ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम बायतु ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तहत जिलेभर में पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को जल संरक्षण की थीम पर जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसके तहत आमजन को पानी के महत्व, जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी धनसिंह महेचा ने बताया कि तीसरे दिन आयोजित गतिविधियों में पानी की बचत, जल का ऑडिट, वर्षा जल संग्रहण, पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर विशेष फोकस रहा। अभियान का उद्देश्य केवल पानी बचाने का संदेश देना ही नहीं, बल्कि लोगों को दैनिक जीवन में जल संरक्षण के उपाय अपनाने तथा सामुदायिक स्तर पर जल संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। विभिन्न स्थानों पर जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों को घरों, सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों में पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने, नलों को खुला नहीं छोड़ने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही पानी के उपयोग का आकलन यानी वाटर ऑडिट करने की जानकारी भी दी गई, ताकि पानी की खपत और संभावित बर्बादी की पहचान कर उसे रोका जा सके। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी के नमूनों की जांच करने की जानकारी दी गई। इससे ग्रामीणों को स्वयं पेयजल की गुणवत्ता जांचने और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया। जल संरक्षण अभियान के तहत पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में होने वाली पानी की बर्बादी रोकने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए घरों के नल कनेक्शन, सार्वजनिक नलों और पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज की पहचान कर उन्हें दुरुस्त कराया गया। आमजन को बताया गया कि छोटी-सी लीकेज भी लंबे समय में बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी का कारण बन सकती है। ऐसे में समय पर मरम्मत कराना जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान के दौरान ग्रामीणों को टांका, खेत तलाई और अन्य पारंपरिक जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी दी गई। बारिश के पानी को व्यर्थ बहने देने के बजाय उसे संरक्षित कर घरेलू एवं कृषि संबंधी आवश्यकताओं में उपयोग करने के उपाय बताए गए। साथ ही घरों, सार्वजनिक भवनों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वर्षा जल संग्रहण की संभावनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। अभियान के तहत तालाब, बावड़ी, जोहड़, कुओं और अमृत सरोवरों की सफाई एवं मरम्मत के महत्व को भी रेखांकित किया गया। स्थानीय लोगों को श्रमदान के माध्यम से पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सामूहिक प्रयासों से पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित कर वर्षा जल का बेहतर संचयन किया जा सकता है। अभियान के माध्यम से जिलेवासियों को संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। घरों में पानी की बचत, जल स्रोतों की स्वच्छता, पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत और वर्षा जल संग्रहण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम बायतु ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तहत जिलेभर में पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को जल संरक्षण की थीम पर जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसके तहत आमजन को पानी के महत्व, जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी धनसिंह महेचा ने बताया कि तीसरे दिन आयोजित गतिविधियों में पानी की बचत, जल का ऑडिट, वर्षा जल संग्रहण, पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर विशेष फोकस रहा। अभियान का उद्देश्य केवल पानी बचाने का संदेश देना ही नहीं, बल्कि लोगों को दैनिक जीवन में जल संरक्षण के उपाय अपनाने तथा सामुदायिक स्तर पर जल संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। विभिन्न स्थानों पर जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों को घरों, सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों में पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने, नलों को खुला नहीं छोड़ने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही पानी के उपयोग का आकलन यानी वाटर ऑडिट करने की जानकारी भी दी गई, ताकि पानी की खपत और संभावित बर्बादी की पहचान कर उसे रोका जा सके। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी के नमूनों की जांच करने की जानकारी दी गई। इससे ग्रामीणों को स्वयं पेयजल की गुणवत्ता जांचने और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया। जल संरक्षण अभियान के तहत पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में होने वाली पानी की बर्बादी रोकने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए घरों के नल कनेक्शन, सार्वजनिक नलों और पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज की पहचान कर उन्हें दुरुस्त कराया गया। आमजन को बताया गया कि छोटी-सी लीकेज भी लंबे समय में बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी का कारण बन सकती है। ऐसे में समय पर मरम्मत कराना जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान के दौरान ग्रामीणों को टांका, खेत तलाई और अन्य पारंपरिक जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी दी गई। बारिश के पानी को व्यर्थ बहने देने के बजाय उसे संरक्षित कर घरेलू एवं कृषि संबंधी आवश्यकताओं में उपयोग करने के उपाय बताए गए। साथ ही घरों, सार्वजनिक भवनों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वर्षा जल संग्रहण की संभावनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। अभियान के तहत तालाब, बावड़ी, जोहड़, कुओं और अमृत सरोवरों की सफाई एवं मरम्मत के महत्व को भी रेखांकित किया गया। स्थानीय लोगों को श्रमदान के माध्यम से पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सामूहिक प्रयासों से पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित कर वर्षा जल का बेहतर संचयन किया जा सकता है। अभियान के माध्यम से जिलेवासियों को संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। घरों में पानी की बचत, जल स्रोतों की स्वच्छता, पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत और वर्षा जल संग्रहण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- सिवाना पंचायत समिति सदस्य वार्ड संख्या नौ से पुष्पा देवी ने किया नामांकन सिवाना पंचायत समिति सदस्य वार्ड संख्या नौ से पुष्पा देवी ने मंगलवार को सैकड़ो समर्थकों के साथ उपखंड कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। वार्ड संख्या नौ से पुष्पा देवी ने बताया की वो महिलाओ की आवाज़ बनकर समस्याओ का समाधान करने की हरसंभव कोशिश करुँगी। मुझे पुरे सतीश कौम का समर्थन मिल रहा हैं।1
- Post by जगदीश कुमार1
- जालौर आलासन ग्राम पंचायत की सरपंच रुकमा कुंवर का ग्रामीण ों ने किया स्वागत अभिनंदन आलासन ग्राम पंचायत के सरपंच रकमों कुंवर का स्वागत कतरासन ठाकुर साहब किसनसिहंजी परबत सिंह जी बाबुसिंह जी समस्त बालावत परिवार व सभी समाज के गणमान्य व्यक्ति ने जेसीबी मशीन से फुल वर्षा कर स्वागत किया गया इस अवसर पर हमारे चंपावत राजपुत रावले से जोधसिंह जी पुर्व तहसीलदार ठीकाना आलासन भी भी उपस्थित थे दोनों गांव से भारी संख्या में जनता जनार्दन की मोजुदगी में जोगसिह से सभी का आभार प्रकट किया सभी को साथ लेकर चलने का वसन दिया विकास ही मेरा मंत्र होगा2
- श्रीमती शीला देवी ने अपने पति श्री राजेंद्र लोल और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति मे पदभार ग्रहण किया। रिपोर्टर सुरेश कुमार शर्वा जोधपुर राजस्थान जोधपुर जिले की सीमा में बसा लांबा गांव अपनी कई खासियतों के लिए जाना जाता है। एक तरफ जहाँ यह गांव ट्रांसपोर्ट और ट्रक बिजनेस के मामले में पूरे क्षेत्र में अपनी धाक और दबंग पहचान रखता है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण के प्रति यहाँ के लोगों का समर्पण इसे औरों से बिल्कुल अलग बनाता है। हाल ही में हुए चुनावों में ग्रामवासियों ने भारी उत्साह दिखाते हुए श्रीमती शीला देवी को अपनी नई सरपंच के रूप में चुना है। आज एक गरिमामयी समारोह के दौरान श्रीमती शीला देवी ने अपने पति श्री राजेंद्र लोल और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने गांव के विकास को गति देने और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता पर रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्यारेलाल लाँबा जियाराम जी सारण और धाकड़ सारण सहित ग्राम के गणमान्य लोग मोजूद रहे।1
- आयुर्वेद कौशलम् 2026 : व्यक्तित्व विकास शिविर के पोस्टर का विमोचन राजस्थान रिपोर्टर दीपक सिंह निर्वाण जोधपुर, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के माननीय कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल द्वारा आज विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में “आयुर्वेद कौशलम् 2026 – व्यक्तित्व विकास शिविर” के पोस्टर का विमोचन किया गया।इस अवसर पर PGIA के प्राचार्य प्रो. चंदन सिंह, विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजाराम अग्रवाल, गुजरात वड़नगर के प्राचार्य प्रोफेसर निरंजन शर्मा,डीन रिसर्च प्रो. देवेंद्र सिंह चाहर, मीडिया प्रभारी प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, डॉ. वी. डी. शर्मा एवं डॉ. राजीव सोनी की गरिमामयी उपस्थिति रही।विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा आयोजित यह चार दिवसीय आवासीय व्यक्तित्व विकास शिविर 26 से 29 दिसंबर 2026 तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। शिविर का उद्देश्य आयुर्वेद विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास, व्यावहारिक दक्षता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता तथा आयुर्वेद के प्रति व्यावहारिक समझ को विकसित करना है।शिविर में योग, अग्निकर्म, जलौका प्रयोग, सोनोग्राफी प्रशिक्षण, वनस्पति परिचय, पंचकर्म प्रायोगिक प्रशिक्षण, अनुभूत चिकित्सा, औषध निर्माण, प्रयोगशाला परीक्षण, संहिता पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, एक्स-रे का ज्ञान, खेलकूद प्रतियोगिताओं तथा जोधपुर नगर भ्रमण जैसी विविध गतिविधियाँ शामिल की गई हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आयुर्वेद के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव एवं कौशल अर्जित करने का अवसर प्राप्त होगा। शिविर में आयुर्वेद महाविद्यालयों के प्रथम वर्ष से अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थी एवं इंटर्न भाग ले सकेंगे। शिविर छात्र एवं छात्राओं दोनों के लिए आयोजित किया जाएगा। प्रतिभागियों के लिए आवास, अल्पाहार एवं भोजन की व्यवस्था पंजीकरण शुल्क में सम्मिलित रहेगी। पंजीकरण की अंतिम तिथि 1 दिसंबर 2026 अथवा निर्धारित सीटें पूर्ण होने तक रखी गई है। इस अवसर पर कुलगुरु ने आयुर्वेद विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा भारतीय चिकित्सा परंपरा के ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में सुदृढ़ बनाने के लिए ऐसे आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया।विश्वविद्यालय एवं विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने, व्यावहारिक कौशल विकसित करने तथा आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट चिकित्सक एवं भावी नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।2
- ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तीसरे दिन जल संरक्षण पर जिलेभर में हुए जागरूकता कार्यक्रम बायतु ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित ब्रिक्स सतत जीवन शैली सप्ताह के तहत जिलेभर में पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को जल संरक्षण की थीम पर जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसके तहत आमजन को पानी के महत्व, जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी धनसिंह महेचा ने बताया कि तीसरे दिन आयोजित गतिविधियों में पानी की बचत, जल का ऑडिट, वर्षा जल संग्रहण, पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर विशेष फोकस रहा। अभियान का उद्देश्य केवल पानी बचाने का संदेश देना ही नहीं, बल्कि लोगों को दैनिक जीवन में जल संरक्षण के उपाय अपनाने तथा सामुदायिक स्तर पर जल संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। विभिन्न स्थानों पर जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों को घरों, सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों में पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने, नलों को खुला नहीं छोड़ने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही पानी के उपयोग का आकलन यानी वाटर ऑडिट करने की जानकारी भी दी गई, ताकि पानी की खपत और संभावित बर्बादी की पहचान कर उसे रोका जा सके। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी के नमूनों की जांच करने की जानकारी दी गई। इससे ग्रामीणों को स्वयं पेयजल की गुणवत्ता जांचने और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया। जल संरक्षण अभियान के तहत पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में होने वाली पानी की बर्बादी रोकने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए घरों के नल कनेक्शन, सार्वजनिक नलों और पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज की पहचान कर उन्हें दुरुस्त कराया गया। आमजन को बताया गया कि छोटी-सी लीकेज भी लंबे समय में बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी का कारण बन सकती है। ऐसे में समय पर मरम्मत कराना जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान के दौरान ग्रामीणों को टांका, खेत तलाई और अन्य पारंपरिक जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी दी गई। बारिश के पानी को व्यर्थ बहने देने के बजाय उसे संरक्षित कर घरेलू एवं कृषि संबंधी आवश्यकताओं में उपयोग करने के उपाय बताए गए। साथ ही घरों, सार्वजनिक भवनों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वर्षा जल संग्रहण की संभावनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। अभियान के तहत तालाब, बावड़ी, जोहड़, कुओं और अमृत सरोवरों की सफाई एवं मरम्मत के महत्व को भी रेखांकित किया गया। स्थानीय लोगों को श्रमदान के माध्यम से पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सामूहिक प्रयासों से पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित कर वर्षा जल का बेहतर संचयन किया जा सकता है। अभियान के माध्यम से जिलेवासियों को संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। घरों में पानी की बचत, जल स्रोतों की स्वच्छता, पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत और वर्षा जल संग्रहण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।1
- रेलों की ढाणी में रहवासी ढाणी में भीषण आग, लाखों का सामान जलकर राख, परिवार बेघर रेलों की ढाणी में रहवासी ढाणी में भीषण आग, लाखों का सामान जलकर राख, परिवार बेघर बायतु रेलों की ढाणी में मंगलवार को अज्ञात कारणों से खेत में बनी रहवासी ढाणी में भीषण आग लग गई। आग में घरेलू सामान, नकदी, सोने-चांदी के जेवरात, जरूरी दस्तावेज, अनाज और कपड़ों सहित लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। घटना के समय ढाणी में बच्चे मौजूद थे। ग्रामीणों ने रेत, मिट्टी और पानी डालकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक पूरा आशियाना जल चुका था। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सर्वे करवाकर मुआवजे और आर्थिक सहायता की मांग की है।1
- मासूम से दरिंदगी करने वाले को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, 7 साल की मासूम... और ये दरिंदा! इस वीडियो को पूरा देखना, क्योंकि जो फैसला आया है उसे सुनकर आपकेोंगटे खड़े हो जाएंगे!" राजस्थान के बाड़मेर से एक 7 साल की बेकसूर बच्ची की जिंदगी बर्बाद कर दी। वारदात के बाद ये भागने की फिराक में था, लेकिन जनता की सूझबूझ और पुलिस की मुस्तैदी से ये बच नहीं पाया। सिर्फ 3 महीने के भीतर कोर्ट ने ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो हर अपराधी के लिए एक सबक है "कोर्ट ने इसे 'जीवन पर्यंत' यानी जब तक सांसें चलेंगी, जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा सुनाई है! फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में सबकी आँखें नम हो गईं। ऐसे दरिंदे को उम्रकैद मिली है, क्या यह सजा काफी है या इससे भी सख्त सजा मिलनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं और ऐसे अपराधियों को सख्त सजा दिलाने के लिए इस वीडियो को शेयर और फॉलो करना न भूलें!"1