जुलाना कस्बे के मैन बाजार में गंदे पानी की निकासी की गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है, जिसके कारण दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों के आगे करीब एक से डेढ़ फीट तक गंदा पानी जमा होने से दुकानदार नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इस जलभराव से बाजार में आने वाले ग्राहकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। दुकानदार नरेंद्र ढांडा, सुरेश, और बीरभान सहित अन्य व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और बरसात के दिनों में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क पर गंदा पानी जमा रहने से लगातार बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा है। इसके साथ ही दुकानों के बाहर पानी जमा रहने से सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। ग्राहकों का बाजार में आना कम हो गया है, और कई ग्राहक पानी व कीचड़ देखकर ही वापस लौट जाते हैं, जिससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। दुकानदारों ने बताया कि इस समस्या के संबंध में कई बार नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। बीते विधानसभा सत्र में जुलाना की विधायक विनेश फोगाट ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था और बाजार की निकासी व्यवस्था सुधारने तथा लोगों को राहत देने की मांग की थी। इसके बावजूद, हालात जस के तस बने हुए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देने तक सीमित है और धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दुकानदारों ने प्रशासन से तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर निकासी व्यवस्था को ठीक करवाने की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को इस समस्या से जल्द से जल्द राहत मिल सके।
जुलाना कस्बे के मैन बाजार में गंदे पानी की निकासी की गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है, जिसके कारण दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों के आगे करीब एक से डेढ़ फीट तक गंदा पानी जमा होने से दुकानदार नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इस जलभराव से बाजार में आने वाले ग्राहकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। दुकानदार नरेंद्र ढांडा, सुरेश, और बीरभान सहित अन्य व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और बरसात के दिनों में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क पर गंदा पानी जमा रहने से लगातार बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा है। इसके साथ ही दुकानों के बाहर पानी जमा रहने से सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। ग्राहकों का बाजार में आना कम हो गया है, और कई ग्राहक पानी व कीचड़ देखकर ही वापस लौट जाते हैं, जिससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। दुकानदारों ने बताया कि इस समस्या के संबंध में कई बार नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। बीते विधानसभा सत्र में जुलाना की विधायक विनेश फोगाट ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था और बाजार की निकासी व्यवस्था सुधारने तथा लोगों को राहत देने की मांग की थी। इसके बावजूद, हालात जस के तस बने हुए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देने तक सीमित है और धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दुकानदारों ने प्रशासन से तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर निकासी व्यवस्था को ठीक करवाने की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को इस समस्या से जल्द से जल्द राहत मिल सके।
- जुलाना कस्बे के मैन बाजार में गंदे पानी की निकासी की गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है, जिसके कारण दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों के आगे करीब एक से डेढ़ फीट तक गंदा पानी जमा होने से दुकानदार नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इस जलभराव से बाजार में आने वाले ग्राहकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। दुकानदार नरेंद्र ढांडा, सुरेश, और बीरभान सहित अन्य व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और बरसात के दिनों में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क पर गंदा पानी जमा रहने से लगातार बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा है। इसके साथ ही दुकानों के बाहर पानी जमा रहने से सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। ग्राहकों का बाजार में आना कम हो गया है, और कई ग्राहक पानी व कीचड़ देखकर ही वापस लौट जाते हैं, जिससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। दुकानदारों ने बताया कि इस समस्या के संबंध में कई बार नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। बीते विधानसभा सत्र में जुलाना की विधायक विनेश फोगाट ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था और बाजार की निकासी व्यवस्था सुधारने तथा लोगों को राहत देने की मांग की थी। इसके बावजूद, हालात जस के तस बने हुए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देने तक सीमित है और धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दुकानदारों ने प्रशासन से तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर निकासी व्यवस्था को ठीक करवाने की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को इस समस्या से जल्द से जल्द राहत मिल सके।1
- आसाराम को एक बार फिर राहत मिली है, क्योंकि उच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत को 7 जुलाई 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। यह जानकारी ताजा खबरों और ब्रेकिंग न्यूज के तहत सामने आई है।1
- नारनौल महेंद्रगढ़ में चल रहे किन्नर विवाद में अब किन्नर बुलबुल महंत ने अपना दूसरा पक्ष सामने रखा है। इस मामले में किन्नर बुलबुल महंत, विनोद सैनी और किन्नर महक पर बुरी तरह से 'आग बबुला' हो गई हैं। उन्होंने विनोद सैनी के कई 'राज खोल' दिए हैं।1
- हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा के सम्मान में गुरुवार को पंडित सीताराम शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय, भिवानी में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों, शिक्षक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। समारोह के दौरान वक्ताओं ने प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा द्वारा शिक्षा क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की जमकर सराहना की। उनके प्रयासों से बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता आई और शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार हुए। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि उनके कार्यकाल में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को नई दिशा मिली और विद्यार्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में, आयोजकों ने डॉ. पवन शर्मा को स्मृति चिन्ह और सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। यह समारोह तालियों, स्वागत नारों और सम्मान गीतों से गूंज उठा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में ईमानदार, दूरदर्शी और मजबूत नेतृत्व की हमेशा आवश्यकता होती है, और प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा ने अपने कार्यकाल में सकारात्मक सोच व प्रभावी प्रशासनिक क्षमता के बल पर शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रमाण दिया। गौरतलब है कि हाल के महीनों में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से जुड़े कई मुद्दों और शिक्षा सुधारों को लेकर प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा तथा बोर्ड प्रशासन लगातार चर्चाओं में रहे हैं। यह कार्यक्रम शिक्षा प्रेमियों, अध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति के साथ उत्साहपूर्ण माहौल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।1
- भिवानी में प्रो. डॉ. पवन शर्मा के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियाँ शामिल हुईं। इस अवसर पर डॉ. पवन शर्मा ने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया और युवाओं को बेहतर शिक्षा प्रदान करने को सबसे बड़ी जिम्मेदारी करार दिया। समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. पवन शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य प्रेरणादायक रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल पेश करता है।1
- भिवानी में सोना और चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इन कीमतों में आ रहे इस बदलाव के पीछे के 'बड़े राज' बृज लाल सर्राफ ने उजागर किए हैं।1
- भिवानी से पूर्व बीजेपी जिला अध्यक्ष रहे शंकर धूपड़ को हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (HBSE) का चैयरमैन नियुक्त किया गया है।1
- जुलाना कस्बे के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) कार्यालय में ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए गहरा रोष प्रकट किया। धरने की अध्यक्षता रिटायर्ड कर्मचारी संघ के खंड प्रधान ईश्वर ठाकूर ने की। धरने को संबोधित करते हुए ईश्वर ठाकूर ने सरकार पर कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रही है। ठाकूर ने ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों की अहम भूमिका पर जोर दिया, बावजूद इसके उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में सभी कच्चे कर्मचारियों को जल्द से जल्द पक्का करना और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रति माह लागू करना शामिल है। इसके साथ ही, कर्मचारियों ने समय पर वेतन भुगतान की भी मांग की, क्योंकि वेतन में देरी के कारण उन्हें अक्सर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।1