२वर्ष बनाम बनाम ५ वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार करना मुख्यमंत्री का साहसिक कदम - राजेंद्र राठौड़ , *2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार करना मुख्यमंत्री का साहसिक कदम, लेकिन कांग्रेस विधायक सदन छोड़कर भागे* *गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान हुआ शर्मसार, भजनलाल सरकार के समय में अपराधों में आई बड़ी क जयपुर, 23 फरवरी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने सोमवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के नेताओं की 2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार की। उन्होंने विधानसभा के पटल पर राज्य सरकार के गत दो साल की उपलब्धियों और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के खोखले पांच साल के दावों का लेखा-जोखा रखा। मुख्यमंत्री का यह साहसिक निर्णय था। बहस की चुनौती वही स्वीकार करते हैं जिनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होता। लेकिन कांग्रेस के विधायक सदन छोड़कर भाग गए। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से विधायकदल को सद्बुद्धि देने का आह्वान करते हुए कहा कि सदन में बहस होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने सच्चाई आए। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बौखलाहट भरी बयानबाजी करते हैं। उनकी आदत है कि वे विधानसभा सदन में एक भी शब्द नहीं बोलते। वे उसी वक्त बोलते हैं जब वे शपथ लेते हैं या मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हैं। उन्होंने विधायक दल की बैठक और विधानसभा परिसर प्रेसवार्ता में भी कुछ बाते कही। वे वरिष्ठ विधायक हैं, विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, उन्हें यहां अपनी बात कहनी चाहिए। पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में पिछली सरकार की तुलना में अपराधों में बड़ी कमी आई है। हत्याएं और बलात्कार के अपराध कम हुए हैं। जबकि तत्कालीन गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान शर्मसार था। महिला अपराध और साइबर क्राइम में प्रदेश पहले पायदान पर था। वहीं, लूट के प्रकरणों में दूसरी पायदान पर थे। गहलोत को शायद अपने शासनकाल की वो कानून व्यवस्था याद आ रही होगी। इसलिए वे कानून-व्यवस्था पर बयानबाजी कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के शासनकाल में कॉलेज धर्मशाला में खुलते थे। कॉलेजों को मानवीय और भौतिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। हमारे समय में विधिवत रूप से कॉलेजों की शुरूआत की जाती है।
२वर्ष बनाम बनाम ५ वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार करना मुख्यमंत्री का साहसिक कदम - राजेंद्र राठौड़ , *2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार करना मुख्यमंत्री का साहसिक कदम, लेकिन कांग्रेस विधायक सदन छोड़कर भागे* *गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान हुआ शर्मसार, भजनलाल सरकार के समय में अपराधों में आई बड़ी क जयपुर, 23 फरवरी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने सोमवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के नेताओं की 2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार की। उन्होंने विधानसभा के पटल पर राज्य सरकार के गत दो साल की उपलब्धियों और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के खोखले पांच साल के दावों का लेखा-जोखा रखा। मुख्यमंत्री का यह साहसिक निर्णय था। बहस की चुनौती वही स्वीकार करते हैं जिनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होता। लेकिन कांग्रेस के विधायक सदन छोड़कर भाग गए। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से विधायकदल को सद्बुद्धि देने का आह्वान करते हुए कहा कि सदन में बहस होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने सच्चाई आए। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बौखलाहट भरी बयानबाजी करते हैं। उनकी आदत है कि वे विधानसभा सदन में एक भी शब्द नहीं बोलते। वे उसी वक्त बोलते हैं जब वे शपथ लेते हैं या मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हैं। उन्होंने विधायक दल की बैठक और विधानसभा परिसर प्रेसवार्ता में भी कुछ बाते कही। वे वरिष्ठ विधायक हैं, विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, उन्हें यहां अपनी बात कहनी चाहिए। पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में पिछली सरकार की तुलना में अपराधों में बड़ी कमी आई है। हत्याएं और बलात्कार के अपराध कम हुए हैं। जबकि तत्कालीन गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान शर्मसार था। महिला अपराध और साइबर क्राइम में प्रदेश पहले पायदान पर था। वहीं, लूट के प्रकरणों में दूसरी पायदान पर थे। गहलोत को शायद अपने शासनकाल की वो कानून व्यवस्था याद आ रही होगी। इसलिए वे कानून-व्यवस्था पर बयानबाजी कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के शासनकाल में कॉलेज धर्मशाला में खुलते थे। कॉलेजों को मानवीय और भौतिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। हमारे समय में विधिवत रूप से कॉलेजों की शुरूआत की जाती है।
- *2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार करना मुख्यमंत्री का साहसिक कदम, लेकिन कांग्रेस विधायक सदन छोड़कर भागे* *गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान हुआ शर्मसार, भजनलाल सरकार के समय में अपराधों में आई बड़ी क जयपुर, 23 फरवरी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने सोमवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के नेताओं की 2 वर्ष बनाम 5 वर्ष की उपलब्धियों पर चुनौती स्वीकार की। उन्होंने विधानसभा के पटल पर राज्य सरकार के गत दो साल की उपलब्धियों और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के खोखले पांच साल के दावों का लेखा-जोखा रखा। मुख्यमंत्री का यह साहसिक निर्णय था। बहस की चुनौती वही स्वीकार करते हैं जिनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होता। लेकिन कांग्रेस के विधायक सदन छोड़कर भाग गए। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से विधायकदल को सद्बुद्धि देने का आह्वान करते हुए कहा कि सदन में बहस होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने सच्चाई आए। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बौखलाहट भरी बयानबाजी करते हैं। उनकी आदत है कि वे विधानसभा सदन में एक भी शब्द नहीं बोलते। वे उसी वक्त बोलते हैं जब वे शपथ लेते हैं या मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हैं। उन्होंने विधायक दल की बैठक और विधानसभा परिसर प्रेसवार्ता में भी कुछ बाते कही। वे वरिष्ठ विधायक हैं, विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, उन्हें यहां अपनी बात कहनी चाहिए। पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में पिछली सरकार की तुलना में अपराधों में बड़ी कमी आई है। हत्याएं और बलात्कार के अपराध कम हुए हैं। जबकि तत्कालीन गहलोत सरकार के समय पूरा राजस्थान शर्मसार था। महिला अपराध और साइबर क्राइम में प्रदेश पहले पायदान पर था। वहीं, लूट के प्रकरणों में दूसरी पायदान पर थे। गहलोत को शायद अपने शासनकाल की वो कानून व्यवस्था याद आ रही होगी। इसलिए वे कानून-व्यवस्था पर बयानबाजी कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के शासनकाल में कॉलेज धर्मशाला में खुलते थे। कॉलेजों को मानवीय और भौतिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। हमारे समय में विधिवत रूप से कॉलेजों की शुरूआत की जाती है।1
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