शनिवार को एटा शहर के वली मोहम्मद चौराहे पर नगर पालिका परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना था। इस दौरान सड़क और फुटपाथ पर किए गए अस्थायी अतिक्रमण को हटाया गया, साथ ही दुकानदारों, ठेला और फड़ संचालकों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न करने की कड़ी हिदायत दी गई। नगर पालिका के अधिकारियों ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों को बताया कि सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ, नालियों और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण करना कानूनी रूप से अपराध है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे निर्धारित सीमा से बाहर सामान रखने, मार्ग अवरुद्ध करने या अवैध कब्जा करने पर नगर पालिका अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत अतिक्रमण हटाने, जुर्माना लगाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाकर प्रशासन का सहयोग करें, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि दोबारा अतिक्रमण पाया गया तो बिना किसी पूर्व सूचना के सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली, जबकि स्थानीय लोगों ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के इस प्रयास की सराहना की।
शनिवार को एटा शहर के वली मोहम्मद चौराहे पर नगर पालिका परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना था। इस दौरान सड़क और फुटपाथ पर किए गए अस्थायी अतिक्रमण को हटाया गया, साथ ही दुकानदारों, ठेला और फड़ संचालकों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न करने की कड़ी हिदायत दी गई। नगर पालिका के अधिकारियों ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों को बताया कि सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ, नालियों और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण करना कानूनी रूप से अपराध है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे निर्धारित सीमा से बाहर सामान रखने, मार्ग अवरुद्ध करने या अवैध कब्जा करने पर नगर पालिका अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत अतिक्रमण हटाने, जुर्माना लगाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाकर प्रशासन का सहयोग करें, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि दोबारा अतिक्रमण पाया गया तो बिना किसी पूर्व सूचना के सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली, जबकि स्थानीय लोगों ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के इस प्रयास की सराहना की।
- शनिवार को एटा शहर के वली मोहम्मद चौराहे पर नगर पालिका परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना था। इस दौरान सड़क और फुटपाथ पर किए गए अस्थायी अतिक्रमण को हटाया गया, साथ ही दुकानदारों, ठेला और फड़ संचालकों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न करने की कड़ी हिदायत दी गई। नगर पालिका के अधिकारियों ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों को बताया कि सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ, नालियों और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण करना कानूनी रूप से अपराध है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे निर्धारित सीमा से बाहर सामान रखने, मार्ग अवरुद्ध करने या अवैध कब्जा करने पर नगर पालिका अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत अतिक्रमण हटाने, जुर्माना लगाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाकर प्रशासन का सहयोग करें, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि दोबारा अतिक्रमण पाया गया तो बिना किसी पूर्व सूचना के सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली, जबकि स्थानीय लोगों ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के इस प्रयास की सराहना की।1
- एटा जिले के अलीगंज से कई माह पूर्व एक प्रेमी संग चली गई चार बच्चों की माँ वापस अपने घर लौट आई है। खबर के अनुसार, अपने बच्चों के आँसुओं ने उसका हृदय पिघला दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसने घर वापसी का निर्णय लिया।1
- एटा के जलेसर में 26 जून को सरकारी सब्सिडी वाले यूरिया की कथित कालाबाजारी के मामले में प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई को भले ही बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रचारित किया जा रहा हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण में कई गंभीर प्रश्न अनुत्तरित हैं। रवींद्र जादौन की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई वास्तविक नेटवर्क तक पहुंचने के बजाय केवल निचले स्तर तक सीमित दिखाई दे रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन 'छोटी मछलियों' को पकड़कर 'बड़े मगरमच्छों' को बचा रहा है। जांच के दौरान, सकरा कानउ मोड़ स्थित एक फैक्ट्री परिसर से सरकारी यूरिया को निजी बोरियों में भरने का काम पकड़ा गया। यहां से भारी मात्रा में यूरिया, खाली कट्टे और एक सिलाई मशीन बरामद की गई, जिसके बाद उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 11 व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। किंतु, रिपोर्ट के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी बना हुआ है: सरकारी यूरिया आखिर आया कहां से? यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह यूरिया किसी सरकारी गोदाम, अधिकृत विक्रेता, परिवहन श्रृंखला या किसी बड़े संगठित नेटवर्क से निकला था या नहीं। संबंधित अधिकारियों, आपूर्ति तंत्र या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच पर भी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि बड़ी मात्रा में यूरिया का कथित उपयोग औद्योगिक एवं रासायनिक इकाइयों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। यदि यह आशंका सही है, तो केवल पैकिंग स्थल पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जनता की मांग है कि पूरी सप्लाई चेन, परिवहन व्यवस्था, टैंकरों की आवाजाही और संभावित लाभार्थियों की भी निष्पक्ष जांच की जाए। जिलाधिकारी ने जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त न करने की बात कही है, लेकिन जनता अपेक्षा कर रही है कि यह संदेश केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक कार्रवाई में भी दिखाई दे। यदि जांच केवल मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित रह गई और मुख्य सप्लायर, वित्तपोषक या संगठित नेटवर्क तक नहीं पहुंची, तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठेंगे। इस पूरे मामले में प्रशासन से जनता जानना चाहती है कि सरकारी यूरिया का वास्तविक स्रोत क्या है और उसे ट्रेस करने में क्या प्रगति हुई है? क्या पूरे सप्लाई नेटवर्क और संभावित बड़े लाभार्थियों की जांच की जा रही है? संदिग्ध परिवहन एवं औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और जांच कब तक होगी? और यदि सरकारी सब्सिडी वाला यूरिया किसानों तक पहुंचने के बजाय अन्यत्र जा रहा है, तो इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी? किसानों को निर्धारित दरों पर यूरिया उपलब्ध कराने की सरकारी व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी जब कालाबाजारी की पूरी श्रृंखला का पर्दाफाश हो और दोषियों के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाए। अन्यथा, यह धारणा और मजबूत होगी कि कार्रवाई केवल सुर्खियां बनाने तक सीमित रही है, जबकि असली नेटवर्क अब भी कानून की पकड़ से बाहर है, जिस पर रहस्यमयी चुप्पी छाई हुई है।3
- यह जानकारी भारतीय सेना के एक बहादुर जवान के बारे में है, जिसकी वीरता का उल्लेख किया गया है।1
- यह पोस्ट दूषित राजनीति और सत्ता में बैठे लोगों पर गहरा अविश्वास और तीखी आलोचना व्यक्त करती है, यह सवाल उठाते हुए कि क्या अब किसी को न्यायालय पर भरोसा रह गया है। पोस्ट में कहा गया है कि जो भी सत्ता में आता है, वह खुद को मसीहा समझने लगता है और पद की गरिमा को भूल जाता है। लेखक इस बात पर जोर देता है कि यदि स्वयं भगवान भी उस गरिमामय गद्दी पर बैठें, तो उन्हें भी संविधान के अनुसार ही फैसले लेने होंगे। वर्तमान स्थिति की निंदा करते हुए कहा गया है कि अपने खिलाफ बोलने वाले को 'ठोक दिया' जाता है और बाद में जनता के सामने एक 'बनी हुई कहानी' पेश कर दी जाती है, क्योंकि 'ये कोई फिल्म नहीं है'। यह पोस्ट संवैधानिक मर्यादा का पालन करने और विरोध की आवाजों को दबाने से रोकने की मांग करती है।1
- जनपद शाहजहांपुर के सिंधौली थाना क्षेत्र अंतर्गत गहारपुर गांव में ग्रामीणों की सूचना पर एक गन्ने के खेत से पुलिस ने एक अज्ञात युवती का शव बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, युवती की गला घोंटकर हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दीक्षा भामरे अरुण ने बताया कि सिंधौली थाना क्षेत्र के गहारपुर गांव के ग्रामीणों ने ही युवती के शव की सूचना दी थी। घटनास्थल पर फील्ड यूनिट द्वारा साक्ष्य संकलन का कार्य किया जा रहा है और युवती की पहचान के प्रयास भी जारी हैं। फिलहाल, पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- एटा जनपद के जलेसर क्षेत्र में एक भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव गहरा गया है। एक पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष ने उनके खेत पर कब्जा करने का प्रयास किया, मारपीट की, फायरिंग की, तोड़फोड़ की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि उसने वर्ष 2015 में अपने भाई अमर सिंह कश्यप के हिस्से की भूमि लगभग दो लाख रुपये में खरीदी थी और तब से उस पर खेती कर रहा है। हालांकि, बाद में उसके भाई ने कथित तौर पर बिना अनुमति के वही भूमि महेशपाल सिंह के नाम बेच दी। इस भूमि विवाद को लेकर सिविल न्यायालय जलेसर में एक वाद लंबित है, और स्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) से संबंधित मामला भी विचाराधीन है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, 20, 21 और 22 जून 2026 को विपक्षी पक्ष के लोग खेत में घुस आए और कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान खेत में बने कमरे और सामान को नुकसान पहुंचाया गया, साथ ही एक ट्रैक्टर में भी तोड़फोड़ की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि विरोध करने पर उन पर लाठी-डंडों, फावड़ों, सरियों, ईंट-पत्थरों और अवैध तमंचों से हमला किया गया, और फायरिंग भी की गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस घटना में प्रेमवीर, भरत सिंह, पुष्पेंद्र, तोताराम, शांति देवी सहित कई लोग घायल हुए। इसके अतिरिक्त, उसके भाई अमर सिंह को स्कूल परिसर के अंदर ले जाकर पीटा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना की सूचना पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और घायलों का समय पर चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया गया। उन्होंने दूसरी ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर को झूठा बताते हुए आरोप लगाया है कि उसमें घटना स्थल गलत दर्शाया गया है। शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर महेशपाल सिंह और अन्य नामजद लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद की मंडी समिति में सोमवार को मजदूरों और आढ़तियों के बीच शुरू हुआ विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। बताया जा रहा है कि एक मजदूर के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद अन्य मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में मजदूर मंडी परिसर में एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की व मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान मंडी परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जिससे व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हुईं और दहशत में कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर बंद कर दिए। विवाद बढ़ने पर एक आढ़ती ने अपनी लाइसेंसी राइफल से हवाई फायरिंग कर दी, जिससे पूरे मंडी परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी के गोली लगने की सूचना नहीं है, लेकिन कई लोगों को मामूली चोटें आने की बात सामने आई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मंडी परिसर में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना दोबारा न हो। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, जिसके तहत घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। मंडी के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मजदूर संगठनों ने भी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित करने की मांग उठाई है। फिलहाल मंडी समिति में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव को देखते हुए पुलिस लगातार निगरानी बनाए हुए है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।1