सूरत-बारडोली रोड पर जोलवा गांव की सीमा में स्थित 'संतोष टेक्सटाइल मिल' एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। हाल ही में इस मिल में लगी भीषण आग में कई श्रमिकों और मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, और इस त्रासदी का मातम अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मिल प्रशासन की घोर लापरवाही फिर उजागर हो गई है। मिल से लगातार निकल रहे काले जहरीले धुएं और फैलते प्रदूषण के कारण पूरे इलाके में भय और रोष का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछली गंभीर आग की घटना के बाद यह उम्मीद थी कि फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मिल मालिक जागेंगे और सुरक्षा व पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे। हालांकि, वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि संतोष टेक्सटाइल मिल के कामकाज में कोई सुधार या बदलाव नहीं दिख रहा है। ऐसा लगता है मानो मानव जीवन की कोई कीमत ही न हो, और हवा में बेरोकटोक जहरीला धुआं छोड़ा जा रहा है। मिल से निकलने वाले रासायनिक काले धुएं के कारण जोलवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इस प्रदूषण के चलते स्थानीय लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन और गले के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही पूरे क्षेत्र में कोहरे जैसे काले बादल छा जाते हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। कई लोगों की मौत के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिल के पास प्रदूषण मुक्त कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण या NOC है? प्रशासन आखिर किस बड़ी आपदा का इंतजार कर रहा है? भूतपूर्व आग की घटना के बावजूद मिल प्रशासकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न होने से स्थानीय नेताओं और ग्रामवासियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में इन 'प्रदूषण माफियाओं' और नियमों का उल्लंघन करने वाली संतोष मिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या सोया हुआ प्रशासनिक तंत्र जागता है या फिर मिल मालिकों की इस दादागिरी के प्रति आंखें मूंदे रहता है।
सूरत-बारडोली रोड पर जोलवा गांव की सीमा में स्थित 'संतोष टेक्सटाइल मिल' एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। हाल ही में इस मिल में लगी भीषण आग में कई श्रमिकों और मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, और इस त्रासदी का मातम अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मिल प्रशासन की घोर लापरवाही फिर उजागर हो गई है। मिल से लगातार निकल रहे काले जहरीले धुएं और फैलते प्रदूषण के कारण पूरे इलाके में भय और रोष का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है
कि पिछली गंभीर आग की घटना के बाद यह उम्मीद थी कि फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मिल मालिक जागेंगे और सुरक्षा व पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे। हालांकि, वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि संतोष टेक्सटाइल मिल के कामकाज में कोई सुधार या बदलाव नहीं दिख रहा है। ऐसा लगता है मानो मानव जीवन की कोई कीमत ही न हो, और हवा में बेरोकटोक जहरीला धुआं छोड़ा जा रहा है। मिल से निकलने वाले रासायनिक काले धुएं के कारण जोलवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में वायु
प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इस प्रदूषण के चलते स्थानीय लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन और गले के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही पूरे क्षेत्र में कोहरे जैसे काले बादल छा जाते हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। कई लोगों की मौत के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिल के पास प्रदूषण मुक्त कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण या NOC है? प्रशासन आखिर किस बड़ी
आपदा का इंतजार कर रहा है? भूतपूर्व आग की घटना के बावजूद मिल प्रशासकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न होने से स्थानीय नेताओं और ग्रामवासियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में इन 'प्रदूषण माफियाओं' और नियमों का उल्लंघन करने वाली संतोष मिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या सोया हुआ प्रशासनिक तंत्र जागता है या फिर मिल मालिकों की इस दादागिरी के प्रति आंखें मूंदे रहता है।
- प्रयागराज के सैदाबाद स्थित मोतिहा गांव में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ मरम्मत किया गया खड़ंजा एक महीना भी नहीं टिक पाया। ग्रामीणों के अनुसार, विकास के नाम पर हुए ये कार्य सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं, जिसके कारण महीने भर के भीतर ही खड़ंजा उखड़ गया। इस घटिया निर्माण से स्थानीय ग्रामीण बेहद परेशान हैं।1
- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में हंडिया थाना क्षेत्र के ग्राम बनपुरवा सराय पीथा में सुनील कुमार (32 वर्ष), पुत्र इंद्रजीत, का शव घर में फंदे से लटकता मिला। यह घटना इसलिए और भी संदिग्ध हो गई है क्योंकि ठीक 20 दिन पहले उसके भाई संतोष (30 वर्ष) का शव भी फंदे से लटका मिला था। एक महीने के भीतर दो सगे भाइयों की मौत के इस मामले को परिजन आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि यह जमीनी विवाद के कारण परिवार के लोगों की हत्या की जा रही है। परिजनों ने इस मामले में समाजवादी पार्टी के हंडिया विधायक हकीम लाल बिंद पर हत्या कराने का सीधा आरोप लगाया है। इस घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने धनुपुर मार्ग को जाम कर दिया। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल के साथ एसीपी हंडिया जनता को समझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन जनता ने अपनी मांग पर अड़ते हुए कहा कि जब तक जिला अधिकारी और डीसीपी गंगानगर मौके पर नहीं आएंगे, तब तक शव को नहीं उठाने दिया जाएगा। मृतक का शव अभी भी फंदे से लटक रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी कुलदीप, पुष्कर वर्मा, और एडीएम प्रयागराज कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों की लगातार मांग पर पुलिस ने हंडिया विधायक पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिसके बाद अब हंडिया विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।1
- ट्रैफिक हवलदार के पद से निलंबित होने के बावजूद विवेकानंद तिवारी का हौसला कम नहीं हुआ। हार मानने के बजाय, उन्होंने 'ट्रैफिक टीचर' बनकर देश के 800 शहरों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक सराहनीय मिशन शुरू किया है। उनका मुख्य ध्येय 'जागरूक भारत, सुरक्षित भारत' का निर्माण करना है।1
- माननीय प्रधानमंत्री जी ने जोधपुर में एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया है। यह महत्वपूर्ण उद्घाटन प्रधानमंत्री जी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ।1
- प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र स्थित सोनबरसा गांव में एक सपेरे ने उस सांप को पकड़ लिया, जिसने बीते सोमवार को एक महिला को डसा था। सपेरे ने कड़ी मशक्कत के बाद कुल दो जहरीले सांपों को पकड़ा और अपने साथ ले गया, जिससे ग्रामीणों ने गहरी राहत महसूस की। यह घटना सोमवार को हुई थी जब घर के आंगन में सो रही 35 वर्षीय रीता पटेल, जो राजकुमार की पत्नी हैं, को सांप ने डस लिया था। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था, जिसके बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ था और परिजन घर में सांप होने की आशंका से भयभीत थे। शनिवार सुबह गांव में सांप दोबारा दिखने पर हड़कंप मच गया, जिसके बाद सूचना पर पहुंचे सपेरे ने काफी प्रयास के बाद दोनों जहरीले सांपों को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। इस दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में झाड़ियों और गंदगी के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा काफी बढ़ गया है। उन्होंने प्रशासन से नियमित सफाई और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। दैनिक भास्कर ने एक अपील भी जारी की है, जिसमें बारिश के मौसम में सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं से बढ़ते खतरे के प्रति आगाह किया गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने घर के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियों को हटा दें, रात में सोते समय सतर्क रहें और जमीन पर सोने से बचें। किसी भी जहरीले जीव के दिखने पर उसे खुद पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत किसी विशेषज्ञ या संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें। काटने की स्थिति में बिना देर किए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है।1
- सूरत-बारडोली रोड पर जोलवा गांव की सीमा में स्थित 'संतोष टेक्सटाइल मिल' एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। हाल ही में इस मिल में लगी भीषण आग में कई श्रमिकों और मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, और इस त्रासदी का मातम अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मिल प्रशासन की घोर लापरवाही फिर उजागर हो गई है। मिल से लगातार निकल रहे काले जहरीले धुएं और फैलते प्रदूषण के कारण पूरे इलाके में भय और रोष का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछली गंभीर आग की घटना के बाद यह उम्मीद थी कि फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मिल मालिक जागेंगे और सुरक्षा व पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे। हालांकि, वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि संतोष टेक्सटाइल मिल के कामकाज में कोई सुधार या बदलाव नहीं दिख रहा है। ऐसा लगता है मानो मानव जीवन की कोई कीमत ही न हो, और हवा में बेरोकटोक जहरीला धुआं छोड़ा जा रहा है। मिल से निकलने वाले रासायनिक काले धुएं के कारण जोलवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इस प्रदूषण के चलते स्थानीय लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन और गले के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही पूरे क्षेत्र में कोहरे जैसे काले बादल छा जाते हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। कई लोगों की मौत के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिल के पास प्रदूषण मुक्त कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण या NOC है? प्रशासन आखिर किस बड़ी आपदा का इंतजार कर रहा है? भूतपूर्व आग की घटना के बावजूद मिल प्रशासकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न होने से स्थानीय नेताओं और ग्रामवासियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में इन 'प्रदूषण माफियाओं' और नियमों का उल्लंघन करने वाली संतोष मिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या सोया हुआ प्रशासनिक तंत्र जागता है या फिर मिल मालिकों की इस दादागिरी के प्रति आंखें मूंदे रहता है।4