9 साल बाद भी अधूरा दादरघाट पुल, बरसात में जोखिम भरा आवागमन जलालगढ़, एक संवाददाता। वर्ष 2017 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ दादरघाट पुल आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के अभाव में करीब 50 से अधिक गांवों के लोगों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ग्रामीण थर्माकोल की नाव और बांस की चचरी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। फिलहाल एकमात्र वैकल्पिक पुल भी जर्जर हालत में है, जिससे संपर्क टूटने का खतरा बना हुआ है। जनवरी 2025 में नए पुल का शिलान्यास हुआ और निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन भूमि मुआवजा विवाद के कारण काम फिलहाल बंद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की है। 9 साल बाद भी अधूरा दादरघाट पुल, बरसात में जोखिम भरा आवागमन जलालगढ़, एक संवाददाता। वर्ष 2017 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ दादरघाट पुल आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के अभाव में करीब 50 से अधिक गांवों के लोगों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ग्रामीण थर्माकोल की नाव और बांस की चचरी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। फिलहाल एकमात्र वैकल्पिक पुल भी जर्जर हालत में है, जिससे संपर्क टूटने का खतरा बना हुआ है। जनवरी 2025 में नए पुल का शिलान्यास हुआ और निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन भूमि मुआवजा विवाद के कारण काम फिलहाल बंद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की है।
9 साल बाद भी अधूरा दादरघाट पुल, बरसात में जोखिम भरा आवागमन जलालगढ़, एक संवाददाता। वर्ष 2017 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ दादरघाट पुल आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के अभाव में करीब 50 से अधिक गांवों के लोगों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ग्रामीण थर्माकोल की नाव और बांस की चचरी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। फिलहाल एकमात्र वैकल्पिक पुल भी जर्जर हालत में है, जिससे संपर्क टूटने का खतरा बना हुआ है। जनवरी 2025 में नए पुल का शिलान्यास हुआ और निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन भूमि मुआवजा विवाद के कारण काम फिलहाल बंद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की है। 9 साल बाद भी अधूरा दादरघाट पुल, बरसात में जोखिम भरा आवागमन जलालगढ़, एक संवाददाता। वर्ष 2017 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ दादरघाट पुल आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के अभाव में करीब 50 से अधिक गांवों के लोगों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ग्रामीण थर्माकोल की नाव और बांस की चचरी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। फिलहाल एकमात्र वैकल्पिक पुल भी जर्जर हालत में है, जिससे संपर्क टूटने का खतरा बना हुआ है। जनवरी 2025 में नए पुल का शिलान्यास हुआ और निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन भूमि मुआवजा विवाद के कारण काम फिलहाल बंद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की है।
- 9 साल बाद भी अधूरा दादरघाट पुल, बरसात में जोखिम भरा आवागमन जलालगढ़, एक संवाददाता। वर्ष 2017 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ दादरघाट पुल आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के अभाव में करीब 50 से अधिक गांवों के लोगों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ग्रामीण थर्माकोल की नाव और बांस की चचरी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। फिलहाल एकमात्र वैकल्पिक पुल भी जर्जर हालत में है, जिससे संपर्क टूटने का खतरा बना हुआ है। जनवरी 2025 में नए पुल का शिलान्यास हुआ और निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन भूमि मुआवजा विवाद के कारण काम फिलहाल बंद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण पूरा कराने की मांग की है।1
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- shamsher alam1
- जनता दरबार में चार मामलों का किया निष्पादन, अन्य पर जांच का आश्वासन जलालगढ़ प्रखंड कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में प्रखंड विकास पदाधिकारी ममता कुमारी ने आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान पेंशन, मनरेगा, नल-जल योजना, आंचल एवं जमीन से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। जनता दरबार में कुल चार मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया, जबकि अन्य मामलों में जांच कर शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निवारण सुनिश्चित हो सके।1