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गरुड़ डिग्री कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में NSUI की अंजली कबडोला विजयी गरुड़ डिग्री कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में NSUI की अंजली कबडोला विजयी
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गरुड़ डिग्री कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में NSUI की अंजली कबडोला विजयी गरुड़ डिग्री कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में NSUI की अंजली कबडोला विजयी
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- उत्तराखंड :चंपावत जिले के लोहाघाट महाविद्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ छात्र संघ चुनाव मतदान1
- • डीएसबी छात्र संघ चुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले के बीच मतदान शुरू, भारी पुलिस बल तैनात कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान मंगलवार सुबह 10 बजे से शुरू हो गया है। दोपहर 3 बजे तक वोट डाले जाएंगे, जिसके तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी। इस बार परिसर में 12 पदों पर 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। सबसे दिलचस्प मुकाबला अध्यक्ष पद पर है, जहाँ हिमांशु आर्या, शुभम कुमार और भानु प्रताप सिंह चौहान के बीच त्रिकोणीय टक्कर है। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है। मुख्य गेट पर वैध आईकार्ड चेकिंग के बाद ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।1
- सरस्वती शिशु मंदिर में कोई निबंध प्रतियोगिता विषय था विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड 2047 धारी (नैनीताल) सरस्वती शिशु मंदिर गंगुवाचौड़ मैं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा 6 कक्षा 8 तक के बच्चों ने भाग लिया विषय रहा विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड 2047। जिसमें सभी आचार्य आचार्या ने बच्चों के साथ सहयोग किया।1
- छात्रसंघ चुनाव को लेकर नैनीताल पुलिस मुस्तैद, की जा रही है सघन निगरानी और चेकिंग SSP डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के निर्देशन में छात्रसंघ चुनाव को सकुशल एवं शांतिपूर्ण संपन्न कराने हेतु नैनीताल पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं डायवर्जन प्वाइंटों पर पुलिस बल तैनात कर सघन निगरानी एवं चेकिंग की जा रही है। डिग्री कॉलेज तिराहा, कुल्यालपुरा चौराहा, तिकोनिया, नरीमन तिराहा काठगोदाम, कॉलटैक्स तिराहा सहित प्रमुख डायवर्जन प्वाइंटों पर पुलिस मुस्तैद है।1
- तेज पिघल रहे ग्लेशियर तो धरती के ध्रुवों से गायब होने लगी है बर्फ धरती के ध्रुवों से गायब होने लगी है बर्फ, 12.5 ट्रिलियन मीट्रिक टन बर्फ बनी पानी, बढ़ा समुद्र का जलस्तर एक ओर हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हुई है तो दूसरी ओर ध्रुवों की बर्फ का समुद्र में समाने का क्रम जारी है। पृथ्वी के वातावरण के लिए यह खबरें चिंताजनक है। एक नए शोध के अनुसार धरती के ध्रुवों से 12.5 ट्रिलियन मीट्रिक टन बर्फ गायब हो चुकी है। जिसे विलुप्त होने में करीब 50 साल का समय लगा है। उधर थर्ड पोल हिमालय के ग्लेशियरों को देखें तो वह पिघलकर पीछे खिसकने लगे हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्ष 2018 में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने को लेकर अध्ययन किया गया था, जो प्रतिवर्ष 20 मीटर पीछे खिसक रहे थे, लेकिन इसके बाद खिसकने की दर अधिक तेज हो चली है, जो अब प्रति वर्ष 25 मीटर पीछे खिसकने लगे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से हिमालय से निकलने वाली नदियों के लिए खतरा उत्पन्न होने लगे है। स्थिति यही रही तो भविष्य में नदियों में जल की मात्रा घट जाएगी और कई छोटी नदियां सूख जाएंगी। इस परिस्थिति में उत्तर भारत समेत बांग्लादेश व नेपाल समेत कुछ अन्य हिस्से प्रभावित होंगे, जो हिमालय से निकलने वाली नदियों के जल पर निर्भर हैं। उन्हें पलायन के मजबूर होना पड़ेगा। डा नरेंद्र सिंह ग्लेशियर पिघलने की मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग बताते हैं। वह कहते हैं कि अभी तक हुए तमाम शोध बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का सावधिक प्रभाव बर्फीले क्षेत्रों पर पड़ रहा है। हिमालय में वैश्विक तापमान बढ़ने की दर दूसरे क्षेत्रों की अपेक्षा कहीं अधिक है। हालिया शोध बताते हैं कि हिमालय में ग्लोबल वॉर्मिंग 2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गई है, जो वास्तव में चिंताजनक है और इस सदी के अंत तक हिमालय क्षेत्र में वैश्विक तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का पूर्वानुमान है। यदि यह स्थिति रही तो हिमालय के ग्लेशियरों की स्थिति और बर्फ का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जो खबर पृथ्वी के ध्रुवों से आ रही है, वह सचेत करने वाली है। नए शोध से पता चला है कि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की मोटी चादरों में पिछले करीब पांच दशकों में भारी कमी दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 1970 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों के आधार पर 12.5 ट्रिलियन अमेरिकी टन (लगभग 11.3 ट्रिलियन मीट्रिक टन) बर्फ कम हो चुकी है। यह शोध उपग्रहों से लिए आंकड़ों के आधार पर किया गया है और यह शोध सबसे लंबे समय के रिकार्ड पर आधारित है। इस शोध में 27 उपग्रहों के मिशनों से लिए गए आंकड़ों का विश्लेषण है। इससे वैश्विक समुद्र के जल स्तर में लगभग 3.1 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। यह अध्ययन Ice Sheet Mass Balance Inter-comparison Exercise (IMBIE) के तहत किया गया। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम ने 42 स्वतंत्र उपग्रह सर्वेक्षणों और 27 उपग्रह मिशनों से मिले आंकड़ों को एक साथ विश्लेषित किया। रिकॉर्ड में ग्रीनलैंड के लिए 1972 और अंटार्कटिका के लिए 1979 से लेकर 2023 तक के आंकड़े शामिल हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार बर्फ का नुकसान केवल सतह के पिघलने से नहीं हुआ। करीब 84 प्रतिशत बर्फ नुकसान तेज गति से समुद्र की ओर बहने वाले ग्लेशियरों के कारण हुआ, जबकि लगभग 16 प्रतिशत नुकसान सतह पर बर्फ पिघलने से जुड़ा है। गर्म समुद्री पानी के कारण बर्फ चादरों के किनारों और नीचे की ओर होने वाले बदलाव भी ग्लेशियरों की गति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 1990 के दशक के बाद बढ़ी बर्फ घटने की रफ्तार आंकड़ों में 1990 के दशक के बाद बर्फ नुकसान की गति में स्पष्ट तेजी दिखाई देती है। ग्रीनलैंड में 1980 के दशक के दौरान सालाना करीब 60 अरब मीट्रिक टन बर्फ कम हो रही थी, जो 2010 के दशक में बढ़कर लगभग 264 अरब टन प्रति वर्ष हो गई। अंटार्कटिका में भी इसी अवधि में बर्फ नुकसान की दर बढ़ी। हालांकि 2020 से 2023 के बीच बर्फ नुकसान में कुछ अस्थायी कमी देखी गई। वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वी अंटार्कटिका में अधिक बर्फबारी और ग्रीनलैंड में अपेक्षाकृत कम सतही पिघलाव ने इस अवधि में कुल नुकसान को कुछ हद तक कम किया। इसे दीर्घकालिक बर्फ नुकसान की प्रवृत्ति में बदलाव नहीं माना गया है। छह से नौ करोड़ नहीं, 60 से 90 लाख लोग अतिरिक्त जोखिम में समुद्र स्तर में करीब तीन सेंटीमीटर की वृद्धि छोटी लग सकती है, लेकिन IMBIE के सह-संस्थापक और नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रयू शेफर्ड के अनुसार इससे लगभग 60 से 90 लाख अतिरिक्त लोग तटीय बाढ़ और कटाव के जोखिम में आ सकते हैं। निचले तटीय क्षेत्रों में समुद्र स्तर बढ़ने से बाढ़ और तटीय कटाव की संवेदनशीलता बढ़ती है। वैज्ञानिकों के लिए इस अध्ययन की खास अहमियत इसलिए है क्योंकि उपग्रहों से प्राप्त आधी सदी के आंकड़े बर्फ चादरों में हो रहे बदलाव को लगातार समझने में मदद करते हैं। भविष्य में समुद्र स्तर बढ़ने के अनुमानों को बेहतर बनाने के लिए ऐसे लंबे उपग्रह रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्रोत: ESA, Northumbria University, IMBIE ESA की रिपोर्ट और आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह। फोटो कैप्शन: ग्रीनलैंड में बर्फीली चादर और ग्लेशियर। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका से 1970 के दशक के बाद से 12.5 ट्रिलियन अमेरिकी टन के बराबर बर्फ कम हुई है। फोटो क्रेडिट: Dr Sammie Buzzard संपादन: रमेश चंद्रा।2
- उत्तराखंड: चंपावत जिले के लोहाघाट महाविद्यालय में छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने लहराया परचम1
- दूरस्थ सिंगदा गांव में पहुंची ‘जन-जन की सरकार’, 510 लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ, स्वास्थ्य, कृषि, आवास, सुरक्षा दीवार समेत विभिन्न मामलों के 57 आवेदन प्राप्त, जिलाधिकारी ने दिए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश। दूरस्थ सिंगदा गांव में पहुंची ‘जन-जन की सरकार’, 510 लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ, स्वास्थ्य, कृषि, आवास, सुरक्षा दीवार समेत विभिन्न मामलों के 57 आवेदन प्राप्त, जिलाधिकारी ने दिए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश। चंपावत, 29 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत मंगलवार को बाराकोट के दूरस्थ ग्राम सिंगदा स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किया गया। जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पाण्डेय और दर्जा राज्य मंत्री सुभाष बगोली विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी दी। लगभग 510 लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ दिया गया। स्वास्थ्य विभाग से 118, पंचायती राज से 84, पशुपालन से 81, उद्यान से 74, आयुष एवं होम्योपैथिक से 53, कृषि से 22, कौशल विकास से 14, सहकारिता से 10 और श्रम विभाग से 7 लाभार्थियों समेत अन्य लोगों को भी लाभान्वित किया गया। 57 आवेदन और शिकायतें हुईं प्राप्त शिविर में कुल 57 शिकायतें एवं आवेदन प्राप्त हुए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों का गंभीरता से परीक्षण कर नियमानुसार समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि पात्र लोगों को योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाना है। ग्रामीण हरीश सिंह सामंत ने विद्यालय के उच्चीकरण, मंदिर की सुरक्षा दीवार, फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़, पेयजल पाइपलाइन और सड़क सुधारीकरण की मांग रखी। प्रकाश सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की मांग की, जिस पर जिला विकास अधिकारी को पात्रता का परीक्षण करने के निर्देश दिए गए। ग्राम प्रधान चंद्रा देवी ने एनएच रोड कटिंग से कई मकानों को खतरा होने की समस्या उठाई। जिलाधिकारी ने एसडीएम लोहाघाट, एनएच के अधिशासी अभियंता और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को संयुक्त रूप से आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं ग्रामीणों द्वारा फसलों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ की मांग पर मुख्य कृषि अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिविर में सोलर लाइट, सुरक्षा दीवार, गौशाला, विद्यालयों में बाउंड्री, आवास, खेल मैदान, शौचालय और पेयजल सहित अन्य समस्याओं से जुड़े आवेदन भी प्राप्त हुए। किसानों को 90 हजार रुपये के ब्याजमुक्त ऋण के चेक सहकारिता विभाग की ओर से पं. दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत कृषक कुंवर सिंह, आनंद सिंह और राजेंद्र सिंह को कृषि कार्य के लिए ब्याजमुक्त ऋण योजना के अंतर्गत कुल 90 हजार रुपये के ऋण चेक प्रदान किए गए। समाज कल्याण विभाग की ओर से हरिराम और जोगा सिंह को श्रवण यंत्र भी उपलब्ध कराए गए। आंगन मिलन में गोदभराई और बेटी का जन्मदिन शिविर के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। गर्भवती प्रीति देवी की गोदभराई कर उन्हें पोषण के लिए फलों की टोकरी प्रदान की गई। वहीं ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश देते हुए एक बच्ची का जन्मदिन भी मनाया गया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख सीमा आर्या, जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी, गिरीश कुंवर, मुख्य विकास अधिकारी अजय सिंह, एसडीएम लोहाघाट नीतू डागर, नोडल अधिकारी एवं महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सुमेधा पंत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।4