बीबीरानी माता का चमत्कार: जहाँ बैंगन चढ़ाने से दूर होते हैं चर्म रोग! आस्था से आरोग्य की राह—बीबीरानी माता मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ बीबीरानी: राजस्थान के अलवर जिले में स्थित प्राचीन बीबीरानी माता मंदिर इन दिनों स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आने वाले भक्तों के न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है। हर बुधवार लगता है भक्तों का तांता स्थानीय लोगों और मंदिर के सुरेश भगत जी ने बताया कि मंदिर में हर बुधवार को विशेष 'जात' (हाजिरी) लगाने की परंपरा है। बुधवार के दिन मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहता है और बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। चर्म रोग से मुक्ति की अनूठी मान्यता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता चर्म रोगों के इलाज से जुड़ी लोक-आस्था है। सुरेश भगत जी के अनुसार, जिन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं, वे यहाँ आकर विशेष मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जात लगाने पर गंभीर से गंभीर चर्म रोग भी ठीक हो जाते हैं। प्रसाद में नारियल और बैंगन का महत्व मंदिर में चढ़ावे की परंपरा भी काफी निराली है। श्रद्धालु माता के चरणों में नारियल के साथ बैंगन अर्पित करते हैं। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि बैंगन चढ़ाने की यह प्राचीन परंपरा चर्म रोगों को जड़ से मिटाने के प्रतीक के रूप में देखी जाती है। बढ़ती जन-आस्था जैसे-जैसे लोगों को यहाँ के चमत्कारों और अनुभवों के बारे में पता चल रहा है, भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग आगंतुकों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करते हैं।
बीबीरानी माता का चमत्कार: जहाँ बैंगन चढ़ाने से दूर होते हैं चर्म रोग! आस्था से आरोग्य की राह—बीबीरानी माता मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ बीबीरानी: राजस्थान के अलवर जिले में स्थित प्राचीन बीबीरानी माता मंदिर इन दिनों स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आने वाले भक्तों के न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है। हर बुधवार लगता है भक्तों का तांता स्थानीय लोगों और मंदिर के सुरेश भगत जी ने बताया कि मंदिर में हर बुधवार को विशेष 'जात' (हाजिरी) लगाने की परंपरा है। बुधवार के दिन मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहता है और बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। चर्म रोग से मुक्ति की अनूठी मान्यता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता चर्म रोगों के इलाज से जुड़ी लोक-आस्था है। सुरेश भगत जी के अनुसार, जिन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं, वे यहाँ आकर विशेष मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जात लगाने पर गंभीर से गंभीर चर्म रोग भी ठीक हो जाते हैं। प्रसाद में नारियल और बैंगन का महत्व मंदिर में चढ़ावे की परंपरा भी काफी निराली है। श्रद्धालु माता के चरणों में नारियल के साथ बैंगन अर्पित करते हैं। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि बैंगन चढ़ाने की यह प्राचीन परंपरा चर्म रोगों को जड़ से मिटाने के प्रतीक के रूप में देखी जाती है। बढ़ती जन-आस्था जैसे-जैसे लोगों को यहाँ के चमत्कारों और अनुभवों के बारे में पता चल रहा है, भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग आगंतुकों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करते हैं।
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- कृषि संकाय की मान्यता को लेकर उठे सवाल 14 दिन से जारी,आहुति दी, ग्रामीणों पहुंचे1
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- मुंडावर के युवाओं ने उड़ाई गुलाल की रंगत: धुलंडी पर बरसे रंग, भाईचारे के साथ मनाया उत्सव मुंडावर नगर पालिका में आज धुलंडी का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कस्बे की गलियों से लेकर गाँवों के चौपालों तक, हर जगह युवाओं की टोलियाँ रंगों में सराबोर नजर आईं। सुबह से ही शुरू हुआ रंगों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। डीजे की धुन और ढोल की थाप पर थिरके युवा मुंडावर के मुख्य बाजारों और मोहल्लों में युवाओं ने डीजे की धुनों और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला। युवाओं की टोलियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान "होली है!" के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भाईचारे और सौहार्द की मिसाल इस बार मुंडावर के युवाओं ने एक नई मिसाल पेश की। उत्सव के दौरान न केवल रंगों का खेल हुआ, बल्कि युवाओं ने बुजुर्गों के घर जाकर उनका आशीर्वाद लिया और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से त्योहार संपन्न हुआ। प्रमुख आकर्षण: हर्बल गुलाल का प्रयोग: कई समूहों में युवाओं ने पर्यावरण और त्वचा की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया। पारंपरिक गीत: ग्रामीण इलाकों में युवाओं ने फाग के गीतों पर नृत्य कर राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखाई। मिलन समारोह: जगह-जगह 'होली मिलन' कार्यक्रमों का आयोजन हुआ जहाँ ठंडाई और गुझिया का आनंद लिया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुंडावर के युवाओं का यह जोश और अनुशासन क्षेत्र में एकता का संदेश देता है। रंगों का यह त्योहार खुशियों की नई लहर लेकर आया है।1
- वैसे तो गांव के पास बड़ी गाड़ी आने का रास्ता है लेकिन थोड़े दिन बाद में बन जाएगा आप पनियाला से लोहाटी मानपुर बानसूर डबल रोड बन गया1
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