मुंडावर के युवाओं ने उड़ाई गुलाल की रंगत: धुलंडी पर बरसे रंग, भाईचारे के साथ मनाया उत्सव मुंडावर के युवाओं ने उड़ाई गुलाल की रंगत: धुलंडी पर बरसे रंग, भाईचारे के साथ मनाया उत्सव मुंडावर नगर पालिका में आज धुलंडी का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कस्बे की गलियों से लेकर गाँवों के चौपालों तक, हर जगह युवाओं की टोलियाँ रंगों में सराबोर नजर आईं। सुबह से ही शुरू हुआ रंगों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। डीजे की धुन और ढोल की थाप पर थिरके युवा मुंडावर के मुख्य बाजारों और मोहल्लों में युवाओं ने डीजे की धुनों और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला। युवाओं की टोलियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान "होली है!" के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भाईचारे और सौहार्द की मिसाल इस बार मुंडावर के युवाओं ने एक नई मिसाल पेश की। उत्सव के दौरान न केवल रंगों का खेल हुआ, बल्कि युवाओं ने बुजुर्गों के घर जाकर उनका आशीर्वाद लिया और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से त्योहार संपन्न हुआ। प्रमुख आकर्षण: हर्बल गुलाल का प्रयोग: कई समूहों में युवाओं ने पर्यावरण और त्वचा की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया। पारंपरिक गीत: ग्रामीण इलाकों में युवाओं ने फाग के गीतों पर नृत्य कर राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखाई। मिलन समारोह: जगह-जगह 'होली मिलन' कार्यक्रमों का आयोजन हुआ जहाँ ठंडाई और गुझिया का आनंद लिया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुंडावर के युवाओं का यह जोश और अनुशासन क्षेत्र में एकता का संदेश देता है। रंगों का यह त्योहार खुशियों की नई लहर लेकर आया है।
मुंडावर के युवाओं ने उड़ाई गुलाल की रंगत: धुलंडी पर बरसे रंग, भाईचारे के साथ मनाया उत्सव मुंडावर के युवाओं ने उड़ाई गुलाल की रंगत: धुलंडी पर बरसे रंग, भाईचारे के साथ मनाया उत्सव मुंडावर नगर पालिका में आज धुलंडी का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कस्बे की गलियों से लेकर गाँवों के चौपालों तक, हर जगह युवाओं की टोलियाँ रंगों में सराबोर नजर आईं। सुबह से ही शुरू हुआ रंगों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। डीजे की धुन और ढोल की थाप पर थिरके युवा मुंडावर के मुख्य बाजारों और मोहल्लों में युवाओं ने डीजे की धुनों और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला। युवाओं की टोलियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान "होली है!" के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भाईचारे और सौहार्द की मिसाल इस बार मुंडावर के युवाओं ने एक नई मिसाल पेश की। उत्सव के दौरान न केवल रंगों का खेल हुआ, बल्कि युवाओं ने बुजुर्गों के घर जाकर उनका आशीर्वाद लिया और आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से त्योहार संपन्न हुआ। प्रमुख आकर्षण: हर्बल गुलाल का प्रयोग: कई समूहों में युवाओं ने पर्यावरण और त्वचा की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया। पारंपरिक गीत: ग्रामीण इलाकों में युवाओं ने फाग के गीतों पर नृत्य कर राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखाई। मिलन समारोह: जगह-जगह 'होली मिलन' कार्यक्रमों का आयोजन हुआ जहाँ ठंडाई और गुझिया का आनंद लिया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुंडावर के युवाओं का यह जोश और अनुशासन क्षेत्र में एकता का संदेश देता है। रंगों का यह त्योहार खुशियों की नई लहर लेकर आया है।
- आस्था से आरोग्य की राह—बीबीरानी माता मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ बीबीरानी: राजस्थान के अलवर जिले में स्थित प्राचीन बीबीरानी माता मंदिर इन दिनों स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आने वाले भक्तों के न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है। हर बुधवार लगता है भक्तों का तांता स्थानीय लोगों और मंदिर के सुरेश भगत जी ने बताया कि मंदिर में हर बुधवार को विशेष 'जात' (हाजिरी) लगाने की परंपरा है। बुधवार के दिन मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहता है और बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। चर्म रोग से मुक्ति की अनूठी मान्यता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता चर्म रोगों के इलाज से जुड़ी लोक-आस्था है। सुरेश भगत जी के अनुसार, जिन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं, वे यहाँ आकर विशेष मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जात लगाने पर गंभीर से गंभीर चर्म रोग भी ठीक हो जाते हैं। प्रसाद में नारियल और बैंगन का महत्व मंदिर में चढ़ावे की परंपरा भी काफी निराली है। श्रद्धालु माता के चरणों में नारियल के साथ बैंगन अर्पित करते हैं। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि बैंगन चढ़ाने की यह प्राचीन परंपरा चर्म रोगों को जड़ से मिटाने के प्रतीक के रूप में देखी जाती है। बढ़ती जन-आस्था जैसे-जैसे लोगों को यहाँ के चमत्कारों और अनुभवों के बारे में पता चल रहा है, भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग आगंतुकों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करते हैं।3
- दोस्तों अपने-अपने बच्चों का ख्याल रखो बाद में मत बोलना कि किसी ने बताया नहीं1
- शभोमिया जी महाराज मंदिर में भव्य कलश यात्राएँ निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश धारण कर भाग लिया एवं मेला का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं महिला श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। जिसमें श्रद्धालुओं ने बाबा के धोक लगाई । भजन संध्या एवं महासी कार्यक्रम में विभिन्न आए , सिंगर बालाराम शर्मा एवं कलाकार पार्टी के द्वारा कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। मंच संचालन कर रहे ,गणपत लाल लाटा,हनुमान सहाय रूडला ने बताया कि कार्यक्रम में बाबा भोमियाजी के मंदिर में विकास कार्यों के लिए दानदाताओं द्वारा लाखों रुपए का जन सहयोग मंदिर विकास के लिए दिया गया। मेला कमेटी द्वारा मेले में ग्राम जनता समिति द्वारा सभी दानदाताओं का स्वागत स्वरुप माला एवं साफा से स्वागत किया गया। अर्जुन जिज्वाडीया , राहुल बुनकर आदि लोग मौजूद थे1
- लड़के, लड़की (महिला) का वेशभूषा पहनकर होली मनाते हुए गीत गाते हैं! इस भाई ने तो बिल्कुल ही कंफ्यूज कर दिया, ये तो हुबहू लड़की लग रहा है..!!1
- रेवाड़ी के रामपुर गांव की न्यू आदर्श नगर पार्ट 2 कॉलोनी में धूमधाम से मनाया गया होली का प्रोग्राम इस दौरान कॉलोनी से सुमन भारद्वाज, मनीष सोनी, मास्टर जी, मुकेश, नीटू आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे |1
- फौलादपुर में रंगों की बौछार: विधायक ललित यादव ने क्षेत्रवासियों संग खेली प्रेम और सौहार्द की होली मुंडावर विधायक ललित यादव ने अपने निवास ग्राम फौलादपुर में विधानसभा क्षेत्र से पहुंचे हजारों लोगों के साथ रंगों की होली खेली। इस दौरान पूरे परिसर में हर्षोल्लास और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। क्षेत्रवासियों ने विधायक को फूलों की माला पहनाई, गुलाल लगाया, मिठाई खिलाई और साफा बांधकर सम्मान व्यक्त किया। विधायक ललित यादव ने भी सभी आगंतुकों के साथ आत्मीयता से होली खेलते हुए शुभकामनाएं दीं। रंग, गुलाल और ढोल-नगाड़ों के बीच यह आयोजन आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता का प्रतीक बन गया। इस अवसर पर विधायक ने कहा, "विधानसभा क्षेत्र के सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद और नौजवानों का सहयोग सदैव मेरे साथ है। आप सभी का आपसी प्यार, प्रेम और भाईचारा ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में खुशियां और समृद्धि लेकर आए। मैं भगवान से क्षेत्र की खुशहाली और उन्नति की कामना करता हूं।" कार्यक्रम में पहुंचे डॉ. शुभम कौशिक (सामाजिक कार्यकर्ता), कांग्रेस नेता अनिल वाल्मीकि, सोहनलाल वाल्मीकि, कैलाश ठेकेदार, अरविंद पत्रकार, सरपंच उमाशंकर, वेद प्रकाश सैनी, अंकित प्रधान, कृष्ण यादव, रमेश गुरुजी (पत्रकार) सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। रंगों के इस उत्सव ने फौलादपुर में सामाजिक एकता और जनप्रतिनिधि व जनता के बीच आत्मीय संबंधों की एक सुंदर मिसाल पेश की।4
- *बाजार से भी सस्ता सामान* *हर आइटम पर 10 to 60% डिस्काउंट* *EX PARAMILITARY CANTEEN STORE* *Opp PNB Bank Nangal Sirohi*1
- आस्था से आरोग्य की राह—बीबीरानी माता मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ बीबीरानी: राजस्थान के अलवर जिले में स्थित प्राचीन बीबीरानी माता मंदिर इन दिनों स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आने वाले भक्तों के न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है। हर बुधवार लगता है भक्तों का तांता स्थानीय लोगों और मंदिर के सुरेश भगत जी ने बताया कि मंदिर में हर बुधवार को विशेष 'जात' (हाजिरी) लगाने की परंपरा है। बुधवार के दिन मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहता है और बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। चर्म रोग से मुक्ति की अनूठी मान्यता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता चर्म रोगों के इलाज से जुड़ी लोक-आस्था है। सुरेश भगत जी के अनुसार, जिन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं, वे यहाँ आकर विशेष मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जात लगाने पर गंभीर से गंभीर चर्म रोग भी ठीक हो जाते हैं। प्रसाद में नारियल और बैंगन का महत्व मंदिर में चढ़ावे की परंपरा भी काफी निराली है। श्रद्धालु माता के चरणों में नारियल के साथ बैंगन अर्पित करते हैं। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि बैंगन चढ़ाने की यह प्राचीन परंपरा चर्म रोगों को जड़ से मिटाने के प्रतीक के रूप में देखी जाती है। बढ़ती जन-आस्था जैसे-जैसे लोगों को यहाँ के चमत्कारों और अनुभवों के बारे में पता चल रहा है, भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग आगंतुकों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करते हैं।1