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तलेंन राजगढ़ में हुआ भीषण हादसा
LAKHAN SINGH CHAUHAN
तलेंन राजगढ़ में हुआ भीषण हादसा
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- 📍भोपाल - जनाक्रोश महारैली ओबीसी एससी एसटी संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश भोपाल में हल्ला बोल कार्यक्रम आयोजित हुआ । ias संतोष वर्मा के समर्थन में आज भोपाल mp4
- Post by Bheru lal Malviya4
- आज सोमवार की दोपहर में 2 बजे स्थानीय थाने से TI केशर राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि SP विनोद कुमारसिंह के निर्देशन में तथा ASP रविन्द्र कुमार बोयट व SDOP देवनारायण यादव के मार्गदर्शन में नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा एमईएस स्कूल के समीप निर्माणाधीन कालोनी से राजा उर्फ सलीम पिता सफीउल्ला खाँ मंसुरी व अरशद पिता शहजाद लाला को पकड़ा है। जिनके पास से 20.60 ग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक को जप्त किया है जिसकी कीमत 60 हजार रुपये है। दोनों आरोपियों को आरोपियों के विरूद्ध विभिन्न धाराओ में प्रकरण दर्ज किया गया है। अप. क्र. 13/26 धारा 8/21 एन.डी.पी.एस. एक्ट का कायम कर विवेचना मे लिया गया । गिरफ्तार आरोपी - 1. राजा उर्फ सलीम पिता सफीउल्ला खाँ मंसुरी उम्र 30 साल निवासी मैना रोड सुसनेर 2. अरशद पिता शहजाद लाला जाति पठान उम्र 23 साल निवासी नरबदिया सुसनेर जप्त मशरूका विवरण 20.60 ग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक- 60,000 रूपये सराहनीय भूमिकाः- इस कार्यवाही में थाना प्रभारी केशर राजपूत के नेतृत्व में थाना सुसनेर के उनि सुमेरसिंह मीणा, सउनि नारायण पुरी, प्र.आर. 150 महेश पाटीदार, प्र.आर. 219 हरीश यादव, प्र. आर. 179 कृष्णानन्द यादव, आर. 02 गिरीराज जामलिया, आर. 230 आशीष सोनी, आर. 58 देवेन्द्र गुर्जर की महत्तवपूर्ण भूमिका रही।1
- त्याग, स्वाभिमान, अप्रतिम शौर्य व पराक्रम के प्रतीक, मातृभूमि एवं धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन #महाराणा #प्रताप #maharanapratap #karnisena #mp1
- Post by सुलिल हसनपलिया जान जान1
- Osho death celebration at home chhipabarod1
- बहुत पुराना मंदिर दाम में दबा हुआ था आज वह निकल आया माना जाता है कि वह विष्णु भगवान का अवतार मंदिर है उसमें कहानी पुरानी या मूर्ति है जैसे आप देख सकते हो इसमें सब भगवानों की मूर्तियां हैं और यह मंदिर है1
- समरसता के भाव को अग्रसर कर रहे हिन्दू सम्मेलन, आयोजनों में कुटुंब प्रबोधन का मिल रहा संदेश सुसनेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जगह-जगह हिंदू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं निश्चित रूप से यह हिंदू सम्मेलन समाज को नई दिशा देने के साथ ही समरसता के भाव को मजबूत करते हुए अग्रसर कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को जामुनिया रोड पर स्थित सुमन मैरिज गार्डन में माधव बस्ती का हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। यहां पर बीएसडब्ल्यू व एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों व सीएम राइज स्कूल के बच्चों ने नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रय के माध्यम से कुटुंब प्रबोधन का संदेश दिया। मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के जिला संघ चालक मोहन आर्य तथा कैलाश धाम शिव टेकरी के संत श्री 1008 हरिहरानंद जी महाराज, वृंदावन के शिव स्वरूप जी महाराज एवं राष्ट्रीय सेविका समिति से भारगवी जोशी ओर सम्मेलन के संयोजक सत्यनारायण सोनी मंचासीन रहे। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पंच परिर्वतन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति, भाषा, संपत्ति या सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पूरा देश सभी का है और यही भावना सच्ची सामाजिक समरसता की पहचान है। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता की पहली शर्त मन से भेदभाव की भावना को खत्म करना और हर व्यक्ति को अपना समझना है। कार्यक्रय का संचालन मांगीलाल शर्मा ने किया व आभार सह नगर कार्यवाह महेंद्र मीणा ने माना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज बंधु व मातृशक्ति उपस्थित रहे। फ़ोटो- मंचासीन अतिथिगण। फ़ोटो- नाटक के माध्यम से दिया कुटुंब प्रबोधन का संदेश। फ़ोटो- उपस्थित मातृशक्ति।1
- सफेद फूलों की चादर से महकने लगा 'काला सोना', काश्तकारों ने बढ़ाई 'चौकसी'- हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है। श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद- अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है। परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त- फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है। क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं। नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे। मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें- अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं। विभाग की भी रहती है पैनी नजर नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे। "अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"1