बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड अंतर्गत उत्तरी कोझी पंचायत के पडावचक गांव में शनिवार को रंजन यादव की पत्नी बेवी देवी और सिकंदर यादव की तीन दुधारू भैंसों की विद्युत की चपेट में आने से तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस हादसे से गुस्साए पशुपालकों और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और फुल्लीडुमर-रामपुर मुख्य मार्ग पर बांस-बल्ले लगाकर मार्ग को घंटों जाम कर दिया। ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है क्योंकि हादसे की सूचना देने के बाद भी विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। सड़क जाम होने की खबर पाकर डायल 112 की पुलिस टीम के साथ स्थानीय थाने के एएसआई अश्वनी कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद दो घंटे बाद सड़क जाम खुलवाया जा सका, लेकिन तब तक वहां आने-जाने वाले छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसके बाद खेसर के भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी और कुमारपुर के पशु चिकित्सा पदाधिकारी अजय सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर मृत मवेशियों के पोस्टमार्टम के संबंध में आवश्यक जानकारी ली। इस हादसे के कारण पीड़ित पशुपालकों को ₹2 लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं बिजली विभाग के रवैये से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है।
बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड अंतर्गत उत्तरी कोझी पंचायत के पडावचक गांव में शनिवार को रंजन यादव की पत्नी बेवी देवी और सिकंदर यादव की तीन दुधारू भैंसों की विद्युत की चपेट में आने से तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस हादसे से गुस्साए पशुपालकों और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और फुल्लीडुमर-रामपुर मुख्य मार्ग पर बांस-बल्ले लगाकर मार्ग को घंटों जाम कर दिया। ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है क्योंकि हादसे की सूचना देने के बाद भी विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। सड़क जाम होने की खबर पाकर डायल 112 की पुलिस टीम के साथ स्थानीय थाने के एएसआई अश्वनी कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद दो घंटे बाद सड़क जाम खुलवाया जा सका, लेकिन तब तक वहां आने-जाने वाले छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसके बाद खेसर के भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी और कुमारपुर के पशु चिकित्सा पदाधिकारी अजय सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर मृत मवेशियों के पोस्टमार्टम के संबंध में आवश्यक जानकारी ली। इस हादसे के कारण पीड़ित पशुपालकों को ₹2 लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं बिजली विभाग के रवैये से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है।
- बांका जिले के कटोरिया प्रखंड में स्थित राजवाड़ा ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कई वर्षों से अधूरा पड़ा है। इस परियोजना की धीमी गति और लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने के कारण स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि इस अधूरे निर्माण के कारण उन्हें आवागमन में न केवल भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में हर समय दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि जनता को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए, U.K.Y News द्वारा जीपीएस लोकेशन के साथ मौके की वीडियो रिकॉर्डिंग कर जमीनी स्थिति को सामने लाया जाएगा। समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से यह सवाल पूछा जाएगा कि निर्माण में देरी का वास्तविक कारण क्या है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा। फिलहाल, इस मुद्दे पर विभाग या किसी अधिकारी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से साझा किया जाएगा।1
- देवघर में पूर्व बीजेपी कैंडिडेट के पिता सीधे कैमरे के सामने आए हैं और उन्होंने एक बड़ी बात कह दी है।1
- झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर में सड़क की स्थिति अत्यंत खराब है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में सड़क ही नहीं है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।4
- श्रावणी मेला 2026 को लेकर बिहार के बांका जिले का प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। सावन से पहले एक बड़ा एक्शन लेते हुए बांका के जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से कांवरिया पथ का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जमीनी जायजा लिया। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त और चाक-चौबंद बनाए रखने की कड़ी हिदायत दी है।1
- जमुई जिले के चकाई मुख्य चौक पर लंबे समय से बनी जलजमाव की गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को एनएच डिवीजन लखीसराय–मुंगेर की एक उच्चस्तरीय टीम ने चकाई मुख्य चौक का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों की इस टीम ने मौके पर जाकर नाले की गहराई, जल निकासी व्यवस्था और पूरे ड्रेनेज सिस्टम का बारीकी से जायजा लिया। इस निरीक्षण दल में कार्यपालक अभियंता रंजीत कुमार, सहायक अभियंता रामप्रवेश चौधरी और कनीय अभियंता सीता कुमारी शामिल थे। इन अधिकारियों ने मौके पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों और आम लोगों से भी सीधा संवाद किया और इस जलजमाव के कारण उन्हें होने वाली विभिन्न समस्याओं को सुना। एनएच विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय जनता और दुकानदारों को भरोसा दिलाया है कि आगामी श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही इस जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। विभाग का मुख्य उद्देश्य है कि देवघर जाने वाले कांवरियों और यहां के स्थानीय नागरिकों को आने वाले समय में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।1
- झारखंड के गिरिडीह से बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलती एक बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहाँ सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर 4 किलोमीटर तक खाट पर ढोकर ले जाना पड़ा। महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिजनों ने एंबुलेंस को तो फोन किया था, लेकिन गांव तक रास्ता न होने के कारण एंबुलेंस गांव के भीतर नहीं पहुंच सकी। इस बेबसी में ग्रामीणों और परिजनों ने खुद ही मोर्चा संभाला और महिला को खाट पर लिटाकर किसी तरह अस्पताल पहुँचाया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि उनके गांव में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि आए दिन उन्हें ऐसी ही विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। आजादी के इतने सालों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव की ये तस्वीरें सीधे तौर पर सोचने को मजबूर करती हैं कि आखिर असली विकास कहाँ है?1
- बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के बलिया गांव में हुए डबल मर्डर केस के मुख्य आरोपी सचिन सिंह के हाफ एनकाउंटर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस जहाँ इस कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग बता रही है, वहीं आरोपी के पिता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरा मामला 5 जुलाई को बलिया गांव के पास धर्मराय गांव निवासी सिट्टू सिंह और गुंजन सिंह की गोली मारकर की गई हत्या से जुड़ा हुआ है। पुलिस का दावा है कि विशेष पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी सचिन सिंह को रांची के एक होटल से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सचिन ने हत्या में इस्तेमाल हथियार बलिया के जंगल में छिपाने की जानकारी दी। जब पुलिस उसे हथियार बरामद करने के लिए जंगल लेकर पहुंची, तो उसने छिपाए गए हथियार से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे सचिन सिंह के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे इलाज के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पुलिस हिरासत में उसका इलाज चल रहा है। इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब घायल सचिन सिंह के पिता संजय कुमार ने पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए। संजय कुमार का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को रांची के होटल से गिरफ्तार करने के बाद किसी दूसरे स्थान पर ले जाकर उसके पैर में गोली मारी। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा बताई जा रही हथियार बरामदगी और मुठभेड़ की कहानी सही नहीं है। हालांकि, पुलिस अपने दावे पर कायम है और उसका कहना है कि आरोपी ने हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।1