उत्तर प्रदेश के आगरा में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली देसी घी बनाने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह पिछले लगभग 10 वर्षों से यह अवैध कारोबार चला रहा था। वह मधुसूदन और पारस जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों सहित अन्य नामी कंपनियों के नाम पर नकली देसी घी तैयार कर बाजार में बेचता था, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा था और असली कंपनियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मौके से भारी मात्रा में तैयार नकली घी, पैकिंग मशीनें, डिब्बे, विभिन्न ब्रांडों के रैपर और अन्य संबंधित सामग्री जब्त की। वीरेंद्र सिंह को घटना स्थल से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि बरामद घी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नकली घी की आपूर्ति किन-किन जिलों और बाजारों में की जा रही थी।
उत्तर प्रदेश के आगरा में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली देसी घी बनाने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह पिछले लगभग 10 वर्षों से यह अवैध कारोबार चला रहा था। वह मधुसूदन और पारस जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों सहित अन्य नामी कंपनियों के नाम पर नकली देसी घी तैयार कर बाजार में बेचता था, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा था और असली कंपनियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मौके से भारी मात्रा में तैयार नकली घी, पैकिंग मशीनें, डिब्बे, विभिन्न ब्रांडों के रैपर और अन्य संबंधित सामग्री जब्त की। वीरेंद्र सिंह को घटना स्थल से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि बरामद घी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नकली घी की आपूर्ति किन-किन जिलों और बाजारों में की जा रही थी।
- गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में आज मुहर्रम का जुलूस पूरे श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाला गया। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। मुहर्रम को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को याद करने का एक अवसर भी माना जाता है, जो सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश देता है। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम है और इसकी दसवीं तारीख, जिसे आशूरा के नाम से जाना जाता है, इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाई जाती है। यह दिन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य, न्याय और इंसानियत के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक माना जाता है। साहिबाबाद में निकलने वाले इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ताज़िए, मातमी जुलूस और पारंपरिक आयोजन इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। इस शांतिपूर्ण आयोजन को संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात की उचित व्यवस्था भी की गई है।4
- उत्तर प्रदेश के आगरा में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली देसी घी बनाने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह पिछले लगभग 10 वर्षों से यह अवैध कारोबार चला रहा था। वह मधुसूदन और पारस जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों सहित अन्य नामी कंपनियों के नाम पर नकली देसी घी तैयार कर बाजार में बेचता था, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा था और असली कंपनियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मौके से भारी मात्रा में तैयार नकली घी, पैकिंग मशीनें, डिब्बे, विभिन्न ब्रांडों के रैपर और अन्य संबंधित सामग्री जब्त की। वीरेंद्र सिंह को घटना स्थल से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि बरामद घी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नकली घी की आपूर्ति किन-किन जिलों और बाजारों में की जा रही थी।1
- गाजियाबाद जनपद के थाना भोजपुर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 25 जून 2026 को थाना पिलखुवा को सूचित किया कि वह पिलखुवा आया था और बैंक से 1 लाख रुपए निकालकर नई बाइक खरीदने गया था। किसी कारणवश वह बाइक नहीं खरीद सका। उन्हें अचानक वॉशरूम जाने की आवश्यकता हुई, जिस पर उन्होंने सड़क पार करके पास खड़े एक छोटे हाथी पर रुपयों का बैग टांग दिया। वापस लौटने पर उन्होंने देखा कि वहां बैग नहीं था। इस संबंध में थाना पिलखुवा ने सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें इस घटना में आवेदक के पुत्र और उसके दोस्तों का हाथ होने की पुष्टि हुई। फिलहाल, आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी पिलखुवा श्री मुनीश चन्द्र ने आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है।1
- गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए आज एक बड़ी कार्रवाई की है। उप जिलाधिकारी मोदीनगर के निर्देशानुसार, राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम सुहाना स्थित चकमार्ग की भूमि पर अभियान चलाया। प्रशासन के अनुसार, खसरा संख्या 336 रकबा 0.0280 हेक्टेयर और खसरा संख्या 637/702 रकबा 0.0510 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्राम समाज के नाम दर्ज है। तहसीलदार मोदीनगर की उपस्थिति में राजस्व टीम ने मौके पर पहुँचकर भूमि का सीमांकन किया। जाँच के दौरान पाया गया कि सार्वजनिक उपयोग और सरकारी भूमि पर अवैध रूप से ईख की फसल खड़ी थी। इसके बाद प्रशासन ने ट्रैक्टर का उपयोग करके इस फसल को जुतवा दिया, जिससे भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।1
- गाजियाबाद के कौशाम्बी और मसूरी थाना क्षेत्र में एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, परिजनों और स्थानीय लोगों को चौंका दिया है। एक व्यक्ति, जिसे परिवार और पुलिस रिकॉर्ड में मृत मान लिया गया था और जिसकी तेरहवीं भी हो चुकी थी, वह अचानक जीवित अपने घर लौट आया। वैशाली के कल्पना अपार्टमेंट निवासी 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट का 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें शांति भंग की आशंका में 151 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया। 21 मई को जेल से रिहा होने के बाद जब गिरधर घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। इसी बीच, 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक लावारिस शव मिला, जिसकी पहचान परिजनों ने गिरधर के रूप में की और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, कौशाम्बी थाने पर जमकर हंगामा किया और मसूरी थाने में हत्या का मुकदमा भी दर्ज कराया गया। लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कथित मृतक गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर लौट आए। जानकारी के अनुसार, गिरधर ने बताया कि वह नाराज़ होकर पंजाब में एक सत्संग में चले गए थे और अब वापस लौटे हैं। गिरधर के लौटने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जैसे कि वह इतने दिनों तक कहां रहे और परिजनों ने जिस शव की पहचान गिरधर के रूप में की थी, वह किसका था। इस पूरे मामले ने अब पुलिस की जांच प्रक्रिया, जांच प्रणाली और शव सुपुर्दगी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी प्रश्न उठ रहा है कि पहचान की प्रक्रिया में चूक कहां हुई और क्या डीएनए परीक्षण या अन्य वैज्ञानिक पहचान प्रक्रिया पूरी तरह नहीं अपनाई गई थी। यदि हत्या के आरोप गलत साबित होते हैं, तो उन लोगों का क्या होगा, जिन्हें इस मामले में हिरासत और जांच का सामना करना पड़ा। यह मामला जितना सनसनीखेज है, उतना ही संवेदनशील भी माना जा रहा है। अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में हुई चूक की जिम्मेदारी किसकी तय होती है और जिस अज्ञात शव को गिरधर समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, उसकी वास्तविक पहचान आखिर कब सामने आएगी।1
- मुजफ्फरनगर में हिंदू रक्षा दल के तत्वावधान में बिहार के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर एक कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की पुरजोर मांग की। यह कैंडल मार्च हिंदू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष शैंकी शर्मा और युवा जिला अध्यक्ष हेमंत शर्मा के नेतृत्व में आयोजित हुआ। रुड़की रोड स्थित पाल धर्मशाला से शुरू होकर यह मार्च शिव चौक होते हुए तुलसी पार्क तक पहुंचा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में युवा और संगठन के पदाधिकारी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां और मसाल लेकर भरत तिवारी के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की और न्याय दिलाने की मांग उठाई। तुलसी पार्क पहुंचने पर सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी, और इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग की। कार्यक्रम के दौरान, हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, जिसे सब इंस्पेक्टर शशि थरूर को दिया गया। इस ज्ञापन में मामले की उच्चस्तरीय जांच, पीड़ित परिवार को न्याय और अन्य कई मांगें शामिल थीं। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक भरत भूषण तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है। इस मौके पर नगर अध्यक्ष आशीष शर्मा, जिला मंत्री अनुकूल जोशी, जिला सचिव अंकित बालियान समेत कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।1
- उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में गुरुवार देर रात करीब 12 बजे बादल फटने से भारी तबाही मची। इस घटना में राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज परिसर, मुख्य बाजार और सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग मलबे की चपेट में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई। बादल फटने के कारण भारी मात्रा में पानी, मलबा और बोल्डर नीचे आ गए, जिससे कई दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचा। मलबा विद्यालय के कार्यालय, प्रधानाचार्य कक्ष, छात्रावास और खेल मैदान तक पहुंच गया, जिससे भवन को भारी नुकसान हुआ। मुख्य बाजार तक मलबे का बहाव पहुंचने से करीब 15 दुकानों में पानी और मलबा घुस गया, जिससे दुकानों में रखा सामान खराब हो गया। इसके अतिरिक्त, बाजार में खड़े 10 से 15 दोपहिया और चारपहिया वाहन भी मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए। भारी मलबे के कारण सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटों तक बंद रहा, जिसे बाद में बीआरओ ने जेसीबी मशीनों से मलबा हटाकर सुबह यातायात के लिए बहाल कर दिया। घटना के दौरान आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर चले गए। फिलहाल, सभी मार्गों की सफाई कर यातायात सुचारू कर दिया गया है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और नुकसान का आकलन अभी भी जारी है।1