नगर परिषद चित्रकूट में अलाव व्यवस्था ठप, ठंड में परेशान आमजन चित्रकूट शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच नगर परिषद चित्रकूट द्वारा की जाने वाली अलाव व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। नगर के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्रों एवं रैन बसेरों के आसपास अलाव नहीं जलने से राहगीरों, मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ठंड लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर परिषद की ओर से अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है। कई स्थानों पर पहले लगाए गए अलाव भी बंद पड़े हैं, जिससे रात के समय हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। नागरिकों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद द्वारा ठंड से बचाव के लिए की जाने वाली व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। आमजन ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से अलाव व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि ठंड से राहत मिल सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। चित्रकूट न्यूज़ चैनल संपादक अरुण कुमार शर्मा
नगर परिषद चित्रकूट में अलाव व्यवस्था ठप, ठंड में परेशान आमजन चित्रकूट शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच नगर परिषद चित्रकूट द्वारा की जाने वाली अलाव व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। नगर के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्रों एवं रैन बसेरों के आसपास अलाव नहीं जलने से राहगीरों, मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ठंड लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर परिषद की ओर से अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है। कई स्थानों पर पहले लगाए गए अलाव भी बंद पड़े हैं, जिससे रात के समय हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। नागरिकों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद द्वारा ठंड से बचाव के लिए की जाने वाली व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। आमजन ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से अलाव व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि ठंड से राहत मिल सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। चित्रकूट न्यूज़ चैनल संपादक अरुण कुमार शर्मा
- खुल गई पोल: सरकारी 'तिजोरी' से अपनी 'चौखट' तक विकास! ग्रामवासियो ने कलेक्टर से की जांच की मांग। क्या आपने कभी सुना है कि सरकारी बजट से किसी के घर का प्राइवेट दरवाजा चमक जाए? लेकिन पन्ना जिले के बसौरा ग्राम पंचायत से एक ऐसा ही 'अजीबोगरीब' कारनामा सामने आया है। यहाँ के सरपंच साहब पर आरोप लगा है कि उन्होंने गांव की गलियां सुधारने के बजाय, सरकारी खजाने का मुंह अपने चहेते वृन्दावन कुशवाहा के घर की तरफ मोड़ दिया! हैरानी की बात तो ये है कि जनता के पैसे से सड़क और पुलिया तो बनी, लेकिन उस पर 'सरकारी ठप्पा' नहीं बल्कि निजी गेट लटक रहा है। यानी पैसा सरकार का, और राज उस व्यक्ति का! गांव वाले बाहर खड़े होकर तमाशा देख रहे हैं क्योंकि साहब ने वहां ताला जड़ दिया है। अब ग्रामीणों ने आज दिन मंगलवार 30 दिसम्बर को शाम 5 बजे कलेक्टर की चौखट खटखटाकर गुहार लगाई है कि 'विकास' की इस बंदरबांट की जांच हो और सरपंच की जेब से पाई-पाई वसूली जाए।4
- लो देख लो मप्र की लाडली बहनाओं आप का भी यही हाल होगा आने वाले समय में #वायरल1
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- आदिवासियों की जमीन पर कब्जा, सरकारी भूमि भी हड़पी! फूलाबाई को संरक्षण दे रहा सिस्टम? पटवारी से लेकर उच्च अधिकारियों तक पर गंभीर आरोप भोपाल। समाजवादी पार्टी के आदिवासी समाज प्रकोष्ठ के नेताओं ने राजधानी भोपाल पहुँचकर प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज यादव जी से मुलाकात कर ग्राम टेढ़ी की भयावह स्थिति से अवगत कराया। नेताओं ने बताया कि गांव में फूलाबाई नामक महिला का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि आदिवासी समाज का जीना दूभर हो गया है। आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि फूलाबाई न केवल आदिवासियों की निजी जमीनों पर जबरन कब्जा कर रही है, बल्कि सरकारी जमीन पर भी अवैध अतिक्रमण कर चुकी है। जब ग्रामीण विरोध करते हैं तो उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी दी जाती है। प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस, पटवारी और कुछ उच्च अधिकारी फूलाबाई का खुला संरक्षण कर रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना, प्रशासन की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अवैध शराब और जंगल कटाई का नेटवर्क फूलाबाई पर अवैध शराब सप्लाई, अवेदा जंगल से लकड़ी कटवाकर बेचने और गांव में अराजकता फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन गतिविधियों से गांव का माहौल पूरी तरह भयभीत हो चुका है। गांव छोड़ने को मजबूर आदिवासी परिवार लगातार हो रहे अत्याचारों से परेशान होकर कई आदिवासी परिवार गांव छोड़ने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है— “प्रशासन अगर साथ न दे तो हम कहां जाएं? हमारा जीना मुश्किल हो गया है।” भोपाल पहुँची आदिवासी समाज की आवाज इन्हीं तमाम मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज के लोग भोपाल पहुँचे और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव जी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि फूलाबाई के खिलाफ तत्काल एफआईआर, जमीन कब्जा हटाने की कार्रवाई और प्रशासनिक संरक्षण की जांच कराई जाए। समाजवादी पार्टी ने उठाया मुद्दा प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव जी ने पूरे मामले को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि यदि आदिवासियों को न्याय नहीं मिला तो समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।3
- शहडोल ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता नववर्ष का उत्सव सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं जिम्मेदारी के साथ मनाएँ। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतें तथा स्वयं जागरूक रहते हुए दूसरों को भी जागरूक करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय घटना की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने अथवा डायल-112 पर दें:- पुलिस अधीक्षक श्री राम जी श्रीवास्तव1
- झांसी गरोठा #अज्ञात कारणों से ग्राम निमगहना में लगी आग, दो बकरियों की जिंदा जलकर मौत1
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- Post by Pushpendra Kumar1