अजमेर जिले में सराधना गाँव के पास अरावली की पहाड़ियों में स्थित गौरीकुंड माता मंदिर अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। यह मंदिर अजमेर से करीब 20 किलोमीटर दूर सराधना और मकरेडा गाँवों के समीप अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है। पहले यहाँ पहुँचना दुर्गम था, लेकिन अब जन सहयोग से गाड़ियों के माध्यम से आसानी से जाया जा सकता है। इस मंदिर को मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि कहा जाता है, जहाँ मान्यता है कि माता ने ऋषि मार्कंडेय को दर्शन दिए थे और उनकी स्वयंभू प्रतिमा यहीं प्रकट हुई थी। मंदिर परिसर में एक चमत्कारी जलकुंड भी है, जिसकी विशेषता है कि इसका पानी हमेशा इतना साफ रहता है कि तल में पड़ा सिक्का भी स्पष्ट दिखाई देता है, और इसमें कभी काई नहीं जमती। हजारों गैलन पानी निकालने के बाद भी यह कुंड खाली नहीं होता, साथ ही, सर्दी में इसका पानी गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं, जिनके लिए श्रद्धालु अक्सर केले और चने जैसे प्रसाद लेकर आते हैं, और उन्हें अपना प्रसाद संभालकर रखना पड़ता है। मंदिर में प्रवेश के कुछ नियम भी हैं; शराब और मांस का सेवन करके आना यहाँ वर्जित है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने वालों को माता के कोप का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी के निचले द्वार पर भैरव बाबा का एक मंदिर भी है, जहाँ मान्यता है कि भैरव बाबा बाहरी क्षेत्र की रक्षा करते हैं, इसलिए दर्शनार्थी पहले भैरव बाबा के दर्शन करते हैं। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
अजमेर जिले में सराधना गाँव के पास अरावली की पहाड़ियों में स्थित गौरीकुंड माता मंदिर अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। यह मंदिर अजमेर से करीब 20 किलोमीटर दूर सराधना और मकरेडा गाँवों के समीप अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है। पहले यहाँ पहुँचना दुर्गम था, लेकिन अब जन सहयोग से गाड़ियों के माध्यम से आसानी से जाया जा सकता है। इस मंदिर को मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि कहा जाता है, जहाँ मान्यता है कि माता ने ऋषि मार्कंडेय को दर्शन दिए थे और उनकी स्वयंभू प्रतिमा यहीं प्रकट हुई थी। मंदिर परिसर में एक चमत्कारी जलकुंड भी है, जिसकी विशेषता है कि इसका पानी हमेशा इतना साफ रहता है कि तल में पड़ा सिक्का भी स्पष्ट दिखाई देता है, और इसमें कभी काई नहीं जमती। हजारों गैलन पानी निकालने के बाद भी यह कुंड खाली नहीं होता, साथ ही, सर्दी में इसका पानी गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं, जिनके लिए श्रद्धालु अक्सर केले और चने जैसे प्रसाद लेकर आते हैं, और उन्हें अपना प्रसाद संभालकर रखना पड़ता है। मंदिर में प्रवेश के कुछ नियम भी हैं; शराब और मांस का सेवन करके आना यहाँ वर्जित है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने वालों को माता के कोप का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी के निचले द्वार पर भैरव बाबा का एक मंदिर भी है, जहाँ मान्यता है कि भैरव बाबा बाहरी क्षेत्र की रक्षा करते हैं, इसलिए दर्शनार्थी पहले भैरव बाबा के दर्शन करते हैं। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
- ब्यावर में नारी जन जागृति संस्थान और अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति की स्थानीय ब्यावर शाखा ने संयुक्त तत्वाधान में केरी पानी का वितरण किया।2
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कायड़ मेडिकल चौराहे पर जोरदार स्वागत किया गया।1
- अजमेर के मदार क्षेत्र में चोरी की एक वारदात सामने आई है, जहाँ अज्ञात चोरों ने मौके का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया। चोरी की यह पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है, जिसके फुटेज अब सामने आए हैं। पीड़ित पक्ष ने इस मामले की शिकायत अलवर गेट थाने में दर्ज करवाई है। पुलिस अब CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है।1
- नसीराबाद में जल संरक्षण के लिए एक विशाल महाअभियान चलाया गया है, जिसे 'वन्दे गंगा अभियान' का नाम दिया गया है। इस अभियान ने क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है और जल संकट से निपटने के लिए एक बड़ी पहल के रूप में उभरा है। इस महाअभियान के तहत, तालाबों पर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें आम जनता ने सक्रिय रूप से भाग लिया और जल बचाने का संकल्प लिया। लोग सड़कों पर उतरकर 'जल है तो कल है' का नारा लगाते हुए देखे गए, जो पूरे नसीराबाद में गूंज उठा। नागरिकों ने एकजुट होकर तालाबों की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'वन्दे गंगा अभियान' अब सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। जल संकट के खिलाफ नसीराबाद के लोगों ने अपनी एकता प्रदर्शित की है, और इस बड़ी पहल के माध्यम से उन्होंने पूरे राजस्थान को जल संरक्षण का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।1
- अजमेर जिले में सराधना गाँव के पास अरावली की पहाड़ियों में स्थित गौरीकुंड माता मंदिर अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। यह मंदिर अजमेर से करीब 20 किलोमीटर दूर सराधना और मकरेडा गाँवों के समीप अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है। पहले यहाँ पहुँचना दुर्गम था, लेकिन अब जन सहयोग से गाड़ियों के माध्यम से आसानी से जाया जा सकता है। इस मंदिर को मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि कहा जाता है, जहाँ मान्यता है कि माता ने ऋषि मार्कंडेय को दर्शन दिए थे और उनकी स्वयंभू प्रतिमा यहीं प्रकट हुई थी। मंदिर परिसर में एक चमत्कारी जलकुंड भी है, जिसकी विशेषता है कि इसका पानी हमेशा इतना साफ रहता है कि तल में पड़ा सिक्का भी स्पष्ट दिखाई देता है, और इसमें कभी काई नहीं जमती। हजारों गैलन पानी निकालने के बाद भी यह कुंड खाली नहीं होता, साथ ही, सर्दी में इसका पानी गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं, जिनके लिए श्रद्धालु अक्सर केले और चने जैसे प्रसाद लेकर आते हैं, और उन्हें अपना प्रसाद संभालकर रखना पड़ता है। मंदिर में प्रवेश के कुछ नियम भी हैं; शराब और मांस का सेवन करके आना यहाँ वर्जित है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने वालों को माता के कोप का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी के निचले द्वार पर भैरव बाबा का एक मंदिर भी है, जहाँ मान्यता है कि भैरव बाबा बाहरी क्षेत्र की रक्षा करते हैं, इसलिए दर्शनार्थी पहले भैरव बाबा के दर्शन करते हैं। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।1
- अजमेर के गेगल थाना क्षेत्र में बालाजी के पास स्थित गणगौर होटल को कल आए तेज आंधी-तूफान ने भारी नुकसान पहुँचाया। तेज हवाओं के कारण होटल परिसर में लगा टीन शेड पूरी तरह से उखड़ कर क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना से होटल को लाखों रुपये का नुकसान होने की जानकारी सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह एक बड़ा हादसा हो सकता था। मौसम विभाग ने पहले ही तेज आंधी और तूफान का अलर्ट जारी किया था, इसके बावजूद तूफान की तीव्रता ने क्षेत्र में काफी नुकसान पहुँचाया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वे इस नुकसान का आकलन करें और प्रभावित व्यवसायियों को उचित राहत प्रदान करें।1