मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बेहद अनोखा और चर्चित मामला सामने आया है, जहाँ मोहन सरकार में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता की जांच के लिए उनके पैतृक क्षेत्र सतना जिले के बसुधा गांव में सार्वजनिक रूप से डुगडुगी पिटवाकर मुनादी कराई गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि उनके पास मंत्री की जाति से संबंधित कोई जानकारी, दस्तावेज या तथ्य हों तो वे जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद चल रही जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थानीय स्तर पर साक्ष्य और जनसाक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तुत जाति प्रमाण-पत्र नियमों के अनुरूप है या नहीं। यह पूरा मामला मंत्री के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से जुड़ा है और न्यायालय के समक्ष लंबित याचिका के बाद ही जांच एजेंसियों को तथ्यों के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे। राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश में संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी मौजूदा मंत्री की जाति की पुष्टि के लिए इस तरह गांव में सार्वजनिक मुनादी कराकर लोगों से जानकारी मांगी गई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट तथा न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगा, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम निर्णय दिए जाने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बेहद अनोखा और चर्चित मामला सामने आया है, जहाँ मोहन सरकार में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता की जांच के लिए उनके पैतृक क्षेत्र सतना जिले के बसुधा गांव में सार्वजनिक रूप से डुगडुगी पिटवाकर मुनादी कराई गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि उनके पास मंत्री की जाति से संबंधित कोई जानकारी, दस्तावेज या तथ्य हों तो वे जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद चल रही जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थानीय स्तर पर साक्ष्य और जनसाक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तुत जाति प्रमाण-पत्र नियमों के अनुरूप है या नहीं। यह पूरा मामला मंत्री के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से जुड़ा है और न्यायालय के समक्ष लंबित याचिका के बाद ही जांच एजेंसियों को तथ्यों के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे। राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश में संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी मौजूदा मंत्री की जाति की पुष्टि के लिए इस तरह गांव में सार्वजनिक मुनादी कराकर लोगों से जानकारी मांगी गई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट तथा न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगा, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम निर्णय दिए जाने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
- गुना शहर के कैंट थाना क्षेत्र के किशनगढ़ इलाके में गुरुवार शाम पुरानी रंजिश और जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुए हिंसक संघर्ष का एक दर्दनाक अंजाम सामने आया है, जहाँ मारपीट के दौरान घायल हुई एक पाँच माह की गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। महिला का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इस खूनी झड़प में महिलाओं सहित सात से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार शाम करीब पाँच बजे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, पहले कहासुनी हुई और फिर विवाद हिंसक रूप ले बैठा, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर घर में घुसकर हमला करने और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। एक पक्ष के सोनू लोधा ने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा लंबे समय से विवाद किया जा रहा था और बातचीत करने जाने पर उन पर हमला कर दिया गया, जिसमें उनके परिवार के पाँच सदस्य घायल हुए। वहीं, दूसरे पक्ष के रामस्वरूप लोधा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि सोनू लोधा अपने साथियों के साथ उनके घर पर हमला करने आया था, और इसी दौरान उनके परिवार की पाँच माह की गर्भवती महिला राजकुमारी के साथ मारपीट हुई, जिससे वह जमीन पर गिर गई। सूचना मिलने पर कैंट थाना पुलिस मौके पर पहुँची और हालात को नियंत्रित करते हुए सभी घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में जाँच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे दोनों भ्रूण की मौत हो चुकी थी, जिसके बाद चिकित्सकों को आपातकालीन गर्भपात करना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। कैंट थाना सीएसपी आनंद राय ने बताया कि बीच-बचाव करने आई गर्भवती महिला को धक्का लगने से वह घायल हुई, जिससे उसके दो प्रीमैच्योर बच्चों की मौत हो गई। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में और गंभीर धाराएँ जोड़ी जाएँगी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और मामले की विवेचना जारी है।1
- अशोकनगर के कोतवाली थाना क्षेत्र में पीएचई के एक कर्मचारी मोहित मांझी से ब्लैकमेलिंग के जरिए ₹1 करोड़ रुपये की ठगी का प्रयास सामने आया है। आरोपी महिला ने पैसे न देने पर कर्मचारी के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी थी। कर्मचारी मोहित मांझी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले रजनी मेर नामक महिला उनके घर में खाना बनाने का काम करती थी। शुरुआत में महिला ने अपनी पारिवारिक परेशानियां बताकर मदद मांगी। कुछ समय बाद उसने मोहित से व्यक्तिगत संबंध बनाने का प्रयास किया, खुद को तलाकशुदा और तीन बच्चों की माँ बताकर उनके फोन पर आपत्तिजनक संदेश भेजने लगी, और धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। इस दौरान महिला ने मोहित के साथ कुछ अश्लील वीडियो भी बनाए और फिर पैसों की मांग शुरू कर दी। उसने पहले भी धमकाकर मोहित से लगभग ₹3 लाख ऐंठ लिए थे और मोहित की पत्नी से भी विवाद करने लगी थी। हाल ही में, महिला ने मोहित से अचानक ₹1 करोड़ की मांग की और उन्हें फोन पर धमकियां देना शुरू कर दिया। इस ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर मोहित ने कोतवाली थाने पहुंचकर पूरी घटना बताई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है, और उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है।1
- राजस्थान के छिपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में 'समुद्र मंथन प्राणायाम' का आयोजन किया गया।1
- शनिवार सुबह 11 बजे मिली जानकारी के अनुसार, 'स्वस्थ बचपन–समृद्ध राष्ट्र' अभियान के तहत शाहबाद के सहरिया क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का शुभारंभ किया गया। इस दौरान जिला कलेक्टर ने शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इन शिविरों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, उनके पोषण स्तर की जांच हुई, और आवश्यक परामर्श व उपचार भी उपलब्ध कराए गए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण और विभिन्न बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।1
- सुरक्षा के मद्देनजर, यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगाए जाने चाहिए। इस पहल को सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।1
- विदिशा के सिरोंज में जिला कुशवाहा समाज ने एक निजी क्लीनिक, संजीवनी हॉस्पिटल, के कथित अवैध संचालन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे पर बुलडोजर चलाने की जोरदार मांग की है। समाज के लोगों ने कलेक्टर और एसपी को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर बताया कि इस अस्पताल के संचालक डॉक्टर संजीव माथुर पर उनकी समाज की एक बेटी के साथ 'गलत काम' करने का आरोप है, जिसके संबंध में एफआईआर भी दर्ज की गई थी और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके बावजूद, यह हॉस्पिटल अभी भी संचालित हो रहा है, जिसे समाज अवैध करार दे रहा है। कुशवाहा समाज ने आरोप लगाया कि आरोपी डॉक्टर के लोगों द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस अवैध अस्पताल की बारीकी से जांच करने, आयुष्मान योजना में संभावित गड़बड़ी समेत अन्य विषयों पर गौर करने और अंततः इसे बुलडोजर चलाकर 'जमींदोज' करने की अपील की है। समाज ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 'उग्र आंदोलन' करेंगे। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त कलेक्टर नितिन जैन ने जानकारी दी है कि मामले की जांच की जा रही है और प्राप्त ज्ञापन को वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।4
- छीपाबड़ौद के स्टेडियम में धनुरासन किया गया।1
- ‘स्वस्थ बचपन–समृद्ध राष्ट्र’ अभियान के तहत शाहाबाद के सहरिया क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का शुभारंभ किया गया, जिसकी जानकारी शनिवार सुबह 11 बजे मिली। जिला कलेक्टर ने इन शिविरों का निरीक्षण कर वहाँ की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविरों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, उनके पोषण स्तर की जांच की गई तथा आवश्यक परामर्श और उपचार भी उपलब्ध कराए गए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण व बीमारियों की समय पर पहचान करना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।1
- तिलोत्तमा दुष्कर्म और हत्या के मामले में अब उनके माता-पिता ने विस्फोटक आरोप लगाए हैं। उन्होंने राज्य फॉरेंसिक प्रयोगशाला में तिलोत्तमा के विसरा परीक्षण के नमूने नष्ट करने का आरोप लगाया है, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है। तिलोत्तमा के पिता के अनुसार, उन्हें एक पूर्व फॉरेंसिक अधिकारी ने पत्र लिखकर इस जानकारी से अवगत कराया है। इस पत्र में दावा किया गया है कि राज्य फॉरेंसिक विभाग के तीन अधिकारियों ने तिलोत्तमा के विसरा सैंपल को नष्ट किया है। इससे भी अधिक सनसनीखेज आरोप यह है कि यह विसरा नमूना एक पूर्व मुख्यमंत्री के निर्देश पर नष्ट किया गया है।1