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8 hrs ago
user_आदिवासी जोहार
आदिवासी जोहार
लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
8 hrs ago

More news from झारखंड and nearby areas
  • गुमला जिला परिषद अध्यक्ष किरण बाड़ा ने सिसई थाना परिसर में आयोजित शांति समिति बैठक सह होली मिलन समारोह कार्यक्रम से सभी प्रखंड वासियों को रंगों का त्यौहार होली की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई दी है।
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    गुमला जिला परिषद अध्यक्ष किरण बाड़ा ने सिसई थाना परिसर में आयोजित शांति समिति बैठक सह होली मिलन समारोह कार्यक्रम से सभी प्रखंड वासियों को रंगों का त्यौहार होली की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई दी है।
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    6 hrs ago
  • राँची। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनोज टंडन के विरुद्ध पुलिसकर्मी काला बिल्ला लगाते हुए ड्यूटी में प्रस्थान कर रहे हैं!
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    राँची। 
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनोज टंडन के विरुद्ध पुलिसकर्मी काला बिल्ला लगाते हुए ड्यूटी में प्रस्थान कर रहे हैं!
    user_Amit Kr Chiku Objectionnews
    Amit Kr Chiku Objectionnews
    Local News Reporter बुरमू, रांची, झारखंड•
    21 hrs ago
  • Hemant Soren की पुलिस को Amba Prasad का खुला चैलेंज! तैयार रहो! सबका हिसाब देना पड़ेगा ? फर्जी मुकदमा क्या होता है हम बताएंगे।
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    Hemant Soren की पुलिस को Amba Prasad का खुला चैलेंज! तैयार रहो! सबका हिसाब देना पड़ेगा ? फर्जी मुकदमा क्या होता है हम बताएंगे।
    user_Aakash Kumar paswan
    Aakash Kumar paswan
    Artist तांडवा, चतरा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • राजू हक्क फुजक धज्जिया वजक्क जन्फुज कलगक
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    राजू हक्क फुजक धज्जिया
वजक्क जन्फुज कलगक
    user_Kulu Garu
    Kulu Garu
    गारू, लातेहार, झारखंड•
    18 hrs ago
  • गारु :पलामू टाइगर रिजर्व के बारेसांढ़ वन क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार को लेकर सुलग रही चिंगारी अब लपटों में बदल चुकी है। आंदोलन के सातवें दिन परेवाटांड़ गांव गुस्से का केंद्र बन गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश और जुबां पर तीखे नारे—पूरा इलाका आंदोलित रहा।“तरुण कुमार सिंह वापस जाओ”, “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” और “जल, जंगल, जमीन हमारा है” के नारों से आसमान गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज अगर अब भी अनसुनी रही, तो हालात और विस्फोटक होंगे। *गांव-गांव में उबल रहा आक्रोश* डेढ़गांव, बगईकोना, झुमरी, टेनटांड, कुजरूम, लाटू और मायापुर—हर गांव में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सात दिनों से जारी आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनविद्रोह का रूप लेता जा रहा है।परेवाटांड़ की सभा में महिलाएं सबसे आगे दिखीं। बुजुर्गों ने कहा, “जंगल हमारी जिंदगी है, इसे दूर बैठकर नहीं बचाया जा सकता।” युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रखंड से जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा। *300 किलोमीटर दूर से ‘निगरानी’—कैसे बचेगा जंगल?* ग्रामीणों का आरोप है कि जिस अधिकारी की मूल तैनाती लगभग 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर क्षेत्र में है, उन्हें बारेसांढ़ जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।लोग सवाल उठा रहे हैं क्या इतनी दूरी से जंगल की रक्षा संभव है? क्या अवैध कटाई, शिकार और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हो पाएगा?बारेसांढ़ क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के जंगल सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “दूर बैठे अफसर” से जंगल और जनता दोनों असुरक्षित हैं। *पूर्व रेंजर का तबादला बना चिंगारी* पूर्व रेंजर नन्द कुमार मेहता के तबादले को लेकर भी लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विभाग और जनता के बीच तालमेल बेहतर था।कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में तबादला किया गया। हालांकि विभाग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। *ज्ञापन के बाद भी चुप्पी, बढ़ा असंतोष* ग्रामीणों ने डीएफओ कुमार आशीष को लिखित आवेदन देकर मौजूदा अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने और नियमित रेंजर की नियुक्ति की मांग की है।लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने से गुस्सा और भड़क उठा है। लोगों का कहना है कि “अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।” *अल्टीमेटम: होगा घेराव* प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है—यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति भी तैयार है।बारेसांढ़ में परेवाटांड़ से उठी यह आग अब शांत होती नहीं दिख रही। प्रशासन की अगली चाल तय करेगी कि यह आंदोलन सुलझेगा या फिर बड़ा टकराव जन्म लेगा।फिलहाल एक बात साफ है—बारेसांढ़ में जंगल ही नहीं, जनभावनाएं भी धधक रही हैं।
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    गारु :पलामू टाइगर रिजर्व के बारेसांढ़ वन क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार को लेकर सुलग रही चिंगारी अब लपटों में बदल चुकी है। आंदोलन के सातवें दिन परेवाटांड़ गांव गुस्से का केंद्र बन गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश और जुबां पर तीखे नारे—पूरा इलाका आंदोलित रहा।“तरुण कुमार सिंह वापस जाओ”, “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” और “जल, जंगल, जमीन हमारा है” के नारों से आसमान गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज अगर अब भी अनसुनी रही, तो हालात और विस्फोटक होंगे।
*गांव-गांव में उबल रहा आक्रोश* 
डेढ़गांव, बगईकोना, झुमरी, टेनटांड, कुजरूम, लाटू और मायापुर—हर गांव में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सात दिनों से जारी आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनविद्रोह का रूप लेता जा रहा है।परेवाटांड़ की सभा में महिलाएं सबसे आगे दिखीं। बुजुर्गों ने कहा, “जंगल हमारी जिंदगी है, इसे दूर बैठकर नहीं बचाया जा सकता।” युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रखंड से जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा।
*300 किलोमीटर दूर से ‘निगरानी’—कैसे बचेगा जंगल?* 
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस अधिकारी की मूल तैनाती लगभग 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर क्षेत्र में है, उन्हें बारेसांढ़ जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।लोग सवाल उठा रहे हैं क्या इतनी दूरी से जंगल की रक्षा संभव है? क्या अवैध कटाई, शिकार और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हो पाएगा?बारेसांढ़ क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के जंगल सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “दूर बैठे अफसर” से जंगल और जनता दोनों असुरक्षित हैं।
*पूर्व रेंजर का तबादला बना चिंगारी* 
पूर्व रेंजर नन्द कुमार मेहता के तबादले को लेकर भी लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विभाग और जनता के बीच तालमेल बेहतर था।कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में तबादला किया गया। हालांकि विभाग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
*ज्ञापन के बाद भी चुप्पी, बढ़ा असंतोष* 
ग्रामीणों ने डीएफओ कुमार आशीष को लिखित आवेदन देकर मौजूदा अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने और नियमित रेंजर की नियुक्ति की मांग की है।लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने से गुस्सा और भड़क उठा है। लोगों का कहना है कि “अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।”
*अल्टीमेटम: होगा घेराव* 
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है—यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति भी तैयार है।बारेसांढ़ में परेवाटांड़ से उठी यह आग अब शांत होती नहीं दिख रही। प्रशासन की अगली चाल तय करेगी कि यह आंदोलन सुलझेगा या फिर बड़ा टकराव जन्म लेगा।फिलहाल एक बात साफ है—बारेसांढ़ में जंगल ही नहीं, जनभावनाएं भी धधक रही हैं।
    user_निरंजन प्रसाद
    निरंजन प्रसाद
    गारू, लातेहार, झारखंड•
    19 hrs ago
  • Post by राहुल कुमार
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    Post by राहुल कुमार
    user_राहुल कुमार
    राहुल कुमार
    Local News Reporter चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    19 hrs ago
  • बैजनाथ जालान महाविद्यालय सिसई परिसर में विद्यार्थियों के द्वारा होली मिलन समारोह कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने शिक्षकों को अबीर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिए। और फगुआ , आधुनिक , नागपुरी गीत में जमकर थिरके विद्यार्थी
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    बैजनाथ जालान महाविद्यालय सिसई परिसर में विद्यार्थियों के द्वारा होली मिलन समारोह कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने शिक्षकों को अबीर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिए। और फगुआ , आधुनिक , नागपुरी गीत में जमकर थिरके विद्यार्थी
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    18 hrs ago
  • पोलपोल में भीषण सड़क हादसा: स्कॉर्पियो-कार की टक्कर, बाल-बाल बचे चालक
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    पोलपोल में भीषण सड़क हादसा: स्कॉर्पियो-कार की टक्कर, बाल-बाल बचे चालक
    user_Bikram reporting News
    Bikram reporting News
    Satbarwa, Palamu•
    9 hrs ago
  • राँची :टाटा रोड NH 33 जैक कौनसील पतरा टोली में 3 कार आपस में टकराई, कई घायल। घायलों को भेजा गया अस्पताल।
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    राँची :टाटा रोड NH 33 जैक कौनसील पतरा टोली में 3 कार आपस में टकराई, कई घायल। घायलों को भेजा गया अस्पताल।
    user_NEWS INDIAN 724
    NEWS INDIAN 724
    पत्रकार Kanke, Ranchi•
    10 hrs ago
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