फर्जी आय प्रमाण पत्र के विरोध में किसानों ने एस डी एम को सौंपा ज्ञापन (हरदोई)। भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष खालिद खां की अगुआई तथा तहसील अध्यक्ष संजीव शर्मा के नेतृत्व में किसान-मजदूर साथियों ने उपजिलाधिकारी शाहाबाद को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आंगनबाड़ी भर्ती में फर्जी आय प्रमाण पत्र लगाकर बीपीएल श्रेणी का लाभ लेने के मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। संगठन का आरोप है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार द्वारा गलत आय प्रमाण पत्र लगाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे वास्तविक गरीब अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हो रहा है।वहीं ग्राम पंचायत बूटा मऊ मजरा ज्ञान पुरवा निवासिनी नीतू पत्नी सुरजीत पर आरोप है कि नीतू का प्रमाण पत्र फर्जी बनाया गया है।जिनके पास कई वाहन और 60 बीघा खेत ये घर में ही प्रधानी होने के बावजूद लेखपाल ने 46 की आय लगाकर प्रमाण पत्र जारी किया है। और मांग की गई कि ग्राम नेदुरा के मजरा महबूब पुरवा में आंगनबाड़ी केंद्र और बारात घर बनवाये जाने की मांग की है वही ग्राम उमर सेंडा में बबलू के मकान से पुराने पंचायत घर तक नाली निर्माण और खड़ंजा निर्माण कराने की माँग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि सात दिन में कार्रवाई, निस्तारण न होने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान-मजदूर साथी मौजूद रहे।
फर्जी आय प्रमाण पत्र के विरोध में किसानों ने एस डी एम को सौंपा ज्ञापन (हरदोई)। भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष खालिद खां की अगुआई तथा तहसील अध्यक्ष संजीव शर्मा के नेतृत्व में किसान-मजदूर साथियों ने उपजिलाधिकारी शाहाबाद को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आंगनबाड़ी भर्ती में फर्जी आय प्रमाण पत्र लगाकर बीपीएल श्रेणी का लाभ लेने के मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। संगठन का आरोप है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार द्वारा गलत आय प्रमाण पत्र लगाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे वास्तविक गरीब अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हो रहा है।वहीं ग्राम पंचायत बूटा मऊ मजरा ज्ञान पुरवा निवासिनी नीतू पत्नी सुरजीत पर आरोप है कि नीतू का प्रमाण पत्र फर्जी बनाया गया है।जिनके पास कई वाहन और 60 बीघा खेत ये घर में ही प्रधानी होने के बावजूद लेखपाल ने 46 की आय लगाकर प्रमाण पत्र जारी किया है। और मांग की गई कि ग्राम नेदुरा के मजरा महबूब पुरवा में आंगनबाड़ी केंद्र और बारात घर बनवाये जाने की मांग की है वही ग्राम उमर सेंडा में बबलू के मकान से पुराने पंचायत घर तक नाली निर्माण और खड़ंजा निर्माण कराने की माँग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि सात दिन में कार्रवाई, निस्तारण न होने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान-मजदूर साथी मौजूद रहे।
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- इसे कहते हैं घोर कलियुग देखो वीडियो 😭😭😭😭😭😢😢😥😥💔💔💔🙏🙏🙏1
- Post by SV भारत न्यूज़ संवाददाता रामबाबू1
- हरदोई में कछौना के बसपा नेताजी की 'लोन वाली डील' पड़ गई भारी, बैठक के बीच से CBI उठा ले गई बसपा नेता को ,राजनीति के मैदान में दांव-पेंच लड़ाने वाले बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश चंद्र चौधरी युवाओं को उद्यमी बनाने चले थे नेताजी, खुद ही CBI के शिकंजे में आ गए........1
- हरदोई पेट्रोल व अन्य तेल पदार्थो की आपूर्ति पर डीएम अनुनय झा की प्रतिक्रिया सामने आई है, उन्होंने कहा कि जिले में पेट्रोल डीजल की कोई किल्लत नहीं है, अराजक तत्वों द्वारा गलत अफवाह फैलाई जा रही है.. सुनिए क्या कहना है डीएम अनुनय झा का... #jaagonews #hardoi_city #hardoinews #hardoi #DMHardoi1
- धर्म सभा में बोले शंकराचार्य गाय और ब्राह्मण भारतीय संस्कृति के मूल1
- एसटीएफ और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, रेलवे स्टेशन के पास से दबोचा शाहाबाद (हरदोई) लगभग 13 वर्षों से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी हत्यारोपी को एसटीएफ और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार थाना शाहाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 444/13 धारा 302 व 504 के मामले में वांछित चल रहे आरोपी विपिन सिंह उर्फ राजू पुत्र विनोद कुमार सिंह निवासी मठो खेड़ा, अजमत खां, थाना शाहाबाद को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। आरोपी लंबे समय से फरार था, जिसकी गिरफ्तारी पर पुलिस महानिरीक्षक लखनऊ परिक्षेत्र द्वारा 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। मंगलवार को एसटीएफ कानपुर नगर और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को आंधी रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और 670 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पहले भी हत्या समेत कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज बताए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और फिर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।4
- ट्रक की टक्कर से घायल सांड ने तड़प-तड़पकर तोड़ा दम, डॉक्टर का फोन नहीं उठा, साड़ का साथी साड़ जहाँ मौके पर दुखी नजर आया वहीं हमेशा की तरह एक बार फिर पशु चिकित्सा अधिकारी की संवेदनहीनता सर्वविदित हो गई। गौरतलब है कि नगर शाहाबाद में इंसानियत और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई। एलआईसी कार्यालय के सामने एक अज्ञात ट्रक चालक ने तेजी व लापरवाही से सड़क पर खड़े एक आवारा सांड को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सांड गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने घायल सांड को बचाने के लिए काफी देर तक राजकीय पशु चिकित्सालय के डॉक्टर को फोन मिलाया, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने एक भी कॉल रिसीव नहीं की। लोगों का कहना है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद बेजुबान की जान बच सकती थी। इलाज के अभाव में घायल सांड ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद क्षेत्र में असंतोष फैल गया। लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत से पशु चिकित्सालय के जिम्मेदार पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं और आपात स्थिति में भी फोन उठाना जरूरी नहीं समझते। लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बल्कि जहाँ एक ओर कभी पशु चिकित्सा अधिकारी आदि न केवल आवारा पशुओं के इलाज के लिए आगे नहीं आते वहीं पालतू पशुओं के इलाज करने के लिए तैयार नहीं रहते, और ऊपर टोल फ्री नम्बर मिलाने पर भी पशुओं को इलाज नहीं मिल पाता। आरोप है कि एक ओर गो शालाओं में गोवंश इलाज एवं देखभाल के अभाव में बेमौत तड़प तड़प कर मर रहे हैं वहीं दूसरी ओर तेज रफ्तार वाहन रौद रहे हैं और तीसरी ओर गोवंशो की गोकशी के लिए तस्करी -बिक्री के भी सूत्र मिल रहे हैं, इतना ही नहीं कई बार स्थानीय विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के नेताओं ने आवाज़ बुलंद की किन्तु उनकी आवाज़ भी भ्रष्टाचार के नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बन गई। अब सवाल जो उठ रहे हैं — ▪ क्या सरकारी पशु चिकित्सालय सिर्फ कागजों में ही चल रहा है? ▪ आपात स्थिति में भी डॉक्टर फोन नहीं उठाएंगे तो बेजुबानों की जान कैसे बचेगी? ▪ जिम्मेदारों की लापरवाही पर प्रशासन कार्रवाई करेगा या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा? ▪ क्षेत्र में आए दिन कहीं न कहीं गंभीर रोगों से ग्रस्त पशुओं की इलाज के अभाव में मौत की जबाबदेही आखिर किसकी है।1