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टीकमगढ़ में धर्म छुपाकर लड़की के साथ धोखा करने के मामले में आरोपी का निकला जुलुस....
Jamil khan
टीकमगढ़ में धर्म छुपाकर लड़की के साथ धोखा करने के मामले में आरोपी का निकला जुलुस....
- मनोज कुमार चौधरीUnchahara, Satna🤝6 hrs ago
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by Jamil khan1
- ललितपुर से बड़ी खबर, जहां शहजाद नदी के पुल के निर्माण के चलते एक इलेक्ट्रिक सवारी से भरी टैक्सी पलटी #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #latestnews #viralpost #lalitpurnews @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें1
- हम आपको बता दें मामला करीला की ओर जाने वाले रास्ते का है जहां पर करीला माता के दर्शन करके लौट रहे युवक को किसी अज्ञात वाहन द्वारा टक्कर मार दी जिससे युवक रोड पर ही गिर पड़ा रोड पर लगभग आधे घंटे पड़े होने के बाद जब वहां से निकल रहे आजद समाज पार्टी युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष ललितपुर शिवा यादव किसी कार्यक्रम से होकर आ रहे थे तभी रास्ते में पड़े युवक पर उनकी नजर पड़ी तो तुरंत ही अपने निजी वाहन से युवक के लिए अस्पताल पहुंचाया और तुरंत इसकी सूचना पर उसे क्षेत्र केलगने वाले थाने को भी दी जिससे युवक का समय पर इलाज चालू हो सके1
- टावर पर चढ़ी मोहब्बत: प्रेमी के लिए जान जोखिम में डालकर 4 घंटे तक चढ़ी रही टावर पर, टीकमगढ़ के जतारा थाना क्षेत्र के बेरवार गांव में एक युवती ने मोबाइल टावर पर चढ़कर हंगामा किया। वह अपने प्रेमी से 4 दिन से बात नहीं करने पर नाराज थी। प्रशासन और ग्रामीणों की समझाइश के बाद प्रेमी के मौके पर पहुंचने पर वह नीचे उतरी। पुलिस दोनों को थाने ले गई है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। यह घटना प्रेम कहानी का अनोखा मोड़ है, जो भावनाओं में बहकर उठाए गए कदम के खतरों को दर्शाती है।3
- Post by राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़1
- ललितपुर जनपद मैं कोतवाली पुलिस द्वारा एक शिव मंदिर में की गई क्षतिग्रस्त मूर्ति को पुनः स्थापित कर वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर भेजा जेल1
- टीकमगढ़ जिले के जतारा थाना क्षेत्र के बेरवार गांव की वो सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। सूरज उग ही रहा था कि गांव अचानक हडकंप मच गया, सुबह करीब 5 बजे कुछ ग्रामीणों ने टावर की ऊंचाई से आती चीख-पुकार सुनी। जब लोग दौड़कर पहुंचे, तो देखा कि एक युवती टावर पर चढ़ी हुई है ! और किसी को बार-बार पुकार रही है। देखते-देखते लोगों की भीड़ जमा होने लगी। युवती बार-बार अपने प्रेमी वीरु का नाम लेकर उसे बुला रही थी। उसके हाथ में मोबाइल था और वह लगातार उससे बात करने की कोशिश कर रही थी। उसकी आवाज में गुस्सा और दर्द था। बताया गया कि पिछले चार दिनों से उसका प्रेमी उससे बात नहीं कर रहा था, जिससे वह बेहद नाराज और परेशान थी, ग्रामीणों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में जतारा पुलिस और तहसीलदार मौके पहुंचकर टावर पर चढ़ी लड़की को नीचे उतरवाया और दोनों को साथ ले गए ! #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #latestnews #viralpost #jatara @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें1
- ये है डॉक्टर पुष्पेंद्र सिंह जो अपनी गलती के बाद कह रहे की मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूं..1
- गर्मी का मौसम शुरू होते ही पाली क्षेत्र के स्थानीय बाजारों में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, खासकर “देसी फ्रेज” (मिट्टी के बड़े घड़े और सुराही) की मांग तेजी से बढ़ी पाली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पाली क्षेत्र के स्थानीय बाजारों में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, खासकर “देसी फ्रेज” (मिट्टी के बड़े घड़े और सुराही) की मांग तेजी से बढ़ी गई है। सुबह होते ही बाजारों में खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है, जहां लोग आधुनिक फ्रिज के विकल्प के रूप में इन देसी उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पाली बाजार में सुबह 6 बजे से ही चहल-पहल शुरू हो जाती है। स्थानीय कुम्हार अपने बनाए विभिन्न आकार और डिज़ाइन के मटके, घड़े और सुराही लेकर बाजार में पहुंच जाते हैं। बढ़ती गर्मी के बीच ठंडा पानी पाने के लिए लोग इन बर्तनों की खरीदारी कर रहे हैं। कई ग्राहकों का कहना है कि मिट्टी के बर्तन में रखा पानी न केवल ठंडा रहता है, बल्कि उसका स्वाद भी बेहतर होता है। विक्रेताओं के अनुसार, इस साल मांग में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। एक स्थानीय कुम्हार ने बताया कि “जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे बिक्री भी बढ़ती है। सुबह के समय सबसे ज्यादा ग्राहक आते हैं, क्योंकि दिन चढ़ने पर गर्मी तेज हो जाती है।” विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम की तरह काम करते हैं। इनमें मौजूद सूक्ष्म छिद्र पानी को धीरे-धीरे वाष्पित होने देते हैं, जिससे पानी ठंडा बना रहता है। साथ ही, बिजली की बचत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी लोगों को इन पारंपरिक साधनों की ओर आकर्षित कर रही है। बाजार में 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के विभिन्न दामों पर ये देसी फ्रेज उपलब्ध हैं, जो हर वर्ग के लोगों की पहुंच में हैं। बढ़ती महंगाई और बिजली की खपत को देखते हुए भी लोग सस्ते और टिकाऊ विकल्प के रूप में इन्हें अपना रहे हैं। कुल मिलाकर, पाली का यह बाजार एक बार फिर पारंपरिक कारीगरी और देसी तकनीक की ओर लौटते समाज की झलक पेश कर रहा है, जहां आधुनिकता के बीच भी मिट्टी की खुशबू और उपयोगिता बरकरार है।1