महिला आरक्षण कानून से जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने, संसद की वर्तमान संख्या के आधार पर इसे तुरंत बिना शर्त लागू करने और इसके भीतर पिछड़ी, अतिपिछड़ी व एससी/एसटी जातियों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर बिहार के आरा में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन (ऐपवा) ने मार्च निकाला। भाकपा-माले जिला कार्यालय श्रीटोला से शुरू हुआ यह मार्च बस स्टैंड पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और जिला सचिव इंदू सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे, यानी परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को आगे बढ़ाने के लिए एक बहाने के रूप में कर रही है। वहीं, ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर सचिव संगीता सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल 'नारी शक्ति' की दिखावटी बातें कर रही है और महिला आरक्षण को राजनीतिक रूप से विवादास्पद परिसीमन के मुद्दे से अलग नहीं कर रही है। उन्होंने इस तरह के ढोंग और इसे लागू करने में की जा रही लंबी देरी को एक गहरी पितृसत्तात्मक वास्तविकता बताया जो महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोक रही है। सभा में ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर अध्यक्ष शोभा मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र-युवाओं के आंदोलन के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी सशक्तिकरण के दावों के बीच जीविका दीदियों को काम से हटाने की धमकी दी जा रही है, जिसके खिलाफ ऐपवा लड़ाई लड़ेगी और सरकार को घेरेगी। इस विरोध कार्यक्रम में संगीता सिंह, इंदू सिंह, संध्या पाल, शोभा मंडल, कलावती देवी, आरती कुमारी और ज्ञान्ती देवी सहित कई महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
महिला आरक्षण कानून से जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने, संसद की वर्तमान संख्या के आधार पर इसे तुरंत बिना शर्त लागू करने और इसके भीतर पिछड़ी, अतिपिछड़ी व एससी/एसटी जातियों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर बिहार के आरा में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन (ऐपवा) ने मार्च निकाला। भाकपा-माले जिला कार्यालय श्रीटोला से शुरू हुआ यह मार्च बस स्टैंड पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और जिला सचिव इंदू सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे, यानी परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को आगे बढ़ाने के लिए एक बहाने के रूप में कर रही है। वहीं, ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर सचिव संगीता सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल 'नारी शक्ति' की दिखावटी बातें कर रही है और महिला आरक्षण को राजनीतिक रूप से विवादास्पद परिसीमन के मुद्दे से अलग नहीं कर रही है। उन्होंने इस तरह के ढोंग और इसे लागू करने में की जा रही लंबी देरी को एक गहरी पितृसत्तात्मक वास्तविकता बताया जो महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोक रही है। सभा में ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर अध्यक्ष शोभा मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र-युवाओं के आंदोलन के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी सशक्तिकरण के दावों के बीच जीविका दीदियों को काम से हटाने की धमकी दी जा रही है, जिसके खिलाफ ऐपवा लड़ाई लड़ेगी और सरकार को घेरेगी। इस विरोध कार्यक्रम में संगीता सिंह, इंदू सिंह, संध्या पाल, शोभा मंडल, कलावती देवी, आरती कुमारी और ज्ञान्ती देवी सहित कई महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
- *दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में आरा में प्रधानमंत्री सहित अन्य नेताओं का पुतला दहन, छात्र-नौजवानों ने जताया आक्रोश* दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र एवं युवा संगठनों द्वारा शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तथा युवाओं के अधिकारों को लेकर चलाए जा रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में आज आरा रेलवे स्टेशन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया गया साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व राजद प्रवक्ता एवं पूर्व छात्र नेता आलोक रंजन ने किया वहीं संचालन जिला पार्षद भीम यादव ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराया। मौके पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए राजद के भोजपुर जिला प्रवक्ता व पूर्व छात्र नेता रहे आलोक रंजन ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी जायज़ मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन केंद्र सरकार छात्रों और नौजवानों की आवाज़ सुनने के बजाय उन पर लाठियां बरसाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवा पेपर लीक, रोजगार, नियमित एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा में समान अवसर तथा छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश का नौजवान बेरोज़गारी, महंगाई और अवसरों की कमी से परेशान है, जबकि सरकार इन गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने का प्रयास कर रही है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बेहद चिंताजनक है। वहीं दूसरी ओर पूर्व छात्र नेता रहे और वर्तमान में भोजपुर जिला परिषद् के सदस्य भीम यादव ने कहा कि जिस देश का युवा अपने भविष्य की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार की मांग कर रहा हो, वहां उस पर लाठीचार्ज होना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। सरकार को आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पेपर लीक के कारण आत्महत्या किए छात्रों का गुनहगार है। वहीं युवा नेता अनुराग पाण्डेय ने कहा कि केंद्र सरकार युवाओं की समस्याओं से लगातार मुंह मोड़ रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं, भर्ती में देरी, बढ़ती बेरोज़गारी और शिक्षा पर बढ़ता आर्थिक बोझ आज युवाओं की सबसे बड़ी चिंता है। इन सवालों का समाधान करने के बजाय आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। वहीं युवा नेता कुमुद पटेल ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ का सम्मान होना चाहिए। यदि छात्र अपने अधिकारों, शिक्षा और रोजगार के लिए भी सुरक्षित तरीके से अपनी बात नहीं रख सकते, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को दमन नहीं, संवाद और समाधान की नीति अपनानी चाहिए। वहीं पूर्व छात्र नेता अभिषेक द्विवेदी ने कहा कि आज देश का युवा रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। सरकार यदि इन मांगों को सुनने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग करेगी, तो युवाओं का आक्रोश और बढ़ेगा। वहीं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शोधार्थी रजनीश यादव ने कहा छात्र-युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का हर प्रयास विफल होगा और संघर्ष जारी रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने केंद्र सरकार से आंदोलनरत छात्रों एवं युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करने, लाठीचार्ज जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मौके पर जिप सदस्य सोनू रजक, हरिफन यादव, रजनीश यादव, तुषार विजेता, धनजीत यादव, देव, अमित ठाकुर, तेजू त्यागी, प्रिंस ठाकुर, विकास, गांगुली, विकू प्रधान, मुन्ना सम्राट, अनुज, विजय, रवि समेत सैकड़ों युवा और छात्र उपस्थित थे।1
- छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना और उनके साथ जो कुछ भी हुआ है, उसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया है। इस परिस्थिति में छात्रों की आवाज को बुलंद करने के लिए श्री राहुल गांधी जी हर समय उनके साथ खड़े हैं।1
- महिला आरक्षण कानून से जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने, संसद की वर्तमान संख्या के आधार पर इसे तुरंत बिना शर्त लागू करने और इसके भीतर पिछड़ी, अतिपिछड़ी व एससी/एसटी जातियों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर बिहार के आरा में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन (ऐपवा) ने मार्च निकाला। भाकपा-माले जिला कार्यालय श्रीटोला से शुरू हुआ यह मार्च बस स्टैंड पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और जिला सचिव इंदू सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे, यानी परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को आगे बढ़ाने के लिए एक बहाने के रूप में कर रही है। वहीं, ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर सचिव संगीता सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल 'नारी शक्ति' की दिखावटी बातें कर रही है और महिला आरक्षण को राजनीतिक रूप से विवादास्पद परिसीमन के मुद्दे से अलग नहीं कर रही है। उन्होंने इस तरह के ढोंग और इसे लागू करने में की जा रही लंबी देरी को एक गहरी पितृसत्तात्मक वास्तविकता बताया जो महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोक रही है। सभा में ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर अध्यक्ष शोभा मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र-युवाओं के आंदोलन के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी सशक्तिकरण के दावों के बीच जीविका दीदियों को काम से हटाने की धमकी दी जा रही है, जिसके खिलाफ ऐपवा लड़ाई लड़ेगी और सरकार को घेरेगी। इस विरोध कार्यक्रम में संगीता सिंह, इंदू सिंह, संध्या पाल, शोभा मंडल, कलावती देवी, आरती कुमारी और ज्ञान्ती देवी सहित कई महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल रहीं।1
- भोजपुर के आरा में ओम नमः शिवाय और जय शिव शंकर के पावन मंत्रों का अनवरत जाप किया गया है। इस पूरे जाप में केवल 'ओम नमः शिवाय', 'जय शिव शंकर' और 'ओम' के पवित्र नाम की श्रद्धापूर्वक बार-बार पुनरावृत्ति की गई है।1
- देश में 21 जुलाई 2026 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। एमएसजी न्यूज (MSG NEWS) द्वारा जारी मुख्य समाचारों के अनुसार, इस तारीख से एलपीजी (LPG), आईटीआर (ITR) और आधार से जुड़े क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर आज की बड़ी और ताजा खबरों के लाइव अपडेट के रूप में जानकारी साझा की गई है।1
- भाकपा-माले, आइसा और इनौस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आरा में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और पेपर लीक के खिलाफ एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह विशाल आक्रोश मार्च पूर्वी रेलवे गुमटी से शुरू होकर शहर के स्टेशन रोड, नवादा चौक, शिवगंज, गोपाली चौक और टाउन थाना होते हुए अम्बेडकर चौक पहुंचा, जहां यह एक विरोध सभा में तब्दील हो गया। इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए (NTA) को भंग करने, पारदर्शी व जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करने और पेपर लीक व परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अनशन के दौरान गिरफ्तार किए जाने और दिल्ली में आंदोलनकारियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ भी तीखा विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि सोनम वांगचुक से बातचीत करने के बदले उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया, और सीधे तौर पर 'मोदी-शाह जवाब दो' के नारे लगाए। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले केंद्रीय कमेटी सदस्य और जिला सचिव अभ्युदय ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन आंदोलन लगातार जारी है। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, आइसा अध्यक्ष नेहा सिंह, मनीष और आमीन की भूख हड़ताल को आज 22 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसमें से सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है और आइसा के दो अनशनकारी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कान में तेल डाले बैठी है और आज तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि अनशनकारियों से वार्ता करने नहीं आया है।3
- बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा में जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा के समीप सिविल सोसाइटी के द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में आयोजित किया गया था, जहां सिविल सोसाइटी के लोगों ने एकत्रित होकर अपना विरोध दर्ज कराया।2
- भोजपुर के चरपोखरी के पास आज शाम 7:15 बजे एक ट्रक ने ऑटो में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में ऑटो चालक जख्मी हो गया है। दुर्घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से जख्मी ऑटो चालक को इलाज के लिए चरपोखरी अस्पताल ले जाया गया।1