logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

हमारी सरकार निरंतर श्रमिक कल्याण के लिए काम कर रही है।उनके हक की पाई-पाई उनकी समृद्धि, उनके परिवार की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित की जा रही

6 hrs ago
user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
Local News Reporter Mauganj, Rewa•
6 hrs ago

हमारी सरकार निरंतर श्रमिक कल्याण के लिए काम कर रही है।उनके हक की पाई-पाई उनकी समृद्धि, उनके परिवार की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित की जा रही

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by Bablu Namdev
    1
    Post by Bablu Namdev
    user_Bablu Namdev
    Bablu Namdev
    Photographer मऊगंज, रीवा, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • भारत देश में अनेक प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं जिसमें से बहुत ज्यादा राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण स्थापित किए गए हैं जिनमें से नीलगाय व्हाइट टाइगर बंगाल टाइगर बहुत सारे मंकी और अमेजिंग एनिमल्स। @Bablu Singh Bairihar Rawan
    1
    भारत देश में अनेक प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं जिसमें से बहुत ज्यादा राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण स्थापित किए गए हैं जिनमें से नीलगाय व्हाइट टाइगर बंगाल टाइगर बहुत सारे मंकी और अमेजिंग एनिमल्स। 
@Bablu Singh Bairihar Rawan
    user_BABLU SINGH BAIRIHAR RAWAN
    BABLU SINGH BAIRIHAR RAWAN
    Graphic designer चुरहट, सीधी, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • ​विंध्य की इस तपती धरती पर जब गेहूं की फसल कट जाती है और चारों ओर केवल धूल और सूखापन नजर आने लगता है, तब किसान के पास दो रास्ते होते हैं— या तो वह खेतों को बीरान छोड़ दे या फिर अपनी मेहनत से उस बंजर दिख रहे मंजर को हरियाली के स्वर्ग में बदल दे। विंध्य बलराम आज उन जुझारू किसानों की कहानी लेकर आया है जिन्होंने कड़ी धूप और गरम हवाओं के बीच अपने खेतों में सब्जी उगाने का साहसिक फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि रबी की फसल के बाद खेत खाली होने पर जमीन में दरारें पड़ने लगती हैं और वातावरण में एक अजीब सी वीरानी छा जाती है, लेकिन यदि इसी समय में सब्जियों की बुवाई कर दी जाए, तो न केवल आंखों को सुकून देने वाली हरियाली चारों तरफ फैलती है, बल्कि हर घर की रसोई तक ताजी, शुद्ध और रसायनों से मुक्त सब्जियां भी पहुँचती हैं। जब चारों ओर का क्षेत्र रेगिस्तान जैसा बीरान दिखने लगे, तब आपके खेतों में लहलहाती भिंडी, लौकी, तोरई और करेले की बेलें एक अलग ही जीवंतता पैदा करती हैं। यह सिर्फ खेती नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने का एक अनोखा तरीका है जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलती है और बाजार की महंगी व बासी सब्जियों पर निर्भरता खत्म हो जाती है। तपती दोपहरी में जब लू चलती है, तब ये हरे-भरे पौधे मिट्टी की नमी को बचाए रखते हैं और पर्यावरण को शीतलता प्रदान करते हैं। यह समय मायूस होकर बैठने का नहीं, बल्कि सूखी मेड़ों पर हरियाली का परचम लहराने का है। यदि हम ठान लें, तो गेहूं की कटाई के बाद का यह सन्नाटा हमारे परिश्रम से एक ऐसी सब्जी क्रांति में बदल सकता है जिसे देखकर हर गुजरने वाले की नजर ठहर जाए और हर किसान गर्व से कह सके कि उसने अपनी माटी को कभी प्यासा और बीरान नहीं छोड़ा। आइए, इस बीरान मौसम में हरियाली का संकल्प लें और विंध्य की इस पावन भूमि को ताजी सब्जियों की सुगंध से महका दें, क्योंकि जागरूक किसान ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है।
    3
    ​विंध्य की इस तपती धरती पर जब गेहूं की फसल कट जाती है और चारों ओर केवल धूल और सूखापन नजर आने लगता है, तब किसान के पास दो रास्ते होते हैं— या तो वह खेतों को बीरान छोड़ दे या फिर अपनी मेहनत से उस बंजर दिख रहे मंजर को हरियाली के स्वर्ग में बदल दे। विंध्य बलराम आज उन जुझारू किसानों की कहानी लेकर आया है जिन्होंने कड़ी धूप और गरम हवाओं के बीच अपने खेतों में सब्जी उगाने का साहसिक फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि रबी की फसल के बाद खेत खाली होने पर जमीन में दरारें पड़ने लगती हैं और वातावरण में एक अजीब सी वीरानी छा जाती है, लेकिन यदि इसी समय में सब्जियों की बुवाई कर दी जाए, तो न केवल आंखों को सुकून देने वाली हरियाली चारों तरफ फैलती है, बल्कि हर घर की रसोई तक ताजी, शुद्ध और रसायनों से मुक्त सब्जियां भी पहुँचती हैं। जब चारों ओर का क्षेत्र रेगिस्तान जैसा बीरान दिखने लगे, तब आपके खेतों में लहलहाती भिंडी, लौकी, तोरई और करेले की बेलें एक अलग ही जीवंतता पैदा करती हैं। यह सिर्फ खेती नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने का एक अनोखा तरीका है जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलती है और बाजार की महंगी व बासी सब्जियों पर निर्भरता खत्म हो जाती है। तपती दोपहरी में जब लू चलती है, तब ये हरे-भरे पौधे मिट्टी की नमी को बचाए रखते हैं और पर्यावरण को शीतलता प्रदान करते हैं। यह समय मायूस होकर बैठने का नहीं, बल्कि सूखी मेड़ों पर हरियाली का परचम लहराने का है। यदि हम ठान लें, तो गेहूं की कटाई के बाद का यह सन्नाटा हमारे परिश्रम से एक ऐसी सब्जी क्रांति में बदल सकता है जिसे देखकर हर गुजरने वाले की नजर ठहर जाए और हर किसान गर्व से कह सके कि उसने अपनी माटी को कभी प्यासा और बीरान नहीं छोड़ा। आइए, इस बीरान मौसम में हरियाली का संकल्प लें और विंध्य की इस पावन भूमि को ताजी सब्जियों की सुगंध से महका दें, क्योंकि जागरूक किसान ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है।
    user_पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    Local News Reporter गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्ती परीक्षा को लेकर चौराहो में बैंड का प्रदर्शन किया गया
    1
    मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्ती परीक्षा को लेकर चौराहो में बैंड का प्रदर्शन किया गया
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Ishu kesharwani
    1
    Post by Ishu kesharwani
    user_Ishu kesharwani
    Ishu kesharwani
    त्योंथर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बे-मौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, मुआवजे की उठी मांग बारा क्षेत्र में अचानक शुरू हुई बे-मौसम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। गेहूं और दलहन की फसल पर बारिश का असर साफ दिख रहा है, जिससे पैदावार घटने का डर बना हुआ है। किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।
    3
    बे-मौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, मुआवजे की उठी मांग
बारा क्षेत्र में अचानक शुरू हुई बे-मौसम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। गेहूं और दलहन की फसल पर बारिश का असर साफ दिख रहा है, जिससे पैदावार घटने का डर बना हुआ है।
किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।
    user_Rohit Sharma
    Rohit Sharma
    निष्पक्षता से खबर को प्रकाशित करना मेरा बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • दिल्ली के लाखों परिवारों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि वर्षों के इंतजार, संघर्ष और उम्मीदों के साकार होने का ऐतिहासिक क्षण है। माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 9 लाख परिवारों को उनका अधिकार और सम्मान मिल रहा है। “As Is Where Is” आधार पर 1511 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण से करीब 45 लाख लोगों को सुरक्षा, स्थिरता और अधिकार का भरोसा मिला है, जो उनके सपनों को संबल और आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत आधार देगा।
    1
    दिल्ली के लाखों परिवारों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि वर्षों के इंतजार, संघर्ष और उम्मीदों के साकार होने का ऐतिहासिक क्षण है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 9 लाख परिवारों को उनका अधिकार और सम्मान मिल रहा है।
“As Is Where Is” आधार पर 1511 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण से करीब 45 लाख लोगों को सुरक्षा, स्थिरता और अधिकार का भरोसा मिला है, जो उनके सपनों को संबल और आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत आधार देगा।
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Local News Reporter Mauganj, Rewa•
    6 hrs ago
  • Post by Bablu Namdev
    1
    Post by Bablu Namdev
    user_Bablu Namdev
    Bablu Namdev
    Photographer मऊगंज, रीवा, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • "साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि ये किसी सुपरहिट फिल्म के 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' की लाइन है, तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए। ये न तो किसी सेल की भीड़ है और न ही मुफ्त का राशन बंट रहा है। ये है 'विद्यार्थी डिस्ट्रीब्यूटर्स' का नजारा, जहाँ इन दिनों शिक्षा कम और अभिभावकों की मजबूरी ज्यादा बेची जा रही है!" ​"दुकान के बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में CBSE और NCERT लिखा है, लेकिन इनके रेट कार्ड देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। हमारे कलेक्टर साहब ने आदेश निकाला था कि किताबें हर दुकान पर मिलनी चाहिए ताकि जनता को सहूलियत हो। लेकिन लगता है कि साहब का आदेश इस दुकान की दहलीज लांघते ही 'रद्दी' के भाव बिक गया।" ​"जरा इस लूट का गणित समझिए—तीसरी और चौथी क्लास की किताबों का सेट सीधे 5 से 6 हजार रुपये में! जो किताबें ₹1500 के आसपास मिलनी चाहिए थीं, उनके दाम रातों-रात रॉकेट बन गए। स्कूल तो बच्चों को गणित बाद में सिखाएगा, ये डिस्ट्रीब्यूटर साहब अभिभावकों को पहले ही सिखा रहे हैं कि 'जेब काटने' का सही फॉर्मूला क्या होता है।" ​"नाग मंदिर के पास स्थित इस दुकान ने पूरे इलाके में ऐसी 'मोनोपोली' जमाई है कि दूसरी किसी दुकान पर किताबें ही गायब हैं। प्रशासन की नाक के नीचे सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और रसूख के दम पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।" ​"अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई सो रहा है या सोने का नाटक कर रहा है? इस खबर के प्रकाशन के बाद अब पूरी उम्मीद है कि मामला कलेक्टर साहब के संज्ञान में पहुंचेगा। अब देखना यह है कि क्या इन 'शिक्षा के सौदागरों' पर प्रशासन का डंडा चलता है या फिर ये लूट तंत्र इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। जनता को इंतज़ार है एक कड़ी कानूनी कार्यवाही का, ताकि शिक्षा की आड़ में चल रहा यह काला बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो सके!"
    1
    "साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि ये किसी सुपरहिट फिल्म के 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' की लाइन है, तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए। ये न तो किसी सेल की भीड़ है और न ही मुफ्त का राशन बंट रहा है। ये है 'विद्यार्थी डिस्ट्रीब्यूटर्स' का नजारा, जहाँ इन दिनों शिक्षा कम और अभिभावकों की मजबूरी ज्यादा बेची जा रही है!"
​"दुकान के बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में CBSE और NCERT लिखा है, लेकिन इनके रेट कार्ड देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। हमारे कलेक्टर साहब ने आदेश निकाला था कि किताबें हर दुकान पर मिलनी चाहिए ताकि जनता को सहूलियत हो। लेकिन लगता है कि साहब का आदेश इस दुकान की दहलीज लांघते ही 'रद्दी' के भाव बिक गया।"
​"जरा इस लूट का गणित समझिए—तीसरी और चौथी क्लास की किताबों का सेट सीधे 5 से 6 हजार रुपये में! जो किताबें ₹1500 के आसपास मिलनी चाहिए थीं, उनके दाम रातों-रात रॉकेट बन गए। स्कूल तो बच्चों को गणित बाद में सिखाएगा, ये डिस्ट्रीब्यूटर साहब अभिभावकों को पहले ही सिखा रहे हैं कि 'जेब काटने' का सही फॉर्मूला क्या होता है।"
​"नाग मंदिर के पास स्थित इस दुकान ने पूरे इलाके में ऐसी 'मोनोपोली' जमाई है कि दूसरी किसी दुकान पर किताबें ही गायब हैं। प्रशासन की नाक के नीचे सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और रसूख के दम पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।"
​"अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई सो रहा है या सोने का नाटक कर रहा है? इस खबर के प्रकाशन के बाद अब पूरी उम्मीद है कि मामला कलेक्टर साहब के संज्ञान में पहुंचेगा। अब देखना यह है कि क्या इन 'शिक्षा के सौदागरों' पर प्रशासन का डंडा चलता है या फिर ये लूट तंत्र इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। जनता को इंतज़ार है एक कड़ी कानूनी कार्यवाही का, ताकि शिक्षा की आड़ में चल रहा यह काला बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो सके!"
    user_पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    Local News Reporter गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.