गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
- कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण ... कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी .... जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच ..... शहडोल 22 सितम्बर 2026:- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे। कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण ... कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी .... जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच ..... शहडोल 22 सितम्बर 2026:- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे।2
- बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है. देखिए वीडियो -1
- चंडिका नगर की महिला ने SP कार्यालय में लगाई गुहार नाबालिग बेटी को स्कूल मार्ग पर परेशान करने का आरोप, ASP ने जांच का दिया आश्वासन1
- जंगलों पर अतिक्रमण करने वाले विजयराघवगढ़ पुलिस की नजर में श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय श्री अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में श्रीमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय श्री कमल मौर्य व श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी श्री वीरेन्द्र धार्वे महोदय के मार्गदर्शन पर निरीक्षक अभिषेक चौबे थाना प्रभारी विजयराघवगढ़ के द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यवाही को अंजाम दिया गया। विवरण – मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में प्राप्त शिकायतों पर थाना विजयराघवगढ़ ने संज्ञान लेकर कार्यवाही की है। आपको बता दें कि मुख्यमत्री जन विश्वास अभियान के दौरान कुछ ग्रामीणों के द्वारा यह शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम कारीतलाई, पिपरा, बम्हौरी, कुसमा स्थित वन विभाग की जमीनों पर कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। पुलिस ने इस पर तत्काल कार्यवाही करते हुये उन स्थानों को चिन्हित किया जहां पर वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा था। पुलिस ने ग्राम पिपरा, गुड़ेहा, कुसमा, बम्हौरी, कारीतलाई स्थित वन भूमि जहां पर अतिक्रमण किया जा रहा था उन स्थानों का भौतिक मुआयना किया एवं वहां पर उपस्थित लोगों को थाना आकर अपने पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने एवं वेरीफिकेशन के लिये पाबंद किया था। इसी लिये दिनांक 22/09/2026 को बड़ी संख्या में वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के आधारकार्ड एवं मोबाईल नम्बर प्राप्त किये गये हैं। इस दौरान करीब 250 की संख्या में महिला पुरूष थाना विजयराघवगढ़ परिसर में इकट्ठा हुये और अपने दस्तावेज प्रस्तुत किये। जिनका वेरीफिकेशन किया जा रहा है। इस दौरान राज्य वन विकास निगम के रेंज आफिसर श्री नायडू एवं उनकी टीम थाना में उपस्थित रही। वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों को समझाईश दी गई कि वन भूमि पर अतिक्रमण करना अवैध है और शीघ्र अतिशीघ्र वन भूमि खाली करने की हिदायत दी गई। अतिक्रमणकारी मुख्य रूप से मैहर, सतना, रीवा, सीधी और शहडोल जिले के हैं। सभी के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।2
- ग्राम कन्हवार में पुलिस का फ्लैग मार्च ग्राम कन्हवार, थाना कुठला: आगामी धार्मिक आयोजनों एवं कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते 💥*जिला कटनी से ज्योति तिवारी*💥 हुए कुठला थाना पुलिस द्वारा ग्राम कन्हवार में फ्लैग मार्च निकाला गया। फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस बल ने गांव के प्रमुख मार्गों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण कर शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। पुलिस ने आमजन से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की। पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास कायम रखना रहा।4
- लाड़ली बहना योजना से श्रीमती आरती नामदेव को मिला आर्थिक संबल, बच्चों की जरूरतें पूरी करना हुआ आसान। मैहर, 22 सितंबर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। मैहर के वार्ड क्रमांक-1 निवासी श्रीमती आरती नामदेव भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने परिवार की जरूरतों को सहजता से पूरा कर रही हैं। श्रीमती आरती नामदेव बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने में भी कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता था। सीमित आय के कारण आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से मिलने वाली 1 हजार 500 रुपये की मासिक राशि उनके लिए आर्थिक सहारा बनी है। इस राशि से वे बच्चों की आवश्यक जरूरतों के साथ-साथ घर-परिवार के छोटे-मोटे खर्च भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं। श्रीमती आरती नामदेव कहती हैं कि हर महीने मिलने वाली राशि से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मविश्वास मिला है। अब छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हुई है और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हो रही है। श्रीमती आरती नामदेव लाड़ली बहना योजना के माध्यम से मिले इस आर्थिक संबल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।1
- Post by Sharda Shrivastava1
- गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।1