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कहीं राहत, कहीं आफत: तेज बारिश से किसानों की फसलों को नुकसान मूसलाधार बारिश बनी आफत, कहीं फसलें हुईं प्रभावित बारिश से किसानों के खिले चेहरे, कहीं तेज बारिश ने फसलों को पहुंचाया नुकसान झमाझम बारिश से राहत, तेज बारिश वाले इलाकों में फसलों को नुकसान मेघ बरसे तो कहीं राहत, कहीं फसलों पर पड़ी भारी बारिश की मार सीमलवाड़ा-झरनी। क्षेत्र में रात को अचानक मौसम बदला और मूसलाधार बारिश हुई। बारिश से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। खेतों में पानी पहुंचने से खरीफ फसलों को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ स्थानों पर तेज बारिश से खड़ी और पक चुकी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। किसानों का कहना है कि बारिश राहत लेकर आई है, लेकिन अधिक बारिश से तैयार फसलों को नुकसान की चिंता बनी हुई है।
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कहीं राहत, कहीं आफत: तेज बारिश से किसानों की फसलों को नुकसान मूसलाधार बारिश बनी आफत, कहीं फसलें हुईं प्रभावित बारिश से किसानों के खिले चेहरे, कहीं तेज बारिश ने फसलों को पहुंचाया नुकसान झमाझम बारिश से राहत, तेज बारिश वाले इलाकों में फसलों को नुकसान मेघ बरसे तो कहीं राहत, कहीं फसलों पर पड़ी भारी बारिश की मार सीमलवाड़ा-झरनी। क्षेत्र में रात को अचानक मौसम बदला और मूसलाधार बारिश हुई। बारिश से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। खेतों में पानी पहुंचने से खरीफ फसलों को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ स्थानों पर तेज बारिश से खड़ी और पक चुकी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। किसानों का कहना है कि बारिश राहत लेकर आई है, लेकिन अधिक बारिश से तैयार फसलों को नुकसान की चिंता बनी हुई है।
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- प्रभु पंड्या के नाम वापसी से भाजपा की राह हुई आसान, अब सुशीला गुप्ता-भरत नागदा आमने-सामने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहित संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके पंड्या ने संगठन हित में लिया फैसला, बोले—पार्टी का सच्चा सिपाही हूं, सुशीला गुप्ता ही बनेंगी सभापति डूंगरपुर(गुणवंत कलाल)। नगरपरिषद सभापति पद के चुनाव को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही सियासी हलचल के बीच शुक्रवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सभापति पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले भाजपा पार्षद प्रभु पंड्या ने अपना नामांकन वापस ले लिया। पंड्या ने रिटर्निंग अधिकारी सोनू गुर्जर के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर नामांकन वापस लिया। उनके नामांकन वापस लेने के साथ ही अब सभापति पद के लिए भाजपा की सुशीला गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा के बीच सीधा मुकाबला रह गया है। प्रभु पंड्या के नाम वापसी के बाद भाजपा खेमे में राहत का माहौल है। नगरपरिषद के कुल 40 पार्षदों में भाजपा के 24, कांग्रेस के 12, बीएपी के 3 और एक निर्दलीय पार्षद है। ऐसे में सदन में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। नामांकन वापसी के बाद भाजपा ने अपने संगठनात्मक निर्णय और पार्षदों की एकजुटता के साथ चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर दिया है। संगठन हित में लिया फैसला प्रभु पंड्या का नामांकन वापस लेना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी संगठन कार्यकर्ता रहे हैं। वे भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सहित जिले और प्रदेश स्तर पर संगठन की विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। लंबे राजनीतिक एवं संगठनात्मक अनुभव के चलते उनके द्वारा लिया गया यह निर्णय पार्टी के भीतर संगठन के प्रति जिम्मेदारी और अनुशासन के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नामांकन वापसी के बाद प्रभु पंड्या ने कहा कि उन्होंने पार्टी के निर्देश पर सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं मिलने के बाद संगठन के निर्देश पर उन्होंने अपना नामांकन वापस लिया है। उन्होंने कहा कि वे भाजपा के सच्चे सिपाही हैं और संगठन का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने विश्वास जताया कि डूंगरपुर नगरपरिषद में भाजपा की सुशीला गुप्ता ही सभापति बनेंगी। पंड्या के इस निर्णय से यह संदेश भी गया कि व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर संगठन का निर्णय और पार्टी हित है। राजनीतिक गलियारों में उनके नामांकन वापसी के कदम को संगठन के प्रति जिम्मेदारी निभाने और पार्टी की एकजुटता बनाए रखने के रूप में देखा जा रहा है। अब सीधा मुकाबला प्रभु पंड्या के नामांकन वापस लेने के बाद सभापति पद की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब भाजपा की सुशीला गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा चुनाव मैदान में आमने-सामने हैं। भाजपा के पास 24 पार्षदों का आंकड़ा होने से उसके पास सदन में स्पष्ट बहुमत है। हालांकि सभापति चुनाव में सभी पार्षदों के मतदान के बाद ही अंतिम परिणाम सामने आएगा। नामांकन वापसी के दौरान भाजपा संगठन जिला प्रभारी वीरेंद्र सिंह चौहान, भाजपा जिला प्रवक्ता एडवोकेट ऋषि दवे और नगीन लाल जैन सहित भाजपा कार्यकर्ता एवं समर्थक मौजूद रहे। सभापति चुनाव को लेकर अब दोनों प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति पर फोकस कर दिया है। प्रभु पंड्या के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा की ओर से संगठन की एकजुटता का संदेश सामने आया है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी भरत नागदा के सामने भाजपा के बहुमत वाले सदन में अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की चुनौती रहेगी। अब सभी की नजरें सभापति चुनाव के मतदान और परिणाम पर टिकी हैं।2
- झुका बिजली का पोल बना हादसे का खतरा, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल सीमलवाड़ा कस्बे की रावल बस्ती मे बिजली का पोल लंबे समय से झुका हुआ होने से हादसे की आशंका बनी हुई है। पोल के साथ बिजली के तार भी नीचे की ओर लटक रहे हैं। आसपास बच्चों की आवाजाही और खेलना जारी रहता है, ऐसे में पोल के गिरने अथवा तारों की चपेट में आने से गंभीर हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पोल काफी झुक चुका है और इसकी स्थिति को देखते हुए समय रहते मरम्मत या पोल को बदलना जरूरी है। लोगों ने बताया कि बिजली के तार भी अपेक्षाकृत नीचे होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर झुके पोल और तारों की स्थिति की जांच कराने तथा आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।1
- आस्था की राह पर निकला ढुंढरीया का जत्था, मां अम्बाजी के दर्शन को रवाना ढुंढरीया। मां अम्बाजी धाम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पदयात्रियों का जत्था आज गांव से जयकारों के साथ रवाना हुआ। श्रद्धालुओं ने मां अम्बे के जयघोष के साथ यात्रा शुरू की और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।1
- गंधवा पाल आकारशोल तालब फुल नदी लाइक कमेंट शेयर करो चैनल सब्सक्राइब करो1
- नगर परिषद सभापति चुनाव में बड़ा अपडेट निर्दलीय प्रत्याशी प्रभु पण्डया ने नामांकन लिया वापस 🚨 ब्रेकिंग न्यूज | डूंगरपुर नगर परिषद सभापति चुनाव में बड़ा अपडेट निर्दलीय प्रत्याशी प्रभु पण्डया ने नामांकन लिया वापस डूंगरपुर। नगर परिषद सभापति पद के चुनाव को लेकर तस्वीर अब साफ हो गई है। निर्दलीय प्रत्याशी प्रभु पण्डया ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके साथ ही सभापति पद के लिए अब भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी सुशीला केके गुप्ता और कांग्रेस प्रत्याशी भरत नागदा चुनावी मैदान में हैं। अब दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नामांकन वापसी के बाद सभापति पद के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला रह गया है। डूंगरपुर नगर परिषद के 40 वार्डों में भाजपा ने 24 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि सभापति चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 21 पार्षदों का है। सभापति पद के लिए मतदान 21 सितंबर 2026 को होगा। ब्यूरो रिपोर्ट — राकेश कलाल कुआँ हर खबर वागड़ न्यूज | डूंगरपुर1
- खड़गदा से भवानपुरा का संपर्क टूटा, तेज बहाव से पुलिया क्षतिग्रस्त, मोरन नदी उफान पर खड़गदा से भवानपुरा का संपर्क टूटा, तेज बहाव से पुलिया क्षतिग्रस्त, मोरन नदी उफान पर सागवाड़ा। डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा उपखंड क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते मोरन नदी उफान पर आ गई है। खड़गदा गांव से होकर बहने वाली मोरन नदी में बीती रात हुई तेज बारिश के बाद जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुक्रवार को दिनभर हुई बारिश से नदी का बहाव और तेज हो गया, जिससे खड़गदा और भवानपुरा के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया। तेज बहाव के कारण नदी पर बनी पुलिया को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे आवागमन प्रभावित हो गया है। नदी के उफान पर होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग मोरन नदी का नजारा देखने के लिए नदी किनारे पहुंच गए। उफनती जलधारा और तेज बहाव को देखने को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रही। स्थानीय लोगों के अनुसार मोरन नदी में इस तरह का जलस्तर लंबे समय बाद देखने को मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2006 में भी नदी इसी तरह उफान पर आई थी और उसके बाद करीब 20 वर्षों में पहली बार इतना अधिक जलस्तर और तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और क्षतिग्रस्त पुलिया के आसपास जाने से बचने तथा सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।1
- लोकेशन डूंगरपुर सवाद दाता महेश्वर चोबीसा Mo 7976727929 हेड लाइन कांग्रेस विधायक गणेश गोगरा बिजली विभाग कार्यालय के बाहर बैठे धरने अगेशित बिजली कटौती के विरोध में उपखंड अधिकारी सोनू गुर्जर मौके पर पहुंचे लोकेशन डूंगरपुर सवाद दाता महेश्वर चोबीसा Mo 7976727929 हेड लाइन कांग्रेस विधायक गणेश गोगरा बिजली विभाग कार्यालय के बाहर बैठे धरने अगेशित बिजली कटौती के विरोध में उपखंड अधिकारी सोनू गुर्जर मौके पर पहुंचे विधायक गणेश गोगरा ने कहा कि जनता से पूछे साहब की लाइट गांव में नहीं आती हैं मैं जनता के लिए यहां धरने पर बैठा हूं अघोषित बिजली कटौती के कारण शहर से 8 किलोमीटर दूर जाकर बिजली विभाग के अधिकारी के साथ जाकर पूछे जनता से के बिजली कटौती है या नहीं3
- बांसिया की आस्था का नया अध्याय: 21 साल की पैदल परंपरा के बाद पहली बार रथ पर सवार होकर अंबाजी रवाना होगा आरासुरी पद यात्रा संघ शुक्रवार को रथ के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, भक्तिमय माहौल में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का सैलाब बांसिया। आरासुरी पद यात्रा संघ बांसिया की 21 वर्षों से चली आ रही शक्तिपीठ अंबाजी की पैदल यात्रा इस बार नए स्वरूप में नजर आएगी। संघ पहली बार रथ लेकर शनिवार को शक्तिपीठ अंबाजी के लिए रवाना होगा। वर्षों से पैदल यात्रा की परंपरा निभा रहे संघ के सदस्यों ने इस बार मां अंबे के दरबार तक रथ ले जाने का निर्णय लिया। निर्णय सामने आते ही संघ के सदस्यों के साथ भामाशाहों और श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक सहयोग करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सहयोग से रथ तैयार हुआ और रथ को गांव में लाया गया। रथ के गांव पहुंचने पर शुक्रवार देर शाम बांसिया में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रथ को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मां अंबे के जयकारों, भजनों और धार्मिक नारों से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने रथ का स्वागत किया। शोभायात्रा में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में खासा उत्साह नजर आया। 21 साल की पैदल यात्रा, अब रथ से मां अंबे के दरबार में दस्तक आरासुरी पद यात्रा संघ बांसिया की ओर से पिछले 21 वर्षों से लगातार अंबाजी की पैदल यात्रा की जा रही है। श्रद्धालु हर वर्ष आस्था और विश्वास के साथ पैदल सफर तय कर मां अंबे के दरबार में पहुंचते हैं। इस बार यात्रा में रथ को शामिल करना संघ के लिए विशेष अवसर है। रथ के साथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है। सदस्यों और भामाशाहों ने बढ़ाया सहयोग का हाथ रथ निर्माण का निर्णय होने के बाद संघ के सदस्यों और भामाशाहों ने आगे बढ़कर सहयोग किया। श्रद्धालुओं की सहभागिता से रथ तैयार हुआ और शुक्रवार को इसे विधिवत गांव में लाया गया। रथ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने के लिए ग्रामीणों में भी उत्साह देखने को मिला। शनिवार को आरासुरी पद यात्रा संघ बांसिया की ओर से रथ के साथ अंबाजी के लिए यात्रा शुरू की जाएगी। यात्रा को लेकर गांव में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। 21 वर्षों की पैदल आस्था के बाद रथ के साथ मां अंबे के दरबार की ओर बढ़ता संघ इस बार बांसिया की श्रद्धा, सेवा और सामूहिक सहभागिता की नई तस्वीर पेश करेगा।4