इको गार्डन में उमड़ा कर्मचारियों का हुजूम, लखीमपुर खीरी से भी बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारी; बातचीत के प्रयास बेनतीजा, मांगों पर ठोस फैसला कब? लखनऊ/लखीमपुर खीरी। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर से जुटे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। लखीमपुर खीरी जिले से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। भारी भीड़ ने साफ कर दिया कि कर्मचारियों की नाराजगी को अब केवल आश्वासनों के सहारे शांत करना आसान नहीं होगा। धरने के दौरान शासन-प्रशासन की ओर से बातचीत के प्रयास किए गए, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी में डटे हैं, तो उनके समाधान की दिशा में निर्णायक कदम कब उठाया जाएगा? बातचीत यदि किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तो उसका लाभ कर्मचारियों को कैसे मिलेगा? आंदोलन के दूसरे दिन भी गतिरोध कायम रहना सरकार के सामने खड़ी चुनौती को उजागर करता है। धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर ने कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और समाधान के लिए ठोस पहल होनी चाहिए। कर्मचारियों की भारी भागीदारी ने आंदोलन को नई ताकत दी है। लखीमपुर खीरी समेत विभिन्न जिलों से कर्मचारियों का राजधानी पहुंचना इस बात का संकेत है कि असंतोष किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। एनएचएम संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर की चिंता भी सामने आ रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं पर वास्तविक असर आंदोलन के कारण होने वाले कार्य व्यवधान पर निर्भर करेगा। अब सवाल यह है कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय लेकर गतिरोध समाप्त करेगी या आंदोलन लंबा खिंचेगा? दूसरे दिन भी धरना जारी रहने से गेंद शासन के पाले में है। कर्मचारियों को केवल बातचीत का भरोसा नहीं, बल्कि उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख और समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
इको गार्डन में उमड़ा कर्मचारियों का हुजूम, लखीमपुर खीरी से भी बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारी; बातचीत के प्रयास बेनतीजा, मांगों पर ठोस फैसला कब? लखनऊ/लखीमपुर खीरी। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर से जुटे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। लखीमपुर खीरी जिले से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। भारी भीड़ ने साफ कर दिया कि कर्मचारियों की नाराजगी को अब केवल आश्वासनों के सहारे शांत करना आसान नहीं होगा। धरने के दौरान शासन-प्रशासन की ओर से बातचीत के प्रयास किए गए, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी में डटे हैं, तो उनके समाधान की दिशा में निर्णायक कदम कब उठाया जाएगा? बातचीत यदि किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तो उसका लाभ कर्मचारियों को कैसे मिलेगा? आंदोलन के दूसरे दिन भी गतिरोध कायम रहना सरकार के सामने खड़ी चुनौती को उजागर करता है। धरने
को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर ने कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और समाधान के लिए ठोस पहल होनी चाहिए। कर्मचारियों की भारी भागीदारी ने आंदोलन को नई ताकत दी है। लखीमपुर खीरी समेत विभिन्न जिलों से कर्मचारियों का राजधानी पहुंचना इस बात का संकेत है कि असंतोष किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। एनएचएम संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर की चिंता भी सामने आ रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं पर वास्तविक असर आंदोलन के कारण होने वाले कार्य व्यवधान पर निर्भर करेगा। अब सवाल यह है कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय लेकर गतिरोध समाप्त करेगी या आंदोलन लंबा खिंचेगा? दूसरे दिन भी धरना जारी रहने से गेंद शासन के पाले में है। कर्मचारियों को केवल बातचीत का भरोसा नहीं, बल्कि उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख और समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
- इको गार्डन में उमड़ा कर्मचारियों का हुजूम, लखीमपुर खीरी से भी बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारी; बातचीत के प्रयास बेनतीजा, मांगों पर ठोस फैसला कब? लखनऊ/लखीमपुर खीरी। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर से जुटे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। लखीमपुर खीरी जिले से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। भारी भीड़ ने साफ कर दिया कि कर्मचारियों की नाराजगी को अब केवल आश्वासनों के सहारे शांत करना आसान नहीं होगा। धरने के दौरान शासन-प्रशासन की ओर से बातचीत के प्रयास किए गए, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी में डटे हैं, तो उनके समाधान की दिशा में निर्णायक कदम कब उठाया जाएगा? बातचीत यदि किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तो उसका लाभ कर्मचारियों को कैसे मिलेगा? आंदोलन के दूसरे दिन भी गतिरोध कायम रहना सरकार के सामने खड़ी चुनौती को उजागर करता है। धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर ने कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और समाधान के लिए ठोस पहल होनी चाहिए। कर्मचारियों की भारी भागीदारी ने आंदोलन को नई ताकत दी है। लखीमपुर खीरी समेत विभिन्न जिलों से कर्मचारियों का राजधानी पहुंचना इस बात का संकेत है कि असंतोष किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। एनएचएम संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर की चिंता भी सामने आ रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं पर वास्तविक असर आंदोलन के कारण होने वाले कार्य व्यवधान पर निर्भर करेगा। अब सवाल यह है कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय लेकर गतिरोध समाप्त करेगी या आंदोलन लंबा खिंचेगा? दूसरे दिन भी धरना जारी रहने से गेंद शासन के पाले में है। कर्मचारियों को केवल बातचीत का भरोसा नहीं, बल्कि उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख और समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई का इंतजार है।2
- पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने उठाई आवाज, आंदोलन की चेतावनी लखीमपुर खीरी में हिंदी खबर के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल और लिविंग इंडिया के सौरभ उपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने निष्पक्ष जांच और तत्काल रिहाई की मांग की। जिलाध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी।1
- कार की टक्कर से टहलने निकले ग्रामीण की मौत परिवार में मचा कोहराम, पलिया-सम्पूर्णानगर रोड पर हुआ हादसा, पुलिस ने कार चालक को वाहन सहित लिया हिरासत में पलिया कलां (खीरी)। पलिया तहसील क्षेत्र के थाना सम्पूर्णानगर के ग्राम त्रिकौलिया निवासी लियाकत इदरीसी आज मंगलवार को रोजाना की तरह सुबह टहलने के लिए निकले थे। इसी दौरान पलिया-सम्पूर्णानगर रोड पर पीछे से आ रही एक कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने घायल को तत्काल पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सम्पूर्णानगर थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने बताया कि टक्कर मारने वाले कार चालक को वाहन सहित कब्जे में ले लिया गया है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया है। अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।3
- लखीमपुर सेठ घाट रोड पर लगा भयंकर जाम छूट छूट कर लगभग 2 घंटे तक लग रहा जाम स्थानीय निवासी और रागीर को हो रही है समस्या लंबे जाम के कारण लोग समय से अपने कम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं जाम में फंसे हुए महावीर जी बताते हैं कि इस प्रकार की जाम हमने पहले इस रोड पर कभी नहीं देखी जो आज देखने को मिल रही है प्रशासन को इस रोड पर एक ट्रैफिक कर्मचारी नियुक्त करना चाहिए और रोड का चौड़ीकरण करना भी होना बहुत जरूरी है1
- 🚨 सड़क पर नमाज… हुई दुर्घटना… क्या उस लड़के को सजा मिलनी चाहिए थी या नहीं? #Australia #ReelKroFeelKro1
- तेंदुए ने सात वर्षीय मासूम बच्ची को बनाया निवाला, गन्ने के खेत में मिला शव। लखीमपुर खीरी में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बोझिया गांव में घर के बाहर से तेंदुआ सात वर्षीय मासूम बच्ची को उठा ले गया था। बच्ची की तलाश में वन विभाग की टीम जुटी हुई थी, लेकिन मंगलवार कों मासूम का अधखाया शव घर से करीब पांच सौ मीटर दूर गन्ने के खेत में बरामद हुआ। बच्ची का सिर धड़ से अलग था। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं तेंदुए की दहशत से ग्रामीण सहमे हुए हैं।लखीमपुर खीरी के पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बोझिया गांव में तेंदुए के हमले से इलाके में दहशत फैल गई है। बताया जा रहा है कि सात वर्षीय बच्ची को तेंदुआ घर के बाहर से उठाकर ले गया था। घटना के बाद से ही वन विभाग की टीम बच्ची की तलाश में जुटी हुई थी।शव की हालत देखकर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मासूम की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर भय बना हुआ है। अब ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।4
- बोझिया गांव में तेंदुए का आतंक, छह वर्षीय सानिया को उठा ले गया; गन्ने के खेतों में रातभर तलाश, बकरी के साथ पिंजरा लगाकर पकड़ने की कोशिश में जुटा वन विभाग ASTv24 digital - शाहिद लखाही लखीमपुर खीरी। जिले के पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बोझिया गांव में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब छह वर्षीय बच्ची सानिया को तेंदुए द्वारा उठा ले जाने की सूचना सामने आई। घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल बनगया। बच्ची की तलाश में पुलिस और वन विभाग की टीमें जुट गई। देर रात तक गन्ने के खेतों और आसपास के इलाके में खोजबीन जारी रही। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगवाया और उसे आकर्षित करने के लिए उसमें बकरी का इंतजाम भी किया गया है। जानकारी के मुताबिक, बोझिया फार्म निवासी संपत्ति गिरी की छह वर्षीय बेटी सानिया सोमवार शाम करीब 6:30 बजे अपने ही घर के आंगन में केला खाते समय कथित तौर पर तेंदुए के हमले का शिकार हुई। बताया जा रहा है कि तेंदुआ बच्ची को उठाकर पास के गन्ने के खेत में चला गया। घटना की खबर फैलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए सूचना मिलते ही पढ़ुआ थाना प्रभारी मोहित पुंडीर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिश और ग्रामीणों ने गन्ने के खेत में बच्ची की तलाश शुरू कर दी ।वहीं, उत्तर निघासन रेंज के रेंजर भूपेंद्र सिंह, धौरहरा रेंज के रेंजर अशोक कुमार श्रीवास्तव, डिप्टी रेंजर ऋषभ प्रताप सिंह और वन दरोगा इशार हुसैन भी घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस और वन विभाग की टीमें आसपास के खेतों में बच्ची की तलाश करने के साथ ही तेंदुए की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के प्रयास में पिंजरा लगाकर उसमें बकरी रखवाई है। मां का साया पहले ही उठ चुका, मजदूरी कर बच्चों को पाल रहा था पिता इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बताया गया कि सानिया की मां का करीब तीन वर्ष पहले निधन हो चुका है। इसके बाद पिता संपत्ति गिरी मजदूरी करके अपने दोनों बच्चों का पालन-पोषण कर रहे थे। सानिया का एक छोटा भाई विकास है, जिसकी उम्र करीब साढ़े चार वर्ष बताई जा रही है। मां के निधन के बाद पिता के दोनों बच्चे ही सहारा थे। ऐसे में सानिया के लापता होने की सूचना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता और छोटे भाई का रो-रो कर बुरा हाल है। घटना के बाद से गांव में चिंता और भय का माहौल बना हुआ है। दहशत में ग्रामीण, बच्ची की तलाश पर टिकी निगाहें बोझिया और आसपास के गांवों में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। लोग बच्ची की सुरक्षित बरामदगी की उम्मीद लगाए हुए हैं। पुलिस और वन विभाग की टीमें लगातार तलाश अभियान चला रही हैं। फिलहाल बच्ची का पता चलने और घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।1
- महिला के साथ इतनी बर्बरता क्यों राहुल गांधी जी सम्मान की बात करते थे आप अब ऐसा क्यों ❓1