नरसिंहपुर का भूसा बैंक: गौ-सेवा और नवाचार से बना प्रेरणादायक मॉडल नरवाई से गो- ग्रास तक का सफर, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा नरसिंहपुर, 20 अप्रैल 2026. जहां समस्या होती है, वहीं समाधान भी जन्म लेता है- इस कहावत को नरसिंहपुर जिले ने साकार कर दिखाया है। जिस "नरवाई" (फसल अवशेष) को किसान पहले बेकार समझकर जला देते थे, वही आज जिले की गौशालाओं के लिए अमूल्य "गो- ग्रास" बन चुकी है। प्रशासन की दूरदर्शिता, युवाओं के नवाचार और किसानों के सहयोग ने मिलकर "भूसा बैंक" जैसी अनूठी पहल को जन्म दिया है, जो अब एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है। संकल्प से सिद्धि: 13 मार्च को बना मील का पत्थर उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. सुनील बृजपुरिया ने बताया कि इस परिवर्तन की नींव 13 मार्च 2026 को रखी गई, जब बहोरीपार स्थित मुख्यमंत्री गौसेवा योजना गौशाला में 6 आधुनिक स्ट्रा-रीपर मशीनों को हरी झंडी दिखाई गई। यह पहल केवल मशीनों का संचालन नहीं, बल्कि गौवंश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम था। युवा शक्ति और तकनीक का संगम ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के माध्यम से त्रिनेत्री सेवा समिति डांगीढाना के युवाओं ने लॉटरी के जरिए 6 स्ट्रा-रीपर मशीनें खरीदीं। आज ये मशीनें प्रतिदिन लगभग 60 ट्रॉली भूसा तैयार कर रही हैं, जिससे गौशालाओं में चारे की कमी पूरी हो रही है। उमरिया गौशाला में 125 ट्रॉली की क्षमता के मुकाबले 250 ट्रॉली भूसा संग्रहित और श्रीनगर गौशाला (गोटेगांव) में 2500 क्विंटल भूसा संग्रह किया गया है। बरमान की हरसिद्धि और केरपानी गौशालाओं ने भी अब किराए के बजाय अपनी मशीनें खरीदकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। आर्थिक रूप से भी मजबूत मॉडल यह पहल सिर्फ सेवा ही नहीं, बल्कि एक सफल आर्थिक मॉडल भी बन चुकी है। · क्षमता: 10 डिब्बे (लगभग 80 क्विंटल) प्रतिदिन · लागत: ₹1,150 प्रति डिब्बा · बाजार मूल्य: ₹2,500 प्रति डिब्बा · शुद्ध लाभ: ₹1,350 प्रति डिब्बा · प्रतिदिन आय: लगभग ₹13,500 जिले में संचालित करीब 300 स्ट्रा-रीपर मशीनें न केवल पर्यावरण को बचा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी प्रतिदिन लाखों रुपये का योगदान दे रही हैं। प्रशासन की संवेदनशील रणनीति इस सफलता के पीछे प्रशासन की सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन है। एक ओर नरवाई जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया, वहीं दूसरी ओर किसानों को इसे गौशालाओं के लिए दान करने हेतु प्रेरित किया गया। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा मैपिंग और नोडल अधिकारियों द्वारा भंडारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। उपलब्धियों की झलक (2025-26) जिले की गौशालाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं: · 05 गौशालाएं: 5000+ क्विंटल भूसा संग्रह · 16 गौशालाएं: 3000+ क्विंटल भूसा संग्रह · 40 गौशालाएं: 1500+ क्विंटल भूसा संग्रह एक मिसाल, पूरे प्रदेश के लिए आज जिले के खेतों में धुआं नहीं, बल्कि समाधान दिखाई देता है। मशीनें गौवंश के लिए सालभर का चारा तैयार कर रही हैं। ‘भूसा बैंक’ की यह पहल जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण बनकर पूरे मध्यप्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
नरसिंहपुर का भूसा बैंक: गौ-सेवा और नवाचार से बना प्रेरणादायक मॉडल नरवाई से गो- ग्रास तक का सफर, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा नरसिंहपुर, 20 अप्रैल 2026. जहां समस्या होती है, वहीं समाधान भी जन्म लेता है- इस कहावत को नरसिंहपुर जिले ने साकार कर दिखाया है। जिस "नरवाई" (फसल अवशेष) को किसान पहले बेकार समझकर जला देते थे, वही आज जिले की गौशालाओं के लिए अमूल्य "गो- ग्रास" बन चुकी है। प्रशासन की दूरदर्शिता, युवाओं के नवाचार और किसानों के सहयोग ने मिलकर "भूसा बैंक" जैसी अनूठी पहल को जन्म दिया है, जो अब एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है। संकल्प से सिद्धि: 13 मार्च को बना मील का पत्थर उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. सुनील बृजपुरिया ने बताया कि इस परिवर्तन की नींव 13 मार्च 2026 को रखी गई, जब बहोरीपार स्थित मुख्यमंत्री गौसेवा योजना गौशाला में 6 आधुनिक स्ट्रा-रीपर मशीनों को हरी झंडी दिखाई गई। यह पहल केवल मशीनों का संचालन नहीं, बल्कि गौवंश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम था। युवा शक्ति और तकनीक का संगम ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के माध्यम से त्रिनेत्री सेवा समिति डांगीढाना के युवाओं ने लॉटरी के जरिए 6 स्ट्रा-रीपर मशीनें खरीदीं। आज ये मशीनें प्रतिदिन लगभग 60 ट्रॉली भूसा तैयार कर रही हैं, जिससे गौशालाओं में चारे की कमी पूरी हो रही है। उमरिया गौशाला में 125 ट्रॉली की क्षमता के मुकाबले 250 ट्रॉली भूसा संग्रहित और श्रीनगर गौशाला (गोटेगांव) में 2500 क्विंटल भूसा संग्रह किया गया है। बरमान की हरसिद्धि और केरपानी गौशालाओं ने भी अब किराए के बजाय अपनी मशीनें खरीदकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। आर्थिक रूप से भी मजबूत मॉडल यह पहल सिर्फ सेवा ही नहीं, बल्कि एक सफल आर्थिक मॉडल भी बन चुकी है। · क्षमता: 10 डिब्बे (लगभग 80 क्विंटल) प्रतिदिन · लागत: ₹1,150 प्रति डिब्बा · बाजार मूल्य: ₹2,500 प्रति डिब्बा · शुद्ध लाभ: ₹1,350 प्रति डिब्बा · प्रतिदिन आय: लगभग ₹13,500 जिले में संचालित करीब 300 स्ट्रा-रीपर मशीनें न केवल पर्यावरण को बचा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी प्रतिदिन लाखों रुपये का योगदान दे रही हैं। प्रशासन की संवेदनशील रणनीति इस सफलता के पीछे प्रशासन की सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन है। एक ओर नरवाई जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया, वहीं दूसरी ओर किसानों को इसे गौशालाओं के लिए दान करने हेतु प्रेरित किया गया। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा मैपिंग और नोडल अधिकारियों द्वारा भंडारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। उपलब्धियों की झलक (2025-26) जिले की गौशालाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं: · 05 गौशालाएं: 5000+ क्विंटल भूसा संग्रह · 16 गौशालाएं: 3000+ क्विंटल भूसा संग्रह · 40 गौशालाएं: 1500+ क्विंटल भूसा संग्रह एक मिसाल, पूरे प्रदेश के लिए आज जिले के खेतों में धुआं नहीं, बल्कि समाधान दिखाई देता है। मशीनें गौवंश के लिए सालभर का चारा तैयार कर रही हैं। ‘भूसा बैंक’ की यह पहल जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण बनकर पूरे मध्यप्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
- नरसिंहपुर से सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाय योजना के अंतर्गत नवीन कृषि उपज मंडी करेली में सामुहिक विवाह सम्मेलन का हुआ आयोजन इस कार्यक्रम मै उदय प्रताप सिंह परिवहन उच्च शिक्षा मंत्री के मुख्य अतिथि मे संपन्न हुआ।1
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- झोतेश्वर में श्री गुरु कृपा गौ सेवा समिति की नवनिर्मित गौशाला का शुभारंभ, नरसिंहपुर जिले के पावन तीर्थ स्थल परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर में रविवार को श्री गुरु कृपा गौ सेवा समिति द्वारा निर्मित नवनिर्मित गौशाला का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, उत्साह एवं धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ फीता काटकर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज, मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा, विशिष्ट अतिथि आचार्य महामंडलेश्वर एवं दैनिक यश भारत अखबार के मालिक आशीष शुक्ला के कर-कमलों से किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में गौ माता का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया गया।1
- कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में सामाजिक समरसता और सादगी का सुंदर उदाहरण देखने को मिला, जहां 200 जोड़ों का विधि-विधान से विवाह सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में नवविवाहित जोड़ों को शासन की ओर से निर्धारित सहायता प्रदान की गई, जिससे उनके नए जीवन की शुरुआत सशक्त रूप से हो सके इस अवसर पर मणिनगेन्द्र सिंह फाउंडेशन द्वारा भी सराहनीय पहल की गई। फाउंडेशन की फाउंडर मेंबर सुमनलता पटेल ने सभी नवदंपत्तियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रत्येक जोड़े को उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहयोग भी मिलता है। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिक एवं मातृशक्ति की उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की1
- नरसिंहपुर से सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल गोटेगांव झोतेश्वर में श्री गुरु कृपा गौ सेवा समिति की नवनिर्मित गौशाला का शुभारंभ, संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- परमहंसी गंगा आश्रम में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती जी महाराज की मौजूदगी में किया गया गौशाला का शुभारंभ3
- नरसिंहपुर से सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल गोटेगांव झोतेश्वर में श्री गुरु कृपा गौ सेवा समिति की नवनिर्मित गौशाला का शुभारंभ, संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न1