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गया: मानपुर के भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग, लाखों का सामान खाक — 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय जिंदा जली गया के मानपुर इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भुसुंडा बाजार समिति के पास अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस आगजनी की घटना में लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेज थी कि 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय भी इसकी चपेट में आकर जल गई। इसके अलावा करीब 20 प्लंग (खाट/बेड) समेत घर का सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास कर आग पर काबू पाने की कोशिश की, जिसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
Ashutosh kumar
गया: मानपुर के भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग, लाखों का सामान खाक — 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय जिंदा जली गया के मानपुर इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भुसुंडा बाजार समिति के पास अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस आगजनी की घटना में लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेज थी कि 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय भी इसकी चपेट में आकर जल गई। इसके अलावा करीब 20 प्लंग (खाट/बेड) समेत घर का सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास कर आग पर काबू पाने की कोशिश की, जिसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
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- दखिनगाँव चौक का नाम बदलने पर बवाल, 24 घंटे के भीतर शुरू हुआ विरोध वज़ीरगंज प्रखंड के दखिनगाँव चौक का नाम बदलकर “परशुराम चौक” किए जाने के महज चौबीस घंटे के भीतर ही इलाके में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उनके गांव की पहचान और इतिहास से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों का कहना है कि भगवान परशुराम के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उनके नाम पर चौक का नामकरण करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन “दखिनगाँव” नाम सदियों से चला आ रहा है, जो उनके पूर्वजों की विरासत और पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इस नाम को पूरी तरह हटाना उचित नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दखिनगाँव नाम सिर्फ एक जगह का नाम नहीं, बल्कि यहां के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। “हमारे पूर्वजों ने इस गांव को बसाया, तब से यह दखिनगाँव के नाम से जाना जाता है। अगर नाम ही बदल दिया जाएगा, तो आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास से कैसे जुड़ पाएगी,” एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर भगवान परशुराम के नाम पर सम्मान देना है, तो संयुक्त नाम रखा जा सकता है, जैसे “दखिनगाँव परशुराम चौक”, ताकि आस्था और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे। वहीं, इस मुद्दे पर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें इस नामकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि बिना व्यापक जनमत के इस तरह का फैसला लेना उचित नहीं है। फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक इस पर प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहरा सकता है।1
- जय जय परशुराम के उद्घोष से गूंज उठा दखिनगाँव, चौक का हुआ नामकरण! वज़ीरगंज प्रखंड अंतर्गत दखिनगाँव में उस समय भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब पूरे गाँव के लोग एक स्वर में जय जय परशुराम के जयघोष से दखिनगाँव चौक को गूंजयमान कर दिए । आपको बता दे की वज़ीरगंज के दखिनगाँव चौक का विधिवत नामकरण हुआ अब उसे परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय ग्रामीणों एवं समाज के गणमान्य लोगों के सहयोग से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा वर्ग उपस्थित रहे। चौक पर भगवान परशुराम के आदर्शों, उनके जीवन और पराक्रम का विस्तार से वर्णन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रतीक थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, विद्वान और पराक्रमी थे। उन्हें भगवान शिव से फरसा प्राप्त हुआ, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान परशुराम ने अन्यायी और अत्याचारी क्षत्रियों के खिलाफ युद्ध किया और इक्कीस बार पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त कराया। उनका जीवन सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भगवान परशुराम ने समाज को यह संदेश दिया कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सच्चा धर्म है। उनका जीवन संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।चौक के नामकरण के अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। युवाओं ने झंडा, बैनर के साथ जुलूस निकाला, वहीं बुजुर्गों ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि परशुराम चौक नाम से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता मिलेगी। अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दिया।1