mhow के सिविल अस्पताल, यानी मध्य भारत अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने से अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। जिसकी वजह से बच्चों के इलाज के लिए आने वाले परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है, जिससे आम जनता में नाराज़गी भी देखने को मिल रही है। सवाल ये है कि जब अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो मासूमों का इलाज आखिर कैसे होगा? अब देखना ये होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कब तक संज्ञान लेता है और अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति कब तक होती है।” mhow के सिविल अस्पताल, यानी मध्य भारत अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने से अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। जिसकी वजह से बच्चों के इलाज के लिए आने वाले परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है, जिससे आम जनता में नाराज़गी भी देखने को मिल रही है। सवाल ये है कि जब अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो मासूमों का इलाज आखिर कैसे होगा? अब देखना ये होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कब तक संज्ञान लेता है और अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति कब तक होती है।”
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- नमस्ते, मैं हूँ [Prince dhule]। अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्य बातें: * ज्ञापन सौंपा: हाल ही में अमरनाथ यात्रा ग्रुप के सदस्यों ने तहसील ऑफिस पहुंचकर एसडीएम (SDM) को एक ज्ञापन सौंपा। यह मांग पत्र जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के नाम भेजा गया है। * पहली मांग: श्रद्धालुओं की मांग है कि यात्रा के पहले दिन (प्रथम पूजन) से ही आम भक्तों को बाबा बर्फानी के दर्शन की अनुमति दी जाए। * दूसरी मांग: यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने के लिए बड़ी मशीनों का इस्तेमाल न किया जाए। भक्तों का कहना है कि मशीनों की गर्मी से पवित्र शिवलिंग जल्दी पिघल जाता है, इसलिए वहां केवल मजदूरों (इंसानों) से काम कराया जाए। निष्कर्ष: भक्तों का मानना है कि इन बदलावों से न केवल आस्था बनी रहेगी, बल्कि शिवलिंग भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा। क्या1
- ब्रेकिंग न्यूज़ निडर भारत न्यूज़ से पत्रकार आकाश कोहली की रिपोर्ट पीथमपुर, सेक्टर नंबर 3 पीथमपुर के सेक्टर नंबर 3 में सतनाला कंपनी के पास नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ी में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते पूरी कचरा गाड़ी जलकर खाक हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर एकत्रित हो गए। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है, हालांकि आशंका जताई जा रही है कि कचरे में मौजूद किसी ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग भड़की हो सकती है। सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग और स्थानीय लोग आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।1
- इंदौर में एक ऑटो चालक की सतर्कता से 18 चोरी के मोबाइल बरामद किए गए। ऑटो चालक की समझदारी और जागरूकता से पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 👉 ताज़ा ब्रेकिंग और स्थानीय खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें । 👉 वीडियो को Like, Share और Comment ज़रूर करें ।1
- इंदौर में उत्साह के आगे धरे रह गए सुरक्षा इंतज़ाम! लोगों के जोश और भारी भीड़ के सामने प्रशासन के लगाए गए बैरिकेट्स भी टिक नहीं पाए। हजारों की संख्या में लोग राजवाड़ा पहुंचने के लिए उमड़ पड़े, जिससे कई जगह सुरक्षा इंतज़ाम बिखरते नजर आए। भीड़ के दबाव में बैरिकेट्स की हालत खराब हो गई और व्यवस्था संभालना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। देखिए मौके का LIVE वीडियो — कैसे उत्साह के आगे धरे रह गए सारे सुरक्षा प्रबंध!1
- This is the situation of muslim living Uttam Nagar is the new definition of justice?1
- इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जूनियर डॉक्टरों (JUDA) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जूडा के बैनर तले डॉक्टरों ने एक विशाल बाइक रैली निकाली, जो एमवाई अस्पताल से शुरू होकर एमजीएम और एमटीएस होते हुए वापस एमवाई अस्पताल पर समाप्त हुई। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का मुख्य आरोप है कि वर्ष 2021 में सरकार के साथ हुए समझौते के तहत उनके मानदेय में सालाना 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि होनी थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया है। जूडा अध्यक्ष डॉ. अंशुल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों जैसे दिल्ली और राजस्थान में जूनियर डॉक्टरों का मानदेय 1 लाख रुपये से अधिक है, जबकि मध्य प्रदेश में यह अब भी 70 से 80 हजार रुपये के बीच अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों का एरियर भी बकाया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले एक साल से सरकार को पत्र और ईमेल के माध्यम से अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भोपाल में भी इसी तरह का आंदोलन जारी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।1
- आखिरी लोक अदालत है इसलिए उन्होंने इंदौर के नागरिक को से अपील की की अपने जलकर व संपत्ति कर का इस लोक अदालत में भुगतान करें और एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें1
- mhow के सिविल अस्पताल, यानी मध्य भारत अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने से अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। जिसकी वजह से बच्चों के इलाज के लिए आने वाले परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है, जिससे आम जनता में नाराज़गी भी देखने को मिल रही है। सवाल ये है कि जब अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो मासूमों का इलाज आखिर कैसे होगा? अब देखना ये होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कब तक संज्ञान लेता है और अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति कब तक होती है।”1