Shuru
Apke Nagar Ki App…
पूर्व निर्धारण कार्यक्रम के तहत 12 फरवरी को विभिन्न ट्रेड यूनियनो द्वारा 4 श्रमिक संहिता के विरोध में विभिन्न कोलियरियों का कामकाज ठप्प कर दिया और सरकार के विरुद्ध जोरदार नारे लगाए उन्होंने इसको लेकर क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में।
संतोष कुमार दे
पूर्व निर्धारण कार्यक्रम के तहत 12 फरवरी को विभिन्न ट्रेड यूनियनो द्वारा 4 श्रमिक संहिता के विरोध में विभिन्न कोलियरियों का कामकाज ठप्प कर दिया और सरकार के विरुद्ध जोरदार नारे लगाए उन्होंने इसको लेकर क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में।
More news from झारखंड and nearby areas
- धनबाद मण्डल कारा का जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश, डीसी व एसएसपी ने किया निरीक्षण, कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं का लिया जानकारी, डीसी एसएसपी ने कहा राजधानी समाहरणालय को बम से उड़ाने की धमकी के बाद जिला प्रशासन अलर्ट,बढ़ाई गई है सुरक्षा धनबाद।धनबाद मण्डल कारा का निरीक्षण जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश बालकिशन तिवारी,डीसी आदित्य रंजन और एसएसपी प्रभात कुमार ने किया। मण्डल कारा में बन्द कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी लिया।नई फूड मेन्यू के तहत मिलने वाली भोजन की जानकारी, किचन का ,सभी वार्ड,महिला वार्ड का निरीक्षण किया। जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश ने कहा रूटीन चेकिंग के तहत निरीक्षण किया गया है। डीसी एसएसपी ने कहा सभी वार्ड,महिला वार्ड किचन का निरीक्षण किया गया।कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में कैदियों से जानकारी लिया गया है।साथ ही नई फूड मेन्यू के तहत कैदियों को भोजन दिया जा रहा है नही इसकी भी जेल प्रबंधन से जानकारी लिया गया। वही राँची समाहरणालय को बम से उड़ाने की धमकी के बाद जिला प्रशासन अलर्ट होने व सभी सरकारी संस्थानों की सुरक्षा बढाने की बात डीसी एसएसपी ने कहा।1
- बाघमारा. (रिपोर्ट प्रेम कुमार ). केंद्र सरकार के द्वारा लिए गए 4 लेबर कोड के निर्णय के खिलाफ मजदूर संगठनों के आह्वान पर बरोरा एवं ब्लॉक दो क्षेत्र में ऐतिहासिक बंदी रहा. मजदूर संग़ठनों ने इस बंदी को सफल बताया. बताते चले की ब्लॉक दो 14 नंबर हाज़िरी घर में मात्र 3 कामगारों ने हाजिरी बनाई. बंदी के कारण यहाँ उत्पादन, संप्रेशन व ट्रांसपोर्टिंग इत्यादि कार्य ठप पड़े रहे. इस मौके पर मुख्य रूप से जे के झा गोपाल मिश्रा तुलसी साव केशव पासवान सुरेन्द्र यादव, अरशद हुसैन विनय सच्चर अखलेश नोनिया कुलदीप महतो दिलीप नोनिया मुखिया ज़ी समेत श्रमिक संग़ठन के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे.1
- वार्ड 18 की जनता का मूड क्या है? संवाददाता छोटे खान की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलकर बोले लोग1
- चार लेबर कोड श्रम कानून के विरोध में संयुक्त मोर्चा द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत निरसा एवं एगारकुंड प्रखंड में गुरुवार की सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक व्यापक आंदोलन किया गया। ECL मुगमा एरिया अंतर्गत विभिन्न कोलियरियों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। मजदूरों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के श्रम कानूनों के खिलाफ विरोध जताया. आंदोलन के तहत सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक संयुक्त मोर्चा के कार्यकर्ताओं और मजदूरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) को जाम कर दिया। इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानून मजदूर विरोधी हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों से मजदूरों का शोषण बढ़ेगा और वे अपने हक एवं अधिकारों की आवाज मजबूती से नहीं उठा सकेंगे। उन्होंने इन कानूनों को “काला कानून” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इन श्रम कानूनों को वापस नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा1
- Post by BinodRajak1
- गुप्त रोग शीघ्रपतन शुक्राणु स्वप्नदोष मर्दाना ताकत फायदा नहीं तो डबल पैसा वापस 100% गारंटी के साथ संपर्क करें डॉक्टर पंकज कुमार 9572291304, 70910778981
- “प्रत्याशी के पोस्टर पर गोबर!” झरिया में सियासी बवाल1
- Post by BinodRajak1
- देशभर में 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा आहूत आम हड़ताल की वजह से गुरुवार को 10 बजे से ही गिरिडीह के तमाम बैंकों में ताला लटका रहा और तमाम बैंक कर्मी बरगंडा रोड स्थित बैंक ऑफ़ इंडिया के बाहर धरने पर डटे रहे।बताया गया कि निजीकरण, मजदूर विरोधी कानून, बढ़ती महंगाई, ठेका प्रथा और रोजगार सुरक्षा के मुद्दों को लेकर यह हड़ताल ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक बन गई। इसी क्रम में ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयीज़ एसोसिएशन के सदस्यों सहित गिरिडीह के बैंक कर्मचारी भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए। हड़ताल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र, बैंकिंग व्यवस्था और श्रमिक अधिकारों पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। सरकार से मांग की गई कि वह श्रमिक संगठनों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करे और जनविरोधी नीतियों को वापस ले। यह आंदोलन श्रमिक वर्ग की एकता, दृढ़ता और अधिकारों की रक्षा का संदेश दे गया।1