नंदू पाण्डेय, प्रधान संपादक ग्रामीणसरोकार, ने चंपावत को उत्तराखंड का "मॉडल जिला" बनाने के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद, जिला मुख्यालय की सड़कों की मौजूदा स्थिति इन दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। हल्की बारिश में सड़कें कीचड़ और जलभराव से भर जाती हैं, वहीं धूप निकलते ही धूल के गुबार से दुकानदार, स्थानीय निवासी और राहगीर बुरी तरह परेशान होते हैं, जिससे सड़कों पर चलना एक चुनौती बन गया है। यह स्थिति केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था की कमी और निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करती है। ग्रामीणसरोकार का कहना है कि विकास केवल नई सड़कें बनाने या करोड़ों रुपये खर्च करने तक सीमित नहीं है; यदि पहली बारिश में ही सड़कें खराब हो जाएं और थोड़ी धूप में धूल से भर जाएं, तो यह स्पष्ट तौर पर योजना, क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर खामियों का संकेत है। जनता यह सवाल उठा रही है कि बार-बार बनने और टूटने वाली सड़कों की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की मंशा पर कोई प्रश्न नहीं है, लेकिन सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब समय आ गया है कि इस "मॉडल जिले" में हुए निर्माण कार्यों का स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, दोषी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, और नागरिकों को स्थायी, सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। क्योंकि, किसी भी जिले की पहचान सरकारी दावों से नहीं, बल्कि उन सड़कों से होती है जिन पर आम नागरिक प्रतिदिन चलता है। यदि बारिश में कीचड़ और धूप में धूल ही लोगों की नियति बन जाए, तो "मॉडल जिला" का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाता है।
नंदू पाण्डेय, प्रधान संपादक ग्रामीणसरोकार, ने चंपावत को उत्तराखंड का "मॉडल जिला" बनाने के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद, जिला मुख्यालय की सड़कों की मौजूदा स्थिति इन दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। हल्की बारिश में सड़कें कीचड़ और जलभराव से भर जाती हैं, वहीं धूप निकलते ही धूल के गुबार से दुकानदार, स्थानीय निवासी और राहगीर बुरी तरह परेशान होते हैं, जिससे सड़कों पर चलना एक चुनौती बन गया है। यह स्थिति केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था की कमी और निगरानी तंत्र
की विफलता को उजागर करती है। ग्रामीणसरोकार का कहना है कि विकास केवल नई सड़कें बनाने या करोड़ों रुपये खर्च करने तक सीमित नहीं है; यदि पहली बारिश में ही सड़कें खराब हो जाएं और थोड़ी धूप में धूल से भर जाएं, तो यह स्पष्ट तौर पर योजना, क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर खामियों का संकेत है। जनता यह सवाल उठा रही है कि बार-बार बनने और टूटने वाली सड़कों की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की मंशा पर कोई प्रश्न नहीं है, लेकिन सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना
प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब समय आ गया है कि इस "मॉडल जिले" में हुए निर्माण कार्यों का स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, दोषी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, और नागरिकों को स्थायी, सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। क्योंकि, किसी भी जिले की पहचान सरकारी दावों से नहीं, बल्कि उन सड़कों से होती है जिन पर आम नागरिक प्रतिदिन चलता है। यदि बारिश में कीचड़ और धूप में धूल ही लोगों की नियति बन जाए, तो "मॉडल जिला" का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाता है।
- नंदू पाण्डेय, प्रधान संपादक ग्रामीणसरोकार, ने चंपावत को उत्तराखंड का "मॉडल जिला" बनाने के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद, जिला मुख्यालय की सड़कों की मौजूदा स्थिति इन दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। हल्की बारिश में सड़कें कीचड़ और जलभराव से भर जाती हैं, वहीं धूप निकलते ही धूल के गुबार से दुकानदार, स्थानीय निवासी और राहगीर बुरी तरह परेशान होते हैं, जिससे सड़कों पर चलना एक चुनौती बन गया है। यह स्थिति केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था की कमी और निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करती है। ग्रामीणसरोकार का कहना है कि विकास केवल नई सड़कें बनाने या करोड़ों रुपये खर्च करने तक सीमित नहीं है; यदि पहली बारिश में ही सड़कें खराब हो जाएं और थोड़ी धूप में धूल से भर जाएं, तो यह स्पष्ट तौर पर योजना, क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर खामियों का संकेत है। जनता यह सवाल उठा रही है कि बार-बार बनने और टूटने वाली सड़कों की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की मंशा पर कोई प्रश्न नहीं है, लेकिन सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब समय आ गया है कि इस "मॉडल जिले" में हुए निर्माण कार्यों का स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, दोषी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, और नागरिकों को स्थायी, सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। क्योंकि, किसी भी जिले की पहचान सरकारी दावों से नहीं, बल्कि उन सड़कों से होती है जिन पर आम नागरिक प्रतिदिन चलता है। यदि बारिश में कीचड़ और धूप में धूल ही लोगों की नियति बन जाए, तो "मॉडल जिला" का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाता है।3
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा चंद्रशेखर घोडके के निर्देशानुसार, जनपद पुलिस द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में, 09.07.2026 को प्रभारी निरीक्षक कोतवाली चौखुटिया अशोक कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कोतवाली क्षेत्र में एक सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस चेकिंग के दौरान, एक कार में अवैध रूप से काली फिल्म लगी हुई पाई गई, जो मोटर वाहन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था। पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए, मौके पर ही वाहन से काली फिल्म को हटवाया और संबंधित वाहन चालक के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की। इस अभियान के दौरान, वाहन चालक को यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया गया तथा उसे वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन, काली फिल्म या किसी अन्य नियम-विरुद्ध बदलाव से बचने की सख्त हिदायत दी गई।1
- राज्य सरकार के "सेवा, सुशासन एवं समर्पण" अभियान के तहत गुरुवार को विकास खंड कोटाबाग के सभागार में "जन जन की सरकार जन के द्वार" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वृहद जन कल्याणकारी शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्र की जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य आमजन तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। शिविर में लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिला, जिसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 16 नवोदित उद्यमियों को कुल 13 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए। साथ ही, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 4 महिलाओं को किट प्रदान की गईं। कुल 580 लोगों ने इस शिविर से सीधा लाभ उठाया, जबकि 170 लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का फायदा मिला। शिविर में उद्योग, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, बाल विकास, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, खाद्य सुरक्षा, राजस्व, पंचायतीराज, वन, श्रम, सेवायोजन, विद्युत, पेयजल सहित कुल 27 विभागों ने अपने स्टॉल लगाए, जहाँ अधिकारियों ने उपस्थित जनता को स्वरोजगार, कृषि यंत्र अनुदान, उद्यान योजनाओं, पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उद्यमियों, स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं एवं महिलाओं को उद्यम स्थापना, बैंक से ऋण, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्धता के संबंध में विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया गया। शिविर में क्षेत्रीय जनता द्वारा सड़क चौड़ीकरण, सड़क किनारे झाड़ी कटान, नाली की सफाई एवं सड़क सुधारीकरण, कृषि भूमि में तारबाड़ लगवाने, भूमि कटाव की रोकथाम, सिंचाई गूलों की मरम्मत आदि से संबंधित कुल 250 शिकायतें एवं मांग पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें से 190 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों को समय सीमा निर्धारित कर निस्तारण के निर्देश दिए गए और खंड विकास अधिकारी को इनकी निगरानी का दायित्व सौंपा गया। शिविर में अपर जिलाधिकारी प्रशासन की न्यायालय में लंबित खाद्य सुरक्षा स्टाम्प पैड के 10 मामलों की भी सुनवाई कर निस्तारण किया गया। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट, कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत और अपर जिलाधिकारी विवेक राय ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और तत्काल समाधान किया। सांसद अजय भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है और इसी उद्देश्य से ऐसे शिविर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को शेष समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और किसानों को पशुओं की बीमारी के लिए 1962 हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी। उन्होंने जल जीवन मिशन से संबंधित शिकायतों पर उपजिलाधिकारी कालाढूंगी को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, साथ ही आयुष्मान कार्ड बनवाने पर जोर दिया। विधायक बंशीधर भगत ने इस तरह के शिविरों से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होने और पारदर्शिता बढ़ने की बात कही। इसके अतिरिक्त, जहरीले सांप के काटने से भैंस की मृत्यु पर मुआवजे की शिकायत पर सांसद ने वन विभाग एवं पशुपालन विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। रामनगर मुख्य रोड से कोटाबाग तक सड़क चौड़ीकरण सहित विभिन्न सड़क मार्गों से झाड़ी कटान एवं नाली, स्कबर सफाई के मामले पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इस अवसर पर नगर निगम हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, शांति मेहरा, दिनेश आर्या, ज्येष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख गीता तिवारी, कनिष्ठ प्रमुख अपूर्वा बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य अरुणव कंबोज, मंडल अध्यक्ष कमलेश पाण्डे, महामंत्री विनोद बधानी सहित उपजिलाधिकारी कालाढूंगी सुधीर कुमार, खंड विकास अधिकारी डॉ. श्वेता, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र पल्लवी गुप्ता, तहसीलदार पूजा शर्मा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम जनता ने शिविर में भाग लिया।1
- उत्तर प्रदेश से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों, संविदाकर्मियों और अन्य पात्र कर्मचारियों के लिए 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, पात्र शिक्षकों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। वहीं, संविदाकर्मियों के लिए ₹60 लाख तक का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस और कई अन्य सुरक्षा लाभ भी घोषित किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इस योजना पर हर साल लगभग ₹450 करोड़ खर्च किए जाएंगे।1
- मौसम विभाग द्वारा जारी 'ऑरेंज अलर्ट' के कारण बागेश्वर जिले में 10 जुलाई को कक्षा एक से बारहवीं तक के सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यह कदम छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।1
- चम्पावत जिले के टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे पर एक बाइक हादसे की खबर सामने आई है। इस दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है।1