राजस्थान के झालावाड़ जिले, विशेषकर रायपुर तहसील में, समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारदान की कमी, ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी खामियां और प्रशासनिक लापरवाही के चलते किसानों की उपज समय पर खरीदी नहीं जा रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि फरवरी में पंजीकरण के बाद मार्च के मध्य तक फसल तैयार हो जाती है, लेकिन सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने के कारण उन्हें अपनी उपज लंबे समय तक संभालकर रखनी पड़ती है। इस दौरान बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने का खतरा बना रहता है। कई खरीद केंद्रों पर किसानों को मैसेज मिलने के बावजूद बारदान की कमी के कारण 10 से 15 दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं, तुलाई होने के बाद भी तकनीकी खामियों के कारण बिल नहीं बन पा रहे हैं, जिसके चलते किसानों को लगातार खरीद केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रायपुर तहसील के ग्राम कड़ोदिया निवासी किसान कैलाश सेन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें 12 मई को गेहूं विक्रय का मैसेज प्राप्त हुआ था, लेकिन बारदान उपलब्ध न होने के कारण उनकी उपज की तुलाई 28 मई को हो पाई। इसके बाद भी तकनीकी कारणों से उनका बिल नहीं बन सका है, और वे समस्या के समाधान के लिए लगातार खरीद केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। कैलाश सेन ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया कि उपज बेचने के बाद भी उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए, सभी खरीद केंद्रों पर पर्याप्त बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ऑनलाइन सिस्टम की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए और किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन किसानों के हित में आगे की रणनीति बनाने को बाध्य होगा।
राजस्थान के झालावाड़ जिले, विशेषकर रायपुर तहसील में, समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारदान की कमी, ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी खामियां और प्रशासनिक लापरवाही के चलते किसानों की उपज समय पर खरीदी नहीं जा रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि फरवरी में पंजीकरण के बाद मार्च के मध्य तक फसल तैयार हो जाती है, लेकिन सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने के कारण उन्हें अपनी उपज लंबे समय तक संभालकर रखनी पड़ती है। इस दौरान बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने का खतरा बना रहता है। कई खरीद केंद्रों पर किसानों को मैसेज मिलने के बावजूद बारदान की कमी के कारण 10 से 15 दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं, तुलाई होने के बाद भी तकनीकी खामियों के कारण बिल नहीं बन पा रहे हैं, जिसके चलते किसानों को लगातार खरीद केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रायपुर तहसील के ग्राम कड़ोदिया निवासी किसान कैलाश सेन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें 12 मई को गेहूं विक्रय का मैसेज प्राप्त हुआ था, लेकिन बारदान उपलब्ध न होने के कारण उनकी उपज की तुलाई 28 मई को हो पाई। इसके बाद भी तकनीकी कारणों से उनका बिल नहीं बन सका है, और वे समस्या के समाधान के लिए लगातार खरीद केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। कैलाश सेन ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया कि उपज बेचने के बाद भी उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए, सभी खरीद केंद्रों पर पर्याप्त बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ऑनलाइन सिस्टम की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए और किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन किसानों के हित में आगे की रणनीति बनाने को बाध्य होगा।
- भारत विकास परिषद की बकानी शाखा ने भीषण ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए पक्षियों के लिए एक सराहनीय पहल की है। परिषद के तत्वाधान में कुल 20 परिंडे विभिन्न स्थानों पर लगाए गए। इनमें पीपली चौराहा स्थित बालाजी मंदिर, जोशी मोहल्ला स्थित बरड़ा के बालाजी मंदिर, पुराना थाना परिसर और मुक्तेश्वर महादेव जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। इस मौके पर भारत विकास परिषद शाखा बकानी के वरिष्ठ सदस्य महेंद्र भंडारी, संरक्षक गोपाल प्रसाद निगम, अध्यक्ष नवनीत प्रजापति, शांताराम गांधी, सचिव चेतन कुमार कुमुद, कोषाध्यक्ष जितेंद्र कुमार मेहर, पंकज सोनी, शक्ति दान चारण और बबलू प्रजापति सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की पाँच दिवसीय जनसंवाद पदयात्रा अपने तीसरे दिन ग्राम पंचायत घाटोली पहुँची। 28 मई को शुरू हुई यह यात्रा 1 जून को संपन्न होगी, जिसमें मंत्री दिलावर गाँवों में पहुँचकर आमजन से सीधे संवाद कर रहे हैं और विकास कार्यों की घोषणाएँ भी कर रहे हैं। शनिवार शाम तक मंत्री के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्री दिलावर ने अब तक दो दिनों में लगभग 47 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर ली है। पूरी पाँच दिवसीय यात्रा में लगभग 80 किलोमीटर क्षेत्र के गाँवों को पैदल कवर करने की योजना है। घाटोली में आयोजित जनसभा में उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और विभिन्न विकास कार्यों पर चर्चा की। इस दौरान, मंत्री दिलावर ने पहले दिन लगभग 1.50 करोड़ रुपए और दूसरे दिन 2.50 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणाएँ कीं, जिससे कुल दो दिनों में 4 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की जा चुकी है। इसी यात्रा के दौरान, मंत्री मदन दिलावर ने दरा नाल में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान हुए हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया, जिसमें रेलवे के दो इंजीनियर पंकज झा और प्रभात सिंह की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि रेलवे ने अपने दो प्रतिभाशाली अभियंताओं को खो दिया है। मंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि वे दुख की इस घड़ी में परिजनों के साथ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे द्वारा हादसे की जाँच की जा रही है और जाँच में जो भी दोषी पाए जाएँगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।2
- कोटा का बड़ा सराफा स्वर्ण रजत कल उत्थान समिति से जुड़ा हाड़ौती का सबसे बड़ा सराफा बाजार रखरखाव की अनदेखी के कारण जर्जर अवस्था में पहुँच गया है। लगभग 25 से 30 वर्ष पुरानी इस विशाल बिल्डिंग में करीब 400 दुकानें हैं, जिसके समय-समय पर आवश्यक रखरखाव न होने से व्यापारियों में लगातार चिंता बढ़ रही है। बाजार के कई हिस्सों में दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है और छतों में दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे कई स्थानों पर सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। व्यापारियों का आरोप है कि संस्था के चुनाव में निर्वाचित होकर आने वाले पदाधिकारी अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद जिम्मेदारी अगले पदाधिकारियों पर छोड़ देते हैं। इसी के परिणामस्वरूप बिल्डिंग की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस स्थिति को देखते हुए, व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संस्था द्वारा शीघ्र ही भवन की तकनीकी जांच कराकर व्यापक मेंटेनेंस कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि किसी भी संभावित हादसे से बचा जा सके। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संस्थान हाड़ौती क्षेत्र की पहचान माना जाता है, ऐसे में इसकी सुरक्षा और रखरखाव को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक है। व्यापारियों ने प्रशासन और संस्था के पदाधिकारियों से मिलकर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है।1
- आज सुसनेर नगर में महेश्वरी समाज द्वारा एक प्रेरणादायी सुविचार पत्रिका का विमोचन किया गया। यह विमोचन नगर के भीतर ही आयोजित किया गया था।1
- सुसनेर नगर परिषद भवन के सामने गायों को पानी पिलाने के लिए बनाए गए होद की सफाई का कार्य संपन्न कराया गया है।1
- खानपुर नगर में शुक्रवार को समाजसेवी स्वर्गीय पारस कुमार जैन की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके परिजनों और मित्रों ने भीषण गर्मी और तीखी धूप को देखते हुए एक सराहनीय सेवा कार्य का आयोजन किया। मेगा हाईवे स्थित दहीखेड़ा चौराहा बस स्टॉप पर एक विशेष प्याऊ और छाछ-शरबत वितरण केंद्र स्थापित किया गया। इस पहल के तहत, वहाँ से गुजरने वाले राहगीरों, वाहन चालकों और बस यात्रियों को ठंडी नमकीन छाछ तथा तरावट देने वाला नींबू का शरबत वितरित कर राहत पहुंचाई गई। दोपहर तक चले इस पुनीत आयोजन में करीब एक हजार लोगों ने छाछ और शरबत का आनंद लिया और इस परोपकारी कार्य की सराहना की। इस सेवा कार्य को सफल बनाने में जैन समाज के प्रतिनिधियों सहित नगर के कई गणमान्य नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आयोजन में महावीर जैन, नरेंद्र जैन, प्रियंक जैन, आशीष जैन, अतुल जैन और विशेष जैन ने व्यवस्थाएं संभालीं। इनके अतिरिक्त, गौशाला समिति के अध्यक्ष महावीर गौतम, एसीटीओ विमल कुमार जैन, सत्यप्रकाश कटारिया, भारत विकास परिषद के सचिव डॉ. देवी शंकर नागर, शिक्षक गोपाल वर्मा, प्रमोद अग्रवाल, अनिल गौतम, दिनेश सुमन, प्रेमनारायण त्रिगुणायत, मनोज गुर्जर, राजेंद्र कुमार मेहरा, रिंकू शर्मा, राकेश गुर्जर और मुकेश मीणा सहित कई प्रबुद्धजनों ने उपस्थित रहकर राहगीरों को शरबत वितरित किया और अपनी सेवाएं प्रदान कीं।1
- सुसनेर के सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने तंबाकू मुक्त भविष्य का संकल्प लेते हुए एक महत्वपूर्ण शपथ ली है।1
- सुसनेर में आई तेज आंधी के बाद गाडोलिया लोहार की बस्ती से कुछ डरावनी तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से बस्ती के लोगों का दर्द स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है, जो आंधी के कारण उत्पन्न हुई मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।1