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BJP सांसद मुकेश राजपूत द्वारा कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करने के गंभीर आरोप BJP सांसद मुकेश राजपूत जमीन कब्जा प्रकरण उत्तर प्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी कुर्मी है बीजेपी की सहयोगी राजनीतिक पार्टी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्षा अनुप्रिया पटेल कुर्मी है उसके बावजूद BJP सांसद मुकेश राजपूत कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करके बीजेपी सहयोगी प्रतिष्ठित कुर्मी नेताओं की बदनामी कर रहा है

2 hrs ago
user_Rana Sarkar Lodhi
Rana Sarkar Lodhi
फर्रुखाबाद, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

BJP सांसद मुकेश राजपूत द्वारा कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करने के गंभीर आरोप BJP सांसद मुकेश राजपूत जमीन कब्जा प्रकरण उत्तर प्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी कुर्मी है बीजेपी की सहयोगी राजनीतिक पार्टी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्षा अनुप्रिया पटेल कुर्मी है उसके बावजूद BJP सांसद मुकेश राजपूत कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करके बीजेपी सहयोगी प्रतिष्ठित कुर्मी नेताओं की बदनामी कर रहा है

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  • BJP सांसद मुकेश राजपूत द्वारा कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करने के गंभीर आरोप BJP सांसद मुकेश राजपूत जमीन कब्जा प्रकरण उत्तर प्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी कुर्मी है बीजेपी की सहयोगी राजनीतिक पार्टी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्षा अनुप्रिया पटेल कुर्मी है उसके बावजूद BJP सांसद मुकेश राजपूत कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करके बीजेपी सहयोगी प्रतिष्ठित कुर्मी नेताओं की बदनामी कर रहा है
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    BJP सांसद मुकेश राजपूत द्वारा कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार की जमीन कब्जा करने के गंभीर आरोप 
BJP सांसद मुकेश राजपूत जमीन कब्जा प्रकरण 
उत्तर प्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी  कुर्मी है बीजेपी की सहयोगी राजनीतिक पार्टी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्षा अनुप्रिया पटेल कुर्मी है उसके बावजूद BJP सांसद मुकेश राजपूत कुर्मी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति पवन कटियार  की जमीन कब्जा करके बीजेपी सहयोगी प्रतिष्ठित कुर्मी नेताओं की बदनामी कर रहा है
    user_Rana Sarkar Lodhi
    Rana Sarkar Lodhi
    फर्रुखाबाद, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के संतोषपुर गांव में सोमवार सुबह खेत में काम करते समय एक किसान को सांप ने डस लिया
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    फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के संतोषपुर गांव में सोमवार सुबह खेत में काम करते समय एक किसान को सांप ने डस लिया
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Farrukhabad, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश कानपुर की हर छोटी बड़ी खबर आप तक देखते रहिए शुरू एप कानपुर समाचार *पेड़ की छांव तले सजी पोषण पंचायत, कुपोषण के खिलाफ जगी अलख* *डीएम बोले, स्थानीय आहार अपनाएं, महिलाएं निभाएं नेतृत्वकर्ता की भूमिका* कानपुर नगर। संभव अभियान-6 के अंतर्गत शनिवार को विकासखंड सरसौल की ग्राम पंचायत हाथीपुर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में पोषण पंचायत आयोजित की गई। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों एवं उनके अभिभावकों को कुपोषण मुक्त पंचायत के लक्ष्य के साथ संतुलित आहार, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण के प्रति जागरूक किया गया। प्राथमिक विद्यालय हाथीपुर परिसर में पेड़ की छांव तले खुले वातावरण में आयोजित पोषण पंचायत में जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि कुपोषण कोई बीमारी नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी का परिणाम है। इसका सीधा संबंध हमारी जीवनशैली और प्रकृति से है। यदि स्थानीय फल, मोटे अनाज, हरी सब्जियों तथा पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से प्रभावी बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि प्रकृति स्वस्थ होगी तो समाज भी स्वस्थ होगा। जिलाधिकारी ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे पोषण पंचायत से प्राप्त जानकारी का अधिकतम लाभ उठाएं, शासन की पोषण एवं स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ें तथा अपने परिवार और गांव को जागरूक करने में नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएं। प्रत्येक महिला पोषण अभियान की संदेशवाहक बने और कुपोषण मुक्त पंचायत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ हरिदत्त नेमी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण एवं पोषण संबंधी परामर्श अपनाकर एनीमिया एवं कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य विभाग की सभी सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रीति सिन्हा ने बताया कि स्वच्छता, संतुलित आहार एवं सही खानपान की आदतें कुपोषण से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि 1 से 8 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान की महत्ता तथा नवजात शिशुओं के समुचित पोषण के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है।
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    उत्तर प्रदेश कानपुर की हर छोटी बड़ी खबर आप तक देखते रहिए शुरू एप 
कानपुर समाचार 
*पेड़ की छांव तले सजी पोषण पंचायत, कुपोषण के खिलाफ जगी अलख*
*डीएम बोले, स्थानीय आहार अपनाएं, महिलाएं निभाएं नेतृत्वकर्ता की भूमिका*
कानपुर नगर।
संभव अभियान-6 के अंतर्गत शनिवार को विकासखंड सरसौल की ग्राम पंचायत हाथीपुर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में पोषण पंचायत आयोजित की गई। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों एवं उनके अभिभावकों को कुपोषण मुक्त पंचायत के लक्ष्य के साथ संतुलित आहार, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण के प्रति जागरूक किया गया।
प्राथमिक विद्यालय हाथीपुर परिसर में पेड़ की छांव तले खुले वातावरण में आयोजित पोषण पंचायत में जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि कुपोषण कोई बीमारी नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी का परिणाम है। इसका सीधा संबंध हमारी जीवनशैली और प्रकृति से है। यदि स्थानीय फल, मोटे अनाज, हरी सब्जियों तथा पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से प्रभावी बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि प्रकृति स्वस्थ होगी तो समाज भी स्वस्थ होगा। 
जिलाधिकारी ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे पोषण पंचायत से प्राप्त जानकारी का अधिकतम लाभ उठाएं, शासन की पोषण एवं स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ें तथा अपने परिवार और गांव को जागरूक करने में नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएं। प्रत्येक महिला पोषण अभियान की संदेशवाहक बने और कुपोषण मुक्त पंचायत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाए।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ हरिदत्त नेमी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण एवं पोषण संबंधी परामर्श अपनाकर एनीमिया एवं कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य विभाग की सभी सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रीति सिन्हा ने बताया कि स्वच्छता, संतुलित आहार एवं सही खानपान की आदतें कुपोषण से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि 1 से 8 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान की महत्ता तथा नवजात शिशुओं के समुचित पोषण के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है।
    user_Rahul katheriya
    Rahul katheriya
    Samaj Sevak फर्रुखाबाद, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..." "यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गगइयां' का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।" सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।" "अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे? देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..." "यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गंगइया का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।" सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।" "अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे?
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    देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..."

"यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गगइयां' का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।"

सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।"

"अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे?
देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..."
"यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गंगइया का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।"
सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।"
"अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे?
    user_Amit farukhabad indiakhasnews
    Amit farukhabad indiakhasnews
    Reporter फर्रुखाबाद, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • CITY NEWS: नाले में मिला अज्ञात युवक का शव, इलाके में सनसनी
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    CITY NEWS: नाले में मिला अज्ञात युवक का शव, इलाके में सनसनी
    user_CITY NEWS
    CITY NEWS
    Farrukhabad, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
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