ईरान ने यह साबित कर दिया है कि हिम्मत और यकीन के आगे बड़ी से बड़ी सुपरपावर भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाती है। पिछले साल ही अमेरिका और इजरायल को इस बात का अंदाज़ा हो गया था, जब ईरान ने पूरी बहादुरी के साथ जवाबी स्ट्राइक करके दोनों को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका की पूरी दुनिया में जग-हंसाई हुई थी। अपनी इसी 'इंसल्ट' का बदला लेने के लिए अमेरिका-इजरायल लॉबी ने एक पूरा गेम प्लान तैयार किया। सबसे पहले उनकी इंटेलिजेंस एजेंसियों और विदेशी विशेषज्ञों को ईरान की असली ताकत का पता लगाने के काम पर लगाया गया। उनके प्लान A के तहत ईरान में आंतरिक प्रदर्शन करवाकर 'रेजिम चेंज' करने की कोशिश की गई, लेकिन यह योजना विफल हो गई। इसके बाद प्लान B बनाया गया, जिसमें सर्जिकल स्ट्राइक के ज़रिए ईरान के सुप्रीम लीडर और शीर्ष कमांडरों को निशाना बनाने की बात थी। उन्हें लगा था कि इससे गृहयुद्ध छिड़ जाएगा और उनका काम आसान हो जाएगा; इजरायल के प्रधानमंत्री ने तो खुलेआम कहा था कि वे "6-7 दिन में ईरान का चैप्टर क्लोज कर देंगे"। लेकिन दुनिया ने लाइव देखा कि ईरान ने किस स्तर की बहादुरी और रणनीति के साथ मुकाबला किया। उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाते हुए उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया कि "जो खुद को दुनिया का ठेकेदार समझते थे, वे अपनी सुरक्षा तक नहीं कर पाए।" वैश्विक विशेषज्ञों का विश्लेषण था कि ईरान कुछ हफ्तों का ही मेहमान है, लेकिन ईरान ने उन सभी गणनाओं को गलत साबित कर दिया। कुछ लोगों का कहना है कि ईरान को नुकसान हुआ, जो स्वाभाविक भी है क्योंकि उसके सामने अमेरिका जैसी सैन्य महाशक्ति थी जिसे हर जगह से समर्थन मिलता है। हालांकि, यह नुकसान एकतरफा नहीं था; ईरान ने इजरायल और अमेरिका को भी इतना ज़्यादा नुकसान पहुँचाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। आखिरकार, अमेरिका को यह समझ आ गया कि जिसे वे "छोटी मछली" समझकर जाल फेंक रहे थे, वह तो मगरमच्छ निकला। अमेरिका-इजरायल को यह भी एहसास हुआ कि जंग जितनी लंबी खिंचेगी, इजरायल उतना ही अधिक तबाह होगा। इसी वजह से अमेरिका अचानक "सभ्यता खत्म हो जाएगी" जैसी बातें करने लगा और अंततः, सीज़फायर के लिए खुद झुकना पड़ा। यह जंग साबित कर गई कि अगर हौसला हो, तो अकेला मुल्क भी सुपरपावर पर भारी पड़ता है। इस संदर्भ में यह भी कहा गया कि अगर हमारा देश (हिंदुस्तान) भी 'मर्द की तरह' चाहे तो पूरी दुनिया हम हिंदुस्तानियों के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगी। लेकिन 'हमारा फेंकू चाँद' हमारे देश को ट्रम्प के कहने के हिसाब से चलाता है, वह वेनेजुएला से 45 दिन का सफर तय करके कच्चा तेल मंगवाता है, जबकि ईरान से तेल लेने में 'उसकी फटती है', जो सिर्फ 5 दिन में आता है और बहुत सस्ता भी होता है।
ईरान ने यह साबित कर दिया है कि हिम्मत और यकीन के आगे बड़ी से बड़ी सुपरपावर भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाती है। पिछले साल ही अमेरिका और इजरायल को इस बात का अंदाज़ा हो गया था, जब ईरान ने पूरी बहादुरी के साथ जवाबी स्ट्राइक करके दोनों को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका की पूरी दुनिया में जग-हंसाई हुई थी। अपनी इसी 'इंसल्ट' का बदला लेने के लिए अमेरिका-इजरायल लॉबी ने एक पूरा गेम प्लान तैयार किया। सबसे पहले उनकी इंटेलिजेंस एजेंसियों और विदेशी विशेषज्ञों को ईरान की असली ताकत का पता लगाने के काम पर लगाया गया। उनके प्लान A के तहत ईरान में आंतरिक प्रदर्शन करवाकर 'रेजिम चेंज' करने की कोशिश की गई, लेकिन यह योजना विफल हो गई। इसके बाद प्लान B बनाया गया, जिसमें सर्जिकल स्ट्राइक के ज़रिए ईरान के सुप्रीम लीडर और शीर्ष कमांडरों को निशाना बनाने की बात थी। उन्हें लगा था कि इससे गृहयुद्ध छिड़ जाएगा और उनका काम आसान हो जाएगा; इजरायल के प्रधानमंत्री ने तो खुलेआम कहा था कि वे "6-7 दिन में ईरान का चैप्टर क्लोज कर देंगे"। लेकिन दुनिया ने लाइव देखा कि ईरान ने किस स्तर की बहादुरी और रणनीति के साथ मुकाबला किया। उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाते हुए उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया कि "जो खुद को दुनिया का ठेकेदार समझते थे, वे अपनी सुरक्षा तक नहीं कर पाए।" वैश्विक विशेषज्ञों का विश्लेषण था कि ईरान कुछ हफ्तों का ही मेहमान है, लेकिन ईरान ने उन सभी गणनाओं को गलत साबित कर दिया। कुछ लोगों का कहना है कि ईरान को नुकसान हुआ, जो स्वाभाविक भी है क्योंकि उसके सामने अमेरिका जैसी सैन्य महाशक्ति थी जिसे हर जगह से समर्थन मिलता है। हालांकि, यह नुकसान एकतरफा नहीं था; ईरान ने इजरायल और अमेरिका को भी इतना ज़्यादा नुकसान पहुँचाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। आखिरकार, अमेरिका को यह समझ आ गया कि जिसे वे "छोटी मछली" समझकर जाल फेंक रहे थे, वह तो मगरमच्छ निकला। अमेरिका-इजरायल को यह भी एहसास हुआ कि जंग जितनी लंबी खिंचेगी, इजरायल उतना ही अधिक तबाह होगा। इसी वजह से अमेरिका अचानक "सभ्यता खत्म हो जाएगी" जैसी बातें करने लगा और अंततः, सीज़फायर के लिए खुद झुकना पड़ा। यह जंग साबित कर गई कि अगर हौसला हो, तो अकेला मुल्क भी सुपरपावर पर भारी पड़ता है। इस संदर्भ में यह भी कहा गया कि अगर हमारा देश (हिंदुस्तान) भी 'मर्द की तरह' चाहे तो पूरी दुनिया हम हिंदुस्तानियों के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगी। लेकिन 'हमारा फेंकू चाँद' हमारे देश को ट्रम्प के कहने के हिसाब से चलाता है, वह वेनेजुएला से 45 दिन का सफर तय करके कच्चा तेल मंगवाता है, जबकि ईरान से तेल लेने में 'उसकी फटती है', जो सिर्फ 5 दिन में आता है और बहुत सस्ता भी होता है।
- सीतापुर जिले में एक ग्रामीण तालाब की घोर उपेक्षा की जा रही है, जिसके कारण चिलचिलाती गर्मी में छोटे गायों और कुत्तों जैसे अनेक जानवर पानी के लिए तरस रहे हैं। बताया गया है कि सरकार द्वारा इस तालाब के लिए आवंटित धन का गबन किया जा रहा है और जानवरों के लिए पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है।2
- सीतापुर जिले की बिसेन्दा ग्राम पंचायत के सेमरपुरवा गांव का हाल यह है कि "बाबा की सरकार" में अधिकारी मौज काट रहे हैं। वहां "हर घर जल जीवन मिशन" योजना केवल कागजों पर ही सिमटी हुई है।1
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल, आरोग्यं हॉस्पिटल, में एक प्रसूता की मौत के मामले ने मानवता और डॉक्टरी पेशे को शर्मसार किया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अस्पताल के संचालकों व डॉक्टरों की भयानक लापरवाही उजागर हुई है, जिसमें पैसों के लालच में कम हीमोग्लोबिन के बावजूद महिला का ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, खैराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम धरैचा की सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 26 मई को परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं सक्रिय एक आशा बहू ने परिजनों को बरगलाकर शहर के निजी आरोग्यं हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति और खून की कमी को छिपाते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला ले लिया। ऑपरेशन के बाद सुमन ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने सुमन को आनन-फानन में लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुमन को वेंटिलेटर हटाकर वापस सीतापुर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित परिजनों ने 29 मई की शाम आरोग्यं हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर जोरदार हंगामा किया, आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए जबरन ऑपरेशन किया और उनकी बहू को मौत के मुंह में धकेल दिया। प्रसूता सुमन देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण 'ब्लड पॉइजनिंग' (सेप्टीसीमिया) पाया गया, जो सीधे तौर पर ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या गलत इलाज की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस चालक ने भी चौंकाने वाला बयान दिया कि लखनऊ से वापस लाते समय रास्ते में परिजनों ने दो बार मरीज का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया था, जिससे उसकी हालत और नाजुक हो गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सीतापुर अब आरोग्यं अस्पताल के संचालकों और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अस्पताल को सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन, सीतापुर ने स्पष्ट किया है कि प्रसूता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पताल और डॉक्टरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।1
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- सीतापुर जिले में मिश्रिख से सांसद अशोक रावत ने प्रधान मंत्री आवास योजना 2.0 को लेकर जिला अधिकारी डॉक्टर राजा गणपत यार सीतापुर को एक प्रार्थना पत्र लिखा है। इस पत्र में सांसद रावत ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि वे मामले की जांच करवाकर नगर पालिका परिषद में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।1
- सीतापुर जिले के महमूदाबाद विकास खंड की ग्राम पंचायत सरैया चालाकापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां आग पीड़ित परिवारों ने ग्राम पंचायत अधिकारी पर सीधा आरोप लगाया है कि आवास दिलाने के नाम पर उनसे 20-20 हजार रुपये की मांग की जा रही है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि रुपये न देने पर उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया गया कि "DM साहब धर्मात्मा हैं तो वहीं दे दें।" यह बयान मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों को और भी गंभीर बना रहा है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने जिलाधिकारी सीतापुर को शपथ पत्र के साथ एक शिकायत सौंपी है। उन्होंने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और इस कथित भ्रष्टाचार में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।1
- सीतापुर जनपद के रामपुरकला थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता का शव घर के अंदर फंदे से लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार, महिला की शादी को अभी महज 25 दिन ही हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के मायके पक्ष ने उसके पति राज समेत ससुराल के अन्य लोगों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही नवविवाहिता से अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था। मायके पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि परिवार में शादी की खुशियों की जगह मातम छा गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की खबर फैलते ही गांव में भारी भीड़ जुट गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता से जांच करने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, और प्रारंभिक जांच में दहेज उत्पीड़न तथा संदिग्ध मृत्यु से जुड़े सभी पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है। स्थानीय लोग भी इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि जांच के बाद तथ्य सामने आने पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।2
- सामने आई एक घटना ने गहरा सदमा पहुंचाया है, जिसमें लोगों के इतना गिर जाने का जिक्र है कि हैवानियत की सारी हदें पार हो गई हैं। यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर यह सब क्या हो रहा है, जहाँ इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले कृत्य किए जा रहे हैं।1