उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल, आरोग्यं हॉस्पिटल, में एक प्रसूता की मौत के मामले ने मानवता और डॉक्टरी पेशे को शर्मसार किया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अस्पताल के संचालकों व डॉक्टरों की भयानक लापरवाही उजागर हुई है, जिसमें पैसों के लालच में कम हीमोग्लोबिन के बावजूद महिला का ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, खैराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम धरैचा की सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 26 मई को परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं सक्रिय एक आशा बहू ने परिजनों को बरगलाकर शहर के निजी आरोग्यं हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति और खून की कमी को छिपाते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला ले लिया। ऑपरेशन के बाद सुमन ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने सुमन को आनन-फानन में लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुमन को वेंटिलेटर हटाकर वापस सीतापुर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित परिजनों ने 29 मई की शाम आरोग्यं हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर जोरदार हंगामा किया, आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए जबरन ऑपरेशन किया और उनकी बहू को मौत के मुंह में धकेल दिया। प्रसूता सुमन देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण 'ब्लड पॉइजनिंग' (सेप्टीसीमिया) पाया गया, जो सीधे तौर पर ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या गलत इलाज की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस चालक ने भी चौंकाने वाला बयान दिया कि लखनऊ से वापस लाते समय रास्ते में परिजनों ने दो बार मरीज का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया था, जिससे उसकी हालत और नाजुक हो गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सीतापुर अब आरोग्यं अस्पताल के संचालकों और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अस्पताल को सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन, सीतापुर ने स्पष्ट किया है कि प्रसूता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पताल और डॉक्टरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल, आरोग्यं हॉस्पिटल, में एक प्रसूता की मौत के मामले ने मानवता और डॉक्टरी पेशे को शर्मसार किया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अस्पताल के संचालकों व डॉक्टरों की भयानक लापरवाही उजागर हुई है, जिसमें पैसों के लालच में कम हीमोग्लोबिन के बावजूद महिला का ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, खैराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम धरैचा की सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 26 मई को परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं सक्रिय एक आशा बहू ने परिजनों को बरगलाकर शहर के निजी आरोग्यं हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति और खून की कमी को छिपाते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला ले लिया। ऑपरेशन के बाद सुमन ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने सुमन को आनन-फानन में लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुमन को वेंटिलेटर हटाकर वापस सीतापुर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित परिजनों ने 29 मई की शाम आरोग्यं हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर जोरदार हंगामा किया, आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए जबरन ऑपरेशन किया और उनकी बहू को मौत के मुंह में धकेल दिया। प्रसूता सुमन देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण 'ब्लड पॉइजनिंग' (सेप्टीसीमिया) पाया गया, जो सीधे तौर पर ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या गलत इलाज की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस चालक ने भी चौंकाने वाला बयान दिया कि लखनऊ से वापस लाते समय रास्ते में परिजनों ने दो बार मरीज का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया था, जिससे उसकी हालत और नाजुक हो गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सीतापुर अब आरोग्यं अस्पताल के संचालकों और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अस्पताल को सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन, सीतापुर ने स्पष्ट किया है कि प्रसूता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पताल और डॉक्टरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- यह पोस्ट एक नए वीडियो की प्रासंगिकता पर सवाल उठाती है, जिसमें पूछा गया है कि यह नया है या नहीं। इसमें बताया गया है कि इमरान हाश्मी की सर्जरी सफलतापूर्वक हो चुकी है, और अयान हाश्मी की भी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई है, इस बात पर बार-बार ज़ोर दिया गया है। पोस्ट में 'गॉड के नए बेटे' जैसे वाक्यांश का भी उल्लेख है, जिसे मज़ेदार या हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त किया गया है। अंत में, पोस्ट पाठक से पुष्टि मांगती है कि बताई गई जानकारी सही है या नहीं।1
- मलिहाबाद क्रॉसिंग पर बन रहे पुल के निर्माण कार्य के कारण सेतु निगम ने अमानीगंज गांव के रास्ते को वैकल्पिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया है। हालांकि, यह व्यवस्था अब स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए एक नई समस्या बन गई है, जिससे वे लगातार परेशानी झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अमानीगंज गांव में कई लोग अपनी कार, मोटरसाइकिल और अन्य वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं। इसके चलते मार्ग काफी संकरा हो जाता है और दोनों तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को भारी दिक्कतें होती हैं, जिससे दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से मलिहाबाद क्रॉसिंग पर निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तब से इस वैकल्पिक मार्ग पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है, जिससे गांव के अंदर का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सड़क पर अवैध रूप से वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। राहगीरों का कहना है कि थाना मलिहाबाद पुलिस और संबंधित विभागों का इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं है। लोगों ने यह चिंता भी जताई है कि यदि किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य आवश्यक वाहन जाम में फंस जाएं और किसी की जान को खतरा हो, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल इस व्यवस्था में सुधार करने और सड़क पर अवैध रूप से वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दिव्यांग व्यक्ति की जमीन पर जबरन कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि कुछ सहयोगियों की मदद से इस वारदात को अंजाम दिया गया है। पीड़ित दिव्यांग ने इस संबंध में प्रार्थना पत्र लिखा है, लेकिन इसके बावजूद उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।1
- मछरेहटा क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था से परेशान किसानों का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आ गया। सैकड़ों की संख्या में किसान मछरेहटा पावर हाउस पहुंच गए और उपखंड अधिकारी (विद्युत) के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। नाराज किसानों ने एसडीओ के कार्यालय के कमरे में ताला डाल दिया और उन्हें बाहर खड़ंजे पर बैठकर अपनी समस्याएं सुनाने को मजबूर कर दिया। किसानों का आरोप है कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे उनकी फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप फसलें सूखने की कगार पर हैं और विभागीय अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल सुचारु बिजली आपूर्ति की मांग की। जानकारी के लिए जब उपखंड अधिकारी (विद्युत) से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र में किसानों के इस आक्रोश को देखते हुए स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।1
- सोशल मीडिया पर बिहार से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक 'पढ़ी-लिखी पत्नी के भाग जाने' की कहानी बताई जा रही है। यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदल गया है। तेज आंधी, बादल और हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, हाल ही में हुई बारिश और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजधानी में तापमान कई डिग्री कम हो गया है, और आने वाले दिनों में भी मौसम के अपेक्षाकृत सुहावना बने रहने की संभावना है। मौसम में आए इस बदलाव का सकारात्मक असर कृषि और बागवानी पर भी दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आम, लीची और अन्य फलदार फसलों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, जिससे उनके फलों की गुणवत्ता और बढ़वार में सुधार की उम्मीद है। कृषि मौसम सलाह में भी इस बदलते मौसम को फलों की फसल के लिए लाभकारी बताया गया है। हालांकि, मौसम विभाग ने लोगों को तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। यह चेतावनी इसलिए जारी की गई है क्योंकि हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में आंधी-तूफान के कारण नुकसान की कई घटनाएं सामने आई हैं।1
- जनपद सीतापुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के मुख्य प्रवेश द्वार से अवैध कब्जों को बुलडोज़र चलाकर हटा दिया गया है। इस कार्रवाई से गेट के आसपास लगे खोखे, ठेले और पटरी दुकानें हटा दी गईं, जिससे लंबे समय से व्याप्त अव्यवस्था समाप्त हो सकी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सीएचसी गेट के सामने किए गए अतिक्रमण के कारण एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन में लगातार बाधा आ रही थी, साथ ही मरीजों और तीमारदारों को भी अस्पताल पहुंचने में काफी परेशानी होती थी। इन शिकायतों के बाद तहसील प्रशासन और नगर पालिका की एक संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया था। अतिक्रमणकारियों को दो दिन पहले ही स्वयं कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बुलडोज़र की मदद से इन अवैध निर्माणों और अस्थायी दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान राजस्व विभाग, नगर पालिका और पुलिस बल की टीमें मौके पर मौजूद रहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक मार्गों, सरकारी भूमि और अस्पताल परिसरों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि रास्ता साफ होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी और एम्बुलेंस सेवाओं का संचालन अब अधिक सुगमता से हो पाएगा। प्रशासन ने आम जनता से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न करने और सार्वजनिक सुविधाओं को बाधित न करने की अपील भी की है।1
- सीतापुर के आरोग्यं हॉस्पिटल में एक महिला की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित और बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।1
- लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक हादसे ने पुलिसिया व्यवस्था के उस चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है, जिसे देखकर कानून के रखवालों पर से भरोसा उठ जाए। यह मामला काकोरी थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर आकाश कुशवाहा और उनकी पत्नी से जुड़ा है, और आरोपों के मुताबिक, खाकी का रवैया एकदम 'वीआईपी मोड' में आ गया है, जहाँ पुलिस लिखा-पढ़ी के खेल में 'मास्टर डिग्री' हासिल कर रही है। तथ्यों और आरोपों के अनुसार, दिनांक 29.05.2026 को दोपहर लगभग 2:30 से 4:00 बजे के बीच, सब-इंस्पेक्टर आकाश कुशवाहा अपनी पत्नी को Creta कार (UP 12 CE 6277) चलाना सिखा रहे थे। अमेठिया सलेमपुर, अंधे की चौकी, हरदोई रोड के पास उनकी कातिलाना रफ्तार वाली गाड़ी ने एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में मोहम्मद साहिल (लगभग 28 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। साहिल, जो अमेठिया सलेमपुर, दुबग्गा, लखनऊ का निवासी था, अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और अपने पीछे चार बहनें तथा कैंसर से पीड़ित एक बीमार पिता छोड़ गया है। मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे उनके दोस्त मो. महताब अली भी गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। हादसा होते ही दरोगा जी का 'कानूनी दिमाग' दौड़ पड़ा और उन्होंने कथित तौर पर मामले को रफा-दफा करने के लिए गाड़ी को पेड़ से लड़ा दिया, ताकि यह दिखाया जा सके कि एक्सीडेंट मोटरसाइकिल के पेड़ से टकराने से हुआ था। इसे 'ऑन-स्पॉट एविडेंस मैनेजमेंट' का कमाल बताया गया है। हालांकि, वहां मौजूद जनता मूर्ख नहीं थी। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत गाड़ी की चालक महिला और दरोगा जी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। लोगों को उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा, लेकिन स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि थाने में अपराधियों को एयर कंडीशनर वाले कमरे में बैठाकर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दिया जा रहा है, जबकि इंसाफ की गुहार लगाने आए पीड़ित पक्ष को थाने से भगाया जा रहा है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को 'सबसे बड़ा मजाक' करार दिया गया है, क्योंकि जनता चिल्ला-चिल्ला कर बता रही है कि गाड़ी एक महिला चालक चला रही थी और दरोगा जी बगल में बैठे थे, प्रार्थना-पत्र में भी यही स्पष्ट लिखा है, फिर भी सरकारी रिपोर्ट में वाहन नंबर UP 12 CE 6277 का चालक 'अज्ञात' दर्ज है। उसके रिश्तेदार का नाम और पता भी 'अज्ञात' लिखा गया है। यह शिकायत प्रार्थी अज्जे खान पुत्र इरशाद खान द्वारा की गई है। पूरे शहर को पता है कि गाड़ी किसकी है और कौन चला रहा था, लेकिन दुबग्गा पुलिस के लिए सब 'अज्ञात' है। पीड़ित परिवार पर अब कथित तौर पर समझौते और पैसों का दबाव बनाया जा रहा है, जिसमें एक गरीब की जिंदगी का सौदा करने का प्रयास किया जा रहा है। यह घटना इस देश में दोहरे कानून पर सवाल उठाती है – एक आम जनता और गरीबों के लिए, और दूसरा खाकी वर्दी वाले अमीरों और रसूखदारों के लिए, जिन्हें सड़क पर किसी की जान लेने के बाद भी थाने में 'एसी की हवा' और 'अज्ञात' होने का सुरक्षा कवच मिलता है। बड़े अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बावजूद, दुबग्गा की जनता बखूबी समझ रही है कि जब मामले की नींव ही 'अज्ञात' के झूठ पर रखी गई हो, तो इंसाफ की इमारत कैसी होगी।1