एक तीखे बयान में दावा किया गया है कि 1971 से 2005 तक, तथाकथित 'दहशतगर्दों' ने तीन करोड़ से अधिक लोगों की हत्या की है। इन्हें 'फसादी और दहशतगर्द' करार देते हुए, अल्लाह से दुआ की गई है कि वह सभी दहशतगर्दों को तबाह व बर्बाद करे। बयान में वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि बड़े बदमाश छोटे बदमाशों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें अमेरिका को 'आलमी बदमाश' (वैश्विक बदमाश) और देशों के शासकों को 'इलाकाई बदमाश' (क्षेत्रीय बदमाश) बताया गया है। ये इलाकाई बदमाश जनता की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें मूर्ख बनाते हैं, जबकि वास्तव में सभी एक साम्राज्यवादी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को मारने के लिए मुसलमानों की आवाज़ का ही इस्तेमाल किया जाता है, और पूरी दुनिया में अपनी मनमर्ज़ी की सरकारें बिठाकर युद्ध छेड़ा जाता है। इस 'जंग' को कायरों की लड़ाई बताया गया है और खुले मैदान में सामने आकर लड़ने की चुनौती दी गई है। ऐसी लड़ाई पर لعنت भेजी गई है जो सामने नहीं आती और पीछे से वार करती है, और कहा गया है कि इस पर फख्र करना शर्म की बात है। एक ज़हीन व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि अंग्रेज़ बेग़ैरत हैं, और ऐसे लोगों पर सवाल उठाया गया है जिनके माता-पिता का पता नहीं। बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मुसलमानों को एक लीडर की ज़रूरत है, और अगर उन्हें एक लीडर मिल जाए तो असल बहादुरी का पता चलेगा। बयान के अंत में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि जब हत्यारे ऐसी बातें करते हैं और सुनने वाले तथा देखने वाले कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, तो इसका अर्थ है कि शैतान अपना काम पूरी लगन और सच्चाई से कर रहा है और बाकी सभी राष्ट्र 'मुर्दा' हैं। एक बार फिर 1971 से 2005 तक हुई हत्याओं का उल्लेख करते हुए सभी दहशतगर्दों के विनाश की दुआ दोहराई गई है।
एक तीखे बयान में दावा किया गया है कि 1971 से 2005 तक, तथाकथित 'दहशतगर्दों' ने तीन करोड़ से अधिक लोगों की हत्या की है। इन्हें 'फसादी और दहशतगर्द' करार देते हुए, अल्लाह से दुआ की गई है कि वह सभी दहशतगर्दों को तबाह व बर्बाद करे। बयान में वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि बड़े बदमाश छोटे बदमाशों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें अमेरिका को 'आलमी बदमाश' (वैश्विक बदमाश) और देशों के शासकों को 'इलाकाई बदमाश' (क्षेत्रीय बदमाश) बताया गया है। ये इलाकाई बदमाश जनता की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें मूर्ख बनाते हैं, जबकि वास्तव में सभी एक साम्राज्यवादी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को मारने के लिए मुसलमानों की आवाज़ का ही इस्तेमाल किया जाता है, और पूरी दुनिया में अपनी मनमर्ज़ी की सरकारें बिठाकर युद्ध छेड़ा जाता है। इस 'जंग' को कायरों की लड़ाई बताया गया है और खुले मैदान में सामने आकर लड़ने की चुनौती दी गई है। ऐसी लड़ाई पर لعنت भेजी गई है जो सामने नहीं आती और पीछे से वार करती है, और कहा गया है कि इस पर फख्र करना शर्म की बात है। एक ज़हीन व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि अंग्रेज़ बेग़ैरत हैं, और ऐसे लोगों पर सवाल उठाया गया है जिनके माता-पिता का पता नहीं। बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मुसलमानों को एक लीडर की ज़रूरत है, और अगर उन्हें एक लीडर मिल जाए तो असल बहादुरी का पता चलेगा। बयान के अंत में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि जब हत्यारे ऐसी बातें करते हैं और सुनने वाले तथा देखने वाले कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, तो इसका अर्थ है कि शैतान अपना काम पूरी लगन और सच्चाई से कर रहा है और बाकी सभी राष्ट्र 'मुर्दा' हैं। एक बार फिर 1971 से 2005 तक हुई हत्याओं का उल्लेख करते हुए सभी दहशतगर्दों के विनाश की दुआ दोहराई गई है।
- एक तीखे बयान में दावा किया गया है कि 1971 से 2005 तक, तथाकथित 'दहशतगर्दों' ने तीन करोड़ से अधिक लोगों की हत्या की है। इन्हें 'फसादी और दहशतगर्द' करार देते हुए, अल्लाह से दुआ की गई है कि वह सभी दहशतगर्दों को तबाह व बर्बाद करे। बयान में वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि बड़े बदमाश छोटे बदमाशों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें अमेरिका को 'आलमी बदमाश' (वैश्विक बदमाश) और देशों के शासकों को 'इलाकाई बदमाश' (क्षेत्रीय बदमाश) बताया गया है। ये इलाकाई बदमाश जनता की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें मूर्ख बनाते हैं, जबकि वास्तव में सभी एक साम्राज्यवादी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को मारने के लिए मुसलमानों की आवाज़ का ही इस्तेमाल किया जाता है, और पूरी दुनिया में अपनी मनमर्ज़ी की सरकारें बिठाकर युद्ध छेड़ा जाता है। इस 'जंग' को कायरों की लड़ाई बताया गया है और खुले मैदान में सामने आकर लड़ने की चुनौती दी गई है। ऐसी लड़ाई पर لعنت भेजी गई है जो सामने नहीं आती और पीछे से वार करती है, और कहा गया है कि इस पर फख्र करना शर्म की बात है। एक ज़हीन व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि अंग्रेज़ बेग़ैरत हैं, और ऐसे लोगों पर सवाल उठाया गया है जिनके माता-पिता का पता नहीं। बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मुसलमानों को एक लीडर की ज़रूरत है, और अगर उन्हें एक लीडर मिल जाए तो असल बहादुरी का पता चलेगा। बयान के अंत में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि जब हत्यारे ऐसी बातें करते हैं और सुनने वाले तथा देखने वाले कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, तो इसका अर्थ है कि शैतान अपना काम पूरी लगन और सच्चाई से कर रहा है और बाकी सभी राष्ट्र 'मुर्दा' हैं। एक बार फिर 1971 से 2005 तक हुई हत्याओं का उल्लेख करते हुए सभी दहशतगर्दों के विनाश की दुआ दोहराई गई है।1
- यह बात स्पष्ट है कि वर्तमान में सरकार से भी अधिक विरोध मीडिया का झेलना पड़ रहा है, खासकर 'गोदी मीडिया' का। एक घटनाक्रम में, 'गोदी मीडिया' के एक रिपोर्टर और कैमरामैन एक टंकी पर चढ़े हुए थे, तभी एक लड़की ने उनके खिलाफ 'गोदी मीडिया वापस जाओ' के नारे लगाए। इस दौरान दोनों की शक्ल देखने लायक हो गई, जिसे पोस्ट में 'घनघोर बेज्जती' बताया गया है। पोस्ट का कहना है कि 'गोदी मीडिया' के कर्म ही ऐसे हो रखे हैं कि जनता उन्हें सम्मान नहीं दे रही है।1
- जंतर मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने के साथ-साथ इसमें जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों पर माहौल भटकाने और नफरत फैलाने की कोशिश करने के आरोप भी लगे, लेकिन आंदोलन अपने मूल मुद्दों पर ही केंद्रित रहा। इस आंदोलन में 'गोदी मीडिया' के 'आविष्कार' और "गोदी मीडिया हाय हाय" जैसे नारे भी गूँजे, जो मीडिया के प्रति तीखी आलोचना को दर्शाते हैं। पोस्ट में पाठकों से यह सवाल भी किया गया है कि क्या देश के युवाओं की आवाज अब पहले से ज्यादा मजबूत हो रही है।1
- मुरादाबाद में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने ढेला नदी के किनारे वृक्षारोपण किया।1
- रामपुर जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बिना लाइसेंस संचालित पैकिंग यूनिट पर बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान, यूनिट से 17 क्विंटल से अधिक चाय पत्ती जब्त की गई। विभाग द्वारा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।1
- 26वें संकीर्तन महोत्सव के उपलक्ष्य में भव्य नगर भ्रमण महोत्सव को बहुत ही धूमधाम से मनाया गया।2
- मसवासी क्षेत्र में हरी मिर्च व्यापारियों की कथित मनमानी और किसानों के शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पदाधिकारियों और किसानों ने 'संपूर्ण समाधान दिवस' में जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यापारी किसानों से हरी मिर्च को बेहद कम दामों पर खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सुबह से मंडी में इंतजार करने के बावजूद उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। किसानों और युवा मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। इस दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। 'संपूर्ण समाधान दिवस' में उपस्थित अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- अपनी लापता बेटी की तलाश में मुजफ्फरनगर अदालत पहुँचे एक बीमार बुजुर्ग पिता सलीम को भीड़ ने सरेआम जेबकतरा समझकर बुरी तरह पीटा और अपमानित किया। उन्हें खबर मिली थी कि उनकी बेटी अदालत में शादी करने आ सकती है, इसी उम्मीद के सहारे वे दर-दर भटकते हुए मुजफ्फरनगर तक जा पहुँचे थे। दुर्भाग्यवश, वहाँ उन्हें अपनी बेटी की एक झलक तक नसीब नहीं हुई, बल्कि लोगों ने बिना सच जाने उन्हें घेर लिया, मारपीट की और बेइज़्ज़ती का बोझ उनके सिर पर डाल दिया। बीमार और बेबस पिता बार-बार गिड़गिड़ाते रहे कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है, लेकिन निर्दयी लोगों ने एक पिता की बेबसी का मजाक उड़ाया। यह घटना इंसानियत को शर्मसार करती है, क्योंकि एक पिता के लिए जहाँ अपनी औलाद से बिछड़ने का दर्द ही कम नहीं होता, वहीं उस पर झूठा इल्ज़ाम लगना और अपमान सहना उसकी पीड़ा को और भी गहरा कर देता है। कुछ ज़ख्म ऐसे होते हैं जो शरीर पर नहीं, सीधे दिल और आत्मा पर लगते हैं, जिनका दर्द उम्रभर साथ रहता है। ऐसे अमानवीय व्यवहार के लिए न्याय की माँग की जा रही है।1