सागर जिले के खिमलासा और बीना में हाल ही में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई अत्यंत दुखद दुर्घटना ने पूरे जैन समाज को गहरे सदमे और पीड़ा में डाल दिया है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस घटना के विरोध में, सकल दिगंबर जैन समाज ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। जैन समाज ने इस घटना को केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से स्पष्ट इनकार किया है, और उपलब्ध तथ्यों, वीडियो क्लिप्स तथा परिस्थितियों के आधार पर इस पर गहरी आशंका व्यक्त की है। समाज का तर्क है कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे और अहिंसक होकर पैदल विहार करते हुए शांति और करुणा का संदेश फैलाते हैं, ऐसे में उनके साथ लगातार हो रही दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सकल दिगंबर जैन समाज ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें मजबूती से रखी हैं। पहली मांग यह है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच SIT (विशेष जाँच दल) या न्यायिक आयोग से कराई जाए, जिसमें घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाएं तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। समाज ने यह भी कहा है कि यदि जाँच में यह किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी प्रमुख मांग विहार करने वाले संतों की सुरक्षा के लिए 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' तत्काल लागू करने की है, जिसमें विहार मार्गों पर बेहतर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और आवश्यक चेतावनी संकेत शामिल हों, ताकि हाइवे और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जैन समाज ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेगा और संतों की सुरक्षा के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
सागर जिले के खिमलासा और बीना में हाल ही में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई अत्यंत दुखद दुर्घटना ने पूरे जैन समाज को गहरे सदमे और पीड़ा में डाल दिया है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस घटना के विरोध में, सकल दिगंबर जैन समाज ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। जैन समाज ने इस घटना को केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से स्पष्ट इनकार किया है, और उपलब्ध तथ्यों, वीडियो क्लिप्स तथा परिस्थितियों के आधार पर इस पर गहरी आशंका व्यक्त की है। समाज का तर्क है कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे और अहिंसक होकर पैदल विहार करते हुए शांति और करुणा का संदेश फैलाते हैं, ऐसे में उनके साथ लगातार हो रही दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सकल दिगंबर जैन समाज ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें मजबूती से रखी हैं। पहली मांग यह है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच SIT (विशेष जाँच दल) या न्यायिक आयोग से कराई जाए, जिसमें घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाएं तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। समाज ने यह भी कहा है कि यदि जाँच में यह किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी प्रमुख मांग विहार करने वाले संतों की सुरक्षा के लिए 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' तत्काल लागू करने की है, जिसमें विहार मार्गों पर बेहतर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और आवश्यक चेतावनी संकेत शामिल हों, ताकि हाइवे और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जैन समाज ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेगा और संतों की सुरक्षा के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
- खिमलासा में सकल दिगम्बर जैन समाज ने पुलिस थाना खिमलासा को एक ज्ञापन सौंपकर रीवा-सतना में विहार कर रहीं पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच और जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इस ज्ञापन को थाना प्रभारी खिमलासा के साथ-साथ जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और भारत सरकार को भी प्रेषित किया गया है। जैन समाज ने अपने ज्ञापन में बताया कि हाल ही में रीवा शहर में विहार के दौरान पूज्य आर्यिका माताजी का असामयिक निधन हो गया था। समाज का कहना है कि यह घटना केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत नहीं होती, क्योंकि उपलब्ध तथ्यों, वीडियो क्लिपों और परिस्थितियों के आधार पर समाज में गहरी आशंका और चिंता का वातावरण बना हुआ है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है। समाज ने यह भी ध्यान दिलाया कि जैन साधु-संत पूर्णतः निर्ग्रंथ, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या भौतिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करते, बल्कि समाज में शांति, संयम, करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाते हैं। ऐसे संतों के साथ निरंतर बढ़ रही दुर्घटनाएं और हमले अत्यंत चिंताजनक हैं। ज्ञापन में जैन समाज द्वारा प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच शामिल है, जिसके लिए SIT अथवा न्यायिक जांच कराने, घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने, दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने और यदि सुनियोजित कृत्य या षड्यंत्र के तथ्य सामने आएं तो कठोर धाराएं लगाने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त, समाज ने तत्काल 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करने की भी मांग की है, जिसके तहत विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग प्रदान करने, ट्रैफिक नियंत्रण और चेतावनी संकेतक लगाने, तथा हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने की अपेक्षा की गई है।4
- सागर जिले के बीना विकासखंड में हर रविवार आयोजित होने वाला साप्ताहिक जैविक हाट बाजार अब सफलता की नई मिसाल बन गया है। इस बाजार ने पिछले छह महीनों में किसानों और शहरवासियों, दोनों के बीच अपनी खास पहचान स्थापित की है। शुरुआत में जहाँ केवल 12 किसान इस हाट बाजार से जुड़े थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 16 तक पहुँच गई है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह जैविक हाट बाजार हर रविवार सुबह 7 बजे शुरू होता है और शहरवासी इसमें बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर और नींबू जैसी ताजी जैविक सब्जियों के साथ-साथ अंजीर, आम, बेल और पपीता जैसे फल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। खास बात यह है कि किसानों के अधिकांश उत्पाद केवल दो से तीन घंटों के भीतर बिक जाते हैं। जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों का कहना है कि इस पहल से उनकी आय बढ़ी है और लोगों का भरोसा जैविक खेती की ओर बढ़ा है। दूसरी ओर, शहरवासियों को यहाँ ताजी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ हो रहा है। कई लोगों ने यह इच्छा भी जताई है कि ऐसा जैविक बाजार प्रतिदिन लगाया जाए ताकि रोजाना ताजी जैविक सब्जियां उपलब्ध हो सकें। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसानों में धीरे-धीरे जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना शहर के लोग भी इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित हो रही है।1
- मध्य प्रदेश के बीना में एक जैन साध्वी की दुर्घटना को लेकर समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है। इस घटना के बाद, प्रशासन से निष्पक्ष जाँच कराने की तीव्र मांग उठाई जा रही है। समाज द्वारा संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करने की भी पुरजोर अपील की जा रही है।1
- मुंगावली नगर में जैन समाज पंचायत के तत्वावधान में सर्व समाज के लोगों ने राम मंच से लेकर पुराने थाने तक एक मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस रीवा में हुई दुखद घटना के विरोध में था, जहां विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक समाधि निधन हो गया था। समाज ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिप के आधार पर, जिसमें एक कार चालक स्पष्ट रूप से टक्कर मारकर भागता हुआ दिख रहा है, यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है। इस घटना से पूरे जैन समाज सहित सभी समुदायों में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है, और निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। पुराने थाने में अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में साधु सुरक्षा नियम सख्त करने और रीवा घटना की एसआईटी या पूर्व जजों की टीम से जांच कराने की मांग सहित पांच प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, "संत सुरक्षा प्रोटोकॉल" लागू करने और "राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति" बनाए जाने की मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही, जैन समाज ने प्रशासन और समाज के बीच "संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ" गठित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने की भी अपील की है, यह कहते हुए कि पूर्णतः अहिंसक और पैदल विहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ज्ञापन के बाद, दिवंगत आर्यिका 105श्री श्रुतमति माता जी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी को समस्त जैन समाज के साथ अन्य सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी। इस दौरान दिगम्बर जैन महिला महासमिति और जिन शासन एकता मंच की महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने संत समाज को भारतीय संस्कृति और आदर्श परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। महिलाओं ने इस दुखद घटना पर पूरे देश के श्रद्धालुओं को हुई गहरी पीड़ा का उल्लेख करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की।2
- विदिशा पुलिस ने महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति अपनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए, दुष्कर्म के एक मामले में दोनों आरोपियों को मात्र 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया है। कोतवाली पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के बाद, आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जो महिला सुरक्षा के प्रति विदिशा पुलिस की एक संवेदनशील पहल को दर्शाता है। पुलिस अधीक्षक विदिशा रोहित काशवानी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे तथा नगर पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह के मार्गदर्शन में थाना कोतवाली पुलिस ने यह त्वरित कार्रवाई की। वर्ष 2026 में थाना कोतवाली क्षेत्रांतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 328/2026, धारा 64(1), 351(3), 3(5) बीएनएस के तहत आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए, पुलिस ने तत्काल जांच प्रारंभ की। पुलिस टीम ने लगातार दबिश और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों — असलम पुत्र अनीश उर्फ अन्नी कुरैशी (26 वर्ष, निवासी बजरिया विदिशा) और मनोज पुत्र स्वर्गीय शंभू दयाल राठौर (45 वर्ष, निवासी बड़ा बाजार विदिशा) — को विदिशा क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के उपरांत, दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक आनंद राज, उपनिरीक्षक प्रतिभा सिंह, सहायक उप निरीक्षक विनोद शर्मा, प्रधान आरक्षक विजय गुप्ता, महिला प्रधान आरक्षक समा खान, आरक्षक अजय सिकरवार, आरक्षक संदीप जाट, आरक्षक राजू जाट, आरक्षक राघवेंद्र सिकरवार और शिशुपाल सिंह दांगी की सराहनीय भूमिका रही।1
- सागर जिले की उल्दन बांध परियोजना से प्रभावित किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे मुआवजे की मांग को लेकर दो किसान बंडा ब्लॉक के ग्राम किरोला में एक हाईटेंशन टावर पर चढ़ गए। किसानों ने आत्मदाह की चेतावनी दी है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, उल्दन बांध परियोजना में किसानों की जमीन और घर चले गए थे, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। किसानों का आरोप है कि वे लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि शासन और प्रशासन द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस अमला मौके पर पहुंच गया और किसानों को समझाने का प्रयास कर रहा है। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।1
- बण्डा के बरायठा से एक भावुक और यादगार तस्वीर सामने आई है, जहाँ बरसों तक क्षेत्र में सेवा देने वाले थाना प्रभारी मकसूद अली का विदिशा स्थानांतरण होने पर ग्रामीणों ने उन्हें अनोखी विदाई दी। उनकी विदाई को भव्य और यादगार बनाने के लिए पूरे गांव में एक जुलूस निकाला गया, जिसमें थाना प्रभारी को बैड डीजे की धुन पर घोड़े पर बैठाकर 'बरात' की तरह सम्मानपूर्वक विदा किया गया। इस दौरान जगह-जगह ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जिससे माहौल पहले जश्न भरा और फिर भावुक हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि मकसूद अली ने अपने सहज व्यवहार, बेहतर पुलिसिंग और आमजन से आत्मीय जुड़ाव के कारण लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उन्होंने हमेशा ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता का भरोसा भी जीता। ग्रामीणों का कहना है कि थाना प्रभारी ने उनके क्षेत्र को एक परिवार की तरह संभाला, और यही वजह है कि उनकी विदाई किसी अधिकारी की नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य की तरह महसूस हुई, जिससे उनके जाने का बहुत दुख हो रहा है, लेकिन साथ ही गर्व भी है। इस भावुक विदाई समारोह के दौरान कई ग्रामीणों की आँखें नम हो गईं, और वे अपनों की तरह गले लगाकर थाना प्रभारी को विदा करते हुए भावुक नजर आए। ग्रामीणों का स्नेह देखकर मकसूद अली भी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि बरायठा की जनता ने उन्हें जो प्यार और सम्मान दिया है, उसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि वे यहाँ से अधिकारी बनकर नहीं, बल्कि अपने परिवार को छोड़कर जा रहे हैं, और दूरी सिर्फ जगह की होगी, रिश्तों की नहीं।1
- मध्यप्रदेश के रीवा में पूज्य आर्यिका श्रुतमति माता और उपशममति माता को ठोकर मारकर घायल किए जाने, जिससे उनकी असमय समाधि हो गई, के विरोध में बीना के सकल जैन समाज ने एक मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस इटावा दिगंबर जैन मंदिर से शुरू होकर मां जागेश्वरी मार्ग, महावीर चौक, बड़ी बजरिया, स्टेशन रोड होते हुए सर्वोदय चौक तक शांतिपूर्ण ढंग से पहुंचा। यहां राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक पांच सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार अंबरपंथी को सौंपा गया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि विहाररत आर्यिका माताजी के साथ हुई यह दुखद घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका और चिंता का माहौल है, जिसके चलते इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। प्रमुख मांगों में घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, एसआईटी अथवा न्यायिक जांच, घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखना, दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही करना, और यदि सुनियोजित कृत्य या षड्यंत्र के तथ्य मिलें तो कठोर धाराएं लगाना शामिल है। समाज ने 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करने की भी मांग की है, जिसमें विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की भी मांग की गई है, जिसके तहत भारत सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा तथा संवेदनशील मार्गों के लिए विशेष प्रावधान निर्मित किए जाएं। ज्ञापन में कहा गया है कि संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए, क्योंकि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते और न ही वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग करते हैं। प्रशासन और समाज के बीच समन्वय तंत्र बनाने और स्थानीय स्तर पर आपातकालीन संपर्क व्यवस्था विकसित करने की भी बात कही गई है। एडवोकेट अशोक जैन ने कहा कि जैन समाज शांति, अहिंसा और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है, और उनका उद्देश्य तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना तथा तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राकेश जैन ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेगा और त्वरित व प्रभावी कदम उठाएगा।4
- सागर जिले के बीना विकासखंड में हर रविवार को लगने वाला साप्ताहिक जैविक हाट बाजार अपनी स्थापना के छह माह पूरे होने पर सफलता की एक नई मिसाल बन गया है। इस पहल से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं शहरवासियों को ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं। शुरुआत में जहाँ इस हाट बाजार से केवल 12 किसान जुड़े थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 16 हो गई है। हर रविवार सुबह 7 बजे से शुरू होने वाले इस बाजार में भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में शहरवासी पहुँच रहे हैं और मात्र दो से तीन घंटों के भीतर किसानों के अधिकांश उत्पाद बिक जाते हैं। बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर, नींबू जैसी सब्जियां और अंजीर, आम, बेल तथा पपीता जैसे फल भी बेचे जा रहे हैं। जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों ने बताया कि इस पहल से उनकी आय बढ़ी है और जैविक खेती के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। शहरवासियों का कहना है कि उन्हें यहाँ ताजी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हैं। कई शहरवासियों ने इस बाजार को प्रतिदिन लगाने की इच्छा भी व्यक्त की है ताकि उन्हें रोजाना ताजी जैविक सब्जियां मिल सकें। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने पुष्टि की कि किसानों में जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना के लोग इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, स्वस्थ समाज के निर्माण और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।1