मुंगावली नगर में जैन समाज पंचायत के तत्वावधान में सर्व समाज के लोगों ने राम मंच से लेकर पुराने थाने तक एक मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस रीवा में हुई दुखद घटना के विरोध में था, जहां विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक समाधि निधन हो गया था। समाज ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिप के आधार पर, जिसमें एक कार चालक स्पष्ट रूप से टक्कर मारकर भागता हुआ दिख रहा है, यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है। इस घटना से पूरे जैन समाज सहित सभी समुदायों में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है, और निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। पुराने थाने में अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में साधु सुरक्षा नियम सख्त करने और रीवा घटना की एसआईटी या पूर्व जजों की टीम से जांच कराने की मांग सहित पांच प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, "संत सुरक्षा प्रोटोकॉल" लागू करने और "राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति" बनाए जाने की मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही, जैन समाज ने प्रशासन और समाज के बीच "संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ" गठित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने की भी अपील की है, यह कहते हुए कि पूर्णतः अहिंसक और पैदल विहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ज्ञापन के बाद, दिवंगत आर्यिका 105श्री श्रुतमति माता जी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी को समस्त जैन समाज के साथ अन्य सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी। इस दौरान दिगम्बर जैन महिला महासमिति और जिन शासन एकता मंच की महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने संत समाज को भारतीय संस्कृति और आदर्श परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। महिलाओं ने इस दुखद घटना पर पूरे देश के श्रद्धालुओं को हुई गहरी पीड़ा का उल्लेख करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की।
मुंगावली नगर में जैन समाज पंचायत के तत्वावधान में सर्व समाज के लोगों ने राम मंच से लेकर पुराने थाने तक एक मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस रीवा में हुई दुखद घटना के विरोध में था, जहां विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक समाधि निधन हो गया था। समाज ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिप के आधार पर, जिसमें एक कार चालक स्पष्ट रूप से टक्कर मारकर भागता हुआ दिख रहा है, यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है। इस घटना से पूरे जैन समाज सहित सभी समुदायों में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है, और निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। पुराने थाने में अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में साधु सुरक्षा नियम सख्त करने और रीवा घटना की एसआईटी या पूर्व जजों की टीम से जांच कराने की मांग सहित पांच प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल
साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, "संत सुरक्षा प्रोटोकॉल" लागू करने और "राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति" बनाए जाने की मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही, जैन समाज ने प्रशासन और समाज के बीच "संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ" गठित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने की भी अपील की है, यह कहते हुए कि पूर्णतः अहिंसक और पैदल विहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ज्ञापन के बाद, दिवंगत आर्यिका 105श्री श्रुतमति माता जी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी को समस्त जैन समाज के साथ अन्य सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी। इस दौरान दिगम्बर जैन महिला महासमिति और जिन शासन एकता मंच की महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने संत समाज को भारतीय संस्कृति और आदर्श परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। महिलाओं ने इस दुखद घटना पर पूरे देश के श्रद्धालुओं को हुई गहरी पीड़ा का उल्लेख करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की।
- मुंगावली नगर में जैन समाज पंचायत के तत्वावधान में सर्व समाज के लोगों ने राम मंच से लेकर पुराने थाने तक एक मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस रीवा में हुई दुखद घटना के विरोध में था, जहां विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक समाधि निधन हो गया था। समाज ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिप के आधार पर, जिसमें एक कार चालक स्पष्ट रूप से टक्कर मारकर भागता हुआ दिख रहा है, यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है। इस घटना से पूरे जैन समाज सहित सभी समुदायों में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है, और निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। पुराने थाने में अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में साधु सुरक्षा नियम सख्त करने और रीवा घटना की एसआईटी या पूर्व जजों की टीम से जांच कराने की मांग सहित पांच प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, "संत सुरक्षा प्रोटोकॉल" लागू करने और "राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति" बनाए जाने की मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही, जैन समाज ने प्रशासन और समाज के बीच "संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ" गठित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने की भी अपील की है, यह कहते हुए कि पूर्णतः अहिंसक और पैदल विहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ज्ञापन के बाद, दिवंगत आर्यिका 105श्री श्रुतमति माता जी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी को समस्त जैन समाज के साथ अन्य सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी। इस दौरान दिगम्बर जैन महिला महासमिति और जिन शासन एकता मंच की महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने संत समाज को भारतीय संस्कृति और आदर्श परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। महिलाओं ने इस दुखद घटना पर पूरे देश के श्रद्धालुओं को हुई गहरी पीड़ा का उल्लेख करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की।2
- सागर जिले के बंडा विकासखंड के किरोला गांव में सोमवार को तीन किसान हाईटेंशन लाइन के एक टावर पर चढ़ गए, जहाँ वे काफी देर तक बैठे रहे। यह घटना उल्दन बांध परियोजना से उपजे असंतोष का परिणाम है, जिसके तहत किरोला गांव डूब क्षेत्र में आ गया है। शासन द्वारा प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन कुछ लोगों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है, इसी बात से नाराज़ होकर इन युवकों ने यह कदम उठाया। टावर पर चढ़े युवकों का कहना है कि शासन और प्रशासन उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो वे कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और युवकों को नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं। रात करीब आठ बजे तक युवक खंभे से नीचे नहीं उतरे थे और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। टावर पर चढ़े युवकों की पहचान ब्रजेश यादव, रवि अहिरवार और संजय पटेल के रूप में हुई है।4
- बीना विकासखंड में पिछले छह महीनों से निरंतर आयोजित हो रहा साप्ताहिक जैविक हाट बाजार अब सफलता की एक नई मिसाल बन चुका है। इस बाजार ने किसानों और शहरवासियों दोनों के बीच अपनी एक विशेष पहचान स्थापित की है। शुरुआत में इस जैविक हाट बाजार से केवल 12 किसान जुड़े थे, जो अपनी जैविक सब्जियां और कृषि उत्पाद लेकर आते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 16 किसानों तक पहुँच गई है। यह बाजार हर रविवार सुबह 7 बजे से शुरू हो जाता है और गर्मी के मौसम में भी शहरवासी बड़ी उत्सुकता के साथ जैविक सब्जियों की खरीदारी के लिए पहुँचते हैं। बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर, नींबू जैसी ताज़ी जैविक सब्जियों के साथ-साथ अंजीर, आम, बेल और पपीता जैसे फल भी उपलब्ध रहते हैं। एक खास बात यह है कि मात्र दो से तीन घंटों के भीतर किसानों के अधिकांश उत्पाद बिक जाते हैं। जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों का कहना है कि उनकी आय में वृद्धि हुई है और लोगों का भरोसा भी जैविक खेती की ओर बढ़ा है। वहीं, शहरवासियों को इस बाजार से ताजी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुँच रहा है। कई लोगों ने प्रतिदिन ऐसा जैविक बाजार लगने की इच्छा भी व्यक्त की है ताकि उन्हें रोज ताजी जैविक सब्जियां मिल सकें। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसानों में धीरे-धीरे जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना शहर के लोग भी इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह बाजार न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रहा है, बल्कि स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल साबित हो रहा है।4
- सोमवार को बीना में जैन समाज का आक्रोश सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जब सड़क दुर्घटना में जैन साध्वियों की दुखद मृत्यु के विरोध में एक विशाल मौन जुलूस निकाला गया। यह जुलूस सुबह 8 बजे इटावा स्थित जैन मंदिर से शुरू हुआ, जिसमें सफेद वस्त्रों में पुरुष और केसरिया साड़ी पहने महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। जुलूस इटावा से चलकर मां जागेश्वरी मार्ग, महावीर चौक, गांधी चौराहा और कॉलेज तिराहा होते हुए सर्वोदय चौराहा पहुंचा। यहां समाजजनों ने तहसीलदार डॉ. अंबर पंथी को मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। समाजजनों ने दृढ़ता से कहा कि जैन संत निहत्थे और अहिंसक रूप से पैदल विहार करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और समाज दोनों की ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।1
- सागर जिले के बीना विकासखंड में हर रविवार आयोजित होने वाला साप्ताहिक जैविक हाट बाजार अपने छह महीने पूरे कर एक नई सफलता की मिसाल बन गया है। इस पहल के कारण किसानों की आय में वृद्धि हुई है, वहीं शहरवासियों को ताज़ी और रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं, जिससे दोनों वर्गों को सीधा लाभ मिल रहा है। हर रविवार सुबह 7 बजे से शुरू होने वाले इस बाजार में भीषण गर्मी के बावजूद शहरवासी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। शुरुआत में जहां इस हाट बाजार से केवल 12 किसान जुड़े थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 16 हो गई है। बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर और नींबू जैसी ताज़ी जैविक सब्जियों के साथ-साथ अंजीर, आम, बेल और पपीता जैसे जैविक फल भी उपलब्ध कराए जाते हैं। खास बात यह है कि किसानों के अधिकांश उत्पाद केवल दो से तीन घंटों के भीतर ही बिक जाते हैं। जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों का कहना है कि इस पहल से उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है और लोगों का भरोसा भी जैविक खेती की ओर बढ़ा है। दूसरी ओर, शहरवासियों का मानना है कि उन्हें यहां ताज़ी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ हो रहा है। कई लोगों ने इच्छा व्यक्त की है कि ऐसे जैविक बाजार प्रतिदिन लगाए जाएं, ताकि रोजाना ताज़ी जैविक सब्जियां उपलब्ध हो सकें। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसानों में धीरे-धीरे जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना शहर के लोग इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित हो रही है।1
- बीना विधानसभा के ग्राम जगदीशपुरा में लगभग 21 एकड़ कृषि भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर रूप लेने लगा है। शनिवार को किसान जगप्रीत सिंह भोगल और अधिवक्ता हरीश गोलंदाज ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रशासनिक कार्रवाई और जमीन खरीद से जुड़े मामले पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस जगदीशपुरा केस में हुई 14 पेशियों, 90 दिन की अवधि और बेदखली आदेश को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए गए हैं।1
- सागर जिले के खिमलासा और बीना में हाल ही में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई अत्यंत दुखद दुर्घटना ने पूरे जैन समाज को गहरे सदमे और पीड़ा में डाल दिया है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस घटना के विरोध में, सकल दिगंबर जैन समाज ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। जैन समाज ने इस घटना को केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से स्पष्ट इनकार किया है, और उपलब्ध तथ्यों, वीडियो क्लिप्स तथा परिस्थितियों के आधार पर इस पर गहरी आशंका व्यक्त की है। समाज का तर्क है कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे और अहिंसक होकर पैदल विहार करते हुए शांति और करुणा का संदेश फैलाते हैं, ऐसे में उनके साथ लगातार हो रही दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सकल दिगंबर जैन समाज ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें मजबूती से रखी हैं। पहली मांग यह है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच SIT (विशेष जाँच दल) या न्यायिक आयोग से कराई जाए, जिसमें घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाएं तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। समाज ने यह भी कहा है कि यदि जाँच में यह किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी प्रमुख मांग विहार करने वाले संतों की सुरक्षा के लिए 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' तत्काल लागू करने की है, जिसमें विहार मार्गों पर बेहतर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और आवश्यक चेतावनी संकेत शामिल हों, ताकि हाइवे और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जैन समाज ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेगा और संतों की सुरक्षा के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।1
- अशोकनगर जिले की मुंगावली में सोमवार सुबह 9:30 बजे भुजरिया तालाब पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत गंगा दशमी पर्व का आयोजन किया गया। इस दौरान चुनरी अर्पण पूजन, जलाशय परिक्रमा और श्रमदान जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए, जिसमें महिलाओं द्वारा कलश यात्रा भी निकाली गई। यह आयोजन ग्रीष्मकाल में जल संकट की समस्या के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जिसके तहत भुजरिया तालाब का गहरीकरण कार्य नगर में काफी तेजी से चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा ऋतु में जल का संचय सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी इसरार खान, नगर परिषद सीएमओ विनय कुमार भट्ट, अध्यक्ष प्रतिनिधि नरेश ग्वाल, सांसद प्रतिनिधि पुष्पेन्द्र दांगी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष दीपक पालीवाल और जनपद सदस्य विवेक यादव सहित कई प्रमुख व्यक्तियों ने भुजरिया तालाब पर भूमि पूजन किया। इस अवसर पर महिला बाल विकास अधिकारी पुष्पा खेश, पंचायत इंस्पेक्टर बल्देवराम भगत, बीईओ श्यामबिहारी शर्मा, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष मोदी, पार्षद कैलाश विश्वकर्मा, पार्षद प्रतिनिधि जाकिर खान और नगर परिषद के कर्मचारी जैसे नवेद काजी, जितेन्द्र अहिरवार, अभिषेक राजपूत, शैलेष अग्रवाल, अमित पवार आदि भी उपस्थित रहे।4