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मुजफ्फरनगर के भोपा थाना पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से 10 अवैध तमंचे और 15 जिंदा कारतूस (.315 बोर) बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री में सक्रिय थे। मामले में आगे की जांच और पूछताछ जारी है, और मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
Shafeek Rajput Jila sangathan
मुजफ्फरनगर के भोपा थाना पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से 10 अवैध तमंचे और 15 जिंदा कारतूस (.315 बोर) बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री में सक्रिय थे। मामले में आगे की जांच और पूछताछ जारी है, और मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में पुलिस ने तीन ऐसे पढ़े-लिखे युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने हथियारों की तस्करी का एक गिरोह बनाया था। ये युवक मेरठ से अवैध हथियार सस्ते दामों पर खरीदकर आसपास के जिलों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। पकड़े गए आरोपियों में से एक ने आईटीआई की है, दूसरा बीए पास कर एसएससी की तैयारी कर रहा है, जबकि तीसरे ने 12वीं पास की है। पूछताछ में इन हथियार तस्करों ने बेखौफ होकर कहा कि जब तक अवैध हथियारों की मांग रहेगी, वे उनकी आपूर्ति करते रहेंगे क्योंकि इससे उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। भोपा थाना पुलिस ने बुधवार रात संदिग्ध व्यक्ति/वाहन चेकिंग के दौरान ककराला रजवाहे की पुलिया के पास से स्कूटी सवार मेरठ निवासी तीन युवक रोहित, निखिल और विकास भाटी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से दस अवैध तमंचे, पंद्रह जिंदा कारतूस और एक स्कूटी बरामद की है। अधिकारियों के अनुसार, ये आरोपी मेरठ से एक तमंचा ₹5,000 में खरीदकर ₹7,000 में बेचते थे। एसपी ग्रामीण अक्षय संजय महाड़िक ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई वाहन चेकिंग के दौरान ये गिरफ्तारियां हुईं और इन तीनों आरोपियों पर सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इनके फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेजेस की गहनता से जांच की जा रही है तथा इसमें आगे जो भी लोग शामिल होंगे, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। इन आरोपियों का अभी तक कोई आपराधिक इतिहास संज्ञान में नहीं आया है, इनकी उम्र 19 साल और 21 साल है और ये कॉलेज में पढ़ाई भी करते थे। एक अन्य घटनाक्रम में, मुजफ्फरनगर पुलिस की एक मानवीय तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। पुलिस ने बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए 12 मजदूरों और उनके परिजनों के लिए थाना परिसर में एक दावत का आयोजन कर इंसानियत की मिसाल पेश की। यह घटना दो दिन पहले की है, जब तितावी थाना क्षेत्र की एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से इन 12 मजदूरों को बंधन मुक्त कराया गया था। नेपाल, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से अपने परिजनों को लेने पहुंचे परिवारों की वर्षों बाद हुई मुलाकात पर कई आंखें नम हो गईं। इस भावुक पल में मुजफ्फरनगर पुलिस ने न सिर्फ कानून का फर्ज निभाया, बल्कि परिवार का दायित्व भी निभाया। थाना परिसर में महिला पुलिसकर्मियों ने स्वयं रसोई संभाली और कचौरी व स्वादिष्ट पकवान बनाए। क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी स्वयं अपने हाथों से मजदूरों और उनके परिजनों को भोजन परोसते दिखे। कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें वर्षों बाद इतना सम्मान और अपनापन मिला है। उनके लिए यह भोजन सिर्फ खाना नहीं, बल्कि आजादी, सम्मान और नए जीवन का उत्सव था। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुजफ्फरनगर पुलिस का आभार जताते हुए जयकारे लगाए। पुलिस ने उनके रहने, खाने और सुरक्षित घर वापसी तक की पूरी व्यवस्था की है। आलाधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार की तरफ से इन सभी बंधन मुक्त कराए गए मजदूरों को तत्काल ₹30,000 दिए जा रहे हैं। केस की विवेचना पूरी होने पर नाबालिग मजदूरों को ₹2 लाख और अन्य मजदूरों को ₹1 लाख मुआवजे की धनराशि दी जाएगी। सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह ने बताया कि 22 तारीख को तितावी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोगों को बंधुआ मजदूर बनाकर दिन-रात काम लिया जा रहा है, उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं और वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। सूचना पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों, जिलाधिकारी, कमिश्नर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सूचित किया। टीमों का गठन कर एसपीआरए और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां 12 लोगों को बंधुआ मजदूर पाया गया। जांच के बाद दो लोगों, शिवा त्यागी और अंकित बालियान के पिता को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अंकित बालियान अभी फरार है जिसकी तलाश में टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने लोगों से अपील भी की कि किसी अनजान व्यक्ति पर विश्वास न करें और नौकरी से पहले अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें ताकि ऐसे बंधक बनने से बच सकें।4
- मुजफ्फरनगर जनपद में अपराध और अवैध शस्त्र तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान `#ऑपरेशन_अवैध_तमंचा` के तहत भोपा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने अवैध शस्त्रों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से कुल 10 अवैध तमंचे और 15 जिंदा कारतूस .315 बोर बरामद किए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ये आरोपी अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त कर क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके साथ ही, यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद हथियार कहां से लाए गए थे और किन लोगों को इनकी सप्लाई की जानी थी। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान के तहत इस कार्रवाई को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- मुजफ्फरनगर के भोपा थाना पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से 10 अवैध तमंचे और 15 जिंदा कारतूस (.315 बोर) बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री में सक्रिय थे। मामले में आगे की जांच और पूछताछ जारी है, और मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।1
- मुज़फ्फरनगर पुलिस द्वारा 'ऑपरेशन मुक्ति' अभियान के तहत एक फैक्ट्री से बंधक मज़दूरों को छुड़ाए जाने का मामला अब राजनीतिक गलियारों तक पहुँच गया है। इस घटना के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर बेरोजगारी पर सवाल उठाए हैं और सरकार पर निशाना साधा है। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात यह भी है कि मुज़फ्फरनगर पुलिस के प्रयासों से डेढ़ वर्ष से बिछड़े 12 लोग अपने परिवारों से मिल पाए हैं। परिवार से मिलने के बाद उनकी खुशी के आँसू थम नहीं रहे हैं। बंधक रहे इन मज़दूरों के शरीर पर चोट के निशान और उनकी हालत उन पर हुए अत्याचारों की गवाही दे रही है। यह भी कहा गया है कि यदि कुछ दिन और बंधक रहते, तो शायद वे अपने परिवार से मिल पाने की स्थिति में नहीं रहते। बंधक रहे मज़दूरों का परिवार मुज़फ्फरनगर पुलिस का बहुत धन्यवाद कर रहा है और उनके दिल से निकली दुआओं को भी बहुत कारगर बताया गया है।1
- मुजफ्फरनगर में मोहर्रम के अवसर पर निकाले गए मातमी जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिसके परिणामस्वरूप यह जुलूस शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में, पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन के नेतृत्व में, और क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ मिश्रा की निगरानी में शिव चौक सहित संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इस दौरान शिव चौक पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया और हर महत्वपूर्ण बिंदु पर पुलिस बल तैनात रहा। मुजफ्फरनगर पुलिस की सजग निगरानी और बेहतर सुरक्षा प्रबंधन के चलते पूरे क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था पूरी तरह कायम रही। पुलिस प्रशासन ने इस अवसर पर अपनी सतर्कता और सक्रियता का प्रदर्शन किया।1
- मुजफ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र के बिरालसी गांव स्थित एक अंग्रेजी शराब के ठेके पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। घटना के मात्र छह घंटे के भीतर, पुलिस ने एक नामजद आरोपी को बिरालसी चौकी चेक पोस्ट से गिरफ्तार कर लिया। यह मामला 22 जून 2026 का है, जब दूधली निवासी अर्जुन कुमार ने पुलिस को तहरीर दी थी। अर्जुन ने बताया कि वे अपने साथी सोनू पुंडीर के साथ बिरालसी स्थित शराब का ठेका बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान, बिरालसी निवासी प्रवीण उर्फ बिट्टू, सुनील कुमार और संदीप ने ठेका खोलकर शराब देने की मांग की। मना करने पर, आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिसमें अर्जुन के चेहरे पर और सोनू के सिर में चोटें आईं। पीड़ित की शिकायत पर, चरथावल थाने में मुकदमा संख्या 103/2026, धारा 131, 109(1), 118(1) व 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत, उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह परिहार और उनकी टीम ने बिरालसी निवासी संदीप पुत्र रामकुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है, और अन्य फरार आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फैक्ट्री से 12 बंधुआ श्रमिकों को मुक्त कराया है। इन श्रमिकों को नौकरी और अच्छे वेतन का झांसा देकर फैक्ट्री में कैद रखा गया था, जहाँ उनसे अमानवीय परिस्थितियों में काम करवाया जा रहा था। पुलिस की जाँच में मारपीट, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और श्रमिकों को धमकाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को जेल भेज दिया है, जबकि फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान अभी भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच के दौरान, मुक्त कराए गए श्रमिकों ने एक सनसनीखेज आरोप लगाया कि उनके साथी टोपी उर्फ अर्जुन की नवंबर 2025 में हत्या कर दी गई थी। इस आरोप के आधार पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल, मुक्त कराए गए श्रमिकों के पुनर्वास, उपचार और उनके परिवारों से मिलवाने की प्रक्रिया जारी है।1
- मुजफ्फरनगर में कचहरी गेट पर हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहाँ छपार थाना क्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली एक महिला और उसके परिजनों के साथ कथित तौर पर ससुराल पक्ष के लोगों ने मारपीट की। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष किसी कानूनी कार्यवाही के संबंध में कचहरी पहुँचे थे। वहाँ दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो जल्द ही विवाद में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई। इस घटना से कचहरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की है, जिसके बाद पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।2