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BaरKaट्ठा Ki आwaज
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- Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज1
- गेतलसुद स्थित एक लाइसेंसी शराब दुकान पर अपराधियों ने रंगदारी को लेकर की ताबड़तोड़ फायरिंग, रात्रि 9 बजे लगभग पांच राउंड फायरिंग की सूचना है, पुलिस मौके पर पहुंची है, फायरिंग करने वाले अपराधी की पहचान हो गई है. बताया गया कि हाल के दिनों में उक्त अपराधी लगातार रंगदारी की मांग को लेकर दहशत फैला रहा है, एक पखवाड़ा पहले भी एक क्रशर प्लांट मे फायरिंग किया था #viralvideo #CCTV #virelreels #reelsfb #ranchi #sachtakjharkhandnews #bishnugarh #nonfollower #sonu_mehta #today #news1
- Post by BITTU JOURNALIST1
- 📍 हजारीबाग के जामा मस्जिद रोड, इमामबाड़ा के पास रमजान के महीने में इमरती की दुकान पर हर शाम लगता है खरीदारों का जन सैलाब। इफ्तार से पहले गरमा-गरम इमरती और जलेबी लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें इस बात का सबूत हैं कि रमजान में मिठास की अपनी अलग ही अहमियत है। 🍥 इमरती और जलेबी — दिखने में एक जैसी, लेकिन स्वाद में अलग पहचान 🔸 बनाने का तरीका: जलेबी मैदे के घोल से बनाई जाती है, जबकि इमरती बिना छिलके वाली उड़द दाल के पेस्ट से तैयार होती है। 🔸 बनावट और स्वाद: मैदे की वजह से जलेबी बाहर से कुरकुरी (Crispy) और हल्की खट्टी होती है, क्योंकि इसमें खमीर (Fermentation) होता है। वहीं दाल से बनी इमरती मुलायम, स्पंजी और रसीली होती है। 🔸 आकार: जलेबी का आकार टेढ़ा-मेढ़ा (Chaotic swirls) होता है, जबकि इमरती को फूल जैसे सुंदर गोल छल्लों के डिजाइन में बनाया जाता है। 🔸 उत्पत्ति: जलेबी की जड़ें पर्शिया (ईरान) से जुड़ी हैं, जहाँ इसे “जुलाबिया” कहा जाता था। जबकि इमरती पूरी तरह भारतीय मिठाई है, जिसे मुगल काल में भारत में ही विकसित किया गया। 🔸 सेहत के नजरिए से: इमरती में दाल होने के कारण प्रोटीन और फाइबर की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, जबकि जलेबी में फाइबर नहीं के बराबर होता है। ✨ रमजान के इस पवित्र महीने में इफ्तार की थाली हो और उसमें गरमा-गरम इमरती या जलेबी न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? आप इफ्तार में क्या पसंद करते हैं — इमरती ❤️ या जलेबी 💛? कमेंट में जरूर बताएं! #hazaribagh #ramzan2026 #imarti #jalebi #iftarspecial #hazaribaghnews #ramzannews #love #fyp1
- क्या राज्यसभा जाएंगे Nitish Kumar? बिहार की राजनीति में मची बड़ी हलचल!1
- , हिंदुस्तान की सबसे बड़ी अद्भुत सुंदरता ये हैं की हिंदू मुस्लिम सब मिल जुलकर रहते हैं होली जहाँ हिंदू भाइयों का पावन पर्व माना जाता हैं वही हिंदुस्तान मे एक सूफी संत की ऐसी भी दरगाह है जहां दरगाह परिसर में लोग मिलजुल कर होली खेलते हैं और गुरु महाराज के नाम का जयकारा भी लगाते हैं यह दरगाह है हिंदुस्तान के उप राज्य के बाराबंकी शहर के देवा शरीफ में स्थित सूफी संत सरकार हाजी वारिस अली शाह की वारिस पाक को कौमी एकता का सबसे बड़ा सूफ़ी संत माना जाता है बताते चले इस दरगाह के मुख्य द्वार का नाम भी कौमी एकता द्वार है वारिस पाक के नाम से प्रसिद्ध इस दरगाह पर उनके आज्ञा के अनुसार सब लोग मिलकर रंगों और फूलो से होली खेलते हैं वारिस पाक के अनुयायियों को वारसी कहते हैं और प्रसिद्ध वर्षी सूफी संतों के अनुसार गुरु महाराज वारिस पाक स्वयं होली बहुत ही श्रद्धा के साथ खेला करते थे पिछले 120 वर्षों से इस दरगाह में परंपरागत होली खेली जा रही है1
- Post by Sunil Kumar journalist1
- गढ़वा: विद्यालय में अश्लील गाने पर डांस मामले में प्रभारी प्रधानाध्यापक निलंबित, दो शिक्षकों पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई प्रारंभ गढ़वा: जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने विद्यालयी अनुशासन, नैतिकता एवं शैक्षणिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। मेराल अंचल स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय सोहबरिया में सामने आए एक गंभीर अनुशासनहीन प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की गई है। प्राप्त जानकारी एवं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर यह पाया गया कि विद्यालय में आठवीं वर्ग के छात्र-छात्राओं के विदाई समारोह के दौरान विद्यालय परिसर में डीजे साउंड (ध्वनि विस्तारक यंत्र) लगाकर अशोभनीय एवं अश्लील गीत बजाए गए तथा विद्यालय की छात्राओं के साथ प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं कुछ शिक्षकों द्वारा नृत्य किए जाने की घटना सामने आई है। यह कृत्य विद्यालय की गरिमा, शैक्षणिक वातावरण तथा शिक्षक की मर्यादा के प्रतिकूल पाया गया है। प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए झारखंड सरकारी सेवक नियमावली, 2016 के तहत प्रभारी प्रधानाध्यापक कुंदन कुमार रंजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, गढ़वा निर्धारित किया गया है। साथ ही राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देशानुसार उन्हें निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। विभागीय नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इस प्रकरण में सहायक शिक्षक पुरुषोत्तम पंडित एवं सुबेश्वर राम का आचरण भी विशेष रूप से अनुचित पाया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने झारखंड सहायक अध्यापक सेवाशर्त नियमावली, 2021 के तहत इसे शिक्षक आचरण के विपरीत एवं गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। संबंधित प्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए दो दिनों के भीतर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधीक्षक-सह-अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, झारखंड शिक्षा परियोजना, गढ़वा को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें तथा इसकी एक प्रति जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को भी प्रेषित करें। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में अनुशासन, नैतिकता एवं शिक्षा के अनुकूल वातावरण बनाए रखना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता अथवा शिक्षक मर्यादा के विपरीत आचरण को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1