मुंगेर में दो महीने से बंद विद्युत शवदाह गृह, बढ़ी परेशानी और खर्च मुंगेर : नगर निगम क्षेत्र के लाल दरवाजा स्थित विद्युत शवदाह गृह पिछले करीब दो महीनों से बंद पड़ा है, जिससे आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। मुंगेर के साथ-साथ लखीसराय, जमुई और आसपास के इलाकों से आने वाले लोगों को अब गंगा किनारे पारंपरिक तरीके से लकड़ी से अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। इससे जहां पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं खर्च भी कई गुना बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले यहां मात्र 500 रुपए में अंतिम संस्कार की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब लकड़ी से शव जलाने में तीन हजार रुपए या उससे अधिक खर्च हो रहा है। साथ ही डोम राजा द्वारा मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कर्मियों ने बताया कि शवदाह गृह की मुख्य भट्ठी पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। पंखे खराब हैं, पैनल क्वायल कटा हुआ है और पानी की वायरिंग भी ठीक नहीं है, जिससे सफाई तक संभव नहीं हो पा रही है। शवदाह गृह बंद होने के कारण लोगों को करीब एक किलोमीटर दूर घाट तक शव ले जाना पड़ रहा है। कई लोग कंधे पर शव ढोते हैं, जबकि लकड़ी ढोने में भी अतिरिक्त खर्च देना पड़ता है। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि मोटर खराब होने के कारण सेवा बंद है। टेंडर प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इसे चालू किया जाएगा।
मुंगेर में दो महीने से बंद विद्युत शवदाह गृह, बढ़ी परेशानी और खर्च मुंगेर : नगर निगम क्षेत्र के लाल दरवाजा स्थित विद्युत शवदाह गृह पिछले करीब दो महीनों से बंद पड़ा है, जिससे आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। मुंगेर के साथ-साथ लखीसराय, जमुई और आसपास के इलाकों से आने वाले लोगों को अब गंगा किनारे पारंपरिक तरीके से लकड़ी से अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। इससे जहां पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं खर्च भी कई गुना बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले यहां मात्र 500 रुपए में अंतिम संस्कार की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब लकड़ी से शव जलाने में तीन हजार रुपए या उससे अधिक खर्च हो रहा है। साथ ही डोम राजा द्वारा मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कर्मियों ने बताया कि शवदाह गृह की मुख्य भट्ठी पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। पंखे खराब हैं, पैनल क्वायल कटा हुआ है और पानी की वायरिंग भी ठीक नहीं है, जिससे सफाई तक संभव नहीं हो पा रही है। शवदाह गृह बंद होने के कारण लोगों को करीब एक किलोमीटर दूर घाट तक शव ले जाना पड़ रहा है। कई लोग कंधे पर शव ढोते हैं, जबकि लकड़ी ढोने में भी अतिरिक्त खर्च देना पड़ता है। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि मोटर खराब होने के कारण सेवा बंद है। टेंडर प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इसे चालू किया जाएगा।
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- तारापुर नगर पंचायत के बाबा रत्नेश्वर धाम महादेव मंदिर, सोनडीहा परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महाज्ञान यज्ञ से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। प्रतिदिन संध्या 6 बजे से रात 10 बजे तक आचार्य अखिलेशानंद जी महाराज कथा का वाचन कर रहे हैं, जिसे सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार को तीसरे दिन महाराज ने सृष्टि उत्पत्ति का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमन्नारायण के संकल्प से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई और तप के माध्यम से उन्हें सृष्टि रचना का दायित्व मिला। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम जप ही सबसे बड़ा साधन है। जुआ, मदिरा, हिंसा व अनैतिक कार्यों में कलयुग का वास होता है, जबकि नाम स्मरण से मुक्ति मिलती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय समिति व ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।1
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