जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई पर उठा विवाद बिलासपुर। जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कमल गौतम का कहना है कि सड़क किनारे बैठे छोटे दुकानदारों को हटाना पीडब्ल्यूडी विभाग का काम नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से डराया जा रहा है, जबकि पहले प्रशासन को उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह इन दुकानदारों के लिए उचित स्थान का चयन करे और वहां उन्हें बसाने की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद भी यदि कोई दुकानदार सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाता है, तभी उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। गौतम ने यह भी बताया कि शहर के अधिकांश छोटे दुकानदार नगर परिषद को हर महीने निर्धारित शुल्क देते हैं, ऐसे में उनके हितों की रक्षा करना नगर परिषद और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। इस पूरे मामले ने शहर में प्रशासनिक अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित दुकानदारों के लिए क्या समाधान निकाला जाता है
जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई पर उठा विवाद बिलासपुर। जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कमल गौतम का कहना है कि सड़क किनारे बैठे छोटे दुकानदारों को हटाना पीडब्ल्यूडी विभाग का काम नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से डराया जा रहा है, जबकि पहले प्रशासन को उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह इन दुकानदारों के लिए उचित स्थान का चयन करे और वहां उन्हें बसाने की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद भी यदि कोई दुकानदार सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाता है, तभी उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। गौतम ने यह भी बताया कि शहर के अधिकांश छोटे दुकानदार नगर परिषद को हर महीने निर्धारित शुल्क देते हैं, ऐसे में उनके हितों की रक्षा करना नगर परिषद और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। इस पूरे मामले ने शहर में प्रशासनिक अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित दुकानदारों के लिए क्या समाधान निकाला जाता है
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- बिलासपुर में अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई पर उठा विवाद बिलासपुर। जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कमल गौतम का कहना है कि सड़क किनारे बैठे छोटे दुकानदारों को हटाना पीडब्ल्यूडी विभाग का काम नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से डराया जा रहा है, जबकि पहले प्रशासन को उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह इन दुकानदारों के लिए उचित स्थान का चयन करे और वहां उन्हें बसाने की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद भी यदि कोई दुकानदार सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाता है, तभी उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। गौतम ने यह भी बताया कि शहर के अधिकांश छोटे दुकानदार नगर परिषद को हर महीने निर्धारित शुल्क देते हैं, ऐसे में उनके हितों की रक्षा करना नगर परिषद और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। इस पूरे मामले ने शहर में प्रशासनिक अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित दुकानदारों के लिए क्या समाधान निकाला जाता है1
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा रविवार 3 मई को आयोजित की जा रही नीट यूजी परीक्षा 2026 के शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला बिलासपुर के उपमंडल सदर बिलासपुर तथा घुमारवीं में स्थापित परीक्षा केन्द्रों के आसपास सम्बन्धित एसडीएम ने धारा 163 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत निषेधात्मक आदेश जारी किए हैं। जिला मुख्यालय बिलासपुर में 3 परीक्षा केन्द्र स्थापित किए गए है जिनमें पीएम श्री मुख्यमंत्री आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) बिलासपुर, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर तथा पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बिलासपुर जबकि घुमारवीं में 2 परीक्षा केन्द्र स्थापित किए गए है जिनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) घुमारवीं तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बालिका) घुमारवीं शामिल है। जारी आदेशों के अनुसार 3 मई 2026 को प्रातः 10 बजे से सायं 6 बजे तक निर्धारित सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास किसी भी प्रकार के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक आयोजन, जुलूस, रैली, नारेबाजी एवं हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही इस अवधि के दौरान लाउडस्पीकर के उपयोग, निर्माण कार्य, टेंट अथवा मंच की स्थापना या हटाने की गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास किसी भी प्रकार के हथियार, लाठी, गोला-बारूद अथवा अन्य घातक वस्तुएं लेकर चलना भी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।1
- ब्लॉक कॉंग्रेस अर्की के अध्यक्ष सतीश कश्यप द्वारा पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर वार्ड नं 7 के कॉंग्रेस समर्थित सदस्यों के बारे जानकारी दी पवन सिंघ अर्की सोलन1
- Post by Dinesh Kumar1
- बद्दी के दिल्ली बाजार में भीषण आग 🔥 | 10 दुकानें जलकर राख | लाखों का नुकसान | Fire in Baddi Delhi Market1
- Post by JAI पंडित1
- बिलासपुर जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा शहर में सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कमल गौतम ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कमल गौतम का कहना है कि सड़क किनारे बैठे छोटे दुकानदारों को हटाना पीडब्ल्यूडी विभाग का काम नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से डराया जा रहा है, जबकि पहले प्रशासन को उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह इन दुकानदारों के लिए उचित स्थान का चयन करे और वहां उन्हें बसाने की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद भी यदि कोई दुकानदार सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाता है, तभी उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। गौतम ने यह भी बताया कि शहर के अधिकांश छोटे दुकानदार नगर परिषद को हर महीने निर्धारित शुल्क देते हैं, ऐसे में उनके हितों की रक्षा करना नगर परिषद और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। इस पूरे मामले ने शहर में प्रशासनिक अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित दुकानदारों के लिए क्या समाधान निकाला जाता है।1