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प्रेस विज्ञप्ति पटना दिनांक : 22 अप्रैल,2026 आज बिहार के तीन क्रांतिकारी संगठनों - सीपीआई (एमएल), जनवादी लोक मंच तथा सीपीआई (एमएल) - न्यू डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वावधान में लेनिन के जन्मदिवस के अवसर पर पटना के आईएमए सभागार में एक साम्राज्यवाद विरोधी कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन का विषय था : "अमेरिकी साम्राज्यवाद आज विश्व शांति का सबसे बड़ा खतरा है।" कन्वेंशन की शुरुआत में सीपीआई (एमएल) के प्रांतीय सचिव कॉमरेड नन्द किशोर सिंह ने कन्वेंशन में शिरकत कर रहे सभी प्रतिनिधियों एवं बिरादराना अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका क्रांतिकारी अभिवादन किया तथा संक्षेप में विषय पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कन्वेंशन के संचालन के लिए एक 3 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल का प्रस्ताव रखा जिसमें सीपीआई (एमएल)- न्यू डेमोक्रेसी के कॉ. रामवृक्ष राम, जनवादी लोक मंच के साथी पुकार तथा सीपीआई (एमएल) के कॉ. नन्द किशोर सिंह शामिल थे। साम्राज्यवाद विरोधी कन्वेंशन को सम्बोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में सीपीआई (एमएल)- न्यू डेमोक्रेसी के बिहार के प्रवक्ता कॉ. वी.के.पटोले , जनवादी लोक मंच के पूर्व संयोजक कॉ. बलदेव झा, सीपीआई (एमएल) के केन्द्रीय कार्यकारिणी कमिटी सदस्य कॉ.अरविन्द सिन्हा, कम्युनिस्ट सेंटर फॉर साइंटिफिक सोशलिज्म के नेता कॉ. नरेन्द्र कुमार, रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया के नेता साथी अजीत , नागरिक अधिकार रक्षा मंच के नेता साथी संजय श्याम, श्रम मुक्ति संगठन के नेता साथी आदित्य कमल, आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। तीनों क्रांतिकारी संगठनों के नेताओं तथा बिरादराना संगठनों के प्रतिनिधियों ने विस्तार से आज की वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था में साम्राज्यवादी ताकतों खासकर अमेरिका द्वारा पूरी दुनिया में किये जा रहे हस्तक्षेप तथा हमले की चर्चा की। जिस प्रकार से वेनेजुएला में अमेरिकी साम्राज्यवाद ने वहां के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के लिए सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति मादुरो तथा उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका के जेल में बंद कर दिया, वह सरासर अमेरिका की दादागिरी एवं गुंडागर्दी है। इसी प्रकार अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में जारी वार्ता जब एक समाधान के करीब पहुंच गयी थी, तब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एकतरफा हमला कर दिया। उन दोनों आक्रमणकारी मुल्कों ने न सिर्फ ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया,बल्कि उसने नागरिक आबादी, स्कूल एवं अस्पताल को भी नहीं छोड़ा। इस हमले में ईरान के एक स्कूल की 160 से अधिक छात्राएं मारी गईं। साम्राज्यवादी अमेरिका और जियोनवादी इजरायल द्वारा ईरान पर थोपे गये इस अन्यायपूर्ण युद्ध के खिलाफ आत्म रक्षा में ईरान ने भी बहादुरी से मुकाबला किया और खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों तथा इजरायली सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया। इसके लिए वक्ताओं ने ईरान की बहादुर जनता को सलाम पेश किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में साम्राज्यवादी अमेरिका ने दर्जनों देशों में खूनी हस्तक्षेप किया है और वहां की चुनी हुई सरकार को अपदस्थ करके अपनी पिट्ठू कठपुतली सरकार बनाया है। आज भी चिली , वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक , लीबिया, सीरिया, वेनेजुएला तथा ईरान सहित दर्जनों देशों की जनता ने साम्राज्यवादी हस्तक्षेप तथा युद्ध की विभीषिका को झेला है। कन्वेंशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जो इसप्रकार है : यह कन्वेंशन साम्राज्यवादी अमेरिका और उसके पिट्ठू इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी 2026 से शुरू किये गये सैनिक हमले और इसी क्रम में इजराइल द्वारा लेबनान पर किये गये हमले की कड़ी निन्दा करता है। अमेरिका-इजराइल ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य युद्ध नियमों को ही केवल नहीं तोड़ा है, बल्कि सभी मानवीय सरोकारों को भी नजरअंदाज करते हुए नैतिक पतन के निचले स्तर पर गिर गया है। अमेरिका ने लड़कियों के एक स्कूल पर बमबारी की, जिसमें 168 से ज्यादा छात्राएँ और 14 शिक्षक मारे गए। नागरिक ठिकानों विशेषकर अस्पतालों और उच्च शिक्षा संस्थानों को निशाना बनाया गया और प्रख्यात वैज्ञानिकों सहित आम शहरी आबादी को मारा गया। उन्होंने ईरान में प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को भी नहीं बख्शा। अमेरिका-इजराइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव अली लरजानी को निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी। परंतु ईरानियों के दृढ़ प्रतिरोध ने हमलावर साम्राज्यवादी अमेरिका को पीछे धकेला और युद्ध विराम मांगने के लिये मजबूर किया। वैसे तो उत्पीड़ित देशों के संसाधन, बाजार और श्रमशक्ति पर नियंत्रण व उसके दोहन की होड़ में युद्ध साम्राज्यवाद की आम प्रवृत्ति है। काॅ. लेनिन ने स्पष्ट कहा था कि ”साम्राज्यवाद का अर्थ युद्ध है”। अमेरिकी साम्राज्यवाद ने इसे नये आयाम तक पहुंचा दिया है। ईरान पर यह वर्तमान आक्रमण अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा उत्पीड़ित पिछड़े राष्ट्रों पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से किये गये कई युद्धों के सिलसिले की एक और कड़ी है। सामाजिक साम्राज्यवादी सोवियत संघ के विघटन के बाद कुछ दशकों तक अमेरिकी साम्राज्यवाद के वर्चस्व के अधीन एक ध्रुवीय दुनिया का दौर चला , परंतु अब अन्य साम्राज्यवादी देश विशेषकर चीन व रूस कम से कम आर्थिक क्षेत्र में उसे चुनौती दे रहे हैं और दुनिया में बहु ध्रुवीयता बढ़ रही है। विश्व में साम्राज्यवादी लूट व नव-औपनिवेशिक शोषण पर अपने एकछत्र वर्चस्व को पुनःस्थापित करने के लिये अमेरिकी साम्राज्यवाद पुरजोर कोशिश कर रहा है जिसका परिणाम उत्पीड़ित राष्ट्रों के खिलाफ युद्धों में दिखता है। हालांकि जहां भारत की भाजपानीत केन्द्र सरकार जैसी सरकार हो, जो साम्राज्यवाद के समक्ष घुटने टेकने को तत्पर हो, वहां बिना युद्ध के ही काम हो जाता है। अमेरिकी सेना ने अपने देश की सीमाओं की रक्षा के लिये कोई युद्ध नहीं लड़ा है और ना ही उसे अपने पड़ोसियों से कोई खतरा है। फिर भी उसका वार्षिक सैनिक बजट 830 बिलियन डाॅलर है जो चीन, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी व फ्रांस पांचों देशों के कुल सैनिक बजट से अधिक है। उसकी सेना के दूसरे देशों में 700 से अधिक सैनिक अड्डे हैं। मध्य पूर्व में ही विभिन्न अरब देशों में ईरान की घेराबंदी करते हुए थल सेना, वायु सेना व नौसेना के कई अड्डे लम्बे समय से हैं जिनमें 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। खनिज तेल के स्रोतों पर नियंत्रण की होड़ में इराक, लीबिया, जैसे कई देशों पर युद्ध थोपकर सत्ता पलटने का इसका इतिहास है। हाल की वेनेजुएला की घटनाएं सबने देखी हैं जहां विमानों से अपने सैनिक भेजकर अमेरिका ने वहां के राष्ट्रपति मादुरो व उनकी पत्नी का अपहरण किया और अमेरिका में उन्हें जेल में रखकर मुकदमा चलाया जा रहा है। वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार अब अमेरिका के नियंत्रण में है। यह कन्वेंशन मानता है कि विश्व शांति के लिए आज सबसे बडा खतरा अमेरिकी साम्राज्यवाद है। यह कन्वेंशन भारत सरकार से मांग करता है कि वह अमेरिका-इजराइल द्वारा भारत के पारम्परिक मित्र ईरान पर किये गये इस आक्रमण का विरोध करे। यह कन्वेंशन देश की जनता से आह्वान करता है कि ईरान के विरुद्ध किये जा रहे युद्ध का विरोध करने के साथ-साथ भारत सरकार से मांग करे कि वह अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा भारत पर थोपी जा रही सभी असमान शोषणकारी व्यापारिक संधियों को अस्वीकार करे। कन्वेंशन ने हाल में नोएडा में मजदूरों के शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आन्दोलन पर पुलिस द्वारा षड्यंत्रकारी तरीके से हिंसा भड़काने तथा असंवैधानिक और गैर कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बिगुल मजदूर दस्ता के कार्यकर्ताओं रूपेश, आदित्य आनन्द, मनीषा, आकृति, सृष्टि और हिमांशु की गिरफ्तारी की निन्दा की। साथ ही प्रख्यात पत्रकार और बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अतिरिक्त गुरुग्राम में भी मजदूर आंदोलन में शामिल इंकलाबी मजदूर केन्द्र के छः कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनपर संगीन धाराएं लगाई हैं। पूरे प्रकरण में पुलिस योगी-मोदी के फासीवादी एजेंडे के तहत काम कर रही है। यह कन्वेंशन ऐसे दमन एवं गिरफ्तारी की तीव्र भर्त्सना करता है। हम सभी जनपक्षधर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की अविलम्ब बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। जारीकर्ता : नन्द किशोर सिंह, रामवृक्ष राम, पुकार सम्पर्क : 9931857997

20 hrs ago
user_Sabir Husain
Sabir Husain
Department of Social Services Sakra, Muzaffarpur•
20 hrs ago
3866865f-93a7-4adf-9034-e36c5fb2aca6

प्रेस विज्ञप्ति पटना दिनांक : 22 अप्रैल,2026 आज बिहार के तीन क्रांतिकारी संगठनों - सीपीआई (एमएल), जनवादी लोक मंच तथा सीपीआई (एमएल) - न्यू डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वावधान में लेनिन के जन्मदिवस के अवसर पर पटना के आईएमए सभागार में एक साम्राज्यवाद विरोधी कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन का विषय था : "अमेरिकी साम्राज्यवाद आज विश्व शांति का सबसे बड़ा खतरा है।" कन्वेंशन की शुरुआत में सीपीआई (एमएल) के प्रांतीय सचिव कॉमरेड नन्द किशोर सिंह ने कन्वेंशन में शिरकत कर रहे सभी प्रतिनिधियों एवं बिरादराना अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका क्रांतिकारी अभिवादन किया तथा संक्षेप में विषय पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कन्वेंशन के संचालन के लिए एक 3 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल का प्रस्ताव रखा जिसमें सीपीआई (एमएल)- न्यू डेमोक्रेसी के कॉ. रामवृक्ष राम, जनवादी लोक मंच के साथी पुकार तथा सीपीआई (एमएल) के कॉ. नन्द किशोर सिंह शामिल थे। साम्राज्यवाद विरोधी कन्वेंशन को सम्बोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में सीपीआई (एमएल)- न्यू डेमोक्रेसी के बिहार के प्रवक्ता कॉ. वी.के.पटोले , जनवादी लोक मंच के पूर्व संयोजक कॉ. बलदेव झा, सीपीआई (एमएल) के केन्द्रीय कार्यकारिणी कमिटी सदस्य कॉ.अरविन्द सिन्हा, कम्युनिस्ट सेंटर फॉर साइंटिफिक सोशलिज्म के नेता कॉ. नरेन्द्र कुमार, रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया के नेता साथी अजीत , नागरिक अधिकार रक्षा मंच के नेता साथी संजय श्याम, श्रम मुक्ति संगठन के नेता साथी आदित्य कमल, आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। तीनों क्रांतिकारी संगठनों के नेताओं तथा बिरादराना संगठनों के प्रतिनिधियों ने विस्तार से आज की वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था में साम्राज्यवादी ताकतों खासकर अमेरिका द्वारा पूरी दुनिया में किये जा रहे हस्तक्षेप तथा हमले की चर्चा की। जिस प्रकार से वेनेजुएला में अमेरिकी साम्राज्यवाद ने वहां के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के लिए सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति मादुरो तथा उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका के जेल में बंद कर दिया, वह सरासर अमेरिका की

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दादागिरी एवं गुंडागर्दी है। इसी प्रकार अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में जारी वार्ता जब एक समाधान के करीब पहुंच गयी थी, तब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एकतरफा हमला कर दिया। उन दोनों आक्रमणकारी मुल्कों ने न सिर्फ ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया,बल्कि उसने नागरिक आबादी, स्कूल एवं अस्पताल को भी नहीं छोड़ा। इस हमले में ईरान के एक स्कूल की 160 से अधिक छात्राएं मारी गईं। साम्राज्यवादी अमेरिका और जियोनवादी इजरायल द्वारा ईरान पर थोपे गये इस अन्यायपूर्ण युद्ध के खिलाफ आत्म रक्षा में ईरान ने भी बहादुरी से मुकाबला किया और खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों तथा इजरायली सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया। इसके लिए वक्ताओं ने ईरान की बहादुर जनता को सलाम पेश किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में साम्राज्यवादी अमेरिका ने दर्जनों देशों में खूनी हस्तक्षेप किया है और वहां की चुनी हुई सरकार को अपदस्थ करके अपनी पिट्ठू कठपुतली सरकार बनाया है। आज भी चिली , वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक , लीबिया, सीरिया, वेनेजुएला तथा ईरान सहित दर्जनों देशों की जनता ने साम्राज्यवादी हस्तक्षेप तथा युद्ध की विभीषिका को झेला है। कन्वेंशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जो इसप्रकार है : यह कन्वेंशन साम्राज्यवादी अमेरिका और उसके पिट्ठू इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी 2026 से शुरू किये गये सैनिक हमले और इसी क्रम में इजराइल द्वारा लेबनान पर किये गये हमले की कड़ी निन्दा करता है। अमेरिका-इजराइल ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य युद्ध नियमों को ही केवल नहीं तोड़ा है, बल्कि सभी मानवीय सरोकारों को भी नजरअंदाज करते हुए नैतिक पतन के निचले स्तर पर गिर गया है। अमेरिका ने लड़कियों के एक स्कूल पर बमबारी की, जिसमें 168 से ज्यादा छात्राएँ और 14 शिक्षक मारे गए। नागरिक ठिकानों विशेषकर अस्पतालों और उच्च शिक्षा संस्थानों को निशाना बनाया गया और प्रख्यात वैज्ञानिकों सहित आम शहरी आबादी को मारा गया। उन्होंने ईरान में प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक

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धरोहरों को भी नहीं बख्शा। अमेरिका-इजराइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव अली लरजानी को निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी। परंतु ईरानियों के दृढ़ प्रतिरोध ने हमलावर साम्राज्यवादी अमेरिका को पीछे धकेला और युद्ध विराम मांगने के लिये मजबूर किया। वैसे तो उत्पीड़ित देशों के संसाधन, बाजार और श्रमशक्ति पर नियंत्रण व उसके दोहन की होड़ में युद्ध साम्राज्यवाद की आम प्रवृत्ति है। काॅ. लेनिन ने स्पष्ट कहा था कि ”साम्राज्यवाद का अर्थ युद्ध है”। अमेरिकी साम्राज्यवाद ने इसे नये आयाम तक पहुंचा दिया है। ईरान पर यह वर्तमान आक्रमण अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा उत्पीड़ित पिछड़े राष्ट्रों पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से किये गये कई युद्धों के सिलसिले की एक और कड़ी है। सामाजिक साम्राज्यवादी सोवियत संघ के विघटन के बाद कुछ दशकों तक अमेरिकी साम्राज्यवाद के वर्चस्व के अधीन एक ध्रुवीय दुनिया का दौर चला , परंतु अब अन्य साम्राज्यवादी देश विशेषकर चीन व रूस कम से कम आर्थिक क्षेत्र में उसे चुनौती दे रहे हैं और दुनिया में बहु ध्रुवीयता बढ़ रही है। विश्व में साम्राज्यवादी लूट व नव-औपनिवेशिक शोषण पर अपने एकछत्र वर्चस्व को पुनःस्थापित करने के लिये अमेरिकी साम्राज्यवाद पुरजोर कोशिश कर रहा है जिसका परिणाम उत्पीड़ित राष्ट्रों के खिलाफ युद्धों में दिखता है। हालांकि जहां भारत की भाजपानीत केन्द्र सरकार जैसी सरकार हो, जो साम्राज्यवाद के समक्ष घुटने टेकने को तत्पर हो, वहां बिना युद्ध के ही काम हो जाता है। अमेरिकी सेना ने अपने देश की सीमाओं की रक्षा के लिये कोई युद्ध नहीं लड़ा है और ना ही उसे अपने पड़ोसियों से कोई खतरा है। फिर भी उसका वार्षिक सैनिक बजट 830 बिलियन डाॅलर है जो चीन, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी व फ्रांस पांचों देशों के कुल सैनिक बजट से अधिक है। उसकी सेना के दूसरे देशों में 700 से अधिक सैनिक अड्डे हैं। मध्य पूर्व में ही विभिन्न अरब देशों में ईरान की घेराबंदी करते हुए थल सेना,

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वायु सेना व नौसेना के कई अड्डे लम्बे समय से हैं जिनमें 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। खनिज तेल के स्रोतों पर नियंत्रण की होड़ में इराक, लीबिया, जैसे कई देशों पर युद्ध थोपकर सत्ता पलटने का इसका इतिहास है। हाल की वेनेजुएला की घटनाएं सबने देखी हैं जहां विमानों से अपने सैनिक भेजकर अमेरिका ने वहां के राष्ट्रपति मादुरो व उनकी पत्नी का अपहरण किया और अमेरिका में उन्हें जेल में रखकर मुकदमा चलाया जा रहा है। वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार अब अमेरिका के नियंत्रण में है। यह कन्वेंशन मानता है कि विश्व शांति के लिए आज सबसे बडा खतरा अमेरिकी साम्राज्यवाद है। यह कन्वेंशन भारत सरकार से मांग करता है कि वह अमेरिका-इजराइल द्वारा भारत के पारम्परिक मित्र ईरान पर किये गये इस आक्रमण का विरोध करे। यह कन्वेंशन देश की जनता से आह्वान करता है कि ईरान के विरुद्ध किये जा रहे युद्ध का विरोध करने के साथ-साथ भारत सरकार से मांग करे कि वह अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा भारत पर थोपी जा रही सभी असमान शोषणकारी व्यापारिक संधियों को अस्वीकार करे। कन्वेंशन ने हाल में नोएडा में मजदूरों के शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आन्दोलन पर पुलिस द्वारा षड्यंत्रकारी तरीके से हिंसा भड़काने तथा असंवैधानिक और गैर कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बिगुल मजदूर दस्ता के कार्यकर्ताओं रूपेश, आदित्य आनन्द, मनीषा, आकृति, सृष्टि और हिमांशु की गिरफ्तारी की निन्दा की। साथ ही प्रख्यात पत्रकार और बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अतिरिक्त गुरुग्राम में भी मजदूर आंदोलन में शामिल इंकलाबी मजदूर केन्द्र के छः कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनपर संगीन धाराएं लगाई हैं। पूरे प्रकरण में पुलिस योगी-मोदी के फासीवादी एजेंडे के तहत काम कर रही है। यह कन्वेंशन ऐसे दमन एवं गिरफ्तारी की तीव्र भर्त्सना करता है। हम सभी जनपक्षधर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की अविलम्ब बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। जारीकर्ता : नन्द किशोर सिंह, रामवृक्ष राम, पुकार सम्पर्क : 9931857997

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  • समस्तीपुर से आ रही है जहां बदमाशो ने रात के अंधेरे में कैनरा बैंक के एटीएम को अपना निशाना बनाया है ।बदमाशो ने कटर मशीन से एटीएम को काट कर उसमें रखे 2 लाख 11 हज़ार रुपये लूटकर फरार हो गया।एटीएम में चोरी की वारदात का तब पता चला जब गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे उस एटीएम में बैंक के अधिकारी पैसा डालने आये।वही इस घटना से पूरे छेत्र में पुलिस गश्ती पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है और एटीएम में गॉर्ड के तैनाती पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।हालांकि पुलिस को इस घटना की जानकारी होते ही एसपी अरविंद प्रताप सिंह के साथ साथ सदर एसडीपीओ संजय कुमार पांडेय और बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुच कर मामले की जांच में जुट गई है और एटीएम और आस पास लगे सीसीटीवी को भी खंगाला जा रहा है मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर रोड की है।जिस जगह पर यह एटीएम था वह समस्तीपुर-मुसरीघरारी मुख्य सड़क है जहां हर मिनट सैकड़ो वाहनों का आवागमन रहता है।आसपास भी भी कई बैंक और आभूषण के बड़े बड़े प्रतिष्ठान भी है इसके बावजूद एटीएम में तो सुरक्षा बंदोस्त नही ही था स्थानीय पुलिस की भी गश्ती नही थी जिसकी वजह से अपराधियों ने आराम से एटीएम मशीन को काटकर रुपए की लूट कर ली और आराम से निकल भी गए फिर भी किसी को भी घटना की भनक तक नही लग सकी।इस घटना ने पुलिसिया व्यवस्था की पोल खोलकर रख दिया है।
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    समस्तीपुर से आ रही है जहां बदमाशो ने रात के अंधेरे में कैनरा बैंक के एटीएम को अपना निशाना बनाया है ।बदमाशो ने कटर मशीन से एटीएम को काट कर उसमें रखे 2 लाख 11 हज़ार रुपये लूटकर फरार हो गया।एटीएम में चोरी की वारदात का तब पता चला जब गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे उस एटीएम में बैंक के अधिकारी पैसा डालने आये।वही इस घटना से पूरे छेत्र में पुलिस गश्ती पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है और एटीएम में गॉर्ड के तैनाती पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।हालांकि पुलिस को इस घटना की जानकारी होते ही एसपी अरविंद प्रताप सिंह के साथ साथ सदर एसडीपीओ संजय कुमार पांडेय और बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुच कर मामले की जांच में जुट गई है और एटीएम और आस पास लगे सीसीटीवी को भी खंगाला जा रहा है मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर रोड की है।जिस जगह पर यह एटीएम था वह समस्तीपुर-मुसरीघरारी मुख्य सड़क है जहां हर मिनट सैकड़ो वाहनों का आवागमन रहता है।आसपास भी भी कई बैंक और आभूषण के बड़े बड़े प्रतिष्ठान भी है इसके बावजूद एटीएम में तो सुरक्षा बंदोस्त नही ही था स्थानीय पुलिस की भी गश्ती नही थी जिसकी वजह से अपराधियों ने आराम से एटीएम मशीन को काटकर रुपए की लूट कर ली और आराम से निकल भी गए फिर भी किसी को भी घटना की भनक तक नही लग सकी।इस घटना ने पुलिसिया व्यवस्था की पोल खोलकर रख दिया है।
    user_Shaquib Press
    Shaquib Press
    समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    44 min ago
  • Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
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    Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
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    51 min ago
  • Post by Narendra Kumar
    1
    Post by Narendra Kumar
    user_Narendra Kumar
    Narendra Kumar
    कुरहनी, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    1 hr ago
  • बाबू बीर कुंवर सिंह जयंती समारोह नरोत्तम मिश्रा मेमोरियल कॉलेज नरवारा शिवहर
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    बाबू बीर कुंवर सिंह जयंती समारोह नरोत्तम मिश्रा मेमोरियल कॉलेज नरवारा शिवहर
    user_NK (पत्रकार)
    NK (पत्रकार)
    समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    3 hrs ago
  • आठ नीले ड्रम में छिपा रखा था शराब , समस्तीपुर में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, गाछी से 400 बोतल विदेशी शराब बरामद, तस्कर फरार, पहचान के बाद गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी । एंकर :बिहार में शराबबंदी दशकों बीत जाने के बावजूद शराब तस्कर का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है ।शराब तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल से सामने आया है,जहां शराब को छिपाने के लिए आठ नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया।हथौड़ी थाना क्षेत्र के मननपुर वार्ड संख्या-14 स्थित एक गाछी में उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम को मौके पर रखे आठ बड़े नीले ड्रम संदिग्ध लगे। जब ड्रम की जांच की गई तो उसमें छिपाकर रखी गई करीब 400 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई।उत्पाद अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तस्करों ने शराब को छिपाने के लिए ड्रम का सहारा लिया था, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।हालांकि छापेमारी के दौरान मुख्य कारोबारी मौके से फरार हो गया, लेकिन उसकी पहचान कर ली गई है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।इस घटना से साफ है कि शराब तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से हटकर नए तरीकों—जैसे ड्रम में छिपाकर भंडारण—का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन भी ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। बाइट:मनोज कुमार सिंह, उत्पाद अधीक्षक समस्तीपुर
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    आठ नीले ड्रम में छिपा रखा था शराब , समस्तीपुर में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, गाछी से 400 बोतल विदेशी शराब बरामद, तस्कर फरार, पहचान के बाद गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी ।
एंकर :बिहार में शराबबंदी दशकों बीत जाने के बावजूद शराब तस्कर का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है ।शराब तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल से सामने आया है,जहां शराब को छिपाने के लिए आठ नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया।हथौड़ी थाना क्षेत्र के मननपुर वार्ड संख्या-14 स्थित एक गाछी में उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम को मौके पर रखे आठ बड़े नीले ड्रम संदिग्ध लगे। जब ड्रम की जांच की गई तो उसमें छिपाकर रखी गई करीब 400 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई।उत्पाद अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तस्करों ने शराब को छिपाने के लिए ड्रम का सहारा लिया था, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।हालांकि छापेमारी के दौरान मुख्य कारोबारी मौके से फरार हो गया, लेकिन उसकी पहचान कर ली गई है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।इस घटना से साफ है कि शराब तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से हटकर नए तरीकों—जैसे ड्रम में छिपाकर भंडारण—का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन भी ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
बाइट:मनोज कुमार सिंह, उत्पाद अधीक्षक समस्तीपुर
    user_Mritunjay Kumar Thakur
    Mritunjay Kumar Thakur
    समस्तीपुर पत्रकार समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    9 hrs ago
  • time tum rakho aur dhamaka ham karenge #ahiranbittuboss
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    time tum rakho aur dhamaka ham karenge #ahiranbittuboss
    user_Ahiran bittu boss
    Ahiran bittu boss
    Chehra Kalan, Vaishali•
    11 hrs ago
  • Post by Vaanishree News
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    Post by Vaanishree News
    user_Vaanishree News
    Vaanishree News
    Newspaper publisher Jandaha, Vaishali•
    1 day ago
  • Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
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    Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Samastipur, Bihar•
    1 hr ago
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