बंगाल हिंसा पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी का हमला। एंकर विजय चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार मैं बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूं - बंगाल की सरकार और सरकार की मुखिया हिंसक वारदातों के लिए ही जानी जाती है। जब बंगाल में चुनाव आयोग के पदाधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, जब उनको भी नहीं छोड़ा गया, तो आप समझ सकते हैं कि आम जनता की क्या स्थिति होगी। फिर हिंसा होना कौन सी बड़ी बात रह जाती है? तृणमूल कांग्रेस का इतिहास उठाकर देख लीजिए। TMC हिंसा के लिए ही जानी जाती है। चुनाव हो, पंचायत हो, या कोई और मसला हो - इनका एक ही तरीका है: डर और हिंसा। मुर्शिदाबाद की घटना हो या उत्तर 24 परगना की, हर जगह पैटर्न एक ही है। कानून-व्यवस्था नाम की चीज बंगाल में बची ही नहीं है। लेकिन ममता बनर्जी कहती हैं कि BJP अशांति फैला रही है? देखिए, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। जिनके राज में राज्यपाल को खुद हिंसा प्रभावित इलाकों में जाना पड़े, हाईकोर्ट को केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश देना पड़े, वो दूसरों पर आरोप लगाएंगे? हमारी मांग है कि केंद्र सरकार इस पर संज्ञान ले। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
बंगाल हिंसा पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी का हमला। एंकर विजय चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार मैं बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूं - बंगाल की सरकार और सरकार की मुखिया हिंसक वारदातों के लिए ही जानी जाती है। जब बंगाल में चुनाव आयोग के पदाधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, जब उनको भी नहीं छोड़ा गया, तो आप समझ सकते हैं कि आम जनता की क्या स्थिति होगी। फिर हिंसा होना कौन सी बड़ी बात रह जाती है? तृणमूल कांग्रेस का इतिहास उठाकर देख लीजिए। TMC हिंसा के लिए ही जानी जाती है। चुनाव हो, पंचायत हो, या कोई और मसला हो - इनका एक ही तरीका है: डर और हिंसा। मुर्शिदाबाद की घटना हो या उत्तर 24 परगना की, हर जगह पैटर्न एक ही है। कानून-व्यवस्था नाम की चीज बंगाल में बची ही नहीं है। लेकिन ममता बनर्जी कहती हैं कि BJP अशांति फैला रही है? देखिए, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। जिनके राज में राज्यपाल को खुद हिंसा प्रभावित इलाकों में जाना पड़े, हाईकोर्ट को केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश देना पड़े, वो दूसरों पर आरोप लगाएंगे? हमारी मांग है कि केंद्र सरकार इस पर संज्ञान ले। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
- समस्तीपुर से आ रही है जहां बदमाशो ने रात के अंधेरे में कैनरा बैंक के एटीएम को अपना निशाना बनाया है ।बदमाशो ने कटर मशीन से एटीएम को काट कर उसमें रखे 2 लाख 11 हज़ार रुपये लूटकर फरार हो गया।एटीएम में चोरी की वारदात का तब पता चला जब गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे उस एटीएम में बैंक के अधिकारी पैसा डालने आये।वही इस घटना से पूरे छेत्र में पुलिस गश्ती पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है और एटीएम में गॉर्ड के तैनाती पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।हालांकि पुलिस को इस घटना की जानकारी होते ही एसपी अरविंद प्रताप सिंह के साथ साथ सदर एसडीपीओ संजय कुमार पांडेय और बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुच कर मामले की जांच में जुट गई है और एटीएम और आस पास लगे सीसीटीवी को भी खंगाला जा रहा है मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर रोड की है।जिस जगह पर यह एटीएम था वह समस्तीपुर-मुसरीघरारी मुख्य सड़क है जहां हर मिनट सैकड़ो वाहनों का आवागमन रहता है।आसपास भी भी कई बैंक और आभूषण के बड़े बड़े प्रतिष्ठान भी है इसके बावजूद एटीएम में तो सुरक्षा बंदोस्त नही ही था स्थानीय पुलिस की भी गश्ती नही थी जिसकी वजह से अपराधियों ने आराम से एटीएम मशीन को काटकर रुपए की लूट कर ली और आराम से निकल भी गए फिर भी किसी को भी घटना की भनक तक नही लग सकी।इस घटना ने पुलिसिया व्यवस्था की पोल खोलकर रख दिया है।1
- Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur1
- बाबू बीर कुंवर सिंह जयंती समारोह नरोत्तम मिश्रा मेमोरियल कॉलेज नरवारा शिवहर1
- आठ नीले ड्रम में छिपा रखा था शराब , समस्तीपुर में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, गाछी से 400 बोतल विदेशी शराब बरामद, तस्कर फरार, पहचान के बाद गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी । एंकर :बिहार में शराबबंदी दशकों बीत जाने के बावजूद शराब तस्कर का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है ।शराब तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल से सामने आया है,जहां शराब को छिपाने के लिए आठ नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया।हथौड़ी थाना क्षेत्र के मननपुर वार्ड संख्या-14 स्थित एक गाछी में उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम को मौके पर रखे आठ बड़े नीले ड्रम संदिग्ध लगे। जब ड्रम की जांच की गई तो उसमें छिपाकर रखी गई करीब 400 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई।उत्पाद अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तस्करों ने शराब को छिपाने के लिए ड्रम का सहारा लिया था, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।हालांकि छापेमारी के दौरान मुख्य कारोबारी मौके से फरार हो गया, लेकिन उसकी पहचान कर ली गई है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।इस घटना से साफ है कि शराब तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से हटकर नए तरीकों—जैसे ड्रम में छिपाकर भंडारण—का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन भी ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। बाइट:मनोज कुमार सिंह, उत्पाद अधीक्षक समस्तीपुर1
- Post by Deepak kumar Jha1
- दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय इन दिनों गंभीर विवाद और प्रशासनिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है — विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति या फिर व्यवस्था की धीमी कार्यशैली? मंगलवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उस समय अभूतपूर्व स्थिति बन गई, जब दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान के नेतृत्व में कर्मचारियों और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सिंडिकेट के सदस्यों और कुलपति लक्ष्मी निवास पांडे को अंदर जाने से रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी — डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया जाए कर्मचारियों के लंबित वेतन और पेंशन का जल्द भुगतान किया जाए मौके पर मौजूद बेनीपुर विधायक और सिंडिकेट सदस्य विनय कुमार चौधरी, पूर्व एमएलसी दिलीप चौधरी और सदस्य अजीत चौधरी ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि वरीयता के आधार पर नियुक्ति में देरी और कर्मचारियों के भुगतान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार सड़क पर ही सिंडिकेट की बैठक करनी पड़ी। इसी बैठक में त्वरित निर्णय लेते हुए डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बन गई। इसके साथ ही कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का भी आश्वासन दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नगर विधायक संजय सरावगी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। वहीं दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान उर्फ गुरुजी ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए सभी समर्थकों का आभार जताया। इस पूरे विवाद में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती दिख रही है: समय पर निर्णय नहीं लेने और वेतन-पेंशन जैसी मूल समस्याओं को लंबित रखने का आरोप कुलपति की भूमिका नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण फैसलों में देरी और दबाव के बाद त्वरित निर्णय सड़क पर बैठक और जनदबाव के बाद फैसला — यह संस्थागत प्रक्रिया पर प्रश्न खड़ा करता है यह घटना केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। अगर समय रहते समस्याओं का समाधान किया जाता, तो शायद सड़क पर बैठक की नौबत नहीं आती।1
- प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु की मौत, परिजनों ने किया, समस्तीपुर हाजीपुर मुख्य मार्ग पर मगरू चौक जाम.1
- Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur1