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नवोदय रिजल्ट सामान समारोह सुपौल जिला बिहार।। शिक्षक बच्चों का मनोबल बढ़ाया
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नवोदय रिजल्ट सामान समारोह सुपौल जिला बिहार।। शिक्षक बच्चों का मनोबल बढ़ाया
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- इफ्तार पार्टी में दिखी एकता की मिसाल, ह्यूमन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी ने दिया भाईचारे का संदेश1
- सुपौल। जिलाधिकारी, सुपौल की अध्यक्षता एवं उप विकास आयुक्त, सुपौल की उपस्थिति में शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक की गई। जिसमें विभिन्न संभाग जैसे निजी विद्यालय में नामांकन, निजी विद्यालय का प्रस्वीकृक्ति एवं नवीनीकरण, विद्यालय को विभिन्न मद में दी गई राशि के व्यय, शिक्षा विभाग के नशामुक्ति, गर्ल्स एडोलेसेंट (माहवारी की जानकारी) कस्तुरबा विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति, छात्रावास में हो रहे असैनिक निर्माण कार्य, आंगनबाड़ी विद्यालय में बालमेला, ट्यूनिंग ऑफ स्कूल, असैनिक निर्माण कार्य इत्यादि की समीक्षा की गई। समीक्षा में निम्न निदेश दिये गये :- 1. कस्तुरबा आवासीय विद्यालय में नामांकन की तुलना में कम उपस्थिति के लिए विशेष अभियान चलाने का निदेश दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी रिक्त सीट को भरने का निदेश दिया गया। कस्तुरबा छात्रावास में मरम्मति कार्य की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी द्वारा निदेश दिया गया कि अविलंब गुणवत्तापूर्ण कार्य करवाते हुए राशि का सदुपयोग किया जाय। कस्तुरबा आवासीय विद्यालय में व्यय 72.5 प्रतिशत है। सुपौल, राघोपुर का व्यय कम है इस पर चिंता व्यक्त की गई तथा आवश्यक निदेश दिया गया। 2. निजी विद्यालय द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर 121 बच्चे का नामांकन नहीं लिया गया है जबकि 13 बच्च्चे को रिजेक्ट कर दिया गया है इस पर जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। राधेश्याम पब्लिक स्कूल, सुपौल के द्वारा बच्च्चे के नामांकन में मौखिक परीक्षा लेने की सूचना प्राप्त होने पर जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा निदेश दिया गया कि ऐसे विद्यालय को चिन्हित कर उसकी प्रस्वीकृति को रदद कर दिया जाय। 45 निजी विद्यालय के अपनी इन्टेक कैपेसिटि नहीं भरने के कारण इन सभी विद्यालय के मान्यता को रद्द करने का निदेश दिया गया। 3. 190 विद्यालय को ट्यूनिंग ऑफ स्कूल के तहत दस हजार की राशि प्रति विद्यालय दी गई है। अब तक मात्र 68 विद्यालय के द्वारा राशि का व्यय किया गया है। जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा उप विकास आयुक्त, सुपौल एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल को विद्यालय के व्यय का जांच करने कार्यक्रम के संबंध में बच्चों का फीडबैक लेने का निदेश दिया गया। 4. समग्र विद्यालय अनुदान, खेल मद में दी गई राशि, सी०आर०सी० को दी गई राशि के व्यय की स्थिति असंतोषजनक है, खेल मद में मात्र 07 प्रतिशत की निकासी की गई। जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा सभी विद्यालय के खेल सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने का निदेश दिया गया। जो भी विद्यालय अब तक व्यय नहीं किये हैं। वे अविलंब गुणवत्तापूर्ण सामग्री का क्रय करेंगे। 5. असैनिक निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा 12 के भवन के निर्माण इसकी गुणवत्ता की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा कई विद्यालयों में लाल ईंट, फलाईएश ईंट की गुणवत्ता को अच्छे तरीके से जांच करने, निर्माण स्थल पर पानी का छिड़काव करने, कोटा स्टोन की पॉलिसिंग, छत की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया गया। यदि किसी निर्माण स्थल पर गैर गुणवत्तापूर्ण की सामग्री का उपयोग को देखा गया तो संबंधित संवेदक से दण्डसवरूप राशि की कटौती कर दी जायेगी। 6. जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा सभी निर्माण स्थल पर बार्ड लगाते हुए जिले का एक सम्पर्क संख्या भी आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया जिससे कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्य की शिकायत जिला से कर सके। 7. जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा समीक्षा बैठक में बच्चों के पठन पाठन, लर्निंग आउट कम, का पी०पी०टी० नहीं रहने पर नाराजगी व्यक्त की गई तथा निदेश दिया गया कि अगले बैठक में इस विषय पर पी०पी०टी० तैयार कर शमिल किया जाय।1
- जमीनी विवाद को लेकर पीड़ित परिवार ने सुपौल थाना में महीना पहले आवेदन देने के बाद भी सुपौल थाना के द्वारा कार्रवाई नहीं करने के कारण परेशान पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री एवं अन्य पदाधिकारी को भी स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन भेजा है लेकिन महीना बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार काफी ज्यादा परेशान है1
- सुपौल में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल,सदर थाना पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन।2
- नवहट्टा प्रखंड अंतर्गत डरहार पंचायत में इन दिनों मनरेगा का भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। पंचायत में भारी मात्रा में फसल सुरक्षा बांध के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया है। मुखिया और रोजगार सेवक के मिलीभगत से लाखों रुपए की लूट खसोट की गई आवेदन देने के बाद भी जिम्मेदार पदाधिकारी।अभी तक जांच को नहीं आए है1
- सहरसा (नौहट्टा): बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय योजना' के तहत 'हर घर नल का जल' पहुँचाने का दावा सहरसा के नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मुरादपुर पंचायत में पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। मुरादपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 सहित पूरी पंचायत में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे ग्रामीणों के बीच हाहाकार मचा हुआ है। 19 में से 17 टंकियां सफेद हाथी साबित पंचायत के आंकड़ों पर गौर करें तो यहाँ कुल 19 पानी की टंकियां स्थापित की गई थीं। लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि इनमें से केवल एक टंकी किसी तरह चल रही है, जबकि शेष 18 टंकियां देखरेख के अभाव में शोपीस बनकर रह गई हैं। जो एक टंकी चालू है, उसकी स्थिति भी बेहद जर्जर है। मरम्मत के नाम पर सामान ले उड़े मुंशी ग्रामीणों ने ठेकेदार और विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नारायण कामत, गणेशी ठाकुर, छोटू मुखिया, नको देवी, राहुल देवी और लाखों देवी ने बताया कि एकमात्र चालू टंकी की स्थिति सुधारने के नाम पर मुंशी यहाँ से केमिकल मशीन लेकर गया था, जो आज तक वापस नहीं आई। इसके अलावा बोरिंग पाइप भी लंबे समय से टूटा हुआ है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। 6 साल से वेतन को तरस रहा ऑपरेटर योजना की विफलता का एक बड़ा कारण कर्मियों का शोषण भी है। पंप संचालक बैजनाथ कामत ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि ठेकेदार ने पिछले 6 वर्षों से उन्हें मानदेय (वेतन) का भुगतान नहीं किया है। बिना वेतन के परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए दूभर हो गया है। संचालक का कहना है कि जब वे शिकायत करते हैं, तो आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता। शिकायतों पर मौन साधे बैठा विभाग ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकारी टोल-फ्री नंबर पर अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं और विभाग के कनीय अभियंता (JE) को भी फोन पर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार के मुंशी मरम्मत का झांसा देकर कीमती सामान निकाल ले जाते हैं और फिर वापस नहीं लौटते। "हम शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और ठेकेदार की मनमानी चरम पर है। अगर जल्द व्यवस्था ठीक नहीं हुई, तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।" — ग्रामीण, मुरादपुर पंचायत वर्तमान में भीषण गर्मी की आहट के बीच पानी की यह किल्लत मुरादपुर पंचायत के लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब संज्ञान लेता है।1
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