उत्तरकाशी. डुंडा रेंज के जंगलो में भीषण अग्नि. राजकीय उद्यान विभाग ने खुद संभाला वन विभाग का मोर्चा. डुंडा रेंज के राजकीय उद्यान विभाग जिसे (पेड़ पौधों )कि नर्सिंरी कहा जाता है. उसी रास्ते पर ऊपरी क्षेत्र पर जखारी व बल्ला गाँव व निचले क्षेत्र पर बांसुबाड़ा का क्षेत्र पड़ता है. ये सभी वन विभाग के डुंडा क्षेत्र मे पड़ता है.जिसमे अत्यधिक अग्नि लगने से आस पास के ग्रामीण अत्यधिक परेशान दिख रहे है बात करे डुंडा रेंज वन विभाग कि तो उनके निकट क्षेत्र मे राजकीय उद्यान विभाग का क्षेत्र पड़ता है. वहीं धुएँ धार आग लगने के कारण पुरे क्षेत्र मे अग्नि फैलने से राजकीय उद्यान विभाग के क्षेत्र मे अग्नि फैलने कि संम्भावना देखने को मिल रही थी. समय रहते स्वयं राजकीय उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने अपने क्षेत्र कि अग्नि को बजाने का प्रयास किया. यह अग्नि डुंडा रेंज मे धीरे धीरे फैलने के संबंध मे वन अधिकारियो से सम्पर्क करने कि कोशिश कि गईं. तो किसी अधिकारी ने इस संबंध में फोन उठाने कि कोई इच्छा नहीं रखी. सर्वप्रथम DFO DP बलोनी उत्तरकाशी, डुंडा रेंजर पूजा चौहान से इस संबंध में पूछने का प्रयास किया गया. कि यह अग्नि नजदीकी क्षेत्र जिसमे फारेस्ट रेंज का क्षेत्र पड़ता है. इसमें कोई जबाब नहीं दिया गया. साथ ही SDO सुनील बलूनी से इस संबंध में वार्ता कि गईं तो उन्होंने इस संबंध के बारे में कोई जानकारी का अभाब बताते हुए कहा कि मुझे इस संबंध में कोई जारी उपलब्ध नहीं है.
उत्तरकाशी. डुंडा रेंज के जंगलो में भीषण अग्नि. राजकीय उद्यान विभाग ने खुद संभाला वन विभाग का मोर्चा. डुंडा रेंज के राजकीय उद्यान विभाग जिसे (पेड़ पौधों )कि नर्सिंरी कहा जाता है. उसी रास्ते पर ऊपरी क्षेत्र पर जखारी व बल्ला गाँव व निचले क्षेत्र पर बांसुबाड़ा का क्षेत्र पड़ता है. ये सभी वन विभाग के डुंडा क्षेत्र मे पड़ता है.जिसमे
अत्यधिक अग्नि लगने से आस पास के ग्रामीण अत्यधिक परेशान दिख रहे है बात करे डुंडा रेंज वन विभाग कि तो उनके निकट क्षेत्र मे राजकीय उद्यान विभाग का क्षेत्र पड़ता है. वहीं धुएँ धार आग लगने के कारण पुरे क्षेत्र मे अग्नि फैलने से राजकीय उद्यान विभाग के क्षेत्र मे अग्नि फैलने कि संम्भावना देखने को मिल रही थी. समय
रहते स्वयं राजकीय उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने अपने क्षेत्र कि अग्नि को बजाने का प्रयास किया. यह अग्नि डुंडा रेंज मे धीरे धीरे फैलने के संबंध मे वन अधिकारियो से सम्पर्क करने कि कोशिश कि गईं. तो किसी अधिकारी ने इस संबंध में फोन उठाने कि कोई इच्छा नहीं रखी. सर्वप्रथम DFO DP बलोनी उत्तरकाशी, डुंडा रेंजर पूजा चौहान से इस
संबंध में पूछने का प्रयास किया गया. कि यह अग्नि नजदीकी क्षेत्र जिसमे फारेस्ट रेंज का क्षेत्र पड़ता है. इसमें कोई जबाब नहीं दिया गया. साथ ही SDO सुनील बलूनी से इस संबंध में वार्ता कि गईं तो उन्होंने इस संबंध के बारे में कोई जानकारी का अभाब बताते हुए कहा कि मुझे इस संबंध में कोई जारी उपलब्ध नहीं है.
- डुंडा रेंज के राजकीय उद्यान विभाग जिसे (पेड़ पौधों )कि नर्सिंरी कहा जाता है. उसी रास्ते पर ऊपरी क्षेत्र पर जखारी व बल्ला गाँव व निचले क्षेत्र पर बांसुबाड़ा का क्षेत्र पड़ता है. ये सभी वन विभाग के डुंडा क्षेत्र मे पड़ता है.जिसमे अत्यधिक अग्नि लगने से आस पास के ग्रामीण अत्यधिक परेशान दिख रहे है बात करे डुंडा रेंज वन विभाग कि तो उनके निकट क्षेत्र मे राजकीय उद्यान विभाग का क्षेत्र पड़ता है. वहीं धुएँ धार आग लगने के कारण पुरे क्षेत्र मे अग्नि फैलने से राजकीय उद्यान विभाग के क्षेत्र मे अग्नि फैलने कि संम्भावना देखने को मिल रही थी. समय रहते स्वयं राजकीय उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने अपने क्षेत्र कि अग्नि को बजाने का प्रयास किया. यह अग्नि डुंडा रेंज मे धीरे धीरे फैलने के संबंध मे वन अधिकारियो से सम्पर्क करने कि कोशिश कि गईं. तो किसी अधिकारी ने इस संबंध में फोन उठाने कि कोई इच्छा नहीं रखी. सर्वप्रथम DFO DP बलोनी उत्तरकाशी, डुंडा रेंजर पूजा चौहान से इस संबंध में पूछने का प्रयास किया गया. कि यह अग्नि नजदीकी क्षेत्र जिसमे फारेस्ट रेंज का क्षेत्र पड़ता है. इसमें कोई जबाब नहीं दिया गया. साथ ही SDO सुनील बलूनी से इस संबंध में वार्ता कि गईं तो उन्होंने इस संबंध के बारे में कोई जानकारी का अभाब बताते हुए कहा कि मुझे इस संबंध में कोई जारी उपलब्ध नहीं है.4
- आज अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। शुभ लग्नानुसार दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कपाटोद्घाटन हुआ, जिसके साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ भी हो गया। कपाट खुलने के बाद अब आगामी छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे। अक्षय तृतीया के अवसर पर सुबह मां यमुना की शीतकालीन गद्दी स्थल खुशीमठ (खरसाली) से पारंपरिक विधि-विधान के साथ डोली यात्रा प्रारंभ हुई। शनिदेव की डोली की अगुवाई में सुबह साढ़े आठ बजे मां यमुना की डोली यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने भव्य ढंग से मां यमुना को विदाई दी। पूरे यमुनोत्री धाम क्षेत्र पारंपरिक वाद्य यंत्रों व आईटीबीपी देहरादून के बैंड की धुन से गुंजायमान रहा तथा मां यमुना के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। खुशीमठ से प्रस्थान करने के बाद डोली यात्रा यमुनोत्री धाम पहुंची, जहां हवन-पूजन एवं विधिवत अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:35 बजे परंपरा अनुसार कपाट खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कपाट खुलने के साथ ही यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है और पूरे क्षेत्र में आस्था व उत्साह का माहौल बना हुआ है।2
- Post by Rajkumar mehra press reporter1
- ब्रेकिंग हरिद्वार। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड होगा भंग। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ऐलान। आगामी सत्र से उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम होगा लागू। उत्तराखंड में नहीं चलेगा मदरसा बोर्ड का पाठ्यक्रम - मुख्यमंत्री नहीं मानने वाले मदरसे बंद किए जाएंगे - मुख्यमंत्री हरिद्वार में संतों के बीच बोले मुख्यमंत्री1
- The Aman Times डोईवाला में आबादी क्षेत्र में आया हाथी। डोईवाला नगर पालिका के वार्ड नंबर 19 चांदमारी में दी रात को एक विशाल हाथी मस्जिद के पास अतीक मास्टर की गली में आ गया। क्योंकि हाथी देर रात को गली में था तो लोगों को सुबह सीसीटीवी कैमरे से पता चला कि गली में हाथी था। घटना की शिकायत लोगों ने लच्छी वाला वन विभाग से की जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी गस्त की बात कर रहे है। और लोगों से सावधानी बरतने की अपील भी कर रहे हैं।1
- Post by योगेश शर्माजी1
- ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से अक्षय आस्था का उदय: गंगा–यमुना के कपाट खुले, हिमालय में गूंजा “हर-हर गंगे” अक्षय तृतीया पर दिव्यता का अवतरण, चारधाम यात्रा का हुआ भव्य शुभारंभ उत्तराखंड। सनातन आस्था के स्वर्णिम पर्व अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आज देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी आंचल में स्थित गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भक्ति के दिव्य वातावरण में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही दोपहर 12:15 बजे गंगोत्री और 12:35 बजे यमुनोत्री के कपाट खुले, पूरा हिमालय “हर-हर गंगे” और “जय मां यमुना” के जयघोष से गूंज उठा। यह केवल कपाट खुलने का क्षण नहीं था, बल्कि सदियों पुरानी आस्था के पुनर्जागरण का जीवंत साक्ष्य था। हिमालय की गोद में उतरी आस्था की गंगा हिमालय की बर्फीली चोटियों से उतरती पवित्र भागीरथी नदी के तट पर बसे गंगोत्री धाम में आज हर ओर भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। मां गंगा की एक झलक पाने को व्याकुल श्रद्धालुओं की आंखों में श्रद्धा, हृदय में विश्वास और आत्मा में दिव्यता का संचार स्पष्ट दिखाई दिया। यह वही पावन धरा है जहां से गंगा नदी की अविरल धारा संपूर्ण भारत को जीवन और मोक्ष का संदेश देती है। आज का दिन इस दिव्य प्रवाह के पुनः जागरण का प्रतीक बन गया। डोलियों के साथ भावनाओं का महासंगम खरसाली से मां यमुना की दिव्य डोली अपने भ्राता शनिदेव की अगुवाई में भावभीनी विदाई के साथ यमुनोत्री धाम की ओर रवाना हुई। लोक देवताओं की डोलियां, ग्रामीणों की आस्था और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को एक अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित कर दिया। वहीं गंगोत्री में मां गंगा की उत्सव डोली भैरव मंदिर से प्रस्थान कर जैसे ही धाम पहुंची, पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री ने की मां गंगा की पूजा, देश की समृद्धि की कामना प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं गंगोत्री धाम पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना कर अखंड ज्योति के दर्शन किए। उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि यह केवल कपाट खुलने का दिन नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दिव्य पर्व है। चारधाम यात्रा: आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा चारधाम यात्रा का यह शुभारंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को पवित्र करने और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का अद्वितीय अवसर है। जब श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं, तो उनके चेहरे पर जो शांति और संतोष झलकता है—वही इस यात्रा का वास्तविक प्रसाद है। जहां गंगा, वहीं जीवन… जहां आस्था, वहीं ईश्वर आज हिमालय फिर साक्षी बना है उस अटूट विश्वास का, जो युगों से भारतीय संस्कृति की आत्मा में प्रवाहित हो रहा है। हिमालय की वादियों में गूंजते मंत्र, बहती गंगा की धारा और श्रद्धालुओं की आस्था ने यह सिद्ध कर दिया— 👉 गंगा केवल नदी नहीं, जीवन है… 👉 आस्था केवल भावना नहीं, सनातन की आत्मा है… चारधाम यात्रा–2026 का यह शुभारंभ, भारत की आध्यात्मिक शक्ति का एक और दिव्य उद्घोष बन गया है।4
- Post by Rajkumar mehra press reporter1