मुख्यमंत्री निराश्रित-बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना से पशुपालकों को मिल रहा सहारा प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री निराश्रित-बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश को पालने वाले पशुपालकों और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को प्रति गोवंश निर्धारित राशि प्रतिमाह दी जाती है, जिससे उनके पालन-पोषण, चारा एवं चिकित्सा की व्यवस्था सुगम हो सके। इससे न केवल गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि सरकार की इस पहल से उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है और निराश्रित गोवंश की समस्या में भी कमी आई है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और ग्रामीण विकास को गति देना है।
मुख्यमंत्री निराश्रित-बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना से पशुपालकों को मिल रहा सहारा प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री निराश्रित-बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश को पालने वाले पशुपालकों और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को प्रति गोवंश निर्धारित राशि प्रतिमाह दी जाती है, जिससे उनके पालन-पोषण, चारा एवं चिकित्सा की व्यवस्था सुगम हो सके। इससे न केवल गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि सरकार की इस पहल से उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है और निराश्रित गोवंश की समस्या में भी कमी आई है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और ग्रामीण विकास को गति देना है।
- गंधक अरु लोभान में, डालो मित्र कपूर। बाधो शिशु के कंठ में, रोग-दोष हो दूर।।1
- Alampur station road per Sant Joseph School ke pass nal laga hua hai jiski halat bahut kharab hai kam se kam 4 sal Se Koi nal ki CC karne ke liye nahin a Raha jisse Charon taraf Pani fail raha hai aur gandgi bhi fail rahi hai bacche aur budhe road per Naha rahe hain Mera anurodh hai ki jald se jald iski CC karva De1
- Post by राजीव कुमार3
- जालौन में नगरपालिका के दबंग सभासदों की दबंगई आई सामने1
- देखिए मजेदार जमीन स्तर की खबर हमारे साथ। अगर हमारी खबर अच्छी लगे तो हमें लाइक कमेंट और फॉलो जरूर करें1
- राठ में एक दहेज से भरी पिकअप में आग लग गई, जिससे करीब 3 लाख रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। अलकछवा-खजली की रहने वाली वर्षा ठाकुर की शादी शारदा पैलेस में संपन्न हुई थी, और दहेज का सामान पिकअप में भरकर ले जाया जा रहा था, तभी अचानक आग भड़क उठी। आग लगने से अलमारी, सोफा, टीवी, फ्रिज, कूलर, आटा-दाल समेत सारा सामान जलकर राख हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास में जल रही चिंगारी से आग पिकअप तक पहुंची, जिससे यह बड़ा हादसा हो गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन परिवार को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। जानकारी के मुताबिक 👇👇👇👇 गाड़ी मालिक सुनील कुमार S/O श्याम बाबू हरसुंडी रिर्पोट निर्दोष राजपूत1
- बांदा कमासिन ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुडवारा की तस्वीर एक ऐसी विडंबना को उजागर करती है, जो हमारे प्राथमिक शिक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है। विद्यालय प्रतिदिन समय से खुलता है—रसोइया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ताला खोल देता है—लेकिन जिन कंधों पर शिक्षा का दायित्व है, वे अध्यापक समयपालन के मूलभूत सिद्धांत से ही विमुख दिखाई देते हैं। यह केवल देरी का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के क्षरण का संकेत है। जिन बच्चों के लिए विद्यालय अनुशासन, ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र होना चाहिए, वहां उन्हें शिक्षकों की अनुपस्थिति का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके मन में शिक्षा व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश भी जाता है। और भी चिंताजनक यह है कि व्यवस्था का निचला स्तर—रसोइया—अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद शिक्षक ही अपने कर्तव्यों से पीछे हटते नजर आते हैं। यह असंतुलन शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।यदि समयपालन जैसी बुनियादी अपेक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना कैसे साकार होगी? आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से लें और जवाबदेही तय करते हुए ठोस कदम उठाएं, ताकि विद्यालय केवल भवन न रह जाए, बल्कि वास्तव में शिक्षा और संस्कार का केंद्र बन सके।1
- हमीरपुर जिले के मुस्करा के पहाड़ी गांव में नमामि गंगे योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइनें सूखी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। गांव के लोगों का कहना है कि पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन पानी की सप्लाई आज तक शुरू नहीं हुई। उन्हें चोहड़ों (गड्ढों/तालाबों) का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। सरकार ने इस योजना के लिए भारी भरकम बजट आवंटित किया था, लेकिन परिणाम शून्य है। ग्रामीण पानी के लिए चंदा जुटा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।1