समय से खुलती स्कूल परदेस से आते शिक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल बांदा कमासिन ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुडवारा की तस्वीर एक ऐसी विडंबना को उजागर करती है, जो हमारे प्राथमिक शिक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है। विद्यालय प्रतिदिन समय से खुलता है—रसोइया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ताला खोल देता है—लेकिन जिन कंधों पर शिक्षा का दायित्व है, वे अध्यापक समयपालन के मूलभूत सिद्धांत से ही विमुख दिखाई देते हैं। यह केवल देरी का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के क्षरण का संकेत है। जिन बच्चों के लिए विद्यालय अनुशासन, ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र होना चाहिए, वहां उन्हें शिक्षकों की अनुपस्थिति का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके मन में शिक्षा व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश भी जाता है। और भी चिंताजनक यह है कि व्यवस्था का निचला स्तर—रसोइया—अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद शिक्षक ही अपने कर्तव्यों से पीछे हटते नजर आते हैं। यह असंतुलन शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।यदि समयपालन जैसी बुनियादी अपेक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना कैसे साकार होगी? आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से लें और जवाबदेही तय करते हुए ठोस कदम उठाएं, ताकि विद्यालय केवल भवन न रह जाए, बल्कि वास्तव में शिक्षा और संस्कार का केंद्र बन सके।
समय से खुलती स्कूल परदेस से आते शिक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल बांदा कमासिन ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुडवारा की तस्वीर एक ऐसी विडंबना को उजागर करती है, जो हमारे प्राथमिक शिक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है। विद्यालय प्रतिदिन समय से खुलता है—रसोइया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ताला खोल देता है—लेकिन जिन कंधों पर शिक्षा का दायित्व है, वे अध्यापक समयपालन के मूलभूत सिद्धांत से ही विमुख दिखाई देते हैं। यह केवल देरी का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के क्षरण का संकेत है। जिन बच्चों के लिए विद्यालय अनुशासन, ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र होना चाहिए, वहां उन्हें शिक्षकों की अनुपस्थिति का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके मन में शिक्षा व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश भी जाता है। और भी चिंताजनक यह है कि व्यवस्था का निचला स्तर—रसोइया—अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद शिक्षक ही अपने कर्तव्यों से पीछे हटते नजर आते हैं। यह असंतुलन शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।यदि समयपालन जैसी बुनियादी अपेक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना कैसे साकार होगी? आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से लें और जवाबदेही तय करते हुए ठोस कदम उठाएं, ताकि विद्यालय केवल भवन न रह जाए, बल्कि वास्तव में शिक्षा और संस्कार का केंद्र बन सके।
- बांदा कमासिन ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुडवारा की तस्वीर एक ऐसी विडंबना को उजागर करती है, जो हमारे प्राथमिक शिक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है। विद्यालय प्रतिदिन समय से खुलता है—रसोइया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ताला खोल देता है—लेकिन जिन कंधों पर शिक्षा का दायित्व है, वे अध्यापक समयपालन के मूलभूत सिद्धांत से ही विमुख दिखाई देते हैं। यह केवल देरी का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के क्षरण का संकेत है। जिन बच्चों के लिए विद्यालय अनुशासन, ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र होना चाहिए, वहां उन्हें शिक्षकों की अनुपस्थिति का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके मन में शिक्षा व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश भी जाता है। और भी चिंताजनक यह है कि व्यवस्था का निचला स्तर—रसोइया—अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद शिक्षक ही अपने कर्तव्यों से पीछे हटते नजर आते हैं। यह असंतुलन शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।यदि समयपालन जैसी बुनियादी अपेक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना कैसे साकार होगी? आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से लें और जवाबदेही तय करते हुए ठोस कदम उठाएं, ताकि विद्यालय केवल भवन न रह जाए, बल्कि वास्तव में शिक्षा और संस्कार का केंद्र बन सके।1
- “पत्नी की हत्या के बाद आरोपी ने लगाई फांसी, बबेरू में डबल क्राइम से सनसनी” #बांदा के बबेरू थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है… जहां ग्राम बगेहटा निवासी 48 वर्षीय मुबिन शेख ने 16 अप्रैल को अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी थी… जिसके बाद से आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी थी… वहीं आज 20 अप्रैल को आरोपी मुबिन शेख ने थाना बबेरू क्षेत्र के ग्राम गौरीखानपुर में एक पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली… घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है… पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है… इस पूरे घटनाक्रम पर अपर पुलिस अधीक्षक बांदा ने जानकारी दी है… #BandaNews #Baberu #CrimeNews #UPPolice #BreakingNews #DoubleCrime #Justice #HindiNews #followers #highlightseveryone1
- *बिजली समस्या को दूल्हा बारात लेकर पहुंचा जिलाधिकारी कार्यालय* *बांदा* -बिजली कटी तो दूल्हा बरात लेकर पहुंचा जिलाधिकारी की चौखट दूल्हा सहित बरातियों ने किया जोरदार प्रदर्शन बांदा में स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है। जहां अपनी शादी से पहले बिजली कटने और बढ़े हुए बिल से परेशान एक दूल्हा बारातियों और बैंड-बाजे के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गया। दरअसल बरात और बैंड बाजा लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे दूल्हे कुलदीप ने बताया कि आज उसकी बारात महोबा के खन्ना जा रही थी, लेकिन विद्युत विभाग ने उसके घर की बिजली काट दी। कुलदीप के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिल दोगुना आ रहा है, जिसे चुकाना उसके लिए मुश्किल हो गया है। दुनखे ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि घर में रिश्तेदार मौजूद हैं और ऐसे में बिजली न होने से सभी को दिक्कत हो रही है। कुलदीप ने सवाल उठाया कि वह बिना बिजली के घर में दुल्हन को कैसे लाएगा। इसी समस्या को लेकर उसने जिलाधिकारी कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। इस मामले में बुंदेलखंड इंसाफ सेना के अध्यक्ष नोमानी ने बताया कि बांदा में जगह-जगह प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में बिजली काट दी जाती है और जब लोग बिजली विभाग के कार्यालय जाते हैं, तो उनसे पहले एडवांस बिल भरने को कहा जाता है। नोमानी ने यह भी बताया कि एडवांस बिल भरने के बाद भी कई बार उपभोक्ताओं का अकाउंट माइनस में चला जाता है, जिसके कारण आधी रात में भी बिजली काट दी जाती है। यह समस्या पूरे जिले में व्याप्त है।3
- Post by Shubham Singh1
- मौदहा जनगणना को लेकर अध्यापकों का प्रशिक्षण शुरू ➡️ नगरपालिका के मीटिंग हाल में तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ ➡️ शिक्षकों को डोर-टू-डोर सर्वे व प्रपत्र भरने की दी जा रही जानकारी ➡️ मोबाइल एप के माध्यम से डाटा अपलोड करने का भी प्रशिक्षण ➡️ पहली बैच 22 अप्रैल तक, दूसरी बैच 26 अप्रैल से होगी शुरू ➡️ करीब आधा सैकड़ा शिक्षक प्रशिक्षण में शामिल1
- हो रही जनता के साथ नाइंसाफी के खिलाफ विद्युत विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ नगर के समाज सेवायों के साथ मिलकर समजसेवी अरशद मामा ने दिया उप जिला अधिकारी को ज्ञापन1
- Post by JSB NEWS UP1
- मौदहा नगर में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में अत्यधिक रीडिंग को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। सोमवार को सांसद प्रतिनिधि शादाब हुसैन बिट्टू के नेतृत्व में करीब एक सैकड़ा से अधिक लोगों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। लोगों ने आरोप लगाया कि मीटरों में बेइंतहा रीडिंग आने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। साथ ही बिना सूचना बिजली कटौती की समस्या भी सामने रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने मीटरों की निष्पक्ष जांच कराने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शिविर लगाकर समस्याओं के समाधान की मांग की।1