गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय कानून और मंत्रालय की मांग तेज, प्रधानमंत्री को सौंपा गया निवेदन देशभर के नागरिकों, गो-भक्तों और संत समाज ने गोवंश की सुरक्षा, सम्मान और सेवा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की नरसिंहपुर/ सम्पूर्ण भारत में देशी गोवंश की सुरक्षा, सेवा और राष्ट्रीय सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से देशभर के नागरिकों, गो-भक्तों, कार्यकर्ताओं और संत समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत निवेदन भेजा गया है। इस निवेदन में गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय स्तर पर सख्त कानून बनाने और स्वतंत्र "गो सेवा मंत्रालय" की स्थापना की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है। निवेदन में कहा गया है कि वर्तमान समय में देश में गोवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तस्करी, अवैध वध और सड़कों पर भटकते निराश्रित पशुओं की समस्या लगातार बढ़ रही है, जिससे समाज में आक्रोश और चिंता का माहौल है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की गई है। आवेदन में संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गो-संरक्षण को केवल राज्य विषय तक सीमित रखने के बजाय केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप कर "केंद्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम" लागू करना चाहिए। साथ ही, देशभर में संचालित वधशालाओं पर सख्त कार्रवाई और उनके लाइसेंस निरस्त करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा गोवंश को "राष्ट्रमाता" या "राष्ट्र आराध्या" के रूप में संवैधानिक मान्यता देने, गो तस्करी और वध को गैर-जमानती अपराध घोषित करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई है। निवेदन में गो आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इसमें पंचगव्य आधारित उत्पादों को कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रोत्साहन देने, स्कूलों के मध्याह्न भोजन और धार्मिक स्थलों में देशी गो उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने की बात कही गई है। बुनियादी ढांचे के विकास के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में नंदीशाला और जिला स्तर पर गो अभ्यारण्य स्थापित करने, साथ ही राजमार्गों पर गोवंश के लिए एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में "गो-विज्ञान" को पाठ्यक्रम में शामिल करने और गोचर भूमि संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने की मांग भी उठाई गई है, ताकि गोवंश के लिए पर्याप्त चारा और सुरक्षित चरागाह उपलब्ध हो सके। निवेदन के अंत में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि वे इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र आवश्यक नीतिगत और विधिक निर्णय लें, जिससे गोवंश की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो सके।
गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय कानून और मंत्रालय की मांग तेज, प्रधानमंत्री को सौंपा गया निवेदन देशभर के नागरिकों, गो-भक्तों और संत समाज ने गोवंश की सुरक्षा, सम्मान और सेवा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की नरसिंहपुर/ सम्पूर्ण भारत में देशी गोवंश की सुरक्षा, सेवा और राष्ट्रीय
सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से देशभर के नागरिकों, गो-भक्तों, कार्यकर्ताओं और संत समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत निवेदन भेजा गया है। इस निवेदन में गोवंश संरक्षण के लिए केंद्रीय स्तर पर सख्त कानून बनाने और स्वतंत्र "गो सेवा मंत्रालय" की
स्थापना की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है। निवेदन में कहा गया है कि वर्तमान समय में देश में गोवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तस्करी, अवैध वध और सड़कों पर भटकते निराश्रित पशुओं की समस्या लगातार बढ़ रही है, जिससे समाज में आक्रोश और चिंता
का माहौल है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की गई है। आवेदन में संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गो-संरक्षण को केवल राज्य विषय तक सीमित रखने के बजाय केंद्र सरकार
को इसमें हस्तक्षेप कर "केंद्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम" लागू करना चाहिए। साथ ही, देशभर में संचालित वधशालाओं पर सख्त कार्रवाई और उनके लाइसेंस निरस्त करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा गोवंश को "राष्ट्रमाता" या "राष्ट्र आराध्या" के रूप में संवैधानिक मान्यता देने,
गो तस्करी और वध को गैर-जमानती अपराध घोषित करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई है। निवेदन में गो आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इसमें पंचगव्य आधारित उत्पादों को कृषि
और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रोत्साहन देने, स्कूलों के मध्याह्न भोजन और धार्मिक स्थलों में देशी गो उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने की बात कही गई है। बुनियादी ढांचे के विकास के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में नंदीशाला और जिला स्तर पर गो अभ्यारण्य स्थापित करने, साथ ही
राजमार्गों पर गोवंश के लिए एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में "गो-विज्ञान" को पाठ्यक्रम में शामिल करने और गोचर भूमि संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने की मांग भी उठाई गई है, ताकि गोवंश के लिए
पर्याप्त चारा और सुरक्षित चरागाह उपलब्ध हो सके। निवेदन के अंत में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि वे इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र आवश्यक नीतिगत और विधिक निर्णय लें, जिससे गोवंश की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो सके।
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- तहसील गाडरवारा प्रवीण राजपूत गाडरवारा में दर्दनाक सड़क हादसे के बाद लोगों का आक्रोश भड़क उठा। हादसे में दो लोगों की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए बीच चौराहे पर मृत शव को जलाने का प्रयास किया, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि शहर के कांच मंदिर के पास खड़े एक डंपर से टकराकर भूरा यादव और ओ.पी. ममार की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने आमगांव तिराहे पर चक्का जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। लोगों की मांग थी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश देने का प्रयास किया। बीच चौराहे पर शव जलाने की कोशिश से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल प्रशासन मामले को शांत कराने में जुटा है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर कब सख्ती होगी, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों।1
- Post by मनोज नौरिया9
- station Ganj rosra ki halat hai1
- सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल गाडरवारा गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम 1
- समर कैंप' नहीं, यह 'संस्कार कैंप': 15 साल के नन्हे पथिक, गुरु के साथ निकले 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर नर्सिंगपुर। जहाँ आज की पीढ़ी गर्मी की छुट्टियों में महंगे समर कैंपों में स्विमिंग, पेंटिंग और गैजेट्स के बीच अपना समय बिताती है, वहीं 15 साल की उम्र के 7 बच्चों ने एक ऐसा मार्ग चुना है जो उनके भविष्य की नींव को 'संस्कारों' से सींच रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में लाठी और पैरों में छाले लिए ये नन्हे पथिक अपने गुरु के सानिध्य में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। 45 डिग्री की तपती दोपहरी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और मीलों का सफर—ये बच्चे किसी सुख-सुविधा की तलाश में नहीं, बल्कि 'मैया' की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह एसी-कूलर के कमरों में नहीं मिलती। 'नर्मदे हर' के जयकारे के साथ कदम-दर-कदम बढ़ती यह यात्रा केवल परिक्रमा नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है, जिसे इन बच्चों ने स्वेच्छा से चुना है। आमतौर पर लोग जीवन की भागदौड़ के बाद रिटायरमेंट के समय चार धाम की यात्रा का संकल्प लेते हैं, लेकिन इन बच्चों ने 15 साल की कच्ची उम्र में ही 3000 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लेकर सबको हैरान कर दिया है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा दादा महाराज मंदिर होते हुए अब माँ के तटों के साथ-साथ आगे बढ़ रही है। सोच बदल दी इन नन्हे पथिकों ने इन बच्चों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। जहाँ हम और आप गर्मियों की छुट्टियों में शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों का सपना देखते हैं, वहीं इन बच्चों ने भौतिक सुखों को त्यागकर माँ नर्मदा के दर्शन और उनके प्रति कृतज्ञता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। यह 'संस्कार कैंप' न केवल इन बच्चों के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि सही मार्गदर्शन (गुरु) और संकल्प शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म, आस्था और अनुशासन का मार्ग ही जीवन का सच्चा 'कैंप' है।1
- डोंगरगांव: डोंगरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरा खेड़ा में आज अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। डायल 112 और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही गाडरवारा से डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान टीम में स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक मुस्तैदी से तैनात रहे। डायल 112 की टीम ने न केवल स्थिति को संभाला बल्कि राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फायर ब्रिगेड के साथ समन्वय स्थापित किया। कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू आग बुझाने के लिए NTPC और CISF के दमकल कर्मियों को बुलाया गया। दमकल कर्मियों, सीआईएसएफ जवानों और डायल 112 के स्टाफ ने मिलकर मोर्चा संभाला। काफी देर तक चली कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया। जान-माल की सुरक्षा डायल 112 के स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक की सजगता और दमकल विभाग की सक्रियता से एक बड़ा हादसा होने से बच गया। समय रहते आग पर काबू पा लेने से आसपास की संपत्तियों को कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। पुलिस प्रशासन अब आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस त्वरित सहायता के लिए गाडरवारा डायल 112 की टीम और दमकल कर्मियों की सराहना की है।3
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1