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रंका गढदेवी मंदिर का हर्षोल्लास के साथ मनाई गई स्थापना दिवस
Sunil singh
रंका गढदेवी मंदिर का हर्षोल्लास के साथ मनाई गई स्थापना दिवस
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- डोल गांव में शिव महापुराण ज्ञान महायज्ञ का भव्य समापन, हवन-पूजन के बाद विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब । चिनियां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड के डोल गांव में चल रहे सात दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ का आज सातवें दिन विधि-विधान से समापन हो गया। अंतिम दिन प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हवन के दौरान पूरा मंदिर परिसर "हर हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठा।श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ आहुति अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। आयोजन समिति के अनुसार समापन दिवस पर आयोजित भव्य भंडारे में लगभग 5000 श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं और पूरे गांव का माहौल भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम के अंतिम दिन अंचल अधिकारी उमेश्वर यादव, राजस्व कर्मचारी विनोद कुमार दुबे सहित कई अंचल कर्मी भी निरीक्षण हेतु पहुंचे। उन्होंने आयोजन व्यवस्था की सराहना की तथा भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इसके उपरांत अधिकारियों ने बालेश्वर नाथ मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन कर क्षेत्र की उन्नति एवं समृद्धि की कामना की। गौरतलब है कि 13 फरवरी से आरंभ हुए इस महायज्ञ में प्रतिदिन संध्या वृंदावन से पधारे आचार्य श्री गौरीश पांडे जी महाराज द्वारा संगीतमय शिव महापुराण कथा का वाचन किया जा रहा था। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने पूरे अंचल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। आज शुक्रवार देर शाम 5:00 बजे समापन के साथ ही डोल गांव का यह महायज्ञ क्षेत्र में आस्था और एकता का प्रतीक बन गया। श्रद्धालुओं के उत्साह और अनुशासन ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।1
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- भारत में दहेज लेना या देना दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (Dowry Prohibition Act, 1961) के तहत एक गंभीर कानूनी अपराध है। इस कानून की धारा 3 के अंतर्गत दहेज लेने या देने पर कम से कम 5 साल की कैद और ₹15,000 या दहेज की रकम (जो भी अधिक हो) का जुर्माना हो सकता है। S3WaaS +2 दहेज से संबंधित प्रमुख कानून और सजा: दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (धारा 3): दहेज लेने/देने पर न्यूनतम 5 साल की सजा। दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (धारा 4): दहेज की मांग करने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A: शादी के बाद दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर 3 साल तक की कैद। IPC की धारा 304-B: विवाह के 7 साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मौत (दहेज मृत्यु) पर कम से कम 7 साल से आजीवन कारावास। Vikaspedia +2 दहेज का लेन-देन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दोनों पक्षों द्वारा किया जा सकता है, जो कानूनन दंडनीय है।1
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