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यह सामग्री पूरी तरह से व्यवसाय से संबंधित चर्चा पर केंद्रित है।
R N Shukla business advisor
यह सामग्री पूरी तरह से व्यवसाय से संबंधित चर्चा पर केंद्रित है।
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- सीतापुर जिले के महमूदाबाद विकास खंड की ग्राम पंचायत सरैया चालाकापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां आग पीड़ित परिवारों ने ग्राम पंचायत अधिकारी पर सीधा आरोप लगाया है कि आवास दिलाने के नाम पर उनसे 20-20 हजार रुपये की मांग की जा रही है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि रुपये न देने पर उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया गया कि "DM साहब धर्मात्मा हैं तो वहीं दे दें।" यह बयान मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों को और भी गंभीर बना रहा है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने जिलाधिकारी सीतापुर को शपथ पत्र के साथ एक शिकायत सौंपी है। उन्होंने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और इस कथित भ्रष्टाचार में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।1
- आज़म खान परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि परिवार के एक छोटे भाई को रिहा कर दिया गया है। यह रिहाई अब्दुल्ला आज़म के बाद हुई है, जिससे पूरे आज़म खान परिवार में जश्न का माहौल है।1
- मछरेहटा क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था से परेशान किसानों का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आ गया। सैकड़ों की संख्या में किसान मछरेहटा पावर हाउस पहुंच गए और उपखंड अधिकारी (विद्युत) के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। नाराज किसानों ने एसडीओ के कार्यालय के कमरे में ताला डाल दिया और उन्हें बाहर खड़ंजे पर बैठकर अपनी समस्याएं सुनाने को मजबूर कर दिया। किसानों का आरोप है कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे उनकी फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप फसलें सूखने की कगार पर हैं और विभागीय अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल सुचारु बिजली आपूर्ति की मांग की। जानकारी के लिए जब उपखंड अधिकारी (विद्युत) से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र में किसानों के इस आक्रोश को देखते हुए स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।1
- सीतापुर जिले में मिश्रिख से सांसद अशोक रावत ने प्रधान मंत्री आवास योजना 2.0 को लेकर जिला अधिकारी डॉक्टर राजा गणपत यार सीतापुर को एक प्रार्थना पत्र लिखा है। इस पत्र में सांसद रावत ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि वे मामले की जांच करवाकर नगर पालिका परिषद में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।1
- सीतापुर जिले में एक ग्रामीण तालाब की घोर उपेक्षा की जा रही है, जिसके कारण चिलचिलाती गर्मी में छोटे गायों और कुत्तों जैसे अनेक जानवर पानी के लिए तरस रहे हैं। बताया गया है कि सरकार द्वारा इस तालाब के लिए आवंटित धन का गबन किया जा रहा है और जानवरों के लिए पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है।2
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल, आरोग्यं हॉस्पिटल, में एक प्रसूता की मौत के मामले ने मानवता और डॉक्टरी पेशे को शर्मसार किया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अस्पताल के संचालकों व डॉक्टरों की भयानक लापरवाही उजागर हुई है, जिसमें पैसों के लालच में कम हीमोग्लोबिन के बावजूद महिला का ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, खैराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम धरैचा की सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 26 मई को परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं सक्रिय एक आशा बहू ने परिजनों को बरगलाकर शहर के निजी आरोग्यं हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति और खून की कमी को छिपाते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला ले लिया। ऑपरेशन के बाद सुमन ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने सुमन को आनन-फानन में लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुमन को वेंटिलेटर हटाकर वापस सीतापुर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित परिजनों ने 29 मई की शाम आरोग्यं हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर जोरदार हंगामा किया, आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए जबरन ऑपरेशन किया और उनकी बहू को मौत के मुंह में धकेल दिया। प्रसूता सुमन देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण 'ब्लड पॉइजनिंग' (सेप्टीसीमिया) पाया गया, जो सीधे तौर पर ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या गलत इलाज की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस चालक ने भी चौंकाने वाला बयान दिया कि लखनऊ से वापस लाते समय रास्ते में परिजनों ने दो बार मरीज का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया था, जिससे उसकी हालत और नाजुक हो गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सीतापुर अब आरोग्यं अस्पताल के संचालकों और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अस्पताल को सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन, सीतापुर ने स्पष्ट किया है कि प्रसूता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पताल और डॉक्टरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।1
- सीतापुर जिले की बिसेन्दा ग्राम पंचायत के सेमरपुरवा गांव का हाल यह है कि "बाबा की सरकार" में अधिकारी मौज काट रहे हैं। वहां "हर घर जल जीवन मिशन" योजना केवल कागजों पर ही सिमटी हुई है।1
- सीतापुर के आरोग्यं हॉस्पिटल में एक महिला की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित और बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।1