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मानपुर में लगने वाले जाम से लोग परेशान प्रशासन भी हुआ नाकाम मानपुर नगर में लगने वाले जानलेवा जाम से बेहाल है आवाम-बेकाम साबित हो रहा 4 साल बीतने के बाद भी नप. प्रशासन। *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी उमरिया)* मानपुर नगर इन दिनों रोज़ाना लगने वाले जाम से जूझ रहा है। बस स्टैंड सहित मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे देर से पहुंच रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, और रोज़मर्रा के कामकाज में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। कई बार खंड स्तर के अधिकारी खुद जाम में घंटों फंसे नजर आते हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो रहे हैं। बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने पहले ही व्यापार कमजोर कर दिया था, अब जाम के कारण ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बिक्री लगातार घट रही है और छोटे व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इधर, मानपुर पुलिस को रोज़ अपने अन्य थाना संबंधी कार्य छोड़कर ट्रैफिक व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुटे रहते हैं, लेकिन यह प्रयास सिर्फ अस्थायी राहत तक सीमित है। अगले ही दिन हालात फिर वही हो जाते हैं। नगर परिषद पर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय बस स्टैंड के विकास, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक सुधार के जो वादे किए गए थे, चार साल बाद भी वे जमीन पर नजर नहीं आते। न अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई हो पाई है, न ही कोई ठोस ट्रैफिक योजना लागू हो सकी है। मानपुर की जनता और व्यापारी अब स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं—तय पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण पर सख्ती और स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन। वरना यह जाम सिर्फ रास्ता ही नहीं रोकेगा, बल्कि नगर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता रहेगा।

10 hrs ago
user_Ashutosh tripathi
Ashutosh tripathi
Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
10 hrs ago
a578ec99-85cb-4587-9e9e-f79f9a7fea78

मानपुर में लगने वाले जाम से लोग परेशान प्रशासन भी हुआ नाकाम मानपुर नगर में लगने वाले जानलेवा जाम से बेहाल है आवाम-बेकाम साबित हो रहा 4 साल बीतने के बाद भी नप. प्रशासन। *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी उमरिया)* मानपुर नगर इन दिनों रोज़ाना लगने वाले जाम से जूझ रहा है। बस स्टैंड सहित मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे देर से पहुंच रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, और रोज़मर्रा के कामकाज में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारी भी अछूते नहीं

हैं। कई बार खंड स्तर के अधिकारी खुद जाम में घंटों फंसे नजर आते हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो रहे हैं। बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने पहले ही व्यापार कमजोर कर दिया था, अब जाम के कारण ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बिक्री लगातार घट रही है और छोटे व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इधर, मानपुर पुलिस को रोज़ अपने अन्य थाना संबंधी कार्य छोड़कर ट्रैफिक व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुटे रहते हैं,

लेकिन यह प्रयास सिर्फ अस्थायी राहत तक सीमित है। अगले ही दिन हालात फिर वही हो जाते हैं। नगर परिषद पर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय बस स्टैंड के विकास, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक सुधार के जो वादे किए गए थे, चार साल बाद भी वे जमीन पर नजर नहीं आते। न अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई हो पाई है, न ही कोई ठोस ट्रैफिक योजना लागू हो सकी है। मानपुर की जनता और व्यापारी अब स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं—तय पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण पर सख्ती और स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन। वरना यह जाम सिर्फ रास्ता ही नहीं रोकेगा, बल्कि नगर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता रहेगा।

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  • मानपुर नगर में लगने वाले जानलेवा जाम से बेहाल है आवाम-बेकाम साबित हो रहा 4 साल बीतने के बाद भी नप. प्रशासन। *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी उमरिया)* मानपुर नगर इन दिनों रोज़ाना लगने वाले जाम से जूझ रहा है। बस स्टैंड सहित मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे देर से पहुंच रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, और रोज़मर्रा के कामकाज में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। कई बार खंड स्तर के अधिकारी खुद जाम में घंटों फंसे नजर आते हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो रहे हैं। बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने पहले ही व्यापार कमजोर कर दिया था, अब जाम के कारण ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बिक्री लगातार घट रही है और छोटे व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इधर, मानपुर पुलिस को रोज़ अपने अन्य थाना संबंधी कार्य छोड़कर ट्रैफिक व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुटे रहते हैं, लेकिन यह प्रयास सिर्फ अस्थायी राहत तक सीमित है। अगले ही दिन हालात फिर वही हो जाते हैं। नगर परिषद पर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय बस स्टैंड के विकास, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक सुधार के जो वादे किए गए थे, चार साल बाद भी वे जमीन पर नजर नहीं आते। न अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई हो पाई है, न ही कोई ठोस ट्रैफिक योजना लागू हो सकी है। मानपुर की जनता और व्यापारी अब स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं—तय पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण पर सख्ती और स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन। वरना यह जाम सिर्फ रास्ता ही नहीं रोकेगा, बल्कि नगर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता रहेगा।
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    मानपुर नगर में लगने वाले जानलेवा जाम से बेहाल है आवाम-बेकाम साबित हो रहा 4 साल बीतने के बाद भी नप. प्रशासन।
*(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी उमरिया)*
मानपुर नगर इन दिनों रोज़ाना लगने वाले जाम से जूझ रहा है। बस स्टैंड सहित मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे देर से पहुंच रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, और रोज़मर्रा के कामकाज में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। कई बार खंड स्तर के अधिकारी खुद जाम में घंटों फंसे नजर आते हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो रहे हैं।
बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने पहले ही व्यापार कमजोर कर दिया था, अब जाम के कारण ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बिक्री लगातार घट रही है और छोटे व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
इधर, मानपुर पुलिस को रोज़ अपने अन्य थाना संबंधी कार्य छोड़कर ट्रैफिक व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुटे रहते हैं, लेकिन यह प्रयास सिर्फ अस्थायी राहत तक सीमित है। अगले ही दिन हालात फिर वही हो जाते हैं।
नगर परिषद पर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय बस स्टैंड के विकास, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक सुधार के जो वादे किए गए थे, चार साल बाद भी वे जमीन पर नजर नहीं आते। न अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई हो पाई है, न ही कोई ठोस ट्रैफिक योजना लागू हो सकी है।
मानपुर की जनता और व्यापारी अब स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं—तय पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण पर सख्ती और स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन। वरना यह जाम सिर्फ रास्ता ही नहीं रोकेगा, बल्कि नगर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता रहेगा।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • शहडोल। मेडिकल कॉलेज शहडोल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इलाज, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शिकायतकर्ता कैलाश यादव ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि यहां मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा, सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह लचर है और मौके पर पुलिस भी नदारद रहती है। वीडियो में कथित तौर पर गार्डों की गुंडागर्दी के दृश्य सामने आए हैं, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार की बात भी सामने आ रही है। सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल जहां एक ओर अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए, वहीं दूसरी ओर गार्डों पर ही बदसलूकी और दबंगई के आरोप लगना स्थिति को और गंभीर बना रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आता है या नहीं, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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    शहडोल। मेडिकल कॉलेज शहडोल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इलाज, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
शिकायतकर्ता कैलाश यादव ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि यहां मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा, सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह लचर है और मौके पर पुलिस भी नदारद रहती है।
वीडियो में कथित तौर पर गार्डों की गुंडागर्दी के दृश्य सामने आए हैं, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार की बात भी सामने आ रही है।
सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
जहां एक ओर अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए, वहीं दूसरी ओर गार्डों पर ही बदसलूकी और दबंगई के आरोप लगना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आता है या नहीं, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Local News Reporter गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बाघ के सामने उतरे लोग, मौत को दिया खुला न्योता उमरिया तपस गुप्ता जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सामने आया एक वीडियो लोगों की गंभीर लापरवाही को उजागर कर रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में ताला-मानपुर रोड पर एक बाघ सड़क पार करता दिखाई दे रहा है, लेकिन उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला नजारा इसके बाद देखने को मिलता है। वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही बाघ नजर आता है, कुछ लोग अपने वाहन बीच सड़क पर रोक देते हैं। हैरानी तब बढ़ जाती है जब कुछ लोग वाहन से उतरकर सीधे बाघ के करीब पहुंच जाते हैं और मोबाइल से वीडियो बनाने लगते हैं। यह हरकत न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि सीधे-सीधे मौत को न्योता देने जैसी है। जानकारी के मुताबिक यह वीडियो रविवार का बताया जा रहा है। बाघ जैसे खतरनाक और संवेदनशील वन्यजीव के इतने करीब जाना किसी भी वक्त गंभीर हादसे में बदल सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां बाघ को उकसा सकती हैं, जिससे वह आक्रामक हो सकता है और हमला कर सकता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही कई सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर वन विभाग लगातार जागरूकता और नियमों का पालन कराने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग महज कुछ सेकंड के वीडियो के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं। यह घटना साफ दिखाती है कि रोमांच के नाम पर लोग किस हद तक गैरजिम्मेदार हो सकते हैं। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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    बाघ के सामने उतरे लोग, मौत को दिया खुला न्योता
उमरिया तपस गुप्ता 
जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सामने आया एक वीडियो लोगों की गंभीर लापरवाही को उजागर कर रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में ताला-मानपुर रोड पर एक बाघ सड़क पार करता दिखाई दे रहा है, लेकिन उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला नजारा इसके बाद देखने को मिलता है।
वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही बाघ नजर आता है, कुछ लोग अपने वाहन बीच सड़क पर रोक देते हैं। हैरानी तब बढ़ जाती है जब कुछ लोग वाहन से उतरकर सीधे बाघ के करीब पहुंच जाते हैं और मोबाइल से वीडियो बनाने लगते हैं। यह हरकत न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि सीधे-सीधे मौत को न्योता देने जैसी है।
जानकारी के मुताबिक यह वीडियो रविवार का बताया जा रहा है। बाघ जैसे खतरनाक और संवेदनशील वन्यजीव के इतने करीब जाना किसी भी वक्त गंभीर हादसे में बदल सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां बाघ को उकसा सकती हैं, जिससे वह आक्रामक हो सकता है और हमला कर सकता है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही कई सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर वन विभाग लगातार जागरूकता और नियमों का पालन कराने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग महज कुछ सेकंड के वीडियो के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
यह घटना साफ दिखाती है कि रोमांच के नाम पर लोग किस हद तक गैरजिम्मेदार हो सकते हैं। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • शहडोल में भगवान परशुराम जयंती पर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई शहडोल। अत्यंत हर्ष के साथ सूचित किया गया है कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह शोभा यात्रा आज 20 अप्रैल 2026, सोमवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) के पावन अवसर पर निकाली जाएगी। आयोजकों के अनुसार शोभा यात्रा शाम को जय स्तंभ चौक, शहडोल से प्रारंभ होगी। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मोहनराम मंदिर, शहडोल में सम्पन्न होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और शहर में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
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    शहडोल में भगवान परशुराम जयंती पर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई
शहडोल। अत्यंत हर्ष के साथ सूचित किया गया है कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह शोभा यात्रा आज  20 अप्रैल 2026, सोमवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) के पावन अवसर पर निकाली जाएगी।
आयोजकों के अनुसार शोभा यात्रा शाम को जय स्तंभ चौक, शहडोल से प्रारंभ होगी। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मोहनराम मंदिर, शहडोल में सम्पन्न होगी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और शहर में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
    user_अजय कुमार केवट
    अजय कुमार केवट
    Photographer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by Ashok Sondhiya
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    Post by Ashok Sondhiya
    user_Ashok Sondhiya
    Ashok Sondhiya
    Paan shop Sohagpur, Shahdol•
    8 hrs ago
  • थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
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    थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भीम आर्मी का प्रदर्शन जारी?
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    भीम आर्मी का प्रदर्शन जारी?
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    13 hrs ago
  • सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां 11 साल के मासूम की हत्या कर उसका शव नीले ड्रम में छिपा दिया गया। घटना कोलगवां थाना क्षेत्र की बैंक कॉलोनी की है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सोमवार दोपहर बच्चे के लापता होने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। घर के बाहर ताला लगा मिला, जिसे तोड़कर जब पुलिस अंदर घुसी तो नज़ारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था। कमरे में खून के निशान, बिस्तर पर खून से सना तकिया और दीवारों पर छींटे मिले। तलाशी के दौरान नीले ड्रम से बच्चे का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान शिवराज रजक (11) के रूप में हुई है, जो कक्षा 5वीं का छात्र था। वारदात के वक्त वह घर में अकेला था—मां काम पर, बहन कॉलेज और भाई मजदूरी के लिए बाहर गया हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मथुरा रजक (45), जो पड़ोसी बताया जा रहा है, ने धारदार हथियार से वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गया। रंजिश बनी हत्या की वजह! प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी और मृतक के पिता के बीच कुछ दिन पहले विवाद हुआ था। इसी रंजिश के चलते मासूम को निशाना बनाया गया। मृतक के पिता फिलहाल महाराष्ट्र के नासिक में मजदूरी करते हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
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    सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां 11 साल के मासूम की हत्या कर उसका शव नीले ड्रम में छिपा दिया गया। घटना कोलगवां थाना क्षेत्र की बैंक कॉलोनी की है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
सोमवार दोपहर बच्चे के लापता होने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। घर के बाहर ताला लगा मिला, जिसे तोड़कर जब पुलिस अंदर घुसी तो नज़ारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था। कमरे में खून के निशान, बिस्तर पर खून से सना तकिया और दीवारों पर छींटे मिले। तलाशी के दौरान नीले ड्रम से बच्चे का शव बरामद किया गया।
मृतक की पहचान शिवराज रजक (11) के रूप में हुई है, जो कक्षा 5वीं का छात्र था। वारदात के वक्त वह घर में अकेला था—मां काम पर, बहन कॉलेज और भाई मजदूरी के लिए बाहर गया हुआ था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मथुरा रजक (45), जो पड़ोसी बताया जा रहा है, ने धारदार हथियार से वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गया।
रंजिश बनी हत्या की वजह!
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी और मृतक के पिता के बीच कुछ दिन पहले विवाद हुआ था। इसी रंजिश के चलते मासूम को निशाना बनाया गया। मृतक के पिता फिलहाल महाराष्ट्र के नासिक में मजदूरी करते हैं।
पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Local News Reporter गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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