छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में नौनिहालों के भविष्य को संवारने और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए बनी सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों के विपरीत, धरातल पर जो सच्चाई सामने आ रही है, वह बेहद खौफनाक और शर्मनाक है। गरीब और आदिवासी बच्चों के मुंह से निवाला छीनकर यहाँ भ्रष्टाचार का एक 'मलाईदार' खेल चल रहा है, जिसने अब जनता के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। पत्थलगांव ब्लॉक के कई आंगनबाड़ी केंद्र या तो बंद पड़े हैं या उनमें सन्नाटा पसरा रहता है, जिसके कारण बच्चों को न तो प्रारंभिक शिक्षा मिल पा रही है और न ही सरकार द्वारा भेजा जा रहा पौष्टिक आहार। नियमों के अनुसार मिलने वाला दलिया, चना और रेडी-टू-ईट फूड बच्चों की थाली तक पहुंचने के बजाय सीधे बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जा रहा है, जिससे मासूम बच्चों का पेट काटकर अधिकारियों और बिचौलियों की जेबें गर्म हो रही हैं। भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए लाखों का फंड जारी हुआ, लेकिन चौंकाने वाला सच यह है कि ये भवन केवल कागजों में बनकर तैयार हो गए और पैसे भी निकाल लिए गए, जबकि जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। कई पुरानी आंगनबाड़ियां इतनी जर्जर हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, कुछ तो पूरी तरह ढह चुकी हैं, जिससे बच्चों को खुले आसमान के नीचे या बदबूदार कमरों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। जब इस महा-घोटाले और बदहाली को लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की जाती है, तो उनका रवैया तानाशाही पूर्ण होता है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी केवल अपनी 'मलाई और मिठाई' (कमीशन) लेने पत्थलगांव आते हैं। यदि कोई ग्रामीण या पत्रकार उनसे मूलभूत सुविधाओं पर सवाल करता है, तो उन्हें सुधरने की बजाय सीधे "SC/ST एक्ट में फंसाने" या झूठे मुकदमों में जेल भेजने की खुली धमकी दी जाती है। इस भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) लगाने पर विभाग के बाबू और अधिकारी यह कहकर जानकारी देने से मना कर देते हैं कि सरकारी फंड, सरकारी जमीन और सरकारी राशन की जानकारी उनकी 'पर्सनल (निजी) जानकारी' है। पत्थलगांव की जनता अब प्रशासन से सवाल कर रही है कि जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले ये सरकारी संस्थान आखिर कब से और किसके इशारे पर 'निजी लिमिटेड कंपनी' बन गए हैं। जनता की मांग है कि बचपन को इस कदर गर्त में धकेलने वाले इन 'सफेदपोश' और 'खाकी-खादी' के गठजोड़ का पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार को इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल प्रभाव से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, वरना पत्थलगांव की आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में नौनिहालों के भविष्य को संवारने और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए बनी सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों के विपरीत, धरातल पर जो सच्चाई सामने आ रही है, वह बेहद खौफनाक और शर्मनाक है। गरीब और आदिवासी बच्चों के मुंह से निवाला छीनकर यहाँ भ्रष्टाचार का एक 'मलाईदार' खेल चल रहा है, जिसने अब जनता के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। पत्थलगांव ब्लॉक के कई आंगनबाड़ी केंद्र या तो बंद पड़े हैं या उनमें सन्नाटा पसरा रहता है, जिसके कारण बच्चों को न तो प्रारंभिक शिक्षा मिल पा रही है और न ही सरकार द्वारा भेजा जा रहा पौष्टिक आहार। नियमों के अनुसार मिलने वाला दलिया, चना और रेडी-टू-ईट फूड बच्चों की थाली तक पहुंचने के बजाय सीधे बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जा रहा है, जिससे मासूम बच्चों का पेट काटकर अधिकारियों और बिचौलियों की जेबें गर्म हो रही हैं। भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए लाखों का फंड जारी हुआ, लेकिन चौंकाने वाला सच यह है कि ये भवन केवल कागजों में बनकर तैयार हो गए और पैसे भी निकाल लिए गए, जबकि जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। कई पुरानी आंगनबाड़ियां इतनी जर्जर हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, कुछ तो पूरी तरह ढह चुकी हैं, जिससे बच्चों को खुले आसमान के नीचे या बदबूदार कमरों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। जब इस महा-घोटाले और बदहाली को लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की जाती है, तो उनका रवैया तानाशाही पूर्ण होता है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी केवल अपनी 'मलाई और मिठाई' (कमीशन) लेने पत्थलगांव आते हैं। यदि कोई ग्रामीण या पत्रकार उनसे मूलभूत सुविधाओं पर सवाल करता है, तो उन्हें सुधरने की बजाय सीधे "SC/ST एक्ट में फंसाने" या झूठे मुकदमों में जेल भेजने की खुली धमकी दी जाती है। इस भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) लगाने पर विभाग के बाबू और अधिकारी यह कहकर जानकारी देने से मना कर देते हैं कि सरकारी फंड, सरकारी जमीन और सरकारी राशन की जानकारी उनकी 'पर्सनल (निजी) जानकारी' है। पत्थलगांव की जनता अब प्रशासन से सवाल कर रही है कि जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले ये सरकारी संस्थान आखिर कब से और किसके इशारे पर 'निजी लिमिटेड कंपनी' बन गए हैं। जनता की मांग है कि बचपन को इस कदर गर्त में धकेलने वाले इन 'सफेदपोश' और 'खाकी-खादी' के गठजोड़ का पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार को इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल प्रभाव से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, वरना पत्थलगांव की आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
- Ajit guptaपत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़आप लोगो के खबर खबर सब्सक्राइब और लाइक से हमको हिम्मत मिलता है बस आप लोग कॉमेंट में भी अपनी समस्या को लिखे अपने अपने जगह की उसका भी खबर दिखाऊंगा । और भी ज्यादा भ्रष्टाचार को उजागर करूंगा जो खबर आपने कभी न देखी होगी ना सुनी होगी ऐसी खबरों के लिए आप बन रहे2 hrs ago
- कोरबा में 'हर घर जल' योजना की शुरुआत तो हुई और इसके तहत हर घर में नल भी लगाए गए। हालांकि, इस योजना के बावजूद इन नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं आ रही है, जिसके चलते पूरा गांव प्यासा है।1
- सरगुजा जिले के लखनपुर इलाके में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पुरानी रंजिश और गुस्से में अंधे एक सगे भाई ने अपने ही भाई को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। 'अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज (ACCG NEWS)' के अनुसार, यह मामला समाज में बढ़ते क्रोध और गिरते संस्कारों पर सोचने पर मजबूर करता है। यह नृशंस वारदात 20 जून की दोपहर, लखनपुर थाने के अंतर्गत ग्राम अलगा बेन्दोपानी (बेलदगी) में घटी। 32 वर्षीय पांडे कोरवा का अपने ही सगे भाई, 25 वर्षीय श्रवण कोरवा, और एक नाबालिग (विधि से संघर्षरत बालक) के साथ पुरानी रंजिश और आपसी विवाद को लेकर भयंकर झगड़ा हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि श्रवण कोरवा ने पांडे कोरवा की नाक दाँतों से काट ली और फिर नाबालिग के साथ मिलकर ईंट-पत्थरों से उसके सिर और कान के पास इतने गंभीर वार किए कि पांडे कोरवा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही, सरगुजा के डीआईजी एवं एसएसपी श्री राजेश अग्रवाल के सख्त निर्देश पर लखनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक संपत पोटाई के नेतृत्व में पुलिस और FSL की टीम ने मौके का मुआयना किया और घटना स्थल से खून से सने ईंट के टुकड़े व पत्थर बरामद किए। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर हत्या के आरोपी भाई श्रवण कोरवा और नाबालिग को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने खून से सने कपड़े भी ज़ब्त कर लिए। बालिग आरोपी को न्यायालय और नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है। ACCG NEWS और चीफ एडिटर शुभम पाठक ने इस घटना को सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के माथे पर एक कलंक बताया है, और समाज में बढ़ते क्रोध तथा गिरते संस्कारों पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में लखनपुर पुलिस (एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह और पूरी टीम) की त्वरित एवं मुस्तैद कार्रवाई की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही यह भी अपील की गई है कि आपसी विवादों को खून-खराबे की बजाय बातचीत और समझदारी से सुलझाने की पहल होनी चाहिए।1
- सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते दो छोटे भाइयों ने मिलकर अपने बड़े भाई पांडे कोरवा की ईंट-पत्थर से ताबड़तोड़ प्रहार कर हत्या कर दी। यह घटना 20 जून की दोपहर को उनके घर में हुई थी, जिसके बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। लखनपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रविवार को दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें एक आरोपी नाबालिग है। मृतक पांडे कोरवा (32 वर्ष), पिता रामधन कोरवा, ग्राम अलगा के बेंदोपानी निवासी था। उसके 25 वर्षीय छोटे भाई सरवन कोरवा और एक नाबालिग भाई उससे पुरानी रंजिश रखते थे। 20 जून की दोपहर उनके बीच फिर किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर सरवन कोरवा और नाबालिग भाई ने पांडे कोरवा को पहले पीटा, फिर ईंट-पत्थर से उसके सिर और कनपटी पर लगातार हमला किया, जिससे गंभीर चोट लगने के कारण वह लहूलुहान होकर मौके पर ही दम तोड़ गया। हत्या के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए, जिसकी सूचना परिजनों ने लखनपुर पुलिस को दी। हत्या की सूचना मिलने पर लखनपुर पुलिस और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद, पुलिस ने मुखबिर की जानकारी पर दोनों आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों भाइयों ने अपने बड़े भाई से पुरानी रंजिश के कारण हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 103 (1) और 3 (5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है। सरवन कोरवा को जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी लखनपुर एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह, पीतांबर सिंह, आरक्षक सुरेश गुप्ता, रामकुमार यादव, आशीष चौहान और सोहन राजवाड़े शामिल थे।1
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर पहुँचकर राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि राहुल गांधी जहाँ-जहाँ जाते हैं, वहाँ क्या हश्र होता है, और तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि उनके आने से किसी का कोई भला नहीं होने वाला है। इसी दौरान, योग दिवस पर लगाए गए डोम को लेकर हो रहे फर्जीवाड़े के आरोपों पर मुख्यमंत्री साय ने पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए। सीएम ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा, आरोप लगाते हुए कहा कि बीते पाँच सालों में प्रदेश को लूटने और जमकर घोटाले करने का काम किया गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस भ्रष्टाचार के चलते कुछ लोग आज जेल में हैं, कुछ बेल पर हैं, और बाकी जेल जाने की तैयारी में हैं।1
- पुलिस ने 7 लाख रुपये की टाटा मैजिक गाड़ी सहित चोरी का अन्य सामान बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।4
- रायगढ़ पुलिस ने एक नाबालिग का आपत्तिजनक फोटो साझा करने के आरोप में एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया है।1
- अंबिकापुर में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम भव्यता के साथ मनाया गया। इस आयोजन में मुख्यमंत्री (सीएम) और कई मंत्रीगण भी उपस्थित रहे। यह उत्सव 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम पार्ट 2' के रूप में संपन्न हुआ।4
- कोरबा के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रामसागरपारा तालाब के पास मुख्य मार्ग पर रविवार रात हुई एक हिंसक घटना का वीडियो सामने आया है। इस घटना में बीच-बचाव करने पहुंचे युवक रवि यादव, जिनके पिता लेथ मशीन का काम करते हैं, के सिर पर डंडे से वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में रामसागरपारा निवासी हर्षित और महेंद्र गंगवानी का नाम सामने आ रहा है, जो वायरल वीडियो में एक युवक हाथ में ईंट और दूसरा डंडा लिए हुए दिख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले हुए एक विवाद का बदला लेने की नीयत से ये लोग युवक के घर गए थे और वहां जमकर मारपीट की। युवक सड़क पर गिर पड़ा और आसपास के लोग जमा हो गए। इसी दौरान रवि यादव सफेद शर्ट में वहां पहुंचे और ईंट पकड़े युवक को समझाने व रोकने का प्रयास करने लगे। ईंट पकड़ा युवक भी अपने साथी को डंडा मारने से रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एकाएक हमला कर दिया गया और रवि यादव के सिर पर जोरदार वार हुआ, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। रवि यादव को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। संभवतः सिर में लगी गंभीर चोट के कारण उनकी मौत हुई है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने हर्षित व महेंद्र गंगवानी के घर पर जाकर अपना गुस्सा उतारने की कोशिश की, लेकिन हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत अलर्ट हो गई और आसपास के इलाकों में फैलकर आरोपियों के घर पर होने वाले संभावित हमले को समय रहते टाल दिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल सकी थी, लेकिन बाद में वार्ड क्रमांक 1 रामसागरपारा (कोरबा) निवासी महेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि दो बच्चों की आपसी लड़ाई ने खूनी मोड़ ले लिया और वह 'हत्यारा पिता' बन गया।2